भोपाल। शत्रु संपत्ति में शामिल शहर का वीआईपी रोड कई अव्यवस्था, कोताही, भ्रष्टाचार, बेइमानी से भरा हुआ है। यहां हुए निर्माण में कई गड़बड़ियां मौजूद हैं। इन कोताहीयों को छिपाने के लिए दस्तावेजों को गायब कर दिया गया है। बार बार मांगे जाने पर इन्हें देने में असमर्थता जताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि खसरा नंबर 78 पर स्थित मकान नंबर 1322 है। इस मकान के निर्माण में कई गड़बड़ियां बताई जाती हैं। सूत्रों का कहना है कि इस भूमि के किसी भी हिस्से पर मरहूम इनाम उल्लाह खान का अधिकार नहीं रहा है। लेकिन उन्होंने उन्होंने जरीना बशीर साहिबा के नाम पर फर्जी हिबानामे पर जमीन लिख दी।
कैसे हुई बिल्डिंग परमिशन
बिना वैध हिबानामा के इस जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। इसी फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर नगर निगम ने परमिशन भी जारी कर दी। लेकिन इस अवैध रजिस्ट्री को गुपचुप तरीके से गायब कर दिया गया है। जिसके चलते सूचना के अधिकार में मांगे जाने पर इसकी प्रति नहीं दी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि इस बारे में 3 बार सूचना का अधिकार आवेदन लगाया जा चुका है।
किसी के पास नहीं उपलब्ध
बताया जाता है कि मकान नंबर 1322 पर निर्माण कराने वाले बशीर नामक व्यक्ति पूर्व में नगर निगम के कर्मचारी रहे हैं। इसके चलते उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए दस्तावेज गायब करवा दिए हैं। सूत्रों का कहना है उन्होंने अपनी पत्नी जरीना बशीर के नाम बनाए अवैध मकान को दस्तावेज के रूप में नगर निगम रिकॉर्ड से गायब कर दिया है। बताया जाता है कि इस मकान के रिकॉर्ड थाने, कोर्ट, नगर निगम या नजूल में कहीं भी उपलब्ध नहीं है।
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लगाई है खरीद-बिक्री पर रोक
भोपाल रियासत की मर्जर, शत्रु, इनायतनामा, हिब्बानामा और नवाबी संपत्तियों की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, रजिस्ट्री, बिल्डिंग परमिशन और अनापत्ति प्रमाण पत्र पर रोक लगाई जाए। यह मांग समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने भोपाल कलेक्टर को 47 पृष्ठों का ज्ञापन सौंपते हुए की। उन्होंने कहा कि 16 जनवरी 2002 को याचिका क्रमांक 6054/2001 में भोपाल की मर्जर संपत्तियों पर रोक लगाई थी। इसके पालन में कलेक्टर भोपाल ने 23 मार्च 2002 को आदेश जारी कर खरीदी-बिक्री और नामांतरण पर रोक लगाई थी। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति कार्यालय, दिल्ली द्वारा 8 मई 2025 को जारी पत्र में बताया गया कि भोपाल सहित सभी जिलों में शत्रु संपत्तियों की पहचान के लिए संयुक्त निरीक्षण चल रहा है।
इनायतनामा और हिब्बानामा पर थी रोक
बताया गया कि 14 अप्रैल 1934 से 26 जनवरी 1950 तक इनायतनामा और हिब्बानामा पर रोक थी। इस अवधि की संपत्तियों की जांच की माँग की गई।
