इसी को कहते हैं मक्खन मीडिया…

चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु

मीडिया के लिए लोगों के मन खटास ऐसे ही नहीं भर गई… जब एक नेशनल न्यूज चैनल जेफ्री एपस्टीन जैसे नर पिशाच को संत साबित करने पर आमादा हो जाए, तो यह खटास और गहरी हो जाती है…!
चंद सेकंड का एक वीडियो एक महिला एंकर ने सोशल मीडिया पर अपडेट किया है….! इस महिला को छोटी, मासूम और खिलौनों से खेलने की उम्र की बच्चियों की चीत्कार सुनाई नहीं दी…! उसकी आंखों के सामने दुनिया के वह नामवर लोग भी नहीं लहराए जिन्होंने हैवानियत की हदें पार कर दीं…! उसको दिखा तो एक संत समान हैवान एपस्टीन, जिसने शिक्षा जैसे पवित्र पेशे को भी दागदार कर दिया…! अपनी लालच की पराकाष्ठा ने उसे हर बुरा काम करने से जोड़ दिया…! मासूमों का बचपन छीनने से लेकर उनका मांस खाने तक का दोषी इस महिला एंकर को संत समान लग रहा है…!
गोदी मीडिया, मक्खन मीडिया, झोला मीडिया इसीलिए सचेत किया गया है कि अप्सटीन फाइल्स की आग हमारे देश के चमकते चेहरों को दागदार न कर दे…! झूठ को सच कहना, जोर जोर से कहना, तब तक कहते रहना जब तक सच न मान लिया जाए… की थीम पर लगे लोग जमे हैं और तरक्की की फसल(?) काट रहे हैं…!

पुछल्ला
नई नहीं आई है महंगाई
अंदर हंगामा भरा था। बाहर भी शोर। मसला मंहगाई का। गैस सिलेंडर की कीमत बहुत ज्यादा है। विपक्ष में बैठे हैं, तो कोई मुद्दा तो उछालना पड़ेगा। लेकिन विरोध के स्वरों में इसको भुला दिया गया कि मंहगाई देश में किसी सियासी दल ने आयात नहीं की है, बल्कि यह तब भी अपना सुर सुनाती थी, जब वे सत्ताधीश हुआ करते थे।

17/02/2026

ज़िंदगी की डोर पर भारी पड़ रहा जानलेवा मांझा, मौत का जिम्मा किसके सर…?

पटियेबाजी

बड़ा सवाल, और कितनी जिंदगियों को लीलेगी प्रशासनिक नाकामी…?

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

बेशक वो घर को चलाने वाला ही रहा होगा तभी “इतवार” को भी काम खोजने निकल पड़ा… वरना किसी निकम्मे और बेशर्म सरकारी करिंदे की तरह “संडे” की मौज काट रहा होता… कहने को तो छुट्टी इंसान की जिंदगी में थोड़ा सा आराम और अगले हफ्ते भर चलने की ताज़गी लेकर आती है… लेकिन उसके लिए ये इतवार आखिरी साबित होते हुए, जीवन को जद्दोजहद और संघर्ष से मुक्त कर गया… चलती सड़क पर किसी तेज़ नश्तरी धागे से भी मौत हो सकती है ये बात उन नौकरशाहों की समझ नहीं आ सकती जो खुद बंद शीशे वाली “सरकारी” कारों में चलते हैं… जिनकी औलादों के पास महंगी लग्ज़री गाड़ियां हैं, जिनके अधिकतर काम करने को नौकर चाकरों की फ़ौज लगी होती है… शायद इसी बेफिक्री के चलते अब मोटी पगार पाने वाले सरकारी मुस्टंडों का काम फ़िलहाल “एडवायजरी” और सख़्त कार्यवाही की चेतावनी देते “प्रेस नोट” जारी करना ही रह गया है… अगर जमीन पर काम हो रहा होता तो वो हमारे बीच मौजूद होता जिसकी जिंदगी का दीया आज बुझ चुका है… ये मुद्दा आम आदमी का है, इन जैसे तमाम मामलों पर आम आदमी को ही लड़ना पड़ेगा… जिंदा रहना हर आदमी का अधिकार है और उसके जिंदा रहने के हक़ पर डाका किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है… अब वक़्त है कि जिम्मेदारों की गिरेबाँ पकड़ कर उनसे पूछा जाए कि ये जानलेवा मांझा शहर में कैसे आया? कैसे बिका…? हर अधिकारी कर्मचारी और विभाग की जवाबदेही किसी भी इंसानी जान की सलामती के लिए तय होना ही चाहिए… ऐसी घटनाओं का दोहराव हर साल देखने सुनने को मिलता है, जहां मांझे से इंसानों और पक्षियों के घायल होते हैं यहां तक कि उनकी मौत भी हो जाती है… इसके बाद भी अगर कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखता तो ये इस बात कर प्रमाण है कि प्रशासनिक अमले न सिर्फ नाकामी बो रहे हैं बल्कि दूसरों की जान को बेहद सस्ती चीज समझ रहे हैं… एक जान गई है इंदौर में, एक अस्पताल में गंभीर जख्मी होकर भर्ती है, अब इन घटनाओं के जिम्मेदारों की खोज होना ही चाहिए… अब ये तय होना जरूरी है कि मांझे से होने वाली मौत का जिम्मा किसके सर जाना चाहिए…? शासन और प्रशासन की नाकामी आखिर कितने प्राणों का होम लेगी ये भी बड़ा सवाल है…?


11-01-2026

बताओ तो साहब, तलब किए गए थे या सफाई देने गए थे…

पटियेबाजी

अब लोग कह रहे, कम से कम अपने ओहदे का तो मान रखा होता…

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

कहीं थोकबंद मौतों पर भी आंकड़ों में न उलझने की बातें तो कहीं मरने वालों के प्रति दुःख जताने के जतन… कभी “जो हुआ सो हुआ” जैसे मुहावरे भी बड़बोले होने के सबूत के साथ सुनाई दे गए तो कहीं से खुद को ईमानदार दिखाने की कोशिशें ही पत्रकारों को धौंस देती दिखाई पड़ीं… वो चेहरा जिसे कभी मजाकिया जुमलों और हंसी का पर्याय बताया जाता था, आज तंग सुरक्षा घेरे में महफूज़ लेकिन गंभीर ही नजर आया… इंदौर में प्रशासनिक नाकामी के चलते घटी घटना पर सबके अपने तर्क हैं, लेकिन खुद के बचाव में… एक वरिष्ठ पत्रकार को मिले अश्लील जवाब पर जो प्रतिक्रिया सामने आई वह भी सबने देखी है, और अपने आका को मुश्किलों से राहत देने वाले सवाल भी सभी ने सुने हैं… सवालिया तीरों की बारिश में जवाबी ढाल से लैस सियासी जिम्मेदारों की असल कलई भी पूरी तरह खुल चुकी है… अधिकारी हमारी नहीं सुनते जैसे उद्गार उन श्री मुखों से झर रहे हैं जो जरा सी बात पर भी बतंगड़ बनाने में माहिर हैं… लेकिन ये भी ठीक ही हुआ जो सूबे की आवाम को भी आज समझ आया कि, पूरी ऐंठ में शीशे बंद गाड़ियों में रौब गांठने वाले हमारे भाईसाब को निम्न स्तर के कर्मचारी भी गंभीरता से नहीं लेते… इस प्रकरण में लगातार फ्रंट लाइन पर खेलने वाले बड़े साहब का लेटेस्ट डिफेंस अब जनता के बीच कानाफूसी का विषय बन चुका है… कभी राहत टैंकरों के पानी चखकर लोगों में भरोसा जगाने वाले बड़े साहब फिलवक्त किसी बड़े दबाव में दिख रहे हैं… लोगों में उत्सुकता यह जानने की है कि बड़े साहब दरबार में सफाई देने गए थे या उन्हें भी दरबार में तलब किया जाने लगा है… हालांकि वजह जो भी हो बड़े साहब का दरबारी बनना न सिर्फ जनता बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी नुकसान है… लेकिन अपन कर भी क्या सकते हैं, न तो बड़े साहब पर अपना जोर है और न ही दरबार से भिड़ने लायक सामर्थ्य है… मौजूदा सरकार में जमे लोगों और भाजपा की राजनीति करने वालों का दरबार जाना सुहाता है, लेकिन आम आदमी और नियमों के प्रति जिम्मेदार बड़े साहब का ऐसा करना हज़म नहीं हो रहा… दरबारी बनने की असल वजह जो भी रही हों लेकिन कानाफूसी में माहिर लोगों को नया मसाला मिल गया है, जिसमें लोग अपने अपने स्वाद से तड़का लगा रहे हैं…

खैर सियासी लोगों की तो अपनी दुनिया होती है, हो सकता है बड़े साहब भी उसी चमक दमक के प्रभाव में हों…

08-01-2026

गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वास केवल शब्द नहीं यह हमारे जीवन की नींव है : गोविंद सिंह राजपूत

खाद्य मंत्री ने मानक महोत्सव पर गुणवत्ता के क्षेत्र में कार्य करने वाले मानक प्रदर्शकों को किया सम्मानित

भोपाल । प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि आज पूरी दुनिया विश्व मानक दिवस मना रही हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वास केवल एक शब्द नहीं बल्कि यह हमारे जीवन की एक नींव है। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि जब हम एक समान मानक अपनाते है तो हम न केवल अपने उत्पादों को बेहतर बनाते है बल्कि समाज और देश को भी मजबूत बनाते है ।
श्री राजपूत ने यह बात उपभोक्ता  मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भारत सरकार की भोपाल इकाई भारतीय मानक ब्यू्रों द्वारा आयोजित मानक महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुये कही। इस अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरों भोपाल के वैज्ञानिक-ई/ निदेशक एवं प्रमुख मोहम्मद रिजवान भारतीय मानक ब्यूरों भोपाल के अधिकारी, औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
मानक महोत्सव को संबोधित करते हुये खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि आज का उपभोक्ता समझदार हो गया है। वह कोई भी वस्तु खरीदता है तो उसमें आईएसआई मार्क और हॉलमार्क जरूर देखता है। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र मानकों से अछूता नहीं है। इन्हीं  मानकों की वजह से हमें भरोसा होता है कि जो चीज हम इस्तेमाल कर रहे है वह सुरक्षित टिकाऊ और भरोसेंमंद है।

गुणवत्ता  और सुरक्षा के मानक तय है :

खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि मैं विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि, खाद्य मानक सीधे तौर पर जनता के विश्वास से जुड़े है। हमारा हर निवाला तभी सुरक्षित होगा जब उसमें गुणवत्ता  और सुरक्षा के मानक तय हो। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरों, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण तथा राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उपभोक्ता को शुद्ध, सुरक्षित और मानकयुक्त  भोजन मिले।  राजपूत ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जिस आत्मनिर्भर भारत की कल्पना करते हैं और स्वदेशी अपनाने की बात कह रहे है उसे पूरा करने के लिये हम सभी को एक संकल्प लेना होगा कि हम राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान के रूप में गुणवत्ता युक्त उत्पादों को बाजार में उतारों जिससे मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल का सपना साकार हों सकें। इस अवसर पर खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने मानक के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले औद्योगिक प्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा भारतीय मानक ब्यू्रों के कर्मचारियों/अधिकारियों को सम्माननित किया।

सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों व बच्चों से मिलने पहुंचे जिपं सदस्य विनय मेहर

मृतकों के परिजनों को दी 21 हजार रुपए की सहायता राशि हर संभव मदद का दिया आश्वासन 


जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। विगत दिनों पूर्व सड़क दुर्घटना में बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खजूरी राकू निवासी डॉ कमर सिंह कुशवाह और  उनकी धर्मपत्नी का एक सड़क दुर्घटना में दुःनिधन हो गया। इस दुखद घटना का समाचार मिलने पर भोपाल जिला पंचायत सदस्य संघ प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता विनय मेहर द्वारा सड़क दुर्घटना में दुःनिधन हो जाने पर मृतकों के निज निवास ग्राम खजूरी राकू पहुंचकर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर मृतकों के परिजनों को 21 हजार रुपए की सहायता राशि देकर मदद  की एवं आगे भी मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना

हमारा वोट सार्थक हो गया जन् प्रतिनिधि हो तो ऐसा
सरकारी मदद मिलेगी जब मिलेगी लेकिन जेब से कोई खर्च नहीं करता लेकिन यह पहला जनप्रतिनिधि है जिसने  अपने घर से तत्काल मदद की है.

रीतेश यादव ग्राम खजूरी

विनय मेहर ने जनप्रतिनिधि होने का अच्छा फर्ज निभाया यही होता है सच्चा जनप्रतिनिधि.

प्रेम सिंह गुर्जर ग्राम खितवास

जो परपीड़ा को समझें वही असली धर्म है शोक मनाने बहुत लोग आते है पर कुछ ही लोग होते हैं जो सहयोग करते हैं.

मनोज कुशवाह ग्राम चाटाहेडी

मामा मोहन, प्रदेश पिछड़ा हुआ है, यहां शिक्षा, स्वच्छता और रोजगार बदहाल…!

भोपाल। प्रदेश विकास के बड़े बड़े सरकारी दावों को एक मासूम ने नकार दिया है। इसके मुताबिक प्रदेश में न शिक्षा की स्थिति अच्छी है और न ही स्वच्छता की। उसके अनुसार प्रदेश में रोजगार के हालात भी अच्छे नहीं हैं। इस मासूम ने बाकायदा एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को मामा संबोधित करते हुए यह बात कही है।
एक कार में अपने परिजनों के साथ सफर कर रही इस मासूम ने यह वीडियो बनाया है। जिसमें  उसने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को मामा संबोधित किया है। उस e वीडियो में कहा है कि उसने चंबल संभाग के तीन जिले घूमे हैं। इनमें श्योपुर, भिंड  और मुरैना जिलों का भ्रमण किया है। उसने मामा को कहा कि इन तीनों जिलों में शिक्षा, स्वच्छता और रोजगार के हालात खराब हैं। वीडियो कहां का है, मासूम के परिजन कौन हैं वह इतनी गंभीर बात क्यों कर रही है, पता नहीं चल पाया है। लेकिन इस वीडियो ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव लगातार प्रदेश विकास के दावे कर रहे हैं। वे हर मंच पर प्रदेश की बेहतर शिक्षा और अच्छी सफाई व्यवस्था की बात करते हैं। साथ ही वे हर युवा को रोजगार मुहैया कराने का दावा भी करते नजर आते हैं।

शराब पर रार, दीदी की हुंकार, कौन है चौकीदार अब क्या करेगी सरकार…

पटियेबाजी


भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

कैलेंडर के कुछेक पन्नों को या दिमागी याददाश्त को पीछे की ओर पलटा जाए तो वे सारे घटनाक्रम बरबस ही ताजा हो जाएंगे जिनमें भाजपा की फायरबांड नेत्री और सूबे की मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती ने शराब के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था… अप्रैल की गर्म हवाओं के आगोश में उड़तीं पुरानी खबरों की कतरनें शराब दुकान पर पत्थरबाजी की गवाही देती नजर आ रही हैं, तो मोबाइल स्क्रीन पर सरकती अंगुली दीदी के पुराने ट्वीट पर जाकर ठहर जाती है…मामला तब भी शराब पर आधारित था और मामला अब फिर वहीं आकर अटक गया है दीदी का ताज़ा ट्वीट फिर वायरल है, ट्वीट के मुताबिक दीदी फिर शराब को लेकर क्रोधित और आंदोलित हैं… मदिरा को लेकर मुखर होने के पीछे दीदी की मंशा दीदी ही जानें लेकिन राजनीति के पंडितों की मानें तो दीदी को महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध की चिंता सता रही है जिसका जिक्र दीदी ने अपने ट्वीट में भी किया है… इधर विपक्षी गलियारों से बहने वाली बयार बता रही है कि दीदी को ढाल बनाकर मोहन को निशाने पर लेने की रणनीति बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है, तो उधर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की नीति पर चलने वाले प्रबुद्ध लोगों के अनुसार दीदी के ट्वीट फिर से सुर्खियों में छाने की कोशिशों के सिवा कुछ भी नहीं है… सबके अपने आंकलन हैं सबके अपने मत हैं कुछ दीदी से सहमत तो कुछ असहमत भी हो सकते हैं, मौजूदा सरकार से लगातार बातचीत होने के बाद भी शराब नीति के प्रभावी तरीके से लागू न हो सकने पर दीदी ने सवाल उठाया है… सरकार की अनसुनी पर कुछ भी कहना जल्दबाजी इसलिए होगी कि मध्यप्रदेश में राजस्व का बड़ा हिस्सा आबकारी विभाग से आता है, विगत चार महीनों से दीदी के मन में पल रही पीड़ा अब गहरी पैठ जमाकर नासूर बन गई है लिहाजा नाराज़ दीदी अब चौकीदार जिंदा है कहने को मजबूर हो गईं… पटियेबाजों के बीच उपजा बड़ा सवाल ये है कि क्या अब दीदी प्रदेश की नई चौकीदार हैं? या फिर चौकीदार शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर सिर्फ इसलिए किया गया है कि पीएम ऑफिस की नजर इस पूरे मामले पर गड़ी रहे… वहीं दीदी ने पिछली पत्थरबाजी से हुई किरकिरी से शायद सबक लेकर ही इस बार गाय के गोबर को इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है, या फिर शराब विरोध को किसी भी बहाने गाय से जोड़ने की कोशिश की गई है ये विश्लेषकों के लिए शोध का विषय हो सकता है… लंबे इंतजार और सरकार से बातचीत के बाद दीदी का फिर से शराब नीति पर मुखर होना सूबे की सियासी हलचल बढ़ा रहा है, गाय और गोबर से मोहन को घेरने की जुगत में लगे चौकीदार के अगले कदम का सभी इंतजार कर रहे हैं…

*15-04-2025*

सरकार, गरीब और महंगाई पर अपने कर्तव्य निभाते आप और हम…

पटियेबाजी

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

आज बड़ा दिन है, आज सरकार ने वो उपलब्धि हासिल की है जिसके ख्वाब आम आदमी तो ख्वाबों में भी नहीं देख सकता… और कहा भी जाता है कि बड़ी उपलब्धि के साथ बड़ी जिम्मेदारी मुफ्त मिलती है… सो आज पक्ष-विपक्ष के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, चिंतकों, विचारकों, लेखकों, विशेषज्ञों, व्यंग्यकार, स्तंभकार, विश्लेषकों और सोशल मीडिया के जाबांजों पर बड़ी जिम्मेदारी आन पड़ी है… मौका ही कुछ ऐसा है कि सभी को भुनाना ही है, जो मारे सो मीर से लेकर मत चूको चौहान वाली सभी कहावतों को आज चरितार्थ होना ही होगा… टीवी स्क्रीन पर दिखने वाले स्पेशल इफैक्ट से भरपूर ग्राफिक्स हों या अत्यंत मारक क्षमता से लैस क्षत विक्षत कर देने वाले व्यंग्यात्मक स्केच कार्टून, सभी तैयार हैं और सतह पर आने को मानो बिलबिला रहे हैं… जानकार कयास लगा रहे हैं कि सत्ता पक्ष की पूरी तैयारी सिर्फ इस बात को सिद्ध करने पर आधारित होगी, कि घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में सीधे पचास रुपए की बढ़ोत्तरी न सिर्फ जनकल्याणकारी है बल्कि देशहित में भी आवश्यक है… उधर राजनीति के पंडितों को भी अंदेशा है कि तमाम विपक्षी दिग्गज आज आस्तीन चढ़ाए इस जुगाड में घूम रहे होंगे, कि जहां कहीं लाइव डिबेट में सत्ता पक्ष वाला प्रवक्ता मिल बैठे तो उसको गरीब विरोधी और कॉरपोरेट प्रेमी घोषित किया जा सके… वहीं दूसरी ओर दिनभर से रास्ते नाप रहे टीवी चैनलों के धुरंधर रिपोर्टर गृहिणियों, विद्यार्थियों, बेरोजगारों और बुजुर्गों की बाइट लेकर उनका दुख रिकॉर्ड कर अपने हिस्से का जिम्मा सम्हाले भी दिखाई दिये… तो अभी तक कुछ ख़ांटी कलमघिस्सु लिख्खाड़ भी सफेद अखबारी पन्नों को स्याह रंगने में मशगूल होंगे और अपने कर्तव्य की इतिश्री कर घर जाने की तैयारी में होंगे… कुल जमा यह कि सरकार द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर पर पचास रुपए बढ़ाने पर सभी ने अपने अपने हिस्से के कर्तव्य निभाए, और कुछ अभी तक निभा भी रहे होंगे… लेकिन हकीकत सिर्फ यह है कि अब इस देश में जनता की सुध जनार्दन भी नहीं ले पा रहे, जनता उन जनसेवकों के फैसले स्वीकार करने को मजबूर है जिनको उसने ही चुना है… एक समय था जब एक राजनीतिक दल के नेता सिलेंडर के साथ प्रदर्शन कर गरीब हित की बातें करते दिखते थे… लेकिन आज इनको महंगाई का म भी सुनाई नहीं देता, और न जनता में उतना उबाल ही बचा है जो अपने ही सेवकों से सवाल कर सके…!
07-04-2025

जिसके वोट से बने मंत्री, उसी जनता को ज़लील मत कीजिए…

पटियेबाजी

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

सयाने कहते हैं कि सत्ता और धन का नशा दिखाने के लिए किसी खास मुहूर्त की जरूरत नहीं होती, ये नशा तो लोगों के सर चढ़कर बोलता खुद ब खुद नजर आ ही जाता है… मध्यप्रदेश में गंभीर नेताओं की फेहरिस्त में अब तक शुमार किए जाने वाले प्रहलाद सिंह पटेल के दंभी बयान पर हल्ला मचा हुआ है… मौजूदा सरकार के मंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मां नर्मदा की लगभग दो हजार पांच सौ किलोमीटर की परिक्रमा कर चुके आध्यात्मिक ज्ञान के धनी नेता के इस बयान को भी विपक्ष समेत दिग्गज पत्रकारों ने आड़े हाथों लिया है… पटेल के भाषण का वीडियो जितनी तेजी से वायरल हो रहा है, उतनी ही ज्यादा उनकी किरकिरी होती दिख रही है, सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी पढ़ी सुनी जा सकती है… राजगढ़ जिले के सुठालिया में वीरांगना अवंती बाई लोधी की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर कहे गए “उद्गार” अब माननीय के गले की फांस बनते नजर आ रहे हैं… अगर मौजूदा मंत्री को लोगों का सरकार से या मंत्रियों से मांग करना भीख मांगना लगता है तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आमजन अपनी गुहार लगाने किस दरबार में जाएं…? मतदाताओं द्वारा फूल माला पहना कर मांग पत्र सौंप देने से खिन्न हो जाने वाले मंत्री लगे हाथ यह भी बताएं कि मांग पत्र सौंपने के दूसरे विकल्प क्या हो सकते हैं…? एक संस्कारवान समाज की स्थापना करने को आतुर दिखने वाले प्रहलाद पटेल ने आमजन से “सरकार से भीख न मांगने तथा लेने के बजाय देने का मानस बनाने” का आग्रह किया, लेकिन यह नहीं बताया कि जनता अपनी चुनी हुई सरकार से आस न करे तो कहां जाए…? भिखारियों की फौज जैसे नवीनतम शब्द गढ़ने वाले मंत्री शायद ये बताना भूल गए थे कि पहले स्वागत सत्कार, कुशलक्षेम और बाद में अपनी मांगों को रखने वाले समाज में कौन से विशिष्ट संस्कारों की कमी है…? मंत्री या उनके समर्थक अब जैसे चाहें इस मामले की लीपापोती करते रहें, लेकिन हकीकत यही है कि जनता के वोट से सरकार में बैठे नेताओं को भी अपनी सामाजिक और सार्वजनिक मर्यादा का भान अब नहीं है… जनता को सीधे तौर पर भिखारी तक कह देने की हिम्मत ऐसे ही पैदा नहीं होती, नेताजी के बोल वचन पर तालियां पीटने वाली जनता खुद इसके लिए जाहिर तौर पर जिम्मेदार है…

02-03-2025

हम शराबियों की पीड़ा भी सुनो “महाराज”…

पटियेबाजी

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

कहा जाता है कि पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए, और यहां तो सुरापान के अनगिनत बहाने मौजूद हैं… सोम पान के ये बहाने कभी ख़ुशी के मौके की आड़ लेते नजर आते हैं, तो कहीं इन बहानों को ग़मों की ओट लेते भी देखा जा सकता है… ख़ांटी शराबियों का ऐसा ही एक ताजा और नायाब मामला तब सामने आया जब “श्रीमंत” को संबोधित एक आवेदन पत्र सोशल मीडिया में तूफानी रफ़्तार से तैरने लगा… “सिंधिया” को लिखे इस अनुरोध पत्र में कोलारस के शराब प्रेमियों ने शराब की कीमत को कम कराने की गुज़ारिश की है… गौर से देखा जाए तो शराबियों ने इस खत के ज़रिए अपनी मज़बूरी और शराब आवश्यकता को बखूबी बखान किया है… मजदूरी कर परिवार पालने वाले मजदूरों ने अपनी व्यथा में लिखा है कि हाड़तोड़ मजदूरी के कारण उपजी थकान को मिटाने के लिए उन्हें शराब का “सहारा” लेना पड़ता है… यदि वे मदिरापान न करें तो उनकी थकान नहीं उतरती और दूसरे दिन वे काम पर जाने लायक नहीं बचते हैं… इसके साथ ही दारू की कीमतों पर चिंता जताते हुए कीमत घटाने की मांग यह कहकर की गई है कि उनकी आधी “मजूरी” पीने में निपट जाती है… यही नहीं अपने परिवार और भविष्य की चिंता में आकंठ डूबे इस शराबी मजदूर वर्ग का दावा है कि शराब की बड़ी कीमत से न सिर्फ उन्हें “भविष्य निधि” जोड़ने में भारी अड़चन आ रही है बल्कि आधी कमाई शराबखोरी में निपट जाने के चलते परिवार का “उदरपोषण” भी खतरे में पड़ गया है… कुछ ज्ञानियों के अनुसार तो कोलारस के समस्त निवासियों के नाम से लिखे इस आवेदन को पूरी गंभीरता से तवज्जो मिलनी चाहिए… इसके पीछे उनके अपने तर्क हैं, लेकिन खास यह कि हर उपभोक्ता को अधिकार है कि वह अपनी मनपसंद वस्तु के आसमान चढ़ते दामों पर असहमति दर्ज करा सकता है… वहीं कुछ युवा विश्लेषकों की मानें तो सिर्फ खबरिया सुर्खियां बटोरना और सोशल मीडिया पर चर्चा पाना ही ऐसे बेतुके आवेदन का एकमात्र आधार हो सकता है, वरना पूरे कोलारस में कुछ लोग तो ऐसे भी होंगे ही जो शराब को छूते भी न हों… खैर। शराबियों के पास अपनी जरूरत और मजबूरी है जिसे वो अपने “महाराज” को बयां कर चुके हैं, वहीं इस आवेदन को अलग अलग नजरिए से देखने वाले ज्ञानियों की अपनी राय है…
शराबियों ने अपना दुख व्यक्त कर लिया है जो अब इस आवेदन पर होने वाली हलचल से कुछ आस लगाए बैठे हैं, उन्हें आशा से अधिक विश्वास है कि “महाराज” हर हाल उनके साथ न्याय करेंगे और आसमान चढ़ते शराब के दामों को ज़मीन दिखा देंगे…

आवेदन

11-02-2024

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu