जनहित के कार्यों में शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं अधिकारी पूरी मुस्तैदी से करें अपने दायित्वों का निर्वहन – कलेक्टर प्रियंक मिश्रा

स्कूल या आंगनवाड़ी भवन जर्जर जीर्ण-क्षीण अवस्था में हैं, उन्हें अविलंब खाली कराया जाए

जीतेन्द्र सेन

भोपाल। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा (टीएल) पत्रों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न विभागों के शासकीय कार्यों की सघन समीक्षा करते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतर्विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में किसी भी स्तर पर उदासीनता अथवा शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी और सभी अधिकारी लोकहित के कार्यों में पूरी संवेदनशीलता के साथ सक्रिय रहें।आगामी विधानसभा सत्र के दृष्टिगत कलेक्टर मिश्रा ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि विधानसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर पूर्णतः सटीक, तथ्यात्मक और समय-सीमा के भीतर प्रेषित किए जाएं, इसमें किसी भी प्रकार का विलंब क्षम्य नहीं होगा।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करते हुए उन्होंने कहा कि मानसून एवं अन्य आपात स्थितियों के मद्देनजर सभी विभाग आपस में जीवंत समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करें। किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में आपदा प्रबंधन का रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम होना चाहिए और पूर्व निर्धारित सभी सुरक्षात्मक कार्यों का निरंतर फॉलो-अप लिया जाए। जल गंगा संवर्धन अभियान की चर्चा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान के समापन अवसर पर सभी विभाग गरिमामयी कार्यक्रमों का आयोजन कर उल्लेखनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रदर्शित करें तथा इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। *राजस्व कार्यों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने पटवारियों को ‘फॉर्मर रजिस्ट्री’ के कार्य को गति देने के लिए साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने के निर्देश दिए और सचेत किया कि इस कार्य में अपेक्षित प्रगति न लाने वाले संबंधितों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।* इसके साथ ही, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। कृषि विभाग को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि वे जिले में उर्वरकों का वितरण अनिवार्य रूप से ‘ई-विकास पोर्टल’ के माध्यम से ही संपादित करें, जिससे संपूर्ण वितरण व्यवस्था पारदर्शी, नियंत्रित और सुगम बनी रहे। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों को उनके मूल प्रशासनिक दायित्वों का स्मरण कराते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र के ‘इंसीडेंट कमांडर’ हैं, अतः वे अपनी सभी प्राथमिक जिम्मेदारियों के प्रति अत्यंत सजग रहें। उन्होंने निर्देश दिए कि क्षेत्र के जो भी स्कूल या आंगनवाड़ी भवन जीर्ण-क्षीण या जर्जर अवस्था में हैं, उन्हें अविलंब खाली कराया जाए जिससे बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने स्थानीय जनसमस्याओं के समाधान हेतु जनप्रतिनिधियों से सतत् समन्वय बनाए रखने तथा क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति के निर्मित होने पर तत्काल धरातल पर मोर्चा संभालते हुए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर मिश्रा ने नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में छात्र नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि करने तथा ड्रॉप-आउट बच्चों की सटीक ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर ऐसे बच्चों को सूचीबद्ध किया जाए जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जिससे उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। अधिकारी स्वयं मैदानी क्षेत्रों का दौरा कर बच्चों की ‘अपार आईडी’ बनवाना सुनिश्चित करें और केवल अधीनस्थों की बातों पर निर्भर न रहकर स्वयं स्थलीय निरीक्षण द्वारा समस्याओं का व्यावहारिक निराकरण करें। इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सह-स्थित आंगनवाड़ियों को’ स्कूलों में स्थानांतरित करने हेतु तत्काल सर्वे कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए।स्वास्थ्य विभाग के कार्यों को गति देने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वे एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की शत-प्रतिशत डाटा प्रविष्टि सुनिश्चित करें तथा ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ वाली महिलाओं का सघन फॉलो-अप लेते हुए जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में सकारात्मक सुधार लाएं। दवाओं की गुणवत्ता और वैधता को परखने के लिए उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर और फूड सेफ्टी ऑफिसर के साथ मिलकर जिले की मेडिकल दुकानों का संयुक्त रूप से सघन निरीक्षण करने के निर्देश दिए, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में शुचिता बनी रहे।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के सुचारू संचालन पर बल देते हुए कहा कि जिन योजनाओं में जल स्रोत या पाइपलाइन की तकनीकी समस्या है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि नागरिकों को सुगमता से पेयजल उपलब्ध हो सके। अंत में, श्रम विभाग को ‘प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान-धन योजना’ के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों का पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विभाग को एक विस्तृत और समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर मिशन मोड में कार्य करने के लिए कहा, जिससे इस कल्याणकारी योजना का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े हितग्राहियों तक सुगमता से पहुंच सके।

कलाकार भी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद गंभीर : शिवराज

मंच कलाकार अदनान खान ने पूर्व मुख्यमंत्री के अभियान में दिया योगदान

भोपाल। पर्यावरण संरक्षण और इसके विकास एवं विस्तार के लिए लगातार काम जारी रहना चाहिए। हर इंसान की इसके लिए ज़िम्मेदारी है। रंगमंच से लेकर सुनहरी पर्दे तक से बेहतर समाज और उज्ज्वल भविष्य के लिए संदेश देने वाले कलाकार भी इस दिशा में अपनी कोशिशें जारी रखे हुए हैं। उम्मीद की जाना चाहिए कि हर मामले में इनको फालो करने वाले इनके लाखों फॉलोअर्स इस भलाई की दिशा को भी चुनेंगे।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पर्यावरण को लेकर किए जाने वाले हरदिन पौधारोपण में रविवार को रंगमंच के वरिष्ठ कलाकार अदनान खान ने हिस्सा लिया। उन्होंने राजधानी भोपाल में शिवराज के साथ पौधा लगाया और इसको फलने फूलने में और सतत देखभाल का भी संकल्प लिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज ने अदनान का स्वागत किया। उन्होंने अदनान के इस सहयोग का धन्यवाद भी किया।

5 साल का अभियान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पौधारोपण की शुरुआत 19 फरवरी 2021 को अमरकंटक से हुई थी। इसके तहत वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं और आम जनता से भी अपने जन्मदिन या वर्षगांठ जैसे विशेष अवसरों पर पेड़ लगाने की अपील करते हैं।

शिवराज का प्रयास

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अभियान को अधिक विकसित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे अधिक से अधिक नागरिक इस पहल से जुड़ सकें। उन्होंने संतों, मनीषियों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरणविदों से भी अपने प्रवचनों और अभियानों के माध्यम से पौधारोपण के लिए जन-जन को प्रेरित करने का आह्वान किया।

‘ज्ञान’ से ‘ज्ञानी’ तक… मप्र बजट में गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के साथ इंडस्ट्री पर भी जोर…!

खान आशु
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ज्ञान’ (GYAN) का लक्ष्य लेकर समग्र समाज के विकास, विस्तार और बेहतरी की बात रखी थी। इसी ‘ज्ञान’ (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) को केंद्र में रखकर विकास योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। मप्र भी इसी गति पर कदमताल कर रहा है। बुधवार को पेश किए गए बजट में इस ‘ज्ञान’ को ‘ज्ञानी’ तक विस्तार दिया गया है। ‘ज्ञान’ के गर्भ में छिपे चारों वर्गों के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को भी इस बजट में तरजीह दी गई है।
बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए 4 लाख, 38 हजार, 317 करोड़ रुपए के बजट में जहां मूलभूत सुविधाओं को जगह दी गई है, वहीं विकास के लिए आवश्यक क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सेवाओं को इस बजट से राहत है तो नारी सशक्तिकरण के विभिन्न आयाम भी छूने की कोशिश की गई है। मजदूर और बेरोजगार भी खुद को इस बजट बारिश में तर पा रहे हैं।

ज्ञान सूत्र
प्रस्तुत हुए प्रदेश के बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान सूत्र गरीब के कल्याण की उन योजनाओं के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं, जो उसके लिए इस श्रेणी से बाहर निकलकर जीने की राह देते हैं। सस्ता अनाज, रियायती घरेलू गैस, पक्के मकान जैसी सुविधाओं का इसमें समावेश है। देश के युवा के शिक्षा, उच्च शिक्षा से लेकर स्पोर्ट्स गतिविधियों को इस बजट में शामिल किया गया है। साथ ही कृषिप्रधान इस देश को गति देने वाले किसान भी इस बजट में कई तरह से लाभांवित होते नजर आ रहे हैं। सिंचाई के माकूल प्रबंध, सौर ऊर्जा के जरिए बिजली खर्च की बचत, उन्नत खाद और बीज एवं बिक्री का उचित दाम उन्हें मिलेगा, ऐसी व्यवस्था यहां कर दी गई है। यह बजट नारी सशक्तिकरण के विभिन्न आयाम भी छूने जैसा है, जिसमें महिलाओं को राहत देने वाला बहुत कुछ शामिल किया गया है।

और ऐसे हुआ ज्ञानी
मप्र सरकार ने अपनी ज्ञान सूत्र प्रतिबद्धता में इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को भी शामिल कर लिया है। अब तक किए जा रहे प्रयासों को विस्तार देते हुए अब प्रदेश में तेजी से फैल रहे उद्योग को और अधिक प्रभावी बनाने के जतन इस बजट व्यवस्था से हो रहे हैं। विभिन्न स्तर पर किए गए निवेश प्रयासों को मूर्त रूप देने के लिए ज्ञान सूत्र की ज्ञानी तक ले जाने की कोशिश की गई है।

क्या कहते हैं मुखिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बजट पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के संकल्प के साथ आज मध्यप्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के ज्ञान (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) के संकल्प में हमारी सरकार ने आई भी जोड़ा है। वर्ष 2026-27 का बजट ज्ञानी (GYA NII) के मार्गदर्शी सिद्धांत पर है। सीएम मोहन ने कहा कि इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर दो दिखते हैं। यह देश का पहला बजट है, जो रोलिंग बजट है। इस बजट के जरिए अगले दो साल के डेवलपमेंट का ब्लूप्रिंट खींचा जाएगा। अमृतकाल 2047 के लिए डेवलपमेंट का पैमाना बनाया गया है।

ली सुशासन की शपथ, अटल जी के आदर्शो पर चलने का संकल्प

भोपाल। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित सुशासन के उच्चतम मापदण्डों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए उनके जन्म दिवस 25 दिसम्बर 2025 के एक दिन पूर्व 24 दिसम्बर 2025 को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल के पुरालेख अधिकारी पदम सिंह मीणा द्वारा समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को सुशासन की शपथ दिलाई गई।

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद का विस्तार जारी, आचार्य उपाध्यक्ष और मनीष राठौर महासचिव मनोनीत

प्रदेश में लगातार विस्तार से मिल रहा संगठन को बल, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताई प्रसन्नता

भोपाल। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद रजि० का मध्यप्रदेश में निरंतर विस्तार हो रहा है। संगठन विस्तार के इस क्रम में चर्चित चेहरे संगठन से जुड़ रहे हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद द्वारा सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप कई जिलों के सक्रिय पत्रकार संगठन से जुड़ चुके हैं। वहीं प्रदेश कार्यसमिति में भी ऐसे सशक्त पत्रकार जुड़ रहे हैं जो प्रदेश में खासी साख रखते हैं। प्रदेश अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने बताया कि अभियानी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले दैनिक प्राइम संदेश समाचार पत्र के संपादक मनीष राठौर को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया है। मनीष राठौर अपनी खोजी खबरों से कई बार पत्रकारिता का लोहा मनवा चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष अमित द्विवेदी के अनुसार प्रदेश के कई विभागों की अंदरूनी नब्ज़ को जानने वाले दैनिक खुलासा जगत अखबार के संपादक सुरेश श्रीवास “आचार्य” भी प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में संगठन से जुड़े हैं। ज्ञात हो कि आचार्य लगातार मुखरता से सरकार को आईना दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखते। मनीष राठौर और सुरेश श्रीवास “आचार्य” को दायित्व मिलने पर उनसे जुड़े हुए आंचलिक पत्रकारों में जबरदस्त हर्ष का माहौल है। इसके साथ ही राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा बधाईयां प्रेषित की जा रही हैं।

सुरेश श्रीवास “आचार्य”

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दी बधाई, जताई खुशी
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र मिश्रा ने प्रदेश उपाध्यक्ष तथा महासचिव नियुक्त होने पर सुरेश श्रीवास आचार्य व मनीष राठौर को बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चर्चित पत्रकारों के प्रदेश कार्यकारिणी में जुड़ने से संगठन विस्तार को और अधिक गति मिलेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र मिश्रा ने राष्ट्रीय कमेटी की ओर से शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अमित द्विवेदी के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मप्र में अमित द्विवेदी के नेतृत्व में संगठन द्रुत गति से विस्तार कर रहा है, नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होते ही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने हेतु हर स्तर पर कार्य किया जाएगा।

मनीष राठौर

पत्रकार हितों की रक्षा के संकल्प के साथ जताया आभार
नवनियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश श्रीवास आचार्य और महासचिव मनीष राठौर ने संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में पत्रकारों के हित की हर लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय तथा प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार ज्ञापित किया।

दुनिया में अमन हो, सबकी भलाई के फैसले हों, हर शख्स रहे खुशहाल…

देश, दुनिया, प्रदेश की तरक्की की दुआओं के साथ इज़्तिमा का समापन

आखिरी दिन उठे दुआ के लिए लाखों हाथ
• अल्लाह के रास्ते निकलीं सैकड़ों जमातें
• फटाफट कचरा सफाचट, खटाखट यातायात भी क्लियर

इज़्तिमागाह से खान आशु
ए अल्लाह, हम गुनाहगार हैं, खतावार हैं, तेरे हुक्म से गाफिल हैं, तेरी राह से भटके हुए हैं, तेरे नाफरमान हैं… लेकिन जो हैं, जैसे हैं तेरे बंदे हैं, तेरी किताब के कायल हैं, तेरे पैगंबर की सीरत को मानने वाले हैं….! ए अल्लाह हम सभी पर रहम फरमा दे….!
पिछले तीन दिनों से ईंटखेड़ी में चल रहे 78वें आलमी तबलीगी इज्तिमा का समापन सोमवार सुबह इन दुआओं के साथ हुआ। मौलाना सआद कांधालवी साहब ने यह दुआ कराई। दुआ ए खास के दौरान मौलाना ने पहले अरबी में दुआ की। इसके बाद मौजूद मजमे को जोड़ते हुए उर्दू में भी दुआओं का निजाम चला।
आयोजन स्थल से लेकर तीन किमी तक सड़क खेत और घरों में बैठे लोगों ने आमीन कहा। दुआ ए खास में शिरकत के लिए बड़ी तादाद में लोगों ने रात से ही इज्तिमागाह पहुंचना शुरू कर दिया था। कुछ लोगों ने अल सुबह इज्तिमागाह का रुख किया। सुबह से दुआ के लिए दौड़ ने शहर की अधिकांश सड़कों को वाहनों से भर दिया। हर शख्स इस मजमा ए खास में शामिल होने के लिए उतावला दिखाई दे रहा था। जिस दौरान मौलाना सआद साहब दुआ कर रहे थे, सारा मजमा पिन ड्रॉप साइलेंट की मुद्रा में दिखाई दे रहा था। दूर दूर तक सिर्फ मौलाना की आवाज गूंज रही थी और बीच बीच में लोगों की आमीन की आवाज़ें इसमें शामिल हो रही थीं।

तय वक्त पर हुई दुआ
आलमी तबलीगी इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को सुबह 10.30 बजे दुआ ए खास होने का ऐलान किया गया था। इस लिहाज से लोगों का इज्तिमागाह पहुंचने का सिलसिला भी अल सुबह से शुरू हो गया था।  मौलाना सआद साहब ने अपना बयान पूरा करने के बाद दुआ ए खास की शुरुआत की। मजमे में मौजूद करीब 13 लाख से भी ज्यादा लोगों दुआ के साथ आमीन की सदाएं गुंजायमान की। खामोशी के दुआ ए खास और आमीन का सिलसिला करीब 30 मिनट तक जारी रहा। सुबह करीब 10.24 बजे शुरू हुई दुआ करीब 10.54 बजे तक चला। दुआ पूरी होने के बाद भोपाल मरकज के इकबाल हफीज ने जमातियों को वापसी का शेड्यूल समझाया।

शुरू हुआ रवानगी का सिलसिला
दुआ के बाद लोगों की रवानगी का सिलसिला शुरू हो गया। यहां से कुछ लोग अपने घरों को लौटे तो कुछ दीन सीखने के मकसद से चार माह और चालीस दिन की जमातों में निकले। 14 नवंबर को हुई  शुरूआत के बाद सोमवार को इस मजहबी समागम का समापन हुआ। जिसमें करीब 13 लाख लोगों ने शिरकत की।

71 पार्किंग में वाहन, ट्रैफिक इंतजाम में हजारों लोग
चार दिन के आलमी तब्लीगी इज्तिमा में 13 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। हजारों वाहन थे। इज्तिमा स्थल ईटखेड़ी पहुंचने के रास्ते भी सीमित। बावजूद इसके न तो कहीं जाम लगा और न ही कहीं यातायात रुका। इन इंतजामों में लगे पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों के साथ हजारों वॉलेन्टियर्स की कई दिनों की मेहनत के चलते ये आसान हो पाया। इज्तिमा के समापन के बाद रास्तेभर वॉलेन्टियर्स ने यातायात इंतजाम संभाले रखा। गोलखेड़ी से होकर कई गांवों को लांघते हुए अचारपुरा बायपास तक आने वाले मार्ग की व्यवस्था हिन्दू भाइयों ने संभाल रखी थी। इनमें एक पूर्व सरपंच भी शामिल थे।

चला तकरीरों का दौर
चार दिन के इस आयोजन में देशभर से उलेमाओं की तकरीर हुई। सोमवार सुबह फजिर की नमाज के बाद की तकरीर में फिर से उन बातों को दोहराया गया। सुबह फजिर की नमाज के बाद बयान किया गया। इनके बाद तबलीग की मुख्य 6 बातों की तालीम दी गई। दुआ ए खास से पहले मौलाना सआद साहब ने जमात में निकलने वालों को खास ताकीद देते हुए बयान किया। चार दिन चलीं इन मजलिसों में उलेमा बोले अल्लाह की मर्जी के बिना कोई काम नहीं होता। ये अकीदा तोड़ने से खराब हालात होंगे। नेक राह जो बताई गई है, उस पर चलने वाले बनो तो तुम्हारी हर परेशानी खत्म हो जाएगी। आपसी रिश्ते बेहतर रखने और सबके काम आने की हिदायत भी मजमे को दी गई।

सबका शुक्रिया, सबका आभार
आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान सहयोग करने वाले सभी लोगों और संस्थाओं का इज्तिमा इंतेजामिया कमेटी ने आभार जताया। जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, पीएचई, विद्युत विभाग, रेलवे, स्वास्थ्य विभाग के सभी जमीनी कर्मचारियों व आला अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया।

झलकियां
• आलमी तबलीगी इज्तिमा के पूरा होने पर होने वाली दुआ ए खास में शामिल होने लोगों ने अल सुबह से दौड़ लगा दी थी।
आमतौर पर ईद और बकरीद पर इतनी सुबह साफ सुथरे कपड़े, खुशबू लगाए और सिर पर टोपी सजाए मुस्लिम धर्मावलंबी सड़कों पर दिखाई देते हैं।
• आलमी तबलीगी इज्तिमा इस कड़ी का तीसरा आयोजन कहा जा सकता है।
• इज्तिमागाह के आसपास स्थित खानपान दुकानों में नारायण नाश्ता हाउस और सहाय फूड कॉर्नर पर भी ग्राहकों की खासी भीड़ दिखाई दी।
• इज्तिमा परिसर में अनिल केतली में चाय लिए घूम घूम कर लोगों की खिदमत कर रहा था। जबकि सुरेश ने यहां मीठे लच्छे बेचता दिखा।
• वापसी सफर के दौरान लोगों ने सड़क किनारे अस्थाई दुकानों से किसानों द्वारा बेची जा रही अमरूद, मूली, संतरे, मैथी आदि की जमकर खरीदी की।
• दुआ ए खास के बाद पहले पैदल मुसाफिरों को निकाला गया। उसके बाद दो पहिया वाहन, फिर चार पहिया निकाले गए। बड़े माल वाहकों को सबसे आखिर में।
• वापसी के समय लोगों का हुजूम इज़्तिमागाह से बायपास, गांधी नगर, करोंद और काजी कैंप के अलावा bmhrc और मंडी होते हुए छोला की तरफ रहा।
• इज़्तिमागाह आने जाने वाले मार्ग पर हर तरफ टोपियां ही टोपियां दिखाई दे रही थीं।

सभी पात्र हितग्राहियों को मिले योजनाओं का लाभ-कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह

कलेक्टर ने ग्राम भानपुर केकड़िया में शिविर का किया निरीक्षण एक बगिया मां के नाम” योजना में आम के पौधे का किया रोपण


जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। कलेक्टर  कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने ग्राम भानपुर केकड़िया के ग्राम पंचायत भवन में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत आयोजित शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए तथा निरंतर हितग्राहियों के लिए शिविरों का आयोजन कर योजनाओं का लाभ सुलभ तरीके से उपलब्ध कराया जाए।
इसके पश्चात कलेक्टर  सिंह ने साईं बाबा समूह की हितग्राही श्रीमती मंजू बाई पति सूरज सिंह के “एक बगिया मां के नाम” योजना में आम के पौधे का रोपण किया। हितग्राही श्रीमती मंजू बाई को ₹2.79 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत हितग्राही द्वारा आम के 100 पौधे रोपित किए जाएंगे।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत भोपाल जिले के एकमात्र ग्राम भानपुर केकड़िया में 17 विभागों की 25 अधोसंरचना एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाना है। इस अभियान के अंतर्गत ग्राम चयन हेतु 500 या उससे अधिक जनसंख्या तथा 50 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या होना अनिवार्य है। ग्राम भानपुर केकड़िया की कुल जनसंख्या 2120 है, जिसमें से 1119 जनसंख्या जनजाति वर्ग की है।

बढ़ी संख्या, बदली जगह, बात अब भी वही… इज्तिमा में होगी 6 बातों पर चर्चा

भोपाल। महज 13 लोगों से शुरुआत… अब इतने ही लाख लोगों की भागीदारी। मस्जिद शकूर खां से हुई शुरुआत, ताजुल मसाजिद होते हुए अब ईंटखेड़ी पहुंच गई। लाखों लोगों की मौजूदगी से अब सैकड़ों एकड़ जगह भी कम पड़ने लगी है। करीब 78 साल से चल रही आलमी तब्लीगी इज्तिमा की 6 बिंदुओं पर होने वाली बात आज भी बरकरार है। यहां आज भी दुनियादारी, समाज में फैली बुराइयों या सियासी बातों के कोई जगह नहीं है। यहां बात सिर्फ जमीन के नीचे की या आसमान के ऊपर की जाती है।
आलमी तब्लीगी इज्तिमा का यह 78वा साल होगा। 14 नवंबर से शुरू होने वाले इस रूहानी समागम का समापन 17 नवंबर को दुआ ए खास के साथ होगा। इतनी सदियों के इस इतिहास में कुछ बदला है तो महज कार्यक्रम की अवधि में इजाफा हुआ है। पहले यह कार्यक्रम 3 दिवसीय हुआ करता था, जिसे बढ़ाकर 4 दिन कर दिया गया है। शुरुआत में मस्जिद शकूर खां में महज 13 लोगों के जोड़ के साथ यह धार्मिक आयोजन परम्परा में आया था, जो अब बढ़कर करीब 13 लाख लोगों की मौजूदगी पर पहुंच गया है।

बदलती रही जगह
वर्ष 1947 में आलमी तब्लीगी इज्तिमा की शुरुआत मस्जिद शकूर खां से हुई थी। इसके अगले ही साल यह आयोजन ताजुल मसाजिद में शिफ्ट कर दिया गया। वर्ष 2003 तक चलने वाले इस निजाम में ताजुल मसाजिद के आसपास का सारा इलाका जमातीयो से पैक हो जाता था। मस्जिद के अलावा आसपास का बाजार, घर और सड़कें भर जाया करती थीं। जिससे होने  वाली परेशानियों को देखते हुए आलमी तब्लीगी इज्तिमा की जगह बदलकर ईंटखेड़ी कर दी गई है। वर्ष 2003 से अब तक यह समागम इसी स्थान पर हो रहा है। जमातियो की हर साल बढ़ती तादाद के कारण यह सैंकड़ों एकड़ जमीन भी कम पड़ने लगी है।

बात जमीन से नीचे की, या आसमान से ऊपर की
चार दिन के इज्तिमा के दौरान नमाज, जिक्र, तस्बीह और सामूहिक चर्चाओं का दौर चलता है। इस दौरान उलेमा तबलीग की 6 बातों को केंद्र में रखकर बात की जाती है। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर यहां बात नहीं की जाती है।

तब्लीग के छह नंबर (छह सिद्धांत)
कलिमा: “ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह” (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं)।
सलाह: पाँचों वक्त की नमाज़ पढ़ना।
इल्म-ओ-ज़िक्र: अल्लाह का ज्ञान और उसका स्मरण करना।
इकराम-ए-मुस्लिम: सभी मुसलमानों के साथ सम्मान और भाईचारे से पेश आना।
इखलास-ए-नीयत: हर काम को पूरी ईमानदारी और अल्लाह के लिए करना।
दावत-ओ-तबलीग: लोगों को अल्लाह की ओर दावत देना और तब्लीग़ में समय निकालना।

क्या होगा खास
तारीख : 14 से 17 नवंबर
निकाह : पहले दिन 14 को
जमाती : करीब 13 लाख
तैयारी में लगे : PWD, PHE, नगर निगम, बिजली विभाग, पुलिस और अन्य
मदद कर रहे: वालेंटियर
बड़ा टास्क : यातायात नियंत्रण
व्यवस्थाएं : स्वास्थ्य, फायर ब्रिगेड, खानपान, टेलीफोन, रेलवे, किताबें आदि।

सीएम दरबार में पहुंचा खसरा नंबर 78 का मामला 

आदेश के बाद नगर निगम रोके बैठा है तोड़ने की कार्यवाही

भोपाल। राजधानी भोपाल के वीआईपी मूवमेंट वाले वीआईपी रोड की विवादित खसरा नंबर 78 की भूमि का मामला अब सीएम दरबार में पहुंच गया है। इस जमीन पर बने मकान को अदालत के आदेश के भी न गिराने की बात भी सीएम की जानकारी में लाई गई है। यहां हुए निर्माण में हिबनामा, निगम अनुज्ञा, इसके खरीद बिक्री और नामांतरण मामले में किए गए भ्रष्टाचार का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
सीएम हेल्पलाइन प्लेटफॉर्म पर यह शिकायत दर्ज कराई गई है। इसमें नगर निगम, नजूल और अन्य विभागों की गलतियां, कमियां और कोताही बताते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव से मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा गया है।
शिकायतकर्ता ने बताया है कि वीआईपी रोड पर स्थित खसरा नंबर 78 पर अव्यवस्थाओं का साम्राज्य छाया हुआ है। जिसके चलते यहां कई बड़े निर्माण ने आकार ले लिया है। इनमें रहवासी मकान, होटल, शादी हाल, कवर्ड कैंपस आदि शामिल हैं।

हुए थे तोड़ने के आदेश
शत्रु संपत्ति में शामिल का स्थान पर एक प्लॉट पर बड़ी कोठी खड़ी कर ली गई है। फर्जी हिबानामे और बिना नगर निगम अनुज्ञा के किए गए इस निर्माण की खरीदी बिक्री भी कर दी गई है। साजिश के तहत एक महिला ने अपने बेटे के नाम ही बिक्री सौदा लिख दिया है। भ्रष्टाचार में लिपटी कार्यवाही के दौरान इसके नामांतरण की कार्यवाही भी पूरी कर ली गई है। इस संपत्ति को लेकर कई अदालती मामले प्रचलन में हैं, लेकिन न्यायालय के आदेशों की अवहेलना भी इस दौरान की गई है।

कमियां, गलतियां, कोताही
कहां : खसरा नंबर 78
हिबानामा: अनधिकृत व्यक्ति
भवन अनुज्ञा : नहीं हुई
नामांतरण : नियम विरुद्ध
अवहेलना : अदालत ने तोड़ने के आदेश दिए थे, नगर निगम ने आदेश दबा दिया है।

अब आगे क्या
सीएम डॉ. मोहन यादव ने पूरे प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ छेड़ रखा है। गत दिनों ऐसे कई निर्माण पर बुलडोजर चला है। शिकायत होने के बाद खसरा नंबर 78 पर भी कार्यवाही की उम्मीद की जा रही है। कहा जा रहा है कि अवैध रूप से हुए निर्माण और इससे जुड़े सभी विभागों तथा अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है।

दवा कंपनियों की लापरवाही उस पर भारी अज्ञानता

पड़ताल : क्योंकि, सच जानना जरूरी है

राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। मामले के तूल पकड़ते ही अब सरकार और दवा कंपनी कटघरे में आ गई है।
हालांकि, दवा ही ज़हर बन गई, यह बात इतनी आसानी से गले नहीं उतर रही, लिहाजा इस मामले की पड़ताल जरूरी थी ताकि सच के करीब पहुंचा जा सके। जो हमने जाना-समझा उसकी चर्चा से पहले हम दवा कंपनियों की लापरवाही पर आते हैं। कफ सिरप ही क्यों?, ऐसी कोई भी दवा जो गुणवत्ताहीन है, दूषित है या एक्सपायरी है वह मार्केट तक पहुंची कैसे? जाहिर है सरकारीतंत्र से मिलीभगत और कालाबाजारी ने ऐसी दवाओं को बाज़ार तक पहुंचाया जो बच्चों की मौत का कारण बनीं। यहां इस बात का जिक्र करना भी लाजिमी है कि ज्यादातर मामलों में ऐसा देखा और पाया गया है कि, गिफ्ट, कमीशन और नगद उपहार के लालच में आकर कतिपय डॉक्टर्स दवा कंपनियों के ऑफर को स्वीकार कर ऐसी दवाएं लिख देते हैं, जो जरूरी नहीं होतीं।

दवाओं में एडवाइजरी क्यों नहीं?
अब दूसरा पहलू यह भी है कि, 2 साल और पांच साल के बच्चों को दवा पिलाने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो एडवाइजरी इस घटना के बाद जारी की है, वह पहले से दवा कंपनियों के लिए जरूरी क्यों नहीं की गई। अगर दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं पिलाना चाहिए तो यह बात कफ सिरप की बोतल में लिखी होनी चाहिए थी।( कम से कम उस डॉ को तो यह बात पता होनी चाहिए थी, जिसने दवा लिखी।) अब इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है? सवाल यह भी है कि महज डॉक्टर पर कार्यवाही कर इस संगीन अपराध से सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती, संबंधित दवा कंपनी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। यह दर्शाता है कि सरकार और दवा कंपनी के बीच “कुछ” तो है। खैर, “कुछ” हो ना हो आम जनमानस में यही भाव जागेगा।

अज्ञानता भी एक बड़ी वजह
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया तहसील में कफ सिरप पीने से जिन बच्चों की मौत हुई, हमारी पड़ताल में व्यक्तिगत तौर पर की गई लापरवाही भी सामने आई है। ( मैं यहां यह स्पष्ट कर दूं कि इस पड़ताल से सरकार और दवा कंपनी की घोर लापरवाही पर पर्दा डालने का कतई मकसद नहीं है।) “व्यक्तिगत लापरवाही” को हम यूं समझें कि, जागरूकता की कमी या ना समझी। कमोवेश यह घटनाएं जहां जहां हुईं, वहां दवा देने की टाइमिंग और डोज को लेकर अज्ञानता भी देखी गई। 2 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को कितनी मात्रा में और कब कब दवा पिलानी है यह जानकारी भी पेरेंट्स को होनी चाहिए। कई बार ज्यादा खांसी चलने पर घबराहट में माता-पिता बच्चों को दवा की ओवरडोज दे देते हैं ताकि वे जल्दी ठीक हो जाएं ,लेकिन ऐसा करना जानलेवा होता है। हमारी पड़ताल में यह बात भी निकल कर सामने आई है। (लेकिन हम इसी को एकमात्र कारण मान लें यह भी जरूरी नहीं।) दरअसल कफ सिरप किडनी और हार्ट को प्रभावित करता है और यदि यह ओवरडोज बच्चों को दे दी जाए तो यह कितना घातक हो सकता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसीलिए बच्चों को डॉक्टर की निगरानी में ही दवाएं देनी चाहिए।
पड़ताल का दूसरा पहलू यह भी गौर करने लायक है कि, बीमार बच्चों के मामले में कफ सिरप के साथ-साथ दूसरी अन्य मेडिसिन भी दी गईं, (बुखार और सर्दी जुकाम से संबंधित) जिसका नॉलेज भी पेरेंट्स को होना चाहिए। यह पता होना चाहिए कि दवाओं का मिश्रित रूप स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।
बहरहाल, दूषित दवा, अज्ञानता या व्यक्तिगत लापरवाही हम किसी निष्कर्ष या नतीजे पर नहीं पहुंच सकते। बच्चों की मौत का मामला बेहद दुखद, मार्मिक और संगीन है, इसकी पूरी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए और ऐसी दवाओं पर भी रोक लगनी चाहिए ताकि भविष्य में और जिंदगियां मौत के मुंह में जाने से बच जाएं।
(लेखक जितेंद्र सूर्यवंशी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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