भोपाल। महज 13 लोगों से शुरुआत… अब इतने ही लाख लोगों की भागीदारी। मस्जिद शकूर खां से हुई शुरुआत, ताजुल मसाजिद होते हुए अब ईंटखेड़ी पहुंच गई। लाखों लोगों की मौजूदगी से अब सैकड़ों एकड़ जगह भी कम पड़ने लगी है। करीब 78 साल से चल रही आलमी तब्लीगी इज्तिमा की 6 बिंदुओं पर होने वाली बात आज भी बरकरार है। यहां आज भी दुनियादारी, समाज में फैली बुराइयों या सियासी बातों के कोई जगह नहीं है। यहां बात सिर्फ जमीन के नीचे की या आसमान के ऊपर की जाती है।
आलमी तब्लीगी इज्तिमा का यह 78वा साल होगा। 14 नवंबर से शुरू होने वाले इस रूहानी समागम का समापन 17 नवंबर को दुआ ए खास के साथ होगा। इतनी सदियों के इस इतिहास में कुछ बदला है तो महज कार्यक्रम की अवधि में इजाफा हुआ है। पहले यह कार्यक्रम 3 दिवसीय हुआ करता था, जिसे बढ़ाकर 4 दिन कर दिया गया है। शुरुआत में मस्जिद शकूर खां में महज 13 लोगों के जोड़ के साथ यह धार्मिक आयोजन परम्परा में आया था, जो अब बढ़कर करीब 13 लाख लोगों की मौजूदगी पर पहुंच गया है।
बदलती रही जगह
वर्ष 1947 में आलमी तब्लीगी इज्तिमा की शुरुआत मस्जिद शकूर खां से हुई थी। इसके अगले ही साल यह आयोजन ताजुल मसाजिद में शिफ्ट कर दिया गया। वर्ष 2003 तक चलने वाले इस निजाम में ताजुल मसाजिद के आसपास का सारा इलाका जमातीयो से पैक हो जाता था। मस्जिद के अलावा आसपास का बाजार, घर और सड़कें भर जाया करती थीं। जिससे होने वाली परेशानियों को देखते हुए आलमी तब्लीगी इज्तिमा की जगह बदलकर ईंटखेड़ी कर दी गई है। वर्ष 2003 से अब तक यह समागम इसी स्थान पर हो रहा है। जमातियो की हर साल बढ़ती तादाद के कारण यह सैंकड़ों एकड़ जमीन भी कम पड़ने लगी है।
बात जमीन से नीचे की, या आसमान से ऊपर की
चार दिन के इज्तिमा के दौरान नमाज, जिक्र, तस्बीह और सामूहिक चर्चाओं का दौर चलता है। इस दौरान उलेमा तबलीग की 6 बातों को केंद्र में रखकर बात की जाती है। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर यहां बात नहीं की जाती है।
तब्लीग के छह नंबर (छह सिद्धांत)
कलिमा: “ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह” (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं)।
सलाह: पाँचों वक्त की नमाज़ पढ़ना।
इल्म-ओ-ज़िक्र: अल्लाह का ज्ञान और उसका स्मरण करना।
इकराम-ए-मुस्लिम: सभी मुसलमानों के साथ सम्मान और भाईचारे से पेश आना।
इखलास-ए-नीयत: हर काम को पूरी ईमानदारी और अल्लाह के लिए करना।
दावत-ओ-तबलीग: लोगों को अल्लाह की ओर दावत देना और तब्लीग़ में समय निकालना।
क्या होगा खास
तारीख : 14 से 17 नवंबर
निकाह : पहले दिन 14 को
जमाती : करीब 13 लाख
तैयारी में लगे : PWD, PHE, नगर निगम, बिजली विभाग, पुलिस और अन्य
मदद कर रहे: वालेंटियर
बड़ा टास्क : यातायात नियंत्रण
व्यवस्थाएं : स्वास्थ्य, फायर ब्रिगेड, खानपान, टेलीफोन, रेलवे, किताबें आदि।
बढ़ी संख्या, बदली जगह, बात अब भी वही… इज्तिमा में होगी 6 बातों पर चर्चा
