Hindi News / Uncategorized

अदनान खान: दो डायलॉग से शुरू कहानी पहुंची रुपहले पर्दे तक

Article Top Ad

थिएटर, फिल्म और वेब सीरीज के सफल निर्देशक की प्रेरणादायक कहानी

सैयद रिजवान अली

बाकानेर/भोपाल। हर कलाकार की कहानी तालियों से शुरू नहीं होती। कुछ कहानियाँ रिहर्सल हॉल की धूल, बैकस्टेज की भागदौड़ और अनगिनत संघर्षों से जन्म लेती हैं। अदनान खान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा कलाकार, जिसने मंच पर आने से पहले झाड़ू उठाई, चाय लाने की ड्यूटी निभाई, दो संवादों वाले सिपाही का किरदार निभाया और फिर धीरे-धीरे अभिनय, निर्देशन तथा कास्टिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।अदनान खान का सफर भोपाल के रंगमंच से शुरू होकर मुंबई की फिल्म और वेब सीरीज इंडस्ट्री तक पहुँचा है। उन्होंने अभिनेता, लेखक, कास्टिंग डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, Supervising Director और क्रिएटिव सुपरवाइज़र जैसी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। वे न केवल एक कुशल निर्देशक हैं, बल्कि एक संवेदनशील लेखक भी हैं, जो भाषा और साहित्य की गहरी समझ रखते हैं।

उर्दू भाषा के प्रति उनका विशेष लगाव उनके काम में स्पष्ट झलकता है। वे उर्दू को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का माध्यम मानते हैं। यही संवेदनशीलता उनके लेखन और निर्देशन को अन्य कलाकारों से अलग बनाती है। आज जब डिजिटल प्लेटफार्मों ने कहानी कहने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, अदनान खान ने इस बदलाव को अपनाया और वर्टिकल ड्रामा तथा डिजिटल फिक्शन में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका मानना है कि माध्यम चाहे कोई भी हो, एक अच्छी और ईमानदार कहानी हमेशा अपने दर्शकों तक पहुँचती है। आइए, अदनान खान के इस प्रेरणादायक सफर को विस्तार से जानते हैं।

इंदौर से भोपाल तक: जड़ों की यात्रा

अदनान खान का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ। वर्ष 2005 में उनका परिवार भोपाल आकर बस गया। भोपाल की गलियों, बोली और संस्कृति ने उन्हें इस कदर अपनाया कि वे खुद मज़ाक में कहते हैं कि वे “पूरी तरह भोपाली” हो गए थे। पढ़ाई में वे स्वयं को कभी होनहार छात्र नहीं मानते। मन में एम.बी.ए. करने का सपना ज़रूर था, लेकिन भीतर कहीं यह एहसास भी था कि उनका रास्ता शायद किसी दफ़्तर की नौकरी तक सीमित नहीं है, बचपन से अभिनेता सलमान खान उनके पसंदीदा रहे। उनकी फ़िल्में और व्यक्तित्व देखकर वे अक्सर कल्पना करते कि एक दिन वे भी अभिनय की दुनिया का हिस्सा बनेंगे। मगर यह सपना उन्होंने लंबे समय तक अपने दिल में ही छिपाकर रखा।

पिता ने बिना पूछे पढ़ लिया बेटे का सपना

उनके बड़े कज़िन इद्राक हाशमत एक ईद स्पेशल “घड़ी डिटर्जेंट पाउडर” विज्ञापन में दिखाई दिए। अदनान ने वह विज्ञापन न जाने कितनी बार देखा, सोशल मीडिया पर साझा किया और अपने दोस्तों को भेजा। यहीं से उनके पिता ने समझ लिया कि बेटे का झुकाव किस ओर है। मीडिया से जुड़े होने के कारण वे मनोरंजन जगत की चुनौतियों से परिचित थे। उन्होंने बेटे को डाँटा नहीं, बल्कि एक अलग रास्ता चुना। वे अदनान को वरिष्ठ रंगकर्मी स्वर्गीय इरफ़ान सौरभ के थिएटर समूह “पल्लव भोपाल” लेकर गए। उनके मन में एक विचार था, अगर अभिनय का सपना केवल आकर्षण है, तो थिएटर की कठिन साधना उसे कुछ ही दिनों में समाप्त कर देगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा।

अभिनय नहीं… पहले झाड़ूथिएटर में पहले दिन अदनान को कोई भूमिका नहीं मिली। गुरु का आदेश था, “पहले बैठकर देखो, सीखो और समझो। मंच पर आने की जल्दी मत करो।” उनके हाथ में स्क्रिप्ट नहीं, झाड़ू आई। रिहर्सल हॉल की सफाई उनकी पहली जिम्मेदारी बनी। कुछ समय बाद उन्हें कलाकारों के लिए चाय लाने का काम मिला। आज वे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि थिएटर ने उन्हें अभिनय से पहले विनम्रता सिखाई। कई महीनों बाद उन्हें एक सिपाही का छोटा-सा किरदार मिला, जिसमें केवल दो संवाद थे। वे उन दो पंक्तियों का दिनभर अभ्यास करते, ताकि प्रस्तुति के दौरान गुरु की डाँट न सुननी पड़े। उन्हें उस समय यह अंदाज़ा नहीं था कि यही दो संवाद आगे चलकर उनके पूरे जीवन की दिशा बदल देंगे।रंगमंच ने उन्हें केवल अभिनय नहीं सिखाया। बोलने का तरीका, चलने का आत्मविश्वास, लोगों का सम्मान करना, अनुशासन और टीम के साथ काम करना, ये सब उन्होंने थिएटर से सीखा। धीरे-धीरे अभिनय उनका शौक नहीं, जीवन बन गया।

तकिए के नीचे रखे 100 रुपये

उस दौर में थिएटर से कोई आमदनी नहीं होती थी। हर सुबह उठने पर अदनान को अपने तकिए के नीचे ₹100 रखे मिलते। उनके पिता बिना कुछ कहे यह पैसा रख दफ्तर जाते थे, ताकि बेटे के आने-जाने का खर्च निकल सके। अदनान रोज़ लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टॉप तक जाते, फिर बस से रिहर्सल स्थल पहुँचते। कई बार देर रात तक अभ्यास चलता और आख़िरी बस छूट जाती, तो वे पैदल ही घर लौटते। जब पिता ने बेटे का यह संघर्ष देखा, तो उन्होंने उसके लिए सेकंड हैंड एक मोटरसाइकिल खरीद दी। अब तकिए के नीचे ₹100 की जगह ₹200 मिलने लगे। अदनान मानते हैं कि उस समय उनके पिता ने केवल आर्थिक मदद नहीं की, बल्कि उनके सपनों का भार भी अपने कंधों पर उठाया।

नौकरी से ज़्यादा मंच की पुकार

घर में नौकरी करने का दबाव बढ़ता जा रहा था। वे इंटरव्यू देने जाते, लेकिन लौटकर किसी न किसी वजह से नौकरी ठुकरा देते। इसी दौरान उन्होंने कई टेलीविज़न धारावाहिकों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। मेहनताना इतना नहीं होता था कि जीवन बदल जाए, लेकिन इतना ज़रूर होता था कि कुछ दिनों का पेट्रोल और छोटे-मोटे खर्च निकल सकें।

भोपाल: रंगमंच की नींव और पहली बड़ी क्षति

भोपाल के रंगमंच ने अदनान को जो सीख दी, वह जीवन भर उनके साथ रही। यहाँ उन्होंने कई नाटकों में काम किया और एक कुशल अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनका सबसे चर्चित नाटक “दारा शिकोह” रहा, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस ऐतिहासिक नाटक ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीता।लेकिन 10 जनवरी 2019 को उनके प्रथम गुरु स्वर्गीय इरफ़ान सौरभ का निधन हो गया। यह घटना उनके जीवन का सबसे कठिन दौर लेकर आई। कई महीनों तक वे स्वयं को संभाल नहीं पाए। भविष्य धुंधला दिखाई देने लगा। कुछ समय उन्होंने एक समाचार चैनल में विशेष कार्यक्रमों के एंकर के रूप में भी काम किया, लेकिन कैमरे के सामने होने के बावजूद उन्हें मंच की कमी महसूस होती रही।

दूसरी शुरुआत और एक और अपूरणीय क्षति

कुछ समय बाद उनकी मुलाकात स्वर्गीय प्रदीप अहिरवार से हुई। यहीं से उनके जीवन का दूसरा अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने दोबारा थिएटर में सक्रिय वापसी की। अभिनय के साथ-साथ कास्टिंग डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में भी काम शुरू किया। धीरे-धीरे आमदनी भी होने लगी और जिम्मेदारियाँ भी बढ़ने लगीं। इसी दौरान “भगवान बिरसा मुंडा” और “दारा शिकोह” जैसे नाटकों ने उन्हें रंगमंच पर नई पहचान दिलाई।लेकिन 28 जून 2023 को स्वर्गीय प्रदीप अहिरवार का अचानक कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। यह केवल एक निर्देशक का जाना नहीं था, बल्कि एक मित्र, मार्गदर्शक का बिछड़ना था। इस कठिन समय में अदनान और उनके साथियों ने निर्णय लिया कि उनके मित्र का सपना अधूरा नहीं रहेगा। लगभग छह महीनों के अथक प्रयासों के बाद उन्होंने रंग मोहल्ला की गतिविधियों को फिर से संगठित किया और नए उत्साह के साथ नाट्य प्रस्तुतियाँ प्रारंभ कीं।

मुंबई: नई संभावनाओं का शहर

मुंबई में आने के बाद अदनान को यहाँ की फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री के कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला। उन्होंने बड़े प्रोडक्शन हाउस में काम करना शुरू किया और कैमरे के पीछे की उन जिम्मेदारियों को समझा जो किसी भी सफल परियोजना की रीढ़ होती हैं। यहाँ उन्होंने महसूस किया कि रंगमंच और फिल्म में काम करने का तरीका कितना अलग है। उन्होंने इस नए माध्यम को अपनाया और खुद को ढाला। इस दौरान उन्होंने अभिनेता, असिस्टेंट डायरेक्टर, Supervising Director और क्रिएटिव सुपरवाइज़र जैसी भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने कई बड़े वेब शोज में Supervising Director के रूप में काम किया, जहाँ उनकी जिम्मेदारी पटकथा की निरंतरता, निर्देशन समन्वय, कलाकारों के प्रदर्शन और पूरे क्रिएटिव विजन को बनाए रखने की थी।

आमिर खान से मुलाकात

आमिर खान से मुलाकात: एक यादगार पलहर कलाकार के जीवन में कुछ ऐसे पल आते हैं जो उनके करियर की दिशा बदल देते हैं। अदनान खान के जीवन में ऐसा ही एक पल तब आया जब उनकी मुलाकात हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार आमिर खान से हुई। अदनान ने आमिर खान को अपने चर्चित नाटक “दारा शिकोह” के बारे में बताया। इस नाटक की ऐतिहासिक विषयवस्तु और पृष्ठभूमि ने आमिर खान का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इस नाटक को लाइव देखने की इच्छा व्यक्त की। इस मुलाकात ने अदनान को अपनी कला पर और अधिक भरोसा दिया और उन्हें लगा कि वे सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उर्दू साहित्य और संवाद लेखन की कला

अदनान खान को उर्दू भाषा और साहित्य में विशेष रुचि है। उन्होंने कई परियोजनाओं में उर्दू अनुवाद और संवाद रूपांतरण का कार्य किया। उनके लिए उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। जब वे संवाद लिखते हैं, तो वे भाषा के प्रवाह, लय और भावनात्मक गहराई का विशेष ख्याल रखते हैं। उनके लिखे संवादों में एक अलग सी मिठास और गहराई होती है, जो दर्शकों को पात्रों से जोड़ती है।

उनकी प्रमुख रचनाएं प्रमुख रचनाएँ: कहानियाँ जो जुड़ीं दर्शकों से

अदनान खान ने अपने करियर में कई ऐसी परियोजनाओं पर काम किया है जो दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुई हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में “Farooq Aur Maryam”, मनोवैज्ञानिक थ्रिलर “The Dark Child” और थिएटर की दुनिया पर आधारित “Natak Jaari Hai” जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं। “Farooq Aur Maryam” एक ऐसी कहानी है जो मानवीय रिश्तों और भावनाओं की गहराई को दिखाती है। “The Dark Child” एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जो मानव मन के अंधेरे पहलुओं को दिखाती है। “Natak Jaari Hai” थिएटर की दुनिया पर आधारित एक परियोजना है, जो अदनान के लिए कुछ खास है क्योंकि वे खुद रंगमंच से आते हैं।

पंद्रह वर्षों की रंगयात्रा

लगभग पंद्रह वर्षों के थिएटर अनुभव में अदनान खान ने अभिनेता, निर्देशक, लेखक, सहायक निर्देशक और कास्टिंग प्रोफेशनल के रूप में अनेक जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्होंने कई नाटकों का निर्देशन किया, नए कलाकारों के साथ काम किया और मंच से मिले अनुभव को कैमरे की दुनिया तक पहुँचाया, आज वे फिल्मों, वेब सीरीज़ और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में बतौर लेखक, निर्देशक और कास्टिंग प्रोफेशनल सक्रिय हैं। उनका मानना है कि रंगमंच ही वह विद्यालय है जिसने उन्हें कहानी कहने की असली कला सिखाई।

भविष्य की राह

आने वाले वर्षों में उनका लक्ष्य ओटीटी और सिनेमा के लिए ऐसी कहानियाँ रचना है जो मनोरंजन के साथ संवेदनाओं और समाज की सच्चाइयों को भी सामने लाएँ। वे लगातार नए प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहे हैं और निर्देशन के क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।तीन लोग, जिनके बिना यह सफर अधूरा थाअदनान खान आज भी अपनी यात्रा का सबसे बड़ा श्रेय तीन व्यक्तियों को देते हैं:

1. अपने पिता को, जो हर परिस्थिति में उन पर विश्वास बनाए रखते हैं।

2. अपने प्रथम गुरु स्वर्गीय इरफ़ान सौरभ को, जिन्होंने उन्हें रंगमंच की पहली शिक्षा दी।

3. और स्वर्गीय प्रदीप अहिरवार को, जिन्होंने उन्हें कलाकार से नेतृत्वकर्ता बनने की राह दिखाई।

आज जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें मंच पर बोले गए दो संवाद नहीं, बल्कि झाड़ू, चाय की केतली, तकिए के नीचे रखे वे 100 रुपये और अपने गुरुओं की सीख सबसे पहले याद आती है। शायद यही वजह है कि उनके लिए सफलता कोई मंज़िल नहीं, बल्कि उन लोगों के विश्वास का सम्मान है जिन्होंने एक साधारण लड़के के भीतर छिपे कलाकार को सबसे पहले पहचाना।अदनान खान की कहानी उन सभी युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। यह सिखाती है कि सफलता के लिए केवल अवसरों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि खुद को लगातार विकसित करते रहना चाहिए और हर मौके को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर बनाना चाहिए।

newsdiary24 को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →On Google