भोपाल ग्रामीण पुलिस का व्यापक साइबर जागरूकता अभियान: कॉलेज अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में लगी चौपाल

जीतेन्द्र सेन

भोपाल! पुलिस मुख्यालय भोपाल के दिशा-निर्देशनुसार आम नागरिकों को “रुको, सोचो,एक्शन लो” की थीम पर जागरूक करने हेतु संचालित Safe Click 2.0 – सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित जीवन अभियान के छठवें दिन भोपाल (ग्रामीण) पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न कॉलेजों,अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम विशेष संवाद, जागरूकता सत्र एवं साइबर रथ के माध्यम से आमजन को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

*थाना बिलखिरिया* क्षेत्र अंतर्गत LNCT कॉलेज में पुलिस अधीक्षक भोपाल (देहात) पंकज कुमार पाण्डेय द्वारा विद्यार्थियों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। अपने संबोधन में पुलिस अधीक्षक ने पीपीटी के माध्यम से वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों जैसे फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक, सोशल मीडिया हैकिंग एवं ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को बताया कि साइबर अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों को मानसिक दबाव, लालच या भय में डालकर ठगी करते हैं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सजग रहना अत्यंत आवश्यक है, “सतर्कता ही हमारा सबसे बड़ा रक्षा कवच है।” साथ ही किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या NCRP Portal पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के व्यावहारिक उत्तर भी दिए गए। इस अवसर पर कॉलेज डायरेक्टर अशोक राय, एसडीओपी बिलखिरिया अंतिमा समाधिया एवं थाना प्रभारी बिलखिरिया उमेश चौहान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 450 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इसी क्रम में *थाना सूखीसेवनिया* क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिर इमलिया एवं चोपड़ा कलां में नर्सिंग स्टाफ, महिलाओं एवं परिजनों को साइबर अपराध से बचाव संबंधी जानकारी दी गई। *थाना ईटखेड़ी* क्षेत्र के लीलावती हॉस्पिटल एवं जीवनदान हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के परिजनों एवं नर्सिंग स्टाफ को साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। *थाना परवलिया सड़क* क्षेत्र के ग्राम झिरनिया बाजार, मुगलिया हाट एवं जीवनज्योति हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में लोग जागरूक हुए। *थाना बैरसिया* क्षेत्र में CHC बैरसिया एवं साइबर जागरूकता रथ के माध्यम से लोग लाभान्वित हुए। *थाना नजीराबाद* क्षेत्र के शासकीय स्वास्थ्य केंद्र नजीराबाद एवं रुनाहा में आयोजित कार्यक्रम में लोग जागरूक हुए। वहीं *थाना गुनगा* क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं साइबर रथ के माध्यम से लोग जागरूक हुए। सभी कार्यक्रमों में आमजन को संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल, OTP शेयरिंग एवं ऑनलाइन ठगी से बचाव हेतु व्यावहारिक सुझाव दिए, तथा साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या NCRP Portal पर शिकायत दर्ज कराने हेतु जानकारी साझा की।आज आयोजित कुल 12 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस अधिकारीयों द्वारा लगभग 1420 से अधिक छात्र-छात्राओं, स्वास्थ्यकर्मियों, महिलाओं एवं ग्रामीण नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

फ़ारूक़ और मरियम से अदनान की नई उड़ान

रंगमंच से वेब सीरीज़ तक… अभिनय, लेखन और निर्देशन का अनवरत सफ़र

खान आशु

भोपाल। रानी कुबरी गणेश, ओरछा के राम, दारा शिकोह और काहिलों की जमात जैसे चर्चित नाटकों से अपनी पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी अदनान आज अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।दो दर्जन से अधिक नाटकों में अभिनय करते-करते कब उनका रुझान लेखन और निर्देशन की ओर बढ़ गया, इसका एहसास उन्हें स्वयं भी नहीं हुआ। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण और निरंतर सीखने की ललक उन्हें नए मुकामों की ओर ले जा रही है।

एक डायलॉग जिसने बदल दी ज़िंदगी”

टक से मौत को छूकर दो मिनट में वापस आ जाता हूँ…”फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का यह चर्चित संवाद अदनान के जीवन में निर्णायक मोड़ बनकर आया। इस संवाद की मिमिक्री और अभिनय ने उन्हें रंगमंच की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया और अगले ही दिन वे मंच की प्रतिष्ठित शख्सियत राजीव बाबा के सान्निध्य में पहुँच गए।तनवीर और मरहूम इरफान साहब जैसे मार्गदर्शकों से सीखते हुए उनका सफर आगे बढ़ा और फिर प्रदीप अहिरवार के साथ रंगकर्म की नई दिशाएँ खुलती चली गईं।

दिल्ली से मुंबई तक, मंच से वेब सीरीज़ तक

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद समेत अनेक शहरों में रंगमंच, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज़ के अनुभवों ने अदनान की कला को परिपक्व बनाया।उनकी लेखनी पर मरहूम हाजी अनवर साहब और मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की साहित्यिक विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। लेखन के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा रचनाकारों में अलग पहचान दिलाती है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ — सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता

आज अदनान अपनी नई वेब सीरीज़ “फ़ारूक़ और मरियम” के साथ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं। दर्शकों के बीच इस सीरीज़ को लगातार सराहना मिल रही है और इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

अदनान के बारे में

वर्टिकल ड्रामा सीरीज “नाटक जारी है” के निर्माता, लेखक और निर्देशक अदनान खान रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट हैं। वे मुंबई के मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं और मुख्य रूप से उर्दू एडॉप्टेशन, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। अदनान खान लंबे समय से ग्राउंड थिएटर और नाटकों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि “नाटक जारी है” में उन्होंने रिहर्सल और बैकस्टेज की बारीकियों को इतने असली और मजेदार ढंग से दिखाया है। वे नाटकों के उर्दू रूपांतरण और गहरे संवाद लिखने में माहिर हैं। अदनान ने इस सीरीज को पूरी तरह एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में खुद लिखा और निर्देशित किया है। उन्होंने मोबाइल दर्शकों की नब्ज को पहचानते हुए पारंपरिक थिएटर को आधुनिक रील्स/वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट (9:16 आस्पेक्ट रेशियो) में ढालकर पेश किया है। अदनान खान अपने काम और सीरीज के सभी नए एपिसोड्स को मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे Adnan Khan Facebook और इंस्टाग्राम प्रोफाइल [@adnan.fromstage] पर रिलीज करते हैं।

अदनान का मानना है कि उनकी यात्रा अभी शुरुआत भर है। मंज़िल से अधिक उन्हें सफ़र पर भरोसा है, क्योंकि रुकना और ठहर जाना उनकी शब्दावली का हिस्सा नहीं है।

मैं घोर सनातनी, भोजशाला फैसले से कोई विरोध नहीं: दिग्विजय

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का एक वार्तालाप शनिवार को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल रहा। भाजपा नेत्री ऊषा ठाकुर के साथ बातचीत के इस वीडियो में वे सनातन पर जमकर ज्ञान दे रहे हैं और खुद को पक्का सनातनी भी करार दे रहे हैं। इस बातचीत में उन्होंने धार स्थित कमाल मौला मस्जिद को लेकर दिए गए अदालत के फैसले से भी सहमति जताई।वीडियो किसी कार्यक्रम का बताया जा रहा है। जिसमें दिग्विजय सिंह शामिल थे। यहां भाजपा नेत्री ऊषा ठाकुर भी दिखाई दे रही हैं। ऊषा ने दिग्विजय सिंह को अपना भाई करार दिया। इस पर दिग्विजय ने खुलकर कहा कि वे घोर सनातनी हैं और उनके बाद ही भाजपा ने इसको अपना मुद्दा बनाया। उन्होंने ठाकुर से सवाल भी किया कि क्या उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की है या उपवास व्रत का पालन करती हैं। इस बीच जब ऊषा ठाकुर ने दिग्विजय से कहा कि आपको हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए तो दिग्विजय ने जवाब दिया कि ऐसा किसने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हैं?

चल पड़ी सियासत

दिग्विजय और ऊषा की इस वार्तालाप से उस बात को बल मिल गया है, जिसमें कहा जाता है सभी राजनीतिक जन आपस में बेहतर रिश्ते रखते हैं। उनकी लड़ाई मंच और पोस्टरों पर ही दिखाई देती है।

एक पक्ष में खुशी, दूसरा मायूस

कांग्रेस के दिग्गज और वरिष्ठ नेता का इस तरह खुलेआम चर्चा करना कुछ लोगों के लिए पीड़ा का कारण बन गया है। खासकर उनके लिए जिनसे 80 प्रतिशत वोटों की अपेक्षा की जाती है। इसी बात पर सामने वाली पार्टी उन्हें खुलकर गाली बक रही है। इसके विपरीत वे लोग इस मुलाकात और बातचीत के बिंदुओं से खुश भी हैं, जिनके लिए हमेशा यह चर्चा रही है कि दिग्विजय जब भी कुछ करते हैं, उससे कांग्रेस का नुकसान और भाजपा का फायदा हुआ है।

एक शायर : 40 बरस से कर रहा दुनिया में भारत का नाम रौशन

1987 में पढ़ा पहला अंतरराष्ट्रीय मुशायरा

दुनिया के पहले शायर मंजर भोपाली, जिन्हें अमेरिका ने दी है मानद नागरिकता

खान आशु
भोपाल। शायर न होते तो वह एक अच्छे हॉकी खिलाड़ी होते या कहीं सरकारी मुलाजमत कर रहे होते। लेकिन किस्मत ने पैर में यायावरी का भंवरा डाल रखा था, एक दिन हॉकी का शौक और लगी लगाई पोस्ट ऑफिस की सरकारी नौकरी ताक पर रख आए। अपने अंदर छुपे शायर को जिंदा किया, और देवास छोटे मंच से जो शुरुआत हुई तो आधी दुनिया के मंचों की कामयाबी की गारंटी बन गए।
अंतर्राष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली ने अपनी शायरी के 50 बरस पूरे कर लिए हैं और इनमें भी उनका 40 सालों का साथ अंतरराष्ट्रीय मुशायरों से जुड़ा हुआ है।
1987 में जब पहली बार करांची के एक अंतरराष्ट्रीय मुशायरे का दावतनामा हाथ लगा तो उस समय न अंतरराष्ट्रीय तहज़ीब साथ थी, न बदन पर तरीके के कपड़े और न विदेश यात्रा करने के लिए पासपोर्ट। साथी शायर मरहूम डॉ. राहत इंदौरी और अंजुम रहबर भी पासपोर्ट न होने के अवसाद में थे, तीनों ने मिलकर पासपोर्ट बनवाया और इस 20/29 दिन के प्रोग्राम में शिरकत की। उस पहली विदेश यात्रा को लेकर मंजर कहते हैं कि दुनिया के तमाम बड़े शायरों की मौजूदगी वाली इस महफिल में उन्हें जो शेर सुनाने के लिए कहा गया था, मंच पर जाकर उसको ही भूल गए। हिम्मत बटोरकर उन्होंने एक कंठस्थ शेर
‘कोई बचने का नहीं
सबका पता जानती है
किस तरफ आग लगाना है
हवा जानती है…!’
सुना दिया, जो उस मंच पर काफी पसंद किया गया।

अमेरिका जा चुके 38 बार
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मंजर भोपाली की मकबूलियत बढ़ी तो वे इन चालीस सालों में आधी दुनिया नाप चुके हैं। अमेरिका के अलग अलग शहरों में करीब 38 बार अपनी आमद दर्ज करवाकर करीब 600/700 प्रोग्राम का हिस्सा बन चुके हैं। भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के वे ऐसे इकलौते हिंदी या उर्दू के शायर कहे जा सकते हैं, जिन्हें अमेरिका ने मानद नागरिकता प्रदान की है।

इन देशों का लगाया फेरा
अमेरिका की 38 यात्राओं का दंभ रखने वाले मंजर भोपाली
केनेड़ा, ऑस्ट्रेलिया, नार्वे, इंग्लैंड, एम्सतर्डन, मलेशिया, सऊदी अरब, यूएई, सल्तनत ए ओमान, दोहा क़तर, पाकिस्तान, अफ्रीका, ईरान, कुवैत, सिंगापुर के मंच भी गुलजार कर चुके हैं।

अब रुख ब्रिटानिया का
शायर मंजर भोपाली ने बताया कि जुलाई माह में दो सप्ताह की विदेश यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मन में मुशायरों की महफिल की रौनक बनेंगे।

सुनने वाले अच्छे हो तो सुनाने का मज़ा: मंजर
मंजर भोपाली बताते हैं कि दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली मुशायरा महफिल हैदराबाद, अलीगढ़, कराची के लोगों की मौजूदगी के बिना पूरी भी नहीं होती और निखर भी नहीं पाती। वे कहते हैं सुनाने वाले शायर को अपना कलाम सुनाने का उत्साह तभी आता है, जब सुनने वाले उसी शिद्दत के साथ मौजूद हों। मंजर कहने से नहीं चूकते कि वे बड़े शायर नहीं हैं, लेकिन लोगों ने उन्हें वह मुकाम दे दिया है। डॉ. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, बशीर बद्र या प्रो वसीम बरेलवी की मंचीय गैरमौजूदगी ने उनके लिए जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं, यह मंजर भोपाली का मानना है।

‘ज्ञान’ से ‘ज्ञानी’ तक… मप्र बजट में गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के साथ इंडस्ट्री पर भी जोर…!

खान आशु
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ज्ञान’ (GYAN) का लक्ष्य लेकर समग्र समाज के विकास, विस्तार और बेहतरी की बात रखी थी। इसी ‘ज्ञान’ (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) को केंद्र में रखकर विकास योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। मप्र भी इसी गति पर कदमताल कर रहा है। बुधवार को पेश किए गए बजट में इस ‘ज्ञान’ को ‘ज्ञानी’ तक विस्तार दिया गया है। ‘ज्ञान’ के गर्भ में छिपे चारों वर्गों के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को भी इस बजट में तरजीह दी गई है।
बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए 4 लाख, 38 हजार, 317 करोड़ रुपए के बजट में जहां मूलभूत सुविधाओं को जगह दी गई है, वहीं विकास के लिए आवश्यक क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सेवाओं को इस बजट से राहत है तो नारी सशक्तिकरण के विभिन्न आयाम भी छूने की कोशिश की गई है। मजदूर और बेरोजगार भी खुद को इस बजट बारिश में तर पा रहे हैं।

ज्ञान सूत्र
प्रस्तुत हुए प्रदेश के बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान सूत्र गरीब के कल्याण की उन योजनाओं के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं, जो उसके लिए इस श्रेणी से बाहर निकलकर जीने की राह देते हैं। सस्ता अनाज, रियायती घरेलू गैस, पक्के मकान जैसी सुविधाओं का इसमें समावेश है। देश के युवा के शिक्षा, उच्च शिक्षा से लेकर स्पोर्ट्स गतिविधियों को इस बजट में शामिल किया गया है। साथ ही कृषिप्रधान इस देश को गति देने वाले किसान भी इस बजट में कई तरह से लाभांवित होते नजर आ रहे हैं। सिंचाई के माकूल प्रबंध, सौर ऊर्जा के जरिए बिजली खर्च की बचत, उन्नत खाद और बीज एवं बिक्री का उचित दाम उन्हें मिलेगा, ऐसी व्यवस्था यहां कर दी गई है। यह बजट नारी सशक्तिकरण के विभिन्न आयाम भी छूने जैसा है, जिसमें महिलाओं को राहत देने वाला बहुत कुछ शामिल किया गया है।

और ऐसे हुआ ज्ञानी
मप्र सरकार ने अपनी ज्ञान सूत्र प्रतिबद्धता में इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को भी शामिल कर लिया है। अब तक किए जा रहे प्रयासों को विस्तार देते हुए अब प्रदेश में तेजी से फैल रहे उद्योग को और अधिक प्रभावी बनाने के जतन इस बजट व्यवस्था से हो रहे हैं। विभिन्न स्तर पर किए गए निवेश प्रयासों को मूर्त रूप देने के लिए ज्ञान सूत्र की ज्ञानी तक ले जाने की कोशिश की गई है।

क्या कहते हैं मुखिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बजट पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के संकल्प के साथ आज मध्यप्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के ज्ञान (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) के संकल्प में हमारी सरकार ने आई भी जोड़ा है। वर्ष 2026-27 का बजट ज्ञानी (GYA NII) के मार्गदर्शी सिद्धांत पर है। सीएम मोहन ने कहा कि इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर दो दिखते हैं। यह देश का पहला बजट है, जो रोलिंग बजट है। इस बजट के जरिए अगले दो साल के डेवलपमेंट का ब्लूप्रिंट खींचा जाएगा। अमृतकाल 2047 के लिए डेवलपमेंट का पैमाना बनाया गया है।

इसी को कहते हैं मक्खन मीडिया…

चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु

मीडिया के लिए लोगों के मन खटास ऐसे ही नहीं भर गई… जब एक नेशनल न्यूज चैनल जेफ्री एपस्टीन जैसे नर पिशाच को संत साबित करने पर आमादा हो जाए, तो यह खटास और गहरी हो जाती है…!
चंद सेकंड का एक वीडियो एक महिला एंकर ने सोशल मीडिया पर अपडेट किया है….! इस महिला को छोटी, मासूम और खिलौनों से खेलने की उम्र की बच्चियों की चीत्कार सुनाई नहीं दी…! उसकी आंखों के सामने दुनिया के वह नामवर लोग भी नहीं लहराए जिन्होंने हैवानियत की हदें पार कर दीं…! उसको दिखा तो एक संत समान हैवान एपस्टीन, जिसने शिक्षा जैसे पवित्र पेशे को भी दागदार कर दिया…! अपनी लालच की पराकाष्ठा ने उसे हर बुरा काम करने से जोड़ दिया…! मासूमों का बचपन छीनने से लेकर उनका मांस खाने तक का दोषी इस महिला एंकर को संत समान लग रहा है…!
गोदी मीडिया, मक्खन मीडिया, झोला मीडिया इसीलिए सचेत किया गया है कि अप्सटीन फाइल्स की आग हमारे देश के चमकते चेहरों को दागदार न कर दे…! झूठ को सच कहना, जोर जोर से कहना, तब तक कहते रहना जब तक सच न मान लिया जाए… की थीम पर लगे लोग जमे हैं और तरक्की की फसल(?) काट रहे हैं…!

पुछल्ला
नई नहीं आई है महंगाई
अंदर हंगामा भरा था। बाहर भी शोर। मसला मंहगाई का। गैस सिलेंडर की कीमत बहुत ज्यादा है। विपक्ष में बैठे हैं, तो कोई मुद्दा तो उछालना पड़ेगा। लेकिन विरोध के स्वरों में इसको भुला दिया गया कि मंहगाई देश में किसी सियासी दल ने आयात नहीं की है, बल्कि यह तब भी अपना सुर सुनाती थी, जब वे सत्ताधीश हुआ करते थे।

17/02/2026

‘दीपक’ की रोशनी अब आबकारी के हिस्से, सीएम की छवि चमकाने की जिम्मेदारी ‘मनीष’ के जादुई हाथों में…

खान आशु
भोपाल। सीएम की छवि चमकाने वाले विभाग जनसंपर्क में अब उनके पहले भी अपना जलवा दिखा चुके IAS मनीष सिंह को सौंपी गई है। नाम के अनुरूप बुद्धिमान, समझदार या विचारशील व्यक्तित्व के धनी मनीष सिंह में जहां काम को जुनून की इंतहा तक उत्साह है, वहीं उनकी प्रशासनिक पकड़ का भी लोहा माना जाता रहा है।
शुक्रवार देर रात हुए प्रशासनिक फेरबदल में आइइएस मनीष मनीष सिंह को जनसंपर्क संचालनालय का जिम्मा सौंपा गया है। उनकी यहां पहले भी एक पारी बीत चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जनसंपर्क विभाग में सेवाएं दे चुके मनीष सिंह की बेहतर ट्यूनिंग से इस विभाग से जुड़े सभी लोग संतुष्ट रहे हैं। जहां विभागीय अधिकारी कर्मचारियों से उनका तालमेल रहा है, वहीं प्रदेश भर के छोटे बड़े अखबार मालिकों को भी उचित प्रतिसाद उनसे मिलता रहा है। विभाग से जुड़े पत्रकारों के लिए भी उनका दोस्ताना व्यवहार यादगार कहा जा सकता है।

यथा नाम, तथा काम
मनीष नाम के मायने खंखालने पर पता चलता है कि इस नाम को ईश्वर के नाम मन+ईश का समावेश माना जाता है। इस नाम के व्यक्ति को मन का स्वामी कहा जाता है। जबकि
बुद्धिमत्ता, समझदारी और विचारशीलता इनकी अतिरिक्त योग्यता मानी जाती है। मनीष सिंह ऐसे व्यक्ति कहे जा सकते हैं, जिनको लेकर यथा नाम, तथा काम की संज्ञा दी जा सकती है।

जहां रहे, अलग पहचान
नगर निगम भोपाल में आयुक्त के रूप में उनकी कार्यशैली शहर को अब तक याद है। स्व. बाबूलाल गौर के मंत्रित्वकाल और उन्हीं की पुत्रवधु कृष्णा गौर के महापौर रहते हुए उन्होंने नगर निगम के नाम एक नई तहरीर लिखी थी। भोपाल से इंदौर एकेवीएन, नगर निगम और इंदौर जिला प्रशासन के साथ पारी खेली और नए आयाम स्थापित किए। बार बार का शहर स्वच्छता अवार्ड भी इंदौर के नाम करने की शुरुआत भी मनीष सिंह के कार्यकाल से ही शुरु हुआ है। भोपाल मेट्रो से लेकर जनसंपर्क विभाग की कई उपलब्धियां भी मनीष सिंह के नाम से ही जानी जाती हैं। उनका दोबारा जनसंपर्क विभाग में लौटना किसी नए कीर्तिमान से जोड़ा जा रहा है।

लोगों में उत्साह भी, उमंग भी
जनसंपर्क संचालनालय के नए मुखिया को लेकर विभाग से जुड़े लोगों में उत्साह बना हुआ है। विभिन्न विभागों में सेवाओं के दौरान लोगों से सतत और गहरे संबंधों को तलाशा जाने लगा है। मनीष सिंह की नई आमद से लोग उत्साह में इसीलिए हैं कि वे इस अधिकारी से बिना किसी व्यवधान के अपनी समस्या का समाधान मांगने आसानी से पहुंच पाएंगे।

उज्जैन में 12 फरवरी से आरंभ हो रहा 139 दिवसीय विक्रमोत्सव

शुभारंभ कार्यक्रम 15 फरवरी को, महाशिवरात्रि पर सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम करेंगे महादेव की आराधाना

भोपाल। सृष्टि सृजनकर्ता महादेव के भव्य-दिव्य महाशिवरात्रि उत्सव से विक्रमोत्सव 2026 का आरंभ कर सृष्टि निर्माण दिवस वर्ष प्रतिपदा से होते हुए पंच महाभूतों में अतिविशिष्ट जल तत्व के संरक्षण, संवर्धन के लिए विशिष्ट रूप से नियोजित जल गंगा संवर्धन अभियान का आयोजन होगा। 12 फरवरी से 30 जून, 2026 की तिथियों में होने वाला यह 139 दिवसीय आयोजन भारत और देश तथा दुनिया में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का एक अनूठा उत्सव होगा। जिसका प्रथम चरण महाशिवरात्रि के अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा शिवोऽहम महादेव की आराधना से प्रारंभ होगा। द्वितीय चरण 19 मार्च से 30 जून 2026 तक जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत सम्पन्न होगा। जिसमें 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों में 4 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जायेंगी। यह जानकारी संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला द्वारा प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दी। इस अवसर पर संस्कृति संचालनालय के संचालक एन. पी. नामदेव, माननीय मुख्यमंत्रीजी के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी एवं दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित थे।
अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि 139 दिवसीय इस महोत्सव में 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियाँ शिवरात्रि मेलों का समारंभ, महाकाल वन मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत, नृत्य, वादन, शिवोद्य, शिवपुराण, अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समोराह, पुतुल समारोह, संगीत का उद्भव और विकास पर केंद्रित अनहद वैचारिक समागम, चित्र प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठी, विक्रमादित्य का न्याय समागम, भारतीय इतिहास समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन लोकार्पण, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, बोलियों एवं हिन्दी रचनाओं का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन, ड्रोन शो व ख्यात कलाकारों प्रीतम तथा विशाल मिश्रा की प्रस्तुतियाँ शामिल है। इसके साथ ही भारतीय कालगणना पर केन्द्रित विक्रम पंचांग सहित विविध पुस्तकों का लोकार्पण एवं सबसे महत्वपूर्ण देश का सबसे बड़ा सम्मान सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण विशेष आकर्षण का केंद्र होगा।

उज्जैन के दशहरा मैदान में महाकाल वनमेला का आयोजन
विक्रमोत्सव अंतर्गत 12 से 16 फरवरी की तिथियों में उज्जैन के दशहरा मैदान में महाकाल वन मेला आयोजित किया जा रहा है। जिसमें हर्बल उत्पादों एवं पारंपरिक हर्बल ज्ञान के विषय में प्रदर्शनी, उत्पादकों का प्रदर्शन किया जायेगा। साथ ही इसमें आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच की जायेगी। तथा इस मौके पर सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जा रही है।

देव महादेव पर्वः प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलों का आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की कलापरक और सांस्कृतिक आराधना के अंतर्गत प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलो का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मंदिरों की साजसज्जा, साफ-सफाई एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ प्रमुख है।

पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, जनजातीय विषयों पर केन्द्रित प्रदर्शनियाँ
विक्रमोत्सव अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर एवं कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, जनजातीय विषयों पर 7 विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्ष भारत, महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह, पताकाएँ, शंख, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक, श्रीकृष्ण प्रभात एवं रागमाला प्रमुख है। इन प्रदर्शनियों को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा तैयार किया गया है।

विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रस्तुतियों का मंचन
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुकी नाट्य प्रस्तुतियों पर केन्द्रित दस दिवसीय इस विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा तैयार की गया प्रस्तुतियों जटायुवधम्, चारूदत्तम, भरतवाक्य, जाति जीवनम्, अभिज्ञान शाकुन्तलम् और चतुर्भाणी शामिल है। इसके साथ ही अंधायुग, भूमि सूर्य वीरगाथा, आदि-अनंत, अभंग नाद, सौगंधिकाहरणं का भी मंचन होगा।

25 से 28 फरवरी में होगा पुतुल समारोह
भारत की विभिन्न पुतुल (कठपुतली) शैलियों पर आधारित पुतुल समारोह में 6 विभिन्न शैलियों में कठपुतलियों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य, भीम और बकासुर, आठवां, द आर्चर स्टूड अलोन, दुर्योधन वधम् व पद्मगाथा की प्रस्तुतियाँ होगी।

भारतीय कवि सम्मेलनों का आयोजन
1 मार्च को लोकरंजन के अंतर्गत जनजातीय भाषा एवं बोलियों का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। जिसमें देश भर के विभिन्न बोलियों एवं भाषा के लगभग 9 कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर नारी शक्ति अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। जिसमें देश-प्रदेश की 9 महिला कवयित्रियों का कविता पाठ होगा। इसके साथ ही 14 मार्च को देशभर के 10 सुप्रसिद्ध एवं जाने-माने कवियों का कविता पाठ होगा। जिसका संचालन अंतरराष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज करेंगे।

शिव पुराण
13 से 17 मार्च तक शिवपुराण के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा के अठारह पुराणों में से एक शिव पुराण आख्यान पर आधरित चित्र प्रदर्शनी, लोक नृत्य तथा नृत्य नाटिकाओं का आयोजन होगा।

अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव में इस बार 25 से अधिक देश होंगे शामिल
पौराणिक फिल्मों का अन्तर्राष्ट्रीय महोत्सव 13 से 17 मार्च 2026 तक उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें 25 से देश शामिल हो रहे है। इसके साथ ही समारोह में अंग्रेजी, फ्रेंच, हिबरू, रसियन, स्पेनिश, अइसलेन्दीक, इटेलियन, डच, मंगोलियन, फिजियन, इन्डोनेशियन, अफरीकन, नाइजिरियन, सिंहली, ग्रीक,, भाषाओ की 25 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन होगा। इस फिल्म समारोह में महाभारत पर केन्द्रित फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जायेगा।

देश का सबसे बड़ा सम्मान होगा सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ ने ऐसे युग निर्माता गणनायक की स्मृति को सुरक्षित रखने तथा उनके शौर्य, औदार्य, न्यायप्रियता तथा धर्म एवं प्रजावत्सल गुणों को समाज में पुनःस्थापित करने की दृष्टि से राशि रूपये 1 करोड़ 1 लाख का अंतरराष्ट्रीय सम्मान स्थापित किया गया है। यह देश का सबसे बड़ा सम्मान होने जा रहा है। इसके अलावा सम्राट विक्रमादित्य के नाम से 21 लाख रूपये का एक राष्ट्रीय सम्मान एवं 5-5 लाख रुपये राशि के तीन राज्य स्तरीय सम्मान स्थापित किये हैं।

अंतरराष्ट्रीय ठहाका सम्मेलन : हुआ हास्य काव्य पाठ

भोपाल। विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष में महाकाल की नगरी उज्जैन में 26वा अंतरराष्ट्रीय ठहाका महोत्सव हुआ। कवि कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित इस तीन दिन के इस कार्यक्रम के अंतिम दिन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में मनपसंंद हास्य योग कला साहित्य मंच, इंदौर के कवियों को भी आमंत्रित किया गया था। देश विदेश से आए कवियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। जिन्होंने विभिन्न प्रकार के हास, परिहास की रचनाओं से श्रोताओं ने खूब ठहाके लगाए। मनपसंंद मंच के संस्थापक अध्यक्ष जनार्दन शर्मा ने “चाय से ज्यादा केतली गरम है” व अन्य हास्य रचनाओं पर हंसाकर खूब तालियां बटोरी और सभी श्रोताओं से हास्य योग का ठहाका भी लगवाया।
अन्य कवियित्रियों में गायत्री शर्मा, रंजना शर्मा, उर्मिला उर्मी ने भी रचना पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों को ठहाका महोत्सव के संस्थापक अध्यक्ष व मंडल सदस्यों द्वारा प्रतीक चिन्ह व सम्मान पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता आशीष विद्यार्थी के कार्यक्रम से संपन्न हुआ।

घर घर स्वदेशी की मंशा के साथ MLB कॉलेज में मना विवेकानंद दिवस

भोपाल। आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जयन्ती के अवसर पर राजधानी के शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई स्नातकोत्तर महाविद्यालय राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया।
इस अवसर पर रन फॉर स्वदेशी उद्देश्य के तहत महाविद्यालय की छात्राओं ने विवेकानंद चौराहे पॉलीटेक्निक पर एक भव्य रैली का प्रदर्शन करते हुए “घर घर स्वदेशी, हर घर स्वदेशी“ के नारे लगाए।
रैली में छात्राओं के साथ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० अजय अग्रवाल और प्राध्यापक भी शामिल हुए। तत्पश्चात महाविद्यालय के सभागार में आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में डॉ० नीना जांगले विभागाध्यक्ष योग विभाग के निर्देशन में छात्राओं ने योगाभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन वनवासी कल्याण परिषद के संगठन मंत्री और प्रचारक तिलकराज दाँगी के उद्बोधन से हुआ। इस अवसर पर तिलकराज ने अपने वक्तव्य की शुरुआत स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में दिए गए भाषण से की। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 1893 को उनके द्वारा धर्म संसद में दिए गए भाषण आज भी उतना ही तर्कसंगत है, जितना उस समय था और तब से पूरा विश्व भारत को अध्यात्म के रूप में जानने लगा। तिलकराज ने विवेकानंद के जीवन की कई घटनाओं को सुनाते हुए छात्राओं के प्रेरणा लेने पर ज़ोर दिया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ० धनंजय वर्मा ने विवेकानंद के दार्शनिक सिद्धांतों पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि स्वामी विवेकानंद जी के पूरे दर्शन को हम इस तरह युवाओं के लिए कह सकते हैं कि वह SPAM की शिक्षा देते हैं S for स्पिरिचुअल ग्रोथ यानी आध्यात्मिक वृद्धि P मतलब फिजिकल Strength यानि शारीरिक शक्ति और M फॉर मेंटल डिसिप्लिन मानसिक अनुशासन आज की युवा यदि इस तीनों को लेकर चलेंगे तो भारत आने वाले समय में निश्चित रूप से वैश्विक गुरु बनेंगे। उनके द्वारा उनके जयंती पर 1985 से हम युवा दिवस मनाने लगे हैं और जब उनकी 150 में जयंती थी तब हम उनके जयंती के अवसर पर 2012 2013 से सूर्य नमस्कार भी करने लगे हैं। विवेकानंद की जयन्ती को युवा दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है और सूर्य नमस्कार, योगाभ्यास क्यों शामिल किया जाता है। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० अजय अग्रवाल ने अपने विचार प्रकट किए और अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu