फ़ारूक़ और मरियम से अदनान की नई उड़ान

रंगमंच से वेब सीरीज़ तक… अभिनय, लेखन और निर्देशन का अनवरत सफ़र

खान आशु

भोपाल। रानी कुबरी गणेश, ओरछा के राम, दारा शिकोह और काहिलों की जमात जैसे चर्चित नाटकों से अपनी पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी अदनान आज अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।दो दर्जन से अधिक नाटकों में अभिनय करते-करते कब उनका रुझान लेखन और निर्देशन की ओर बढ़ गया, इसका एहसास उन्हें स्वयं भी नहीं हुआ। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण और निरंतर सीखने की ललक उन्हें नए मुकामों की ओर ले जा रही है।

एक डायलॉग जिसने बदल दी ज़िंदगी”

टक से मौत को छूकर दो मिनट में वापस आ जाता हूँ…”फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का यह चर्चित संवाद अदनान के जीवन में निर्णायक मोड़ बनकर आया। इस संवाद की मिमिक्री और अभिनय ने उन्हें रंगमंच की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया और अगले ही दिन वे मंच की प्रतिष्ठित शख्सियत राजीव बाबा के सान्निध्य में पहुँच गए।तनवीर और मरहूम इरफान साहब जैसे मार्गदर्शकों से सीखते हुए उनका सफर आगे बढ़ा और फिर प्रदीप अहिरवार के साथ रंगकर्म की नई दिशाएँ खुलती चली गईं।

दिल्ली से मुंबई तक, मंच से वेब सीरीज़ तक

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद समेत अनेक शहरों में रंगमंच, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज़ के अनुभवों ने अदनान की कला को परिपक्व बनाया।उनकी लेखनी पर मरहूम हाजी अनवर साहब और मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की साहित्यिक विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। लेखन के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा रचनाकारों में अलग पहचान दिलाती है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ — सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता

आज अदनान अपनी नई वेब सीरीज़ “फ़ारूक़ और मरियम” के साथ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं। दर्शकों के बीच इस सीरीज़ को लगातार सराहना मिल रही है और इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

अदनान के बारे में

वर्टिकल ड्रामा सीरीज “नाटक जारी है” के निर्माता, लेखक और निर्देशक अदनान खान रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट हैं। वे मुंबई के मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं और मुख्य रूप से उर्दू एडॉप्टेशन, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। अदनान खान लंबे समय से ग्राउंड थिएटर और नाटकों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि “नाटक जारी है” में उन्होंने रिहर्सल और बैकस्टेज की बारीकियों को इतने असली और मजेदार ढंग से दिखाया है। वे नाटकों के उर्दू रूपांतरण और गहरे संवाद लिखने में माहिर हैं। अदनान ने इस सीरीज को पूरी तरह एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में खुद लिखा और निर्देशित किया है। उन्होंने मोबाइल दर्शकों की नब्ज को पहचानते हुए पारंपरिक थिएटर को आधुनिक रील्स/वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट (9:16 आस्पेक्ट रेशियो) में ढालकर पेश किया है। अदनान खान अपने काम और सीरीज के सभी नए एपिसोड्स को मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे Adnan Khan Facebook और इंस्टाग्राम प्रोफाइल [@adnan.fromstage] पर रिलीज करते हैं।

अदनान का मानना है कि उनकी यात्रा अभी शुरुआत भर है। मंज़िल से अधिक उन्हें सफ़र पर भरोसा है, क्योंकि रुकना और ठहर जाना उनकी शब्दावली का हिस्सा नहीं है।

हर वर्ग और हर समाज को मिले समान अवसर और सम्मान

राहुल गांधी से अल्पसंख्यक एडवाइज़री काउंसिल की लंबी बातचीत

भोपाल। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अल्पसंख्यक एडवाइज़री काउंसिल के पचास से अधिक सदस्यों के साथ विस्तृत संवाद किया। यह बैठक खुली बातचीत और खुली मानसिकता के साथ हुई, जिसमें हर वर्ग और हर समाज के समान अवसर व सम्मान पर जोर दिया गया। राहुल गांधी ने भाजपा के नफ़रत के एजेंडे के खिलाफ “मुहब्बत की राजनीति” के विचार को दोहराते हुए कहा कि हर समुदाय को बराबरी का मुकाम मिलना चाहिए।अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने राहुल गांधी का आभार व्यक्त किया और उनके प्रति धन्यवाद जताया कि उन्होंने अल्पसंख्यक समाज के नेताओं को सुना और उनकी समस्याओं तथा सुझावों को गंभीरता से समझा। बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधियों में तारिक अनवर, अभिषेक मनु सिंहवी, अजहरूद्दीन, गुपदीप सप्पल, विधायक आरिफ मसूद, क़नीज़ फ़ातिमा, क्रिस्टोफ़र तिलक, नासिर हुसैन, इमरान मसूद, असलम शेख़, साजिद पठान, इरफ़ान अंसारी, रक़ीबुद्दीन, हमदुल्ला सईद, जेबी माथेर हिशाम सहित अन्य अनेक सदस्य शामिल थे।विशेष रूप से भोपाल से विधायक आरिफ मसूद ने राहुल गांधी को मुस्लिम समुदाय से जुड़ी निर्मनों और सुझावों को बेबाकी से रखा, जिन्हें राहुल गांधी ने ध्यानपूर्वक सुना और गंभीरता से ग्रहण किया। बैठक के दौरान सामाजिक समानता, सुरक्षा, शिक्षा एवं रोजगार जैसी अहम पहलुओं पर चर्चा हुई और कई ठोस सुझाव रखे गए जिन पर आगे कार्यवाही करने का आश्वासन भी दिया गया।बैठक का स्वर समावेशी रहा और प्रतिनिधि मंडल ने आशा जताई कि यह संवाद आगे भी जारी रहेगा तथा समुदायों के बीच भरोसा और आपसी समझ बढ़ाने में मदद करेगा।

एक संदेश शहर के नाम : ताकि सभी ले सकें त्यौहार का मजा

ईद-उल-अज़हा 2026 : स्वच्छता प्लानिंग एवं अवेयरनेस मुहिम

भोपाल। ईद-उल-अज़हा के मौक़े पर इस साल सामाजिक संस्था भोपाल सर्विंग ह्यूमैनिटी ने अनेक संस्थाओं के साथ मिलकर पहले से कहीं ज़्यादा बड़े स्तर पर तैयारी की है। पिछले वर्षों के अनुभव को देखते हुए इस बार पूरी प्लानिंग को और मज़बूत, व्यवस्थित और ग्राउंड लेवल तक प्रभावी बनाया गया है, ताकि भोपाल शहर का हर इलाक़ा ईद के दौरान साफ़, सुरक्षित और व्यवस्थित बना रहे।इस वर्ष इस टीम ने वॉलंटियर्स की संख्या में बड़े स्तर पर इज़ाफ़ा किया है। अलग-अलग वार्डों, कॉलोनियों और मुस्लिम बस्तियों के लिए विशेष टीमें तैयार की गई हैं, जिन्हें उनकी ज़िम्मेदारियाँ पहले से निर्धारित कर दी गई हैं। खास तौर पर उन दूर-दराज़ इलाक़ों और छोटी बस्तियों पर ध्यान दिया जा रहा है जहाँ अक्सर सफ़ाई व्यवस्था पहुँचने में कठिनाई होती है।

स्पेशल ग्राउंड प्लानिंग

नगर निगम के साथ समन्वय बनाकर Waste Collection पर विशेष निगरानी रखा जाएगा।

हर क्षेत्र में अलग-अलग वॉलंटियर टीम तैनात रहेगी।

लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार Announcement और Awareness Campaign चलाए जाएंगे।

संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सफ़ाई टीम और निगरानी रखी जाएगी।

अपील

क़ुर्बानी के जानवरों के अवशेष (Organs/Waste) सड़कों, नालियों या खाली जगहों पर बिल्कुल ना डालें।इन्हें केवल नगर निगम की गाड़ियों में दें या नगर निगम द्वारा निर्धारित Collection Points पर ही जमा करें।

यह कोशिश भी

इस साल स्वच्छता मुहिम को और असरदार बनाने के लिए भोपाल के तमाम सोशल मीडिया Influencers, समाजसेवी और जागरूक नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है, ताकि साफ़-सफ़ाई का पैग़ाम शहर के हर घर और हर मोहल्ले तक पहुँचे।

स्वच्छता अवॉर्ड 2026

हर साल की तरह इस साल भी वह वार्ड, मोहल्ला और कॉलोनी जो ईद के दौरान सबसे बेहतर साफ़-सफ़ाई बनाए रखेगी और अपने क्षेत्र की स्वच्छता के Videos एवं Photos साझा करेगी, उन्हें Cleanliness Award 2026 से सम्मानित किया जाएगा।

यह रहेंगे साथ

ईद-उल-अज़हा 2026 के मौक़े पर आयोजित इस विशेष स्वच्छता एवं अवेयरनेस अभियान में शहर की कई सामाजिक एवं खिदमती तंज़ीमें मिलकर अपनी ज़िम्मेदारी अदा कर रही हैं।इनमें भोपाल सर्विंग ह्यूमैनिटी,न्यूज मोहल्ला, टीम बीबीएम, रहमान फाउंडेशन, मेजबान, सेंट्रल खिदमत टीम आदि शामिल हैं।

बड़बोलेपन ने डाला प्रियंक को मुसीबत में… हो रहीं एक के बाद एक शिकायतें

पहले AI निर्मित तस्वीर, अब प्रताड़ना की एक दास्तां

भोपाल। अब तक एक कौम खास को लेकर टिप्पणियों की बारिश थी, सोचा था कि सरदार खुश होंगे और इनाम भी देंगे… लेकिन कुछ नया पाने की होड़ में लगी इस तेज दौड़ में वे अपनी पार्टी के लोगों को प्रतिद्वंद्वी बना बैठे। नतीजा एक ऐसे प्रकरण के रूप में सामने आया है कि अपने लोगों की नाराज़गी भी ओढ़कर बैठ गए हैं।मामला राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो से जुड़ा है। वैसे तो आयोग के संवैधानिक दायरों में रहते हुए उन्हें सीधे सियासी मामलों में पड़ना नहीं था। लेकिन प्रियंक कानूनगो ने एक कौम खास को टारगेट करते हुए जो बयानबाजी शुरू की तो वे यहां तक भी बोलते गए कि राजधानी की किसी विधानसभा को अपना ठिकाना बनाने की मंशा में घिरे दिखने लगे। मुस्लिम समाज के कई आंतरिक मामलों में वे दखलंदाजी करते दिखाई दिए। इन हालात से वे लोग विचलित भी हुए, जो बरसों से राजधानी में अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं। ऐसे में किसी नए समीकरण पर सियासी खलबली का माहौल बन गया। जिसका नतीजा प्रियंक कानूनगो के खिलाफ शिकायतों के रूप में आया है। सूत्र बताते हैं कि इन सब हालात के पीछे कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी के लोग लगे हुए हैं।

भगवान को कर दिया कैद

मामला विदिशा जिले की त्योंदा तहसील के ग्राम कस्बा बांगरोद का बताया जा रहा है। यहां स्थित शासन संधारित अति प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर को लेकर उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो के भाई मयंक कानूनगो ने मंदिर पर ताला जड़ दिया है, जिससे भगवान कैद हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि मयंक कानूनगो मंदिर की मूर्तियों को हटवाकर राम जानकी मंदिर में रखवाने पर अड़े रहे जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया। इस दौरान जमकर कहासुनी हुई। तब प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नवीन पुजारी को व्यस्था सौंपकर मंदिर के ताले खुलवाए।

तुम्हारे पूरे परिवार का पता नहीं चलेगा… धमकीl

मंदिर के पुजारी लकी महाराज ने शिकायत की है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो द्वारा उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। वह धमकी दे रहे हैं कि तुम यह गांव और जमीन छोड़कर चले जाओ नहीं तो तुम्हारे पूरे परिवार का पता नहीं चलेगा। पुजारी ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रपति को भी की है।

पहले इस तरह किया था माहौल खराब

पिछले सप्ताह प्रियंक कानूनगो के खिलाफ कांग्रेस नेता औसाफ बबलू ने जहांगीराबाद थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि एक AI निर्मित तस्वीर के सहारे प्रियंक ने शहर का माहौल खराब करने की कोशिश की थी। इस तस्वीर में उन्होंने एक मंदिर को जेसीबी से तोड़ते हुए एक कौम खास के लोगों को दिखाया था।

इंसाफ की मांग करने वाले ही कटघरे में…

आयोग सदस्य कानूनगो की शिकायत

भोपाल। वैसे जिम्मेदारी तो उन्हें मानवों के अधिकार की सुरक्षा की दी गई। चिंता वे सियासत की बहती धारा में हाथ धोने की कर रहे हैं। लागतार बयानों और क्रियाकलाप में खुद को हिंदूवादी बताने के प्रयास कर रहे हैं। इन कोशिशों में मुस्लिम समाज को भी अपना लक्ष्य उन्होंने बना लिया है। राजधानी भोपाल के एक मामले को गलत तरीके से पेश करते हुए वैमनस्यता फैलाने की हिमाकत उन्होंने कर दी है। जिसे लेकर समाज का एक धड़ा नाराज है और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा आया है।

मामला राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो से जुड़ा है। जिन्हें लेकर राजधानी भोपाल में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता औसाफ बबलू और साथियों ने पुलिस को लिखित आवेदन दिया है। जिसमें कहा गया है कि आयोग सदस्य कानूनगो ने एकएआई जनरेटेड भ्रामक पोस्ट से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है। उन्होंने इस मामले में भोपाल पुलिस से सख्त कार्यवाही की मांग की है।

यह है मामला

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म फेसबुक पर एक कथित एआई जनरेटेड तस्वीर साझा की गई है। जिसको लेकर शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने गंभीर आपत्ति व्यक्त की है।वायरल तस्वीर में संत रविदास मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों को टोपी पहने हुए तथा जेसीबी मशीन के साथ मंदिर तोड़ते हुए दर्शाया गया है। साथ ही मंदिर के समीप मस्जिद को भी दिखाया गया है। आपत्ति करने वालों का कहना है कि यह तस्वीर पूरी तरह काल्पनिक, भ्रामक और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाली है, जिसका उद्देश्य शहर की शांति और भाईचारे को प्रभावित करना प्रतीत होता है।*सब कुछ काल्पनिक*सामाजिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज का न तो इस कथित घटना से कोई संबंध है और न ही समुदाय का कोई व्यक्ति जेसीबी मशीन लेकर वहाँ पहुँचा था। यदि किसी निर्माण या संरचना को हटाने का प्रस्ताव है, तो वह मेट्रो परियोजना अथवा अन्य शासकीय विकास कार्यों के अंतर्गत प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। ऐसे मामलों को किसी विशेष समुदाय से जोड़कर प्रस्तुत करना दुर्भावनापूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना कदम माना जा रहा है।

बताया शांति को खतरा

शिकायतकर्ता का कहना है कि सबंधित व्यक्ति आयोग के पद पर बैठ कर एक समुदाय विशेष के खिलाफ दूसरे समुदायों को भड़का रहा है फेसबुक पेज https://www.facebook.com/share/18Zxshkptp/जबकि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह समाज में विश्वास, शांति और सद्भाव को मजबूत करे। बिना सत्यापन के भ्रामक सामग्री साझा करना न केवल पद की गरिमा के प्रतिकूल है, बल्कि इससे सामाजिक तनाव भी बढ़ सकता है।

उठी कार्यवाही की मांग

शिकायतकर्ता ओसाफ बबलू द्वारा जहांगीराबाद थाना में एक शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर मांग की है कि पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आदेश के अनुसार एआई जनरेटेड और भ्रामक सामग्री के माध्यम से समाज में तनाव फैलाने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति भोपाल की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।===============

मैं घोर सनातनी, भोजशाला फैसले से कोई विरोध नहीं: दिग्विजय

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का एक वार्तालाप शनिवार को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल रहा। भाजपा नेत्री ऊषा ठाकुर के साथ बातचीत के इस वीडियो में वे सनातन पर जमकर ज्ञान दे रहे हैं और खुद को पक्का सनातनी भी करार दे रहे हैं। इस बातचीत में उन्होंने धार स्थित कमाल मौला मस्जिद को लेकर दिए गए अदालत के फैसले से भी सहमति जताई।वीडियो किसी कार्यक्रम का बताया जा रहा है। जिसमें दिग्विजय सिंह शामिल थे। यहां भाजपा नेत्री ऊषा ठाकुर भी दिखाई दे रही हैं। ऊषा ने दिग्विजय सिंह को अपना भाई करार दिया। इस पर दिग्विजय ने खुलकर कहा कि वे घोर सनातनी हैं और उनके बाद ही भाजपा ने इसको अपना मुद्दा बनाया। उन्होंने ठाकुर से सवाल भी किया कि क्या उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की है या उपवास व्रत का पालन करती हैं। इस बीच जब ऊषा ठाकुर ने दिग्विजय से कहा कि आपको हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए तो दिग्विजय ने जवाब दिया कि ऐसा किसने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हैं?

चल पड़ी सियासत

दिग्विजय और ऊषा की इस वार्तालाप से उस बात को बल मिल गया है, जिसमें कहा जाता है सभी राजनीतिक जन आपस में बेहतर रिश्ते रखते हैं। उनकी लड़ाई मंच और पोस्टरों पर ही दिखाई देती है।

एक पक्ष में खुशी, दूसरा मायूस

कांग्रेस के दिग्गज और वरिष्ठ नेता का इस तरह खुलेआम चर्चा करना कुछ लोगों के लिए पीड़ा का कारण बन गया है। खासकर उनके लिए जिनसे 80 प्रतिशत वोटों की अपेक्षा की जाती है। इसी बात पर सामने वाली पार्टी उन्हें खुलकर गाली बक रही है। इसके विपरीत वे लोग इस मुलाकात और बातचीत के बिंदुओं से खुश भी हैं, जिनके लिए हमेशा यह चर्चा रही है कि दिग्विजय जब भी कुछ करते हैं, उससे कांग्रेस का नुकसान और भाजपा का फायदा हुआ है।

एक शायर : 40 बरस से कर रहा दुनिया में भारत का नाम रौशन

1987 में पढ़ा पहला अंतरराष्ट्रीय मुशायरा

दुनिया के पहले शायर मंजर भोपाली, जिन्हें अमेरिका ने दी है मानद नागरिकता

खान आशु
भोपाल। शायर न होते तो वह एक अच्छे हॉकी खिलाड़ी होते या कहीं सरकारी मुलाजमत कर रहे होते। लेकिन किस्मत ने पैर में यायावरी का भंवरा डाल रखा था, एक दिन हॉकी का शौक और लगी लगाई पोस्ट ऑफिस की सरकारी नौकरी ताक पर रख आए। अपने अंदर छुपे शायर को जिंदा किया, और देवास छोटे मंच से जो शुरुआत हुई तो आधी दुनिया के मंचों की कामयाबी की गारंटी बन गए।
अंतर्राष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली ने अपनी शायरी के 50 बरस पूरे कर लिए हैं और इनमें भी उनका 40 सालों का साथ अंतरराष्ट्रीय मुशायरों से जुड़ा हुआ है।
1987 में जब पहली बार करांची के एक अंतरराष्ट्रीय मुशायरे का दावतनामा हाथ लगा तो उस समय न अंतरराष्ट्रीय तहज़ीब साथ थी, न बदन पर तरीके के कपड़े और न विदेश यात्रा करने के लिए पासपोर्ट। साथी शायर मरहूम डॉ. राहत इंदौरी और अंजुम रहबर भी पासपोर्ट न होने के अवसाद में थे, तीनों ने मिलकर पासपोर्ट बनवाया और इस 20/29 दिन के प्रोग्राम में शिरकत की। उस पहली विदेश यात्रा को लेकर मंजर कहते हैं कि दुनिया के तमाम बड़े शायरों की मौजूदगी वाली इस महफिल में उन्हें जो शेर सुनाने के लिए कहा गया था, मंच पर जाकर उसको ही भूल गए। हिम्मत बटोरकर उन्होंने एक कंठस्थ शेर
‘कोई बचने का नहीं
सबका पता जानती है
किस तरफ आग लगाना है
हवा जानती है…!’
सुना दिया, जो उस मंच पर काफी पसंद किया गया।

अमेरिका जा चुके 38 बार
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मंजर भोपाली की मकबूलियत बढ़ी तो वे इन चालीस सालों में आधी दुनिया नाप चुके हैं। अमेरिका के अलग अलग शहरों में करीब 38 बार अपनी आमद दर्ज करवाकर करीब 600/700 प्रोग्राम का हिस्सा बन चुके हैं। भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के वे ऐसे इकलौते हिंदी या उर्दू के शायर कहे जा सकते हैं, जिन्हें अमेरिका ने मानद नागरिकता प्रदान की है।

इन देशों का लगाया फेरा
अमेरिका की 38 यात्राओं का दंभ रखने वाले मंजर भोपाली
केनेड़ा, ऑस्ट्रेलिया, नार्वे, इंग्लैंड, एम्सतर्डन, मलेशिया, सऊदी अरब, यूएई, सल्तनत ए ओमान, दोहा क़तर, पाकिस्तान, अफ्रीका, ईरान, कुवैत, सिंगापुर के मंच भी गुलजार कर चुके हैं।

अब रुख ब्रिटानिया का
शायर मंजर भोपाली ने बताया कि जुलाई माह में दो सप्ताह की विदेश यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मन में मुशायरों की महफिल की रौनक बनेंगे।

सुनने वाले अच्छे हो तो सुनाने का मज़ा: मंजर
मंजर भोपाली बताते हैं कि दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली मुशायरा महफिल हैदराबाद, अलीगढ़, कराची के लोगों की मौजूदगी के बिना पूरी भी नहीं होती और निखर भी नहीं पाती। वे कहते हैं सुनाने वाले शायर को अपना कलाम सुनाने का उत्साह तभी आता है, जब सुनने वाले उसी शिद्दत के साथ मौजूद हों। मंजर कहने से नहीं चूकते कि वे बड़े शायर नहीं हैं, लेकिन लोगों ने उन्हें वह मुकाम दे दिया है। डॉ. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, बशीर बद्र या प्रो वसीम बरेलवी की मंचीय गैरमौजूदगी ने उनके लिए जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं, यह मंजर भोपाली का मानना है।

इसी को कहते हैं मक्खन मीडिया…

चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु

मीडिया के लिए लोगों के मन खटास ऐसे ही नहीं भर गई… जब एक नेशनल न्यूज चैनल जेफ्री एपस्टीन जैसे नर पिशाच को संत साबित करने पर आमादा हो जाए, तो यह खटास और गहरी हो जाती है…!
चंद सेकंड का एक वीडियो एक महिला एंकर ने सोशल मीडिया पर अपडेट किया है….! इस महिला को छोटी, मासूम और खिलौनों से खेलने की उम्र की बच्चियों की चीत्कार सुनाई नहीं दी…! उसकी आंखों के सामने दुनिया के वह नामवर लोग भी नहीं लहराए जिन्होंने हैवानियत की हदें पार कर दीं…! उसको दिखा तो एक संत समान हैवान एपस्टीन, जिसने शिक्षा जैसे पवित्र पेशे को भी दागदार कर दिया…! अपनी लालच की पराकाष्ठा ने उसे हर बुरा काम करने से जोड़ दिया…! मासूमों का बचपन छीनने से लेकर उनका मांस खाने तक का दोषी इस महिला एंकर को संत समान लग रहा है…!
गोदी मीडिया, मक्खन मीडिया, झोला मीडिया इसीलिए सचेत किया गया है कि अप्सटीन फाइल्स की आग हमारे देश के चमकते चेहरों को दागदार न कर दे…! झूठ को सच कहना, जोर जोर से कहना, तब तक कहते रहना जब तक सच न मान लिया जाए… की थीम पर लगे लोग जमे हैं और तरक्की की फसल(?) काट रहे हैं…!

पुछल्ला
नई नहीं आई है महंगाई
अंदर हंगामा भरा था। बाहर भी शोर। मसला मंहगाई का। गैस सिलेंडर की कीमत बहुत ज्यादा है। विपक्ष में बैठे हैं, तो कोई मुद्दा तो उछालना पड़ेगा। लेकिन विरोध के स्वरों में इसको भुला दिया गया कि मंहगाई देश में किसी सियासी दल ने आयात नहीं की है, बल्कि यह तब भी अपना सुर सुनाती थी, जब वे सत्ताधीश हुआ करते थे।

17/02/2026

वैश्विक निवेश, पूंजी प्रवाह, व्यावसायिक विस्तार और सामुदायिक उत्थान पर महमंथन

भोपाल। मुंबई में माहेश्वरी इंटरनेशनल बिजनेस फाउंडेशन द्वारा आयोजित “कॉन्क्लेव ऑन फ्यूचर ऑफ इन्वेस्टिंग” का आयोजन किया गया। निवेश, अर्थव्यवस्था और सामुदायिक विकास पर केंद्रित इस कॉन्क्लेव में देश के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों तथा कॉरपोरेट लीडर्स की भागीदारी रही।
कार्यक्रम की शुरुआत एमआईबीएफ के संस्थापक महामंत्री संतोष कुमार लाहोटी के स्वागत संबोधन से हुई। इसके पश्चात एमआईबीएफ के संस्थापक प्रशांत माहेश्वरी ने नव-चयनित एमआईबीएफ के अध्यक्ष व नंदन ग्रोथ फंड के मैनेजिंग पार्टनर दीपक माहेश्वरी का सामुदायिक औद्योगिक जगत से परिचय कराया। इस अवसर पर शोभा सढ़ानी ने सामुदायिक सशक्तिकरण और सामाजिक सहभागिता पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का एक आकर्षण अनन्या बिड़ला द्वारा एमएमयू ब्रांड का शुभारंभ एवं कार्यक्रम स्मारिका का औपचारिक विमोचन रहा। इसके बाद कार्यक्रम के प्रधान वक्ता और भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एसएस मूंदड़ा ने भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक परिदृश्य, वित्तीय प्रणाली की स्थिरता, क्रेडिट इकोसिस्टम, नियामकीय दृष्टिकोण तथा दीर्घकालिक पूंजी आवंटन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कॉन्क्लेव में आयोजित पैनल चर्चाओं ने निवेश के विविध पहलुओं को सामने रखा। पहले पैनल में वैश्विक एवं घरेलू पूंजी प्रवाह और भारत के आगामी निवेश चक्र पर चर्चा हुई।
दूसरी पैनल चर्चा “पब्लिक मार्केट्स रीसेट: इक्विटी, डेट और पोर्टफोलियो निर्माण” विषय पर हुई, जिसका संचालन सौरभ अजमेरा ने किया। इस सत्र में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट चंदन तापड़िया, मिराए एसेट के सीईओ पुनीत कुमार मुंधड़ा तथा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के कार्यकारी निदेशक नीरज तापड़िया ने निवेश रणनीतियों पर सार्थक चर्चा की।
तीसरी पैनल चर्चा में प्राइवेट मार्केट्स पर यथार्थपरक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। इस सत्र में रिटर्न के स्रोत, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक पोर्टफोलियो में प्राइवेट एसेट्स की भूमिका पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ योगदानकर्ताओं एवं समाज के विशिष्ट लीडर्स रामेश्वर लाल काबरा एवं रतनी बाई, वरिष्ठ आईआरएस चंदन पुगलिया, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, आदित्य बिड़ला समूह के केके माहेश्वरी, विश्वंभर नेवर तथा प्रबुद्ध वक्ता भाविका माहेश्वरी का सम्मान किया गया।

हज के दौरान रोक : गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारों पर रहेगी पाबंदी

भोपाल। हज के दौरान आने वाली अचानक आपदाओं से निपटने के लिए सऊदी हज प्रबंधन ने इंतजाम किए हैं। इसके लिए उसने अति बुजुर्ग लोगों पर पहले ही पाबंदी लागू कर दी थी। इससे आगे बढ़कर अब गंभीर बीमारियों से जूझ रहे आवेदकों को हज सफ़र पर आने से रोक दिया गया है। साथ ही गर्भस्थ महिलाओं पर भी यह पाबंदी लागू होगी।
हज 2026 के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने एक ट्रेनिंग प्रोग्राम पिछले दिनों आयोजित किया था। इस दौरान हज आवेदकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी अनिवार्यताओं के बारे में जानकारी दी गई है। इस बारे में विस्तृत नियमावली तैयार की जा रही है, जिसके बारे में जल्दी ही हज आवेदकों को सूचित किया जाएगा।

पूरी तरह हों स्वस्थ
जानकारी में आया है कि भारत से हज सफ़र पर जाने वाले हाजी सबसे ज्यादा उम्रदराज होते हैं। ऐसे में उन हाजियों में कई लोगों को उम्रजनित बीमारियां भी होती हैं। ऐसे में हज के दौरान मौत का आंकड़ा भी भारतीय हाजियों का ही ज्यादा होता है। ऐसे हाजियों को संभालने, देखरेख करने या इलाज अथवा मौत होने पर कफन दफन की जिम्मेदारी भी सऊदी सरकार को उठानी पड़ती है। ऐसे मामलों को चिन्हित कर इन स्थितियों पर रोक लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इन पर लगेगी रोक
गंभीर बीमारी वाले मरीज :
डायलिसिस पर चल रहे किडनी मरीज
हल्की मेहनत में भी तकलीफ वाला हार्ट-फेल्युअर
ऑक्सीजन पर निर्भर फेफड़ों की बीमारी
• गंभीर लीवर सिरोसिस / लीवर फेल्युअर
• गंभीर मानसिक या न्यूरोलॉजिकल बीमारी वाले व्यक्ति
• डिमेंशिया (याददाश्त की बीमारी) से पीड़ित बुजुर्ग

गर्भवती महिलाएँ
गर्भावस्था के आखिरी 3 महीनों में
• या किसी भी समय हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में

संक्रामक बीमारी वाले व्यक्ति
खुली टीबी
• वायरल हैमरेजिक फीवर
• कैंसर मरीज, जो कीमोथेरेपी या इम्यूनिटी कम करने वाला इलाज ले रहे हों

यह करना पड़ेगा
सभी हाजी और हज्जनों को फिर से नया मेडिकल फिटनेस बनाना होगा, जिसकी गाईड लाईन हज कमिटी बहुत जल्द जारी करेगी।

इनका कहना है
हज सफ़र के दौरान किसी भी हानि या उसके परिवार को कोई दिक्कत न हो, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी नियम भी इसीलिए बनाए जा रहे हैं।
रफत वारसी
अध्यक्ष, मप्र राज्य हज कमेटी

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