आलमी तब्लीगी इज्तिमा : चार दिन मजहबी समागम 14 से

तैयारियां जोरों पर, अंतिम रूप देने में जुटे वालेंटियर

भोपाल। आलमी तब्लीगी इज्तिमा को लेकर ईंटखेडी स्थित इज्तिमागाह पर तैयारियों का दौर जारी है और अधिकांश कामों को पूरा कर लिया गया है। जबकि कई नीतिगत निर्णय अभी लिए जाना बाकी हैं। यह आयोजन 14 नवंबर से शुरू होगा और 14 नवंबर को दुआ-ए-खास के साथ इसका समापन होगा। आलमी तब्लीगी इज्तिमा में इस बार दुनियाभर की जमातों की आमद होगी। जिसमें अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, जकार्ता, बंगलादेश, अमेरिका, रूस आदि देशों की जमातें शामिल होंगी। हिंदुस्तान के सभी प्रदेशों के जमाती भी यहां पहुंचेंगे। चार दिन चलने वाली मजहबी तकरीरों के दौर के बीच उलेमा लोगों को दुनिया में रखे जाने वाले अपने किरदार और अपने अल्लाह के लिए वफादारी की बातें सिखाएंगे। आमतौर पर उलेमाओं की तकरीरों में इस्लाम के 6 मुख्य बिंदुओं पर केन्द्रित बात ही की जाती है। जिसको लेकर यह भी कहा जाता है कि यहां सिर्फ जमीन से नीचे और आसमान के ऊपर की बात की जाती है, जबकि दुनियावी बातों का जिक्र इस मजमे में नहीं किया जाता।

तैयारियां जोरों पर
ईंटखेडी स्थित इज्तिमागाह पर आयोजन की तैयारियों का दौर तेज है। पिछले कई दिनों से यहां वालेंटियर्स पहुंचकर जमीन समतलीकरण, पांडाल लगाने, वुजूखाने और बॉथरूम के लिए पाइप लाइन बिछाने, बिजली के खंभे खड़े करने आदि के कामों को पूरा करने में जुटे हैं। इज्तिमा प्रबंधन कमेटी का कहना है कि अब तक करीब 70 फीसदी से ज्यादा काम निपट चुका है, जबकि नगर निगम, पीडब्ल्युडी, विद्युत मंडल आदि सरकारी विभागों से जुड़े कुछ काम बाकी हैं, जिनमें अब तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।

इस बार नॉनवेज की बिक्री रहेगी जारी
पिछले साल इज्तिमा प्रबंधकों ने इज्तिमागाह में नॉनवेज खाने की बिक्री पर पाबंदी लगाई थी। सफाई व्यवस्था को लेकर लगाई इस पाबंदी को लेकर लोगों ने एतराज भी जताया था और नाराजगी भी। हालांकि प्रशासन ने भी इस पाबंदी को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया था। जिसके बाद इस साल खाने के स्टालों को नॉनवेज बिक्री की इजाजत दे दी गई है। जानकारी के मुताबिक इज्तिमागाह में करीब 50 से ज्यादा फूड जोन लगाए जाएंगे। जिनमें चाय, नाश्ता और खाना रियायती दामों पर उपलब्ध रहेगा। यह फूड जोन विभिन्न बिरादरियों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगाए जाते हैं, जिनका मकसद नो प्रॉफिट, नो लॉस के आधार पर जमातियों को सस्ता और बेहतर खाना मुहैया कराना होता है।

फैसले कुछ बाकी हैं
आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान तीन दिनों तक अलग-अलग समय तकरीर करने वाले उलेमाओं और दुआ-ए-खास की जिम्मेदारी संभालने वाले आलिम का नाम फिलहाल तय नहीं हुआ है। इसके लिए दिल्ली मरकज से नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

आने लगीं जमातें, कर रहीं शहर गश्त
आलमी तब्लीगी इज्तिमा में शिरकत करने वालों की तादाद में हर साल लगातार बढोतरी होती जा रही है। पिछले आयोजनों में यहां 10 से 12 लाख तक जमाती शिरकत करते रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस साल इस आयोजन में इस तादाद में और इजाफा होगा। इज्तिमा में शामिल होने के लिए शहर की विभिन्न मस्जिदों में अलग-अलग शहरों से जमातों का आने का सिलसिला शुरू हो गया है। यह जमातें मस्जिदों की स्थानीय गतिविधियों में जुटकर दीनी काम कर रहे हैं। साथ ही लोगों को इज्तिमा में शिरकत की दावत भी दे रहे हैं।

यह हो रहे इंतजाम
वर्ष : 78वां
जमाती आएंगे: करीब 15 लाख
पंडाल : 120 एकड़ में
पार्किंग : करीब 70 जोन
कितनी जगह : 300 एकड़ जगह पर

थाना बैरसिया पुलिस द्वारा रन फॉर यूनिटी के माध्यम से मनाया गया राष्ट्रीय एकता दिवस

जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। बैरसिया थाना परिसर में शुक्रवार को थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन के नेतृत्व में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर रन फॉर यूनिटी रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का उद्देश्य सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान को याद कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मुख्य उद्देश्य था। गौरतलब हैं कि थाना बैरसिया के
थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन ने बताया कि आज हम सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहे हैं उनकी दूरदर्शिता और कर्तव्य ने भारत को एक मजबूत और एकजुट राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इस रैली कार्यक्रम में सांदीपनि विद्यालय बैरसिया के खेल शिक्षक मदन गोपाल नामदेव और स्कूल  विद्यार्थी भी सम्मिलित हुए रैली के दौरान लोगों ने एकता और अखंडता की भावना को बढ़ावा देने के लिए शपथ ली। रन फॉर यूनिटी रैली का आयोजन करके थाना बैरसिया ने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने और सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया।इस मौके पर बैरसिया थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन पुलिस जवान समेत वरिष्ठ जन एवं स्कूल विद्यार्थी मौजूद रहे।

किसानों के हित में बड़ा फैसला : 16 जिलों में बचे हुए किसानों का धान पंजीयन अब 6 नवंबर तक होगा

सरकार की मंशा, “हर किसान को मिले उसका हक

भोपाल। किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु बचे हुए किसानों का पंजीयन अब 6 नवंबर तक हो सकेगा। यह निर्णय प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की विशेष पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान-हितैषी सोच का परिणाम है।
मप्र के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस संबंध में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार डिण्डौरी, मण्डला, बालाघाट, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, दमोह, सिवनी, मैहर, उमरिया, जबलपुर, सीधी, अलीराजपुर, बैतूल और पन्ना जिलों में अब शेष किसानों का पंजीयन निर्धारित नोडल अधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा।
खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों से यह सुझाव प्राप्त हुए थे कि तकनीकी कारणों, समयाभाव या मौसम की बाधाओं के चलते कुछ किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं करा पाए हैं। कलेक्टरों द्वारा भेजे गए इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार ने कृषक पंजीयन की अवधि में विस्तार का निर्णय लिया है ताकि कोई भी पात्र किसान सरकारी खरीदी से वंचित न रह जाए।

पंजीयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी :

खाद्य संचालनालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि, प्रत्येक पंजीयन केन्द्र पर खाद्य, सहकारिता, राजस्व एवं कृषि विभाग के नोडल अधिकारी की उपस्थिति में ही बचे हुए किसानों का पंजीयन किया जाएगा।
केन्द्रवार केवल उन शेष कृषकों का ही पंजीयन होगा, जिनके नाम जिला प्रस्ताव में उल्लेखित हैं। किसान पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि 6 नवंबर तक शेष रहे किसानों का पंजीयन हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए।

सरकार की मंशा, “हर किसान को मिले उसका हक” :

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार किसानों के हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोई भी किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से वंचित न रह जाए, यह हमारा दायित्व है। इसीलिए पंजीयन अवधि बढ़ाई गई है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। खरीफ उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा रहा है ताकि किसान को मंडियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हमेशा किसानों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा है। उनकी पहल पर प्रदेश में कृषि आधारित योजनाओं का विस्तार किया गया है। सिंचाई, बीज, खाद, बिजली और फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को लगातार राहत दी जा रही है। धान उपार्जन पंजीयन अवधि बढ़ाए जाने का यह निर्णय इसी दृष्टि का विस्तार है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य का कोई भी किसान समर्थन मूल्य का लाभ पाने से वंचित न रहे।
सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो अभी तक पंजीयन नहीं करा पाए थे। अब वे 6 नवंबर तक अपने नजदीकी पंजीयन केन्द्रों पर जाकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीयन करा सकते हैं। यह कदम प्रदेश सरकार की “किसान हित सर्वोपरि” नीति को एक बार फिर पुष्ट करता है।

राष्ट्र की एकता और अखंडता में सरदार पटेल का योगदान देश भुला नहीं सकता : गोविंद सिंह राजपूत

खाद्य मंत्री ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर एकता दौड़ को दिखाई हरी झंडी

भोपाल। सरदार वल्लभ भाई पटेल के 150वें जन्मोत्सव 31 अक्टूबर को सागर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर  एकता दौड़ (रन फॉर यूनिटी) को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने  राष्ट्र की एकता के लिए शपथ दिलाई और हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।
इस अवसर पर मंत्री राजपूत ने कहा कि राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और सुरक्षा को बनाये रखने एवं मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।  राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आज प्रदेश के सभी पुलिस थानों पर एकता दौड़ (रन फॉर यूनिटी) का आयोजन कर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान का  देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष सागर श्याम तिवारी, कलेक्टर संदीप आर, पुलिस अधीक्षक, संजीव ऊईके, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, लोकेश सिन्हा सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी अधिकारी मौजूद थे।
इस दौड़ में युवा खिलाड़ी, नगर एवं ग्राम रक्षा समिति के सदस्य, स्कूल-कॉलेज के बच्चे, एनसीसी, एनएसएस कैडेट्स, सृजन समूह की बालिकाए, अभिमन्यु सामुदायिक पुलिस के बालक, पुलिस कर्मी एवं विसबल वाहिनियों के पुलिस कर्मी अधिक से अधिक मात्रा में भाग लिया। दौड़ के प्रारंभिक एवं अंतिम स्थल पर राष्ट्रीय एकता दिवस से संबंधित पोस्टर, बेनर एवं हॉर्डिंग्स लगाये गए।

सभी पात्र हितग्राहियों को मिले योजनाओं का लाभ-कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह

कलेक्टर ने ग्राम भानपुर केकड़िया में शिविर का किया निरीक्षण एक बगिया मां के नाम” योजना में आम के पौधे का किया रोपण


जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। कलेक्टर  कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने ग्राम भानपुर केकड़िया के ग्राम पंचायत भवन में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत आयोजित शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए तथा निरंतर हितग्राहियों के लिए शिविरों का आयोजन कर योजनाओं का लाभ सुलभ तरीके से उपलब्ध कराया जाए।
इसके पश्चात कलेक्टर  सिंह ने साईं बाबा समूह की हितग्राही श्रीमती मंजू बाई पति सूरज सिंह के “एक बगिया मां के नाम” योजना में आम के पौधे का रोपण किया। हितग्राही श्रीमती मंजू बाई को ₹2.79 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत हितग्राही द्वारा आम के 100 पौधे रोपित किए जाएंगे।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत भोपाल जिले के एकमात्र ग्राम भानपुर केकड़िया में 17 विभागों की 25 अधोसंरचना एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाना है। इस अभियान के अंतर्गत ग्राम चयन हेतु 500 या उससे अधिक जनसंख्या तथा 50 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या होना अनिवार्य है। ग्राम भानपुर केकड़िया की कुल जनसंख्या 2120 है, जिसमें से 1119 जनसंख्या जनजाति वर्ग की है।

सीखकर जाएंगे, पूरे अरकान निभाएंगे, उमराह के लिए भी दे रहे तरबियत

भोपाल। लोगों में इन दिनों उमराह के लिए उत्साह बढ़ा है। दिल्ली, मुंबई या कश्मीर, नैनीताल की तफरीह की बजाए लोगों ने मजहबी सफ़र को तरजीह दी है। यही वजह है कि दर्जनों टूर एजेंसियां हर माह कई उमराह ग्रुप रवाना कर रहे हैं।
उमराह पर जाने वाले भी इस मुबारक सफ़र के अरकान पूरे करके लौटें, यह कोशिश की जा रही है। इसके लिए अलग अलग तारीखों में तरबियती कैंप लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भोपाल के उमर इंटरनेशनल टूर एंड ट्रेवल्स ने एक नवम्बर को राजधानी भोपाल में उमराह तरबियती कैंप का आयोजन किया है। यह कैंप कोहेफिजा स्थित उमर इंटरनेशनल टूर एंड ट्रेवल्स के दफ्तर में आयोजित किया जाएगा। सुबह 10  बजे से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम दोपहर 1:00 तक जारी रहेगा। इसे मौलाना मुफ्ती रईस अहमद खान क़ासमी संबोधित करेंगे और उमराह के अरकान समझाएंगे। आयोजक काजी सैयद अनस अली नदवी ने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक मोबाइल नंबर 9175402021 और
8688011777 पर संपर्क किया जा सकता है।

लौह पुरुष सरदार पटेल : भारत की एकता के अमर शिल्पीगांधी और नेहरू के संग आत्मीयता से गढ़ी राष्ट्रीय एकता की अटूट नींव

(श्रीमती विभा पटेल)
भारत की स्वतंत्रता का इतिहास जिन महापुरुषों के बिना अधूरा है, उनमें सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। वे केवल स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय चरित्र के जीवंत प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग, अनुशासन, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति की वह गाथा है, जो हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।
संघर्षों से तपकर बना लौह व्यक्तित्व
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड में जन्मे वल्लभभाई पटेल साधारण किसान परिवार से थे, किंतु उनकी प्रतिभा असाधारण थी। सीमित संसाधनों में शिक्षा प्राप्त कर वे एक सफल वकील बने, पर उनके भीतर जनसेवा का ज्वार निरंतर उमड़ता रहा। उनका जीवन सादगी और कठोर परिश्रम का संगम था। वे मानते थे कि “सच्चा नेतृत्व वाणी से नहीं, कर्म से प्रकट होता है।” यही कर्मठता उन्हें आगे चलकर “लौह पुरुष” के रूप में प्रतिष्ठित करने वाली बनी।
स्वतंत्रता आंदोलन के दृढ़ सेनानी
महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित होकर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। 1918 के खेड़ा सत्याग्रह और 1928 के बारडोली आंदोलन ने उन्हें जनता का सच्चा नेता बना दिया। अन्यायपूर्ण कर नीति के विरुद्ध उन्होंने किसानों को संगठित किया और ब्रिटिश हुकूमत को झुकने पर विवश कर दिया। इसी आंदोलन के बाद जनता ने उन्हें स्नेहपूर्वक “सरदार” की उपाधि दी।
भारत छोड़ो आंदोलन के समय उनका जोश और अडिगता जन-जन में स्वाधीनता की नई चेतना लेकर आई। गांधीजी ने उनके लिए कहा था — “वल्लभभाई अविचल संकल्प और अडिग चरित्र के व्यक्ति हैं।”
भारत के एकीकरण का अद्भुत अध्याय
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत 562 रियासतों में बँटा हुआ था। यह नवनिर्मित राष्ट्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। देश के पहले गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में सरदार पटेल ने दृढ़ संकल्प, राजनीतिक कुशलता और असाधारण संगठन क्षमता से इन रियासतों का भारत में विलय कराया। हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी जटिल रियासतों से निपटने में उन्होंने संयम और कठोरता का अद्भुत संतुलन दिखाया। कुछ ही महीनों में लगभग सभी रियासतें भारत का अभिन्न अंग बन गईं। इस महान कार्य के कारण वे सदा के लिए “भारत के एकीकरण के शिल्पी” और “लौह पुरुष” कहलाए।
गांधी और नेहरू के संग आत्मीयता व सहयोग
सरदार पटेल और महात्मा गांधी का संबंध गहन आत्मीयता का था। गांधीजी के विचार उनके जीवन का आधार बने। वे सदैव तर्क और व्यवहारिक दृष्टि से निर्णय लेते थे। दोनों उद्देश्य सदैव एक — राष्ट्रहित — ही रहता था। गांधीजी उन्हें “मेरा सबसे विश्वसनीय साथी” कहते थे।
पंडित जवाहरलाल नेहरू से भी उनके संबंध काफी मजबूत थे। जहां नेहरू ने भारत के आधुनिक निर्माण की दिशा दी, वहीं पटेल ने उसकी नींव को एकता के सीमेंट से मजबूत किया। दोनों के संयुक्त प्रयासों से भारत का लोकतांत्रिक ढांचा साकार हुआ। नेहरू ने कहा था — “यदि सरदार न होते, तो भारत का मानचित्र शायद आज ऐसा न होता।”
एकता में ही भारत की आत्मा
सरदार पटेल ने सदा कहा — “हमारी जाति, धर्म और भाषा भिन्न हो सकती है, पर भारत हमारी साझा पहचान है।” आज जब समाज में विभाजन और असहिष्णुता के स्वर सुनाई देते हैं, तब पटेल का यह संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। उन्होंने दिखाया कि मतभेदों के बावजूद मिलकर चलना ही राष्ट्र की असली शक्ति है।
अमर संकल्प की प्रेरणा
सरदार पटेल का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रभक्त वह है जो अपने निजी हितों से ऊपर उठकर देश की एकता और सम्मान के लिए कार्य करे। उनकी दृढ़ता, निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी हमारे लिए आदर्श है।
31 अक्टूबर, उनकी जयंती के अवसर पर आइए हम सब यह संकल्प लें कि हम भी अपने कर्म, अनुशासन और निष्ठा से उस भारत का निर्माण करें जिसका सपना सरदार पटेल ने देखा था — एक ऐसा भारत जो विविधता में एकता का प्रतीक हो, सशक्त, अखंड और आत्मनिर्भर हो।
सरदार पटेल की यह पंक्ति आज भी उतनी ही सार्थक है —
“एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, और यही भारत की आत्मा है।”
(लेखिका मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष हैं)

रियासत की अदबी दुनिया में ‘सिलसिला ए अदब’  अपनी एक खास पहचान बना रहा है: सैफी सिरोंजी

महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन और रोज़नामा नया नज़रिया का मासिक कार्यक्रम सीसिलसिला ए अदब आयोजित

भोपाल। महमूद ज़की फाउंडेशन और रोज़ाना नया नज़रिया की भोपालने  ख़िदमात काबिल तारीफ है। सिलसिला ए अदब  प्रोग्राम अपनी एक खास जगह बना रहा है। मैं इस काम के लिए डॉ. नज़र महमूद और उनकी टीम को बधाई देता हूं। ये विचार मशहूर लेखक और शायर सैफी सिरोंजी ने सिलसिला ए अदब प्रोग्राम की अध्यक्षता करते हुए कहे। रोज़ानामा नया नज़रिया के ऑफिस में हुए मासिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अल्लाह से दुआ है कि यह कार्यक्रम ऐसे ही चलता रहे। रोज़ाना नया नज़रिया और महमूद ज़की  वेलफेयर फ़ाउंडेशन के प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल सीनियर सहाफ़ी  और रोज़नामा नदीम के एडिटर आरिफ अज़ीज़ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं महमूद ज़की साहब को तब से जानता हूँ जब उनके आर्टिकल रेगुलर तौर पर आफ़ताब-ए-जदीद में छपते थे। मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे महमूद ज़की साहब से मिलने का भी मौका मिला। उसके बाद, मैंने उन पर आयोजित  एक नेशनल सेमिनार में भी हिस्सा लिया और उन पर लिखा अपना एक आर्टिकल पढ़ा। यह बहुत बड़ी बात है कि महमूद ज़की साहब ने अपने बच्चों को ऐसी परवरिश दी कि उनके काबिल बच्चों ने उनका नाम ज़िंदा रखा। ऐसा बहुत कम होता है कि बच्चे अपने माता-पिता के नाम और काम को आगे बढ़ाएँ। यह महमूद ज़की साहब की ट्रेनिंग ही है कि डॉ. नज़र महमूद और उनके भाई अपने पिता के नाम और काम को इतने ऑर्गनाइज़्ड तरीके से दुनिया तक पहुँचा रहे हैं। मैं दुआ करता हूँ कि अल्लाह सबको महमूद जकी की तरह  डॉ. नज़र महमूद जैसे बच्चे  दें। प्रोग्राम के दूसरे खास मेहमान, आपूर्ति सुपरस्टोर के मालिक इमरान मंसूर ने कहा कि ऐसे प्रोग्राम का हिस्सा बनना मेरे लिए एक नया अनुभव है। मैं खुद  खुशनसीब समझ रहा हूं के मुझे इस  प्रोग्राम में शामिल होने के लिए दावत दी। नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन साहित्य की जो सेवा कर रहे हैं, वह न सिर्फ तारीफ़ के काबिल है, बल्कि उससे सिख कर हमको भी काम करना चाहिए है।



प्रोग्राम के आखिर में रोज़ाना नया नज़रिया के एडिटर और पब्लिशर और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन के फाउंडर डॉ. नज़र महमूद ने मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि आप सबने प्रोग्राम में शामिल होकर इसकी शान बढ़ाई है। इस प्रोग्राम की खास बात यह है कि इसमें जितने जाने-माने कवि और लेखक शामिल हैं, उतने अहम सुनने वाले भी हैं। यह प्रोग्राम मेरे पिता का लगाया हुआ पौधा है। यह सब उनकी मेहनत और कोशिशों का नतीजा है कि मुझे आप सबका प्यार मिल रहा है।

इस बार प्रोग्राम का संचालन डॉ. अहसान आज़मी ने बहुत अच्छे से किया। उन्होंने संचालक की ज़िम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई और हर कवि और लेखक को उनकी अहमियत और खासियत के हिसाब से बुलाया। उन्होंने प्रोग्राम की शुरुआत में महमूद ज़की फ़ाउंडेशन और रोज़ाना नया नज़रिया के इस मासिक प्रोग्राम के मकसद पर अपने खास अंदाज़ में रोशनी डाली। साथ ही, उन्होंने कहा कि रोज़ाना नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफ़ेयर फ़ाउंडेशन का मकसद नई पीढ़ी के सामने उर्दू की बेहतरीन चीज़ें पेश करना है। रोज़ाना नया नज़रीटा के एडिटर और पब्लिशर डॉ. नज़र महमूद एक ऐसे परिवार से हैं जो उर्दू भाषा और साहित्य का बहुत सम्मान करता है। उनके पिता महमूद ज़की अपने ज़माने के जाने-माने पत्रकारों में से एक थे। उन्होंने उज्जैन में एक दर्जन से ज़्यादा उर्दू अख़बारों को रिप्रेज़ेंट किया, वहीं उन्होंने हमारा समाज और दूसरे अख़बारों में एडिटर की ज़िम्मेदारी भी निभाई। इतना ही नहीं, उन्होंने कालिदास के संस्कृत साहित्य को जिस तरह से  उर्दू में तर्जुमा करने का काम किया है, वह उर्दू साहित्य में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ मध्य प्रदेश के स्नातक छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं और मध्य प्रदेश लेखक सिंघ द्वारा 2010 से, महमूद ज़की ग़ज़ल सम्मान भी प्रतिनिधि उर्दू कवियों को दिया जा रहा है। डॉ अहसान आज़मी ने नया नज़रिया के संपादक और प्रकाशक डॉ नज़र महमूद की पत्रकारिता  और दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ उनके पूर्व के कार्यों से भी श्रोताओं और कवियों को परिचित कराया।

कार्यक्रम की शुरुआत में, डॉ नज़र महमूद ने मोतियों की माला और उपहारों के साथ अतिथियों का स्वागत किया। उनके साथ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सैफी सिरोंजी का स्वागत प्रसिद्ध लेखक और कवि इकबाल मसूद ने किया। मुख्य अतिथि आरिफ अज़ीज़ और इमरान मंसूर, भोपाल के  कवि सरवत ज़ैदी, हिंदी कवि और वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाठक का स्वागत डॉ नज़र महमूद ने किया इसके बाद, सीनियर शायर रकीब अंजुम का स्वागत काज़ी नावेद मलिक ने किया, युवा शायर अशफ़ाक अंसार का स्वागत मौलाना आज़ाद उर्दू यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर मुहम्मद हसन ने किया, युवा शायर फ़ाज़िल फ़ैज़ का स्वागत समीन-उल-ज़फ़र सिद्दीकी ने किया और हिंदी शॉर्ट स्टोरी राइटर चंद्रभान राही का स्वागत डॉ. आज़म ने किया। शॉर्ट स्टोरी राइटर चंद्रभान राही ने अपनी दो शॉर्ट स्टोरीज़ ‘मनत’ और ‘भविष्य तलाशती लड़की’ पढ़कर दर्शकों का मनोरंजन किया।  नया नज़रियाऔर महमूद ज़की वेलफेयर फ़ाउंडेशन के इस प्रोग्राम में उस्ताद शायर ज़फ़र सेहबाई, इक़बाल मसूद, अंजुम बराबांकवी, डॉ. आज़म, काज़ी नावेद मलिक, विजय तिवारी विजय, अलीम बज़्मी, अज़ीम असर, साजिद हसन, हसीब अंसारी, मुहम्मद गुफ़रान, अबरार ख़ान, नुसरत अली, डॉ. क़मर अली शाह, रिज़वान फ़ारूक़ी, मुहम्मद सलमान, फ़ैज़ान, इरशाद अली, मुहम्मद आज़म, मुहम्मद तौफ़ीक़, खलील ख़ान, शाद अहमद ख़ान और सैयद नमीर महमूद ने मौजूद रहकर महफ़िल की शान बढ़ाई।

सिलसिला ए अदब में शायरों की पेश की गई कविताएँ इस तरह थीं:
मैंने माना के हो गई शोहरत
मर गया मै तो खो गई शोहरत

सैफी सरवनजी

महफिल ए शर ओ अदब में बे हुनर कोई नहीं
कम नज़र आते हैं लेकिन कम नज़र की नहीं
सरवत ज़ैदी

यह वही लाशों का शहर है
जहाँ पर दो माह बाद, एक कविता जन्म लेगी
क्योंकि मरे हुए लोगों के बीच,
कोई मरता नहीं

पंकज पाठक
रास तो आई जिंदगी लेकिन
ऐसे बिछड़े के फिर मिले ही नहीं

रकीब अंजुम

हक राह पर चलूंगा मैं आहिस्ता और तुम
छू भी नहीं सकोगे मुझे दौड़ने के बाद

अशफाक अंसार

या तो दुनिया रहे या इश्क रहे
आशिकी हो तो आशिकी की तरह
फ़ज़ील फैज़

बढ़ी संख्या, बदली जगह, बात अब भी वही… इज्तिमा में होगी 6 बातों पर चर्चा

भोपाल। महज 13 लोगों से शुरुआत… अब इतने ही लाख लोगों की भागीदारी। मस्जिद शकूर खां से हुई शुरुआत, ताजुल मसाजिद होते हुए अब ईंटखेड़ी पहुंच गई। लाखों लोगों की मौजूदगी से अब सैकड़ों एकड़ जगह भी कम पड़ने लगी है। करीब 78 साल से चल रही आलमी तब्लीगी इज्तिमा की 6 बिंदुओं पर होने वाली बात आज भी बरकरार है। यहां आज भी दुनियादारी, समाज में फैली बुराइयों या सियासी बातों के कोई जगह नहीं है। यहां बात सिर्फ जमीन के नीचे की या आसमान के ऊपर की जाती है।
आलमी तब्लीगी इज्तिमा का यह 78वा साल होगा। 14 नवंबर से शुरू होने वाले इस रूहानी समागम का समापन 17 नवंबर को दुआ ए खास के साथ होगा। इतनी सदियों के इस इतिहास में कुछ बदला है तो महज कार्यक्रम की अवधि में इजाफा हुआ है। पहले यह कार्यक्रम 3 दिवसीय हुआ करता था, जिसे बढ़ाकर 4 दिन कर दिया गया है। शुरुआत में मस्जिद शकूर खां में महज 13 लोगों के जोड़ के साथ यह धार्मिक आयोजन परम्परा में आया था, जो अब बढ़कर करीब 13 लाख लोगों की मौजूदगी पर पहुंच गया है।

बदलती रही जगह
वर्ष 1947 में आलमी तब्लीगी इज्तिमा की शुरुआत मस्जिद शकूर खां से हुई थी। इसके अगले ही साल यह आयोजन ताजुल मसाजिद में शिफ्ट कर दिया गया। वर्ष 2003 तक चलने वाले इस निजाम में ताजुल मसाजिद के आसपास का सारा इलाका जमातीयो से पैक हो जाता था। मस्जिद के अलावा आसपास का बाजार, घर और सड़कें भर जाया करती थीं। जिससे होने  वाली परेशानियों को देखते हुए आलमी तब्लीगी इज्तिमा की जगह बदलकर ईंटखेड़ी कर दी गई है। वर्ष 2003 से अब तक यह समागम इसी स्थान पर हो रहा है। जमातियो की हर साल बढ़ती तादाद के कारण यह सैंकड़ों एकड़ जमीन भी कम पड़ने लगी है।

बात जमीन से नीचे की, या आसमान से ऊपर की
चार दिन के इज्तिमा के दौरान नमाज, जिक्र, तस्बीह और सामूहिक चर्चाओं का दौर चलता है। इस दौरान उलेमा तबलीग की 6 बातों को केंद्र में रखकर बात की जाती है। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर यहां बात नहीं की जाती है।

तब्लीग के छह नंबर (छह सिद्धांत)
कलिमा: “ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह” (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं)।
सलाह: पाँचों वक्त की नमाज़ पढ़ना।
इल्म-ओ-ज़िक्र: अल्लाह का ज्ञान और उसका स्मरण करना।
इकराम-ए-मुस्लिम: सभी मुसलमानों के साथ सम्मान और भाईचारे से पेश आना।
इखलास-ए-नीयत: हर काम को पूरी ईमानदारी और अल्लाह के लिए करना।
दावत-ओ-तबलीग: लोगों को अल्लाह की ओर दावत देना और तब्लीग़ में समय निकालना।

क्या होगा खास
तारीख : 14 से 17 नवंबर
निकाह : पहले दिन 14 को
जमाती : करीब 13 लाख
तैयारी में लगे : PWD, PHE, नगर निगम, बिजली विभाग, पुलिस और अन्य
मदद कर रहे: वालेंटियर
बड़ा टास्क : यातायात नियंत्रण
व्यवस्थाएं : स्वास्थ्य, फायर ब्रिगेड, खानपान, टेलीफोन, रेलवे, किताबें आदि।

खसरा नंबर 78:  लगी हुई थी हिबानामा पर पाबंदी, कैसे हो गई, अब दस्तावेज लापता

भोपाल। शत्रु संपत्ति में शामिल शहर का वीआईपी रोड कई अव्यवस्था, कोताही, भ्रष्टाचार, बेइमानी से भरा हुआ है। यहां हुए निर्माण में कई गड़बड़ियां मौजूद हैं। इन कोताहीयों को छिपाने के लिए दस्तावेजों को गायब कर दिया गया है। बार बार मांगे जाने पर इन्हें देने में असमर्थता जताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि खसरा नंबर 78 पर स्थित मकान नंबर 1322 है। इस मकान के निर्माण में कई गड़बड़ियां बताई जाती हैं। सूत्रों का कहना है कि इस भूमि के किसी भी हिस्से पर मरहूम इनाम उल्लाह खान का अधिकार नहीं रहा है। लेकिन उन्होंने उन्होंने जरीना बशीर साहिबा के नाम पर फर्जी हिबानामे पर जमीन लिख दी।

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कैसे हुई बिल्डिंग परमिशन
बिना वैध हिबानामा के इस जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। इसी फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर नगर निगम ने परमिशन भी जारी कर दी। लेकिन इस अवैध रजिस्ट्री को गुपचुप तरीके से गायब कर दिया गया है। जिसके चलते सूचना के अधिकार में मांगे जाने पर इसकी प्रति नहीं दी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि इस बारे में 3 बार सूचना का अधिकार आवेदन लगाया जा चुका है।

किसी के पास नहीं उपलब्ध
बताया जाता है कि मकान नंबर 1322 पर निर्माण कराने वाले बशीर नामक व्यक्ति पूर्व में नगर निगम के कर्मचारी रहे हैं। इसके चलते उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए दस्तावेज गायब करवा दिए हैं। सूत्रों का कहना है उन्होंने अपनी पत्नी जरीना बशीर के नाम बनाए अवैध मकान को दस्तावेज के रूप में नगर निगम रिकॉर्ड से गायब कर दिया है। बताया जाता है कि इस मकान के रिकॉर्ड थाने, कोर्ट, नगर निगम या नजूल में कहीं भी उपलब्ध नहीं है।

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लगाई है खरीद-बिक्री पर रोक
भोपाल रियासत की मर्जर, शत्रु, इनायतनामा, हिब्बानामा और नवाबी संपत्तियों की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, रजिस्ट्री, बिल्डिंग परमिशन और अनापत्ति प्रमाण पत्र पर रोक लगाई जाए। यह मांग समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने भोपाल कलेक्टर को 47 पृष्ठों का ज्ञापन सौंपते हुए की। उन्होंने कहा कि 16 जनवरी 2002 को याचिका क्रमांक 6054/2001 में भोपाल की मर्जर संपत्तियों पर रोक लगाई थी। इसके पालन में कलेक्टर भोपाल ने 23 मार्च 2002 को आदेश जारी कर खरीदी-बिक्री और नामांतरण पर रोक लगाई थी। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति कार्यालय, दिल्ली द्वारा 8 मई 2025 को जारी पत्र में बताया गया कि भोपाल सहित सभी जिलों में शत्रु संपत्तियों की पहचान के लिए संयुक्त निरीक्षण चल रहा है।

इनायतनामा और हिब्बानामा  पर थी रोक
बताया गया कि 14 अप्रैल 1934 से 26 जनवरी 1950 तक इनायतनामा और हिब्बानामा पर रोक थी। इस अवधि की संपत्तियों की जांच की माँग की गई।

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