कलेक्टर की नजर पड़ते ही खुला राज- कर्मचारी निलंबित
जीतेन्द्र सेन
भोपाल। टीकमगढ़ जिले में स्थानांतरण रुकवाने के लिए प्रभारी मंत्री के नाम से कथित तौर पर फर्जी पत्र तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी ने अपना ट्रांसफर रुकवाने के लिए कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से प्रभारी मंत्री के नाम का पत्र तैयार किया और उसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर दिया। मामला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा, जहां जांच के दौरान पत्र फर्जी पाया गया।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीकमगढ़ जिले के स्वास्थ्य केंद्र गोर में पदस्थ एमपीडब्ल्यू केएल बंशकार का स्थानांतरण स्वास्थ्य केंद्र दरगाएं किया गया था। बताया जा रहा है कि कर्मचारी अपना स्थानांतरण रुकवाना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने कथित तौर पर प्रभारी मंत्री के नाम से एक पत्र तैयार किया, जिसमें स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे।यह पत्र स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉ. ओपी अनुरागी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके बाद सीएमएचओ ने पत्र के आधार पर नोटशीट तैयार कर उसे कलेक्टर विवेक श्रोतिय के समक्ष भेज दिया। हालांकि, कलेक्टर की नजर जब प्रभारी मंत्री के नाम से तैयार पत्र पर पड़ी तो उसमें लिखे गए नाम को लेकर उन्हें संदेह हुआ। पत्र में प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर का नाम गलत लिखा गया था।नाम में गलती सामने आने के बाद कलेक्टर ने पूरे पत्र की जांच कराने के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि प्रभारी मंत्री के नाम से जारी किया गया पत्र वास्तविक नहीं था। इसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।जानकारी के मुताबिक संबंधित कर्मचारी का स्थानांतरण 7 जुलाई 2026 को किया गया था। स्थानांतरण आदेश को निरस्त कराने के उद्देश्य से कथित तौर पर यह फर्जी पत्र तैयार कर स्वास्थ्य विभाग में प्रस्तुत किया गया।मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि मामला प्रभारी मंत्री के आदेश से जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच आवश्यक है।कलेक्टर ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी पत्र तैयार करने और उसे विभाग में प्रस्तुत करने के मामले में संबंधित कर्मचारी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। अब पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी पत्र तैयार करने में AI का किस तरह इस्तेमाल किया गया और इस पूरे मामले में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। इस घटना ने सरकारी दस्तावेजों की जांच और अधिकारियों द्वारा पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।