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बीमारी का नाम, वीडियो कॉन्फ्रेंस से हाजिरी, फैसला आ सकता है सकारात्मक

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बरसों से अटकी रुबात मामले में हो सकता है कुछ अच्छा

खान अशु

भोपाल। हाजियों की दुआओं का असर कहें, स्वयंसेवी संस्थाओं की कोशिशों की सफलता, विधायक द्वारा की गई कोशिशों का नतीजा या फिर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के तीखे तेवर पर अगली कार्रवाई का डर… लेकिन भोपाल रियासत के हाजियों के लिए कुछ बेहतर इंतजाम होने की उम्मीद बन रही है। वर्षों से लंबित सऊदी अरब अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शाही ओकाफ की मुतावल्ली सबा अली खान हाजिर हो चुकी हैं। भोपाल से भी एक उच्च स्तरीय डेलिगेशन भी अपनी बात रख चुका है। जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले साल में भोपाल रियासत से हज सफ़र पर जाने वाले यात्रियों को रुबात में रुकने की इजाजत मिल सकती है।सूत्रों का कहना है कि शाही ओकाफ की मुतावल्ली सबा अली खान ने पिछले दिनों सऊदी अरब अदालत के सामने हाजिरी दे दी है। इंग्लैंड में इलाज के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए यह हाजिरी दी गई। इधर भोपाल से भी एक डेलिगेशन ने सऊदी अरब पहुंचकर लंबित मामलों पर अपना पक्ष रखा। जिसको सऊदी अदालत ने मान्य कर लिया है। इस कार्यवाही का नतीजा यह बताया जा रहा है कि हज 2027 के दौरान भोपाल रियासत के हाजियों को रुबात में ठहरने का मौका मिल सकता है।

कई वर्षों से रुका है मामला

सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब में नवाबकालीन रुबात का मामला कई सालों से अटका हुआ है। कुछ कानूनी पेंचीदगियों की वजह से हाजियों को मक्का और मदीना में रुबात मिलना मुश्किल हो गया था। मामले को लेकर सऊदी अदालत में शाही ओकाफ की मुतावल्ली सबा अली खान को आवश्यक रूप से हाजिर होना था। सूत्र बताते हैं कि उनके सऊदी अरब न पहुंचने और शाही ओकाफ भोपाल द्वारा संतोषजनक उत्तर न दिए जाने के कारण मामला कई सालों से अटका हुआ था।

करना पड़ रहा था अधिक भुगतान

मक्का और मदीना में रिहाइश की सुविधा मिल जाने से भोपाल रियासत के हाजियों को हज खर्च में बड़ी राहत मिल जाया करती थी। इन हाजियों को रुबात न मिलने के चलते प्रति व्यक्ति करीब एक लाख रुपए अधिक खर्च करने की मजबूरी बनी हुई थी।

गर्म रहा मामला

रुबात मामले को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आवाज उठाई थी। उन्होंने शाही ओकाफ जिम्मेदारों से मुलाकात और चिट्ठी पत्री के अलावा सऊदी सरकार से भी बात की थी। मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी कई सख्त सवाल उठाए थे। जिनकी आवाज अल्पसंख्यक मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और हज कमेटी ऑफ इंडिया तक पहुंची, सऊदी सरकार तक भी यह बात गई थी। इधर भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद ने मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल और शाही ओकाफ के जिम्मेदार सिकंदर हफीज से इस बारे में सवाल किया था। इस बीच विधायक और सिकंदर हफिज़ के अदालती मामलात भी हुए थे।

इनका कहना

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने रुबात मामले को गंभीरता से लिया था। जिसका नतीजा अच्छे परिणाम के रूप में आने की संभावना है। भारतीय हाजियों को परदेस में बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रियंक कानूनगो सदस्य , राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

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