उमरबन में भ्रष्ट पंचायत सचिवों को सीईओ का वृहदहस्त
खान अशु
भोपाल। एक, दो, पांच नहीं बल्कि पूरा का पूरा घान ही भ्रष्टाचार की कढ़ाई में गोते खाता नजर आ रहा है। इनकी उड़ती पतंग को हवा देने के वह जिम्मेदार बैठे हैं, जिनको इनकी निगरानी के लिए पाबंद किया गया था। मामला धार जिले के उमरबन ब्लॉक का है। यहां पंचायत अधिनियम की सिरे से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। थोकबंद सचिवों ने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया और जिम्मेदार इनका कवच बन गए। सूत्र इसके पीछे अधिकारियों का भी भ्रष्टाचार मामले में बराबर का शरीक होना बताते हैं।
चला ऐसा चक्र
सूत्रों का कहना है कि उमरबन जनपद पंचायत की करीब 61 ग्राम पंचायत के अधिकांश सचिव लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। एक बड़े भ्रष्टाचार में यह साबित भ्रष्टाचारी यह पाए गए। पंचायत अधिनियम की धारा 40 और 92 के मुताबिक इन करीब 22 लोगों का निलंबन होना था, साथ ही इनके वित्तीय अधिकार पर भी पाबंदी लगना थी। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2011 से 2015 के बीच हुए इस मामले को तत्कालीन अधिकारियों ने बेइमानी की बिना पर छिपा दिया। बताया जाता है कि खानापूर्ति की कार्यवाही में इन सभी भ्रष्ट सचिवों को जनपद में ही दूसरी पंचायतों में ट्रांसफर कर दिया गया। साथ ही भ्रष्टाचार गंगा बहती गंगा को बहते रहने के लिए इन सभी को वित्तीय अधिकार भी सौंप दिए गए। नतीजा यह है कि हालात जस के तस बने हुए हैं और पंचायत राज की खिल्ली उड़ाई जा रही है।
नई घोड़ी, नया दाम
उमरबन जनपद पंचायत में नए सीईओ के रूप में रोहित पचौरी नाम अधिकारी पदस्थ हो गए हैं। तमाम पिछले कारनामों से वाकिफ पचौरी ने सभी सचिवों को काली कमाई का खुला ऑफर दे दिया है।
नपेंगे पचौरी भी
जानकारों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था के तहत पदभार संभालते ही वर्तमान अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी उस मामले की रिपोर्टिंग और जांच में सहयोग करना होती है। यदि वर्तमान अधिकारी को अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में हुए घोटालों या वित्तीय अनियमितताओं का पता चलता है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन 2018 के तहत उनका कर्तव्य बनता है कि वे इसकी लिखित रिपोर्ट तुरंत अपने उच्च अधिकारियों, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) या राज्य सतर्कता आयोग/एसीबी को दें। लेकिन सूत्र बताते हैं कि पिछले कार्यकाल में हुए घोटालेबाजी को पचौरी ने न तो उच्च अधिकारियों को सूचित किया, और न ही भ्रष्ट सचिवों के खिलाफ कोई एक्शन लिया।नियमानुसार उन्हें जांच एजेंसियों को इस बारे में सूचित करना था। साथ ही सरकारी नियमावली के अनुसार, वर्तमान अधिकारी को घोटाले वाले प्रोजेक्ट्स का विशेष ऑडिट करवाने की सिफारिश भी करना थी। बताया जा रहा है कि वर्तमान सीईओ पचौरी पर घोटाले को जानबूझकर छुपाने, साक्ष्य नष्ट करने, और अपने पूर्ववर्ती को बचाने की कार्यवाही ही सकती है। जिसके लिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत षड्यंत्रकर्ता या सबूत नष्ट करने का दोषी मानकर कार्यवाही की जा सकती है।
