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तिनका परमिशन, पहाड़ खुदाई, बड़े नाम का फायदा उठाने की कोशिश

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सीता मैया, भगवान शंकर तथा हनुमान जी की भव्य मूर्तियां भी लालच के निशाने पर

सरकारी अनुमतियों के नाम पर अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा किया जा रहा आस्थाओं पर प्रहार

खान अशु

भोपाल। जहां एक ओर भारत हिन्दू राष्ट्र बनने की तरफ अग्रसर है, हर तरफ राम नाम की गूंज है, देवी देवताओं के सम्मान के प्रयास प्रबल हैं, वहीं एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने आस्थाओं को धराशाई करने का मन बना रखा है। कंपनी द्वारा एक सरकारी अनुमति को आधार बनाकर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के निशान मिटाने का प्रपंच रचा जा रहा है। मनमानी तरीके से किए जा रहे खनन से भविष्य में इन प्राचीन धरोहर का नाम-ओ-निशान मिट सकता है।मामला धार जिले की मनावर तहसील के ग्राम देवरा का है। यहां परमार कालीन विशाल शिव मंदिर प्राचीनकाल से स्थित है। जो वर्तमान समय में पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। यहां सीतापुरी में माता सीता की पौराणिक एवं अमुल्य धरोहर अनगिनत प्रमाण के साथ प्राचीन गुफा के रूप में स्थित है। वहीं जंगलों में भगवान शंकर तथा हनुमान जी की भव्य मूर्तियां जिर्णशिर्ण अवस्था में हैं। वहीं अण्डियाव में भव्य पत्थर के नंदी की प्रतिमा है।

नाम की मंजूरी, धरोहर पर निशाना

सूत्रों का कहना है कि एक बड़े औद्योगिक घराने बिरला समूह से संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने पुरातत्व विभाग को अंधेरे में रखकर खनन संबंधी अनुमति प्राप्त कर लीं। जिसके अनुसार उसे ग्राम टोंकी स्थिति प्लांट द्वारा खनन हेतु 344.783 हेक्टेयर चूना पत्थर के लिए ग्राम देवरा, सीतापुरी, उदयपुर और मुहाली के लिए बताई जाती हैं। गौरतलब है कि मनावर तहसील के इन ग्रामों की जमीन मध्य प्रदेश को पर्यावरण वन एवं जलवायु के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हो गया यह खेल

सूत्रों का कहना है कि कंपनी अपने निजी स्वार्थ के लिए पुरानी धरोहरों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उसके द्वारा देवरा जैसे स्थान पर, जहां भव्य मंदिर जीर्णशीर्ण अवस्था में मौजूद हैं, इसके आसपास खुदाई कर दी गई है। सूत्रों का कहना है कि चिन्हित और अनुमति प्राप्त स्थान से इतर यह खुदाई की जा रही है। जिससे पुरातन धरोहर के मिटने का खतरा पैदा हो गया है।

बड़े नाम का फायदा

सूत्रों का कहना है कि चूंकि आदित्य बिरला समूह देश में एक नामवर उद्योग समूह है। जिसकी दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश तक तूती बोलती है। इसी ख्याति को भुनाते हुए अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा है। इससे होने वाले पुरातत्विक नुकसान को भी गुमराह किया जा रहा है।

दूरी का भी फायदा

बताया जाता है कि इस अव्यवस्था को लेकर पुरातत्व एवं अभिलेखागार विभाग इंदौर को स्थानीय लोगों द्वारा कई बार सूचित किया गया और शिकायत की गई। लेकिन इंदौर से मनावर की दूरी और इस क्षेत्र का दूरस्थ में होना किसी परिणाम तक नहीं पहुंच पाया। बताया जाता है कि इंदौर से कागजों पर ही फैसले कर दिए जा रहे हैं और उनके परिपालन पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है अल्ट्राटेक द्वारा दिल्ली से मिली अनुमति के नाम पर भी विभाग को गुमराह करके अपने फायदे के लिए खनन कर रहा है।

अब शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक

सूत्रों का कहना है कि प्राचीन धरोहर, धार्मिक आस्थाओं और पर्यावरण के इस नुकसान को लेकर नेशनल एनजीओ नया कारवां ने बीड़ा उठाया है। संस्था इस अव्यवस्था को लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक आवाज उठाने वाली है, जिससे इस अनमोल प्राचीन संस्कृति कोबचाया जा सके। साथ ही जंगलों में जहां-जहां अवशेष हैं, वहां फैक्ट्री के खनन करने पर प्रतिबंध लगाया जा सके।

इनका कहना

इस मामले में अल्ट्राटेक सीमेंट के मुख्यमहाप्रबंधकविपिन सक्सेना से बात करना चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

प्राचीन धरोहर और धार्मिक आस्थाओं पर प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली की अनुमति निरस्त करने और खनन बंद करने तक उच्च स्तरीय प्रयास किए जाएंगे।

मोहम्मद तारिक फाउंडर, नया कारवां भोपाल

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