भोपाल। मुंबई में माहेश्वरी इंटरनेशनल बिजनेस फाउंडेशन द्वारा आयोजित “कॉन्क्लेव ऑन फ्यूचर ऑफ इन्वेस्टिंग” का आयोजन किया गया। निवेश, अर्थव्यवस्था और सामुदायिक विकास पर केंद्रित इस कॉन्क्लेव में देश के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों तथा कॉरपोरेट लीडर्स की भागीदारी रही।
कार्यक्रम की शुरुआत एमआईबीएफ के संस्थापक महामंत्री संतोष कुमार लाहोटी के स्वागत संबोधन से हुई। इसके पश्चात एमआईबीएफ के संस्थापक प्रशांत माहेश्वरी ने नव-चयनित एमआईबीएफ के अध्यक्ष व नंदन ग्रोथ फंड के मैनेजिंग पार्टनर दीपक माहेश्वरी का सामुदायिक औद्योगिक जगत से परिचय कराया। इस अवसर पर शोभा सढ़ानी ने सामुदायिक सशक्तिकरण और सामाजिक सहभागिता पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का एक आकर्षण अनन्या बिड़ला द्वारा एमएमयू ब्रांड का शुभारंभ एवं कार्यक्रम स्मारिका का औपचारिक विमोचन रहा। इसके बाद कार्यक्रम के प्रधान वक्ता और भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एसएस मूंदड़ा ने भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक परिदृश्य, वित्तीय प्रणाली की स्थिरता, क्रेडिट इकोसिस्टम, नियामकीय दृष्टिकोण तथा दीर्घकालिक पूंजी आवंटन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कॉन्क्लेव में आयोजित पैनल चर्चाओं ने निवेश के विविध पहलुओं को सामने रखा। पहले पैनल में वैश्विक एवं घरेलू पूंजी प्रवाह और भारत के आगामी निवेश चक्र पर चर्चा हुई।
दूसरी पैनल चर्चा “पब्लिक मार्केट्स रीसेट: इक्विटी, डेट और पोर्टफोलियो निर्माण” विषय पर हुई, जिसका संचालन सौरभ अजमेरा ने किया। इस सत्र में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट चंदन तापड़िया, मिराए एसेट के सीईओ पुनीत कुमार मुंधड़ा तथा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के कार्यकारी निदेशक नीरज तापड़िया ने निवेश रणनीतियों पर सार्थक चर्चा की।
तीसरी पैनल चर्चा में प्राइवेट मार्केट्स पर यथार्थपरक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। इस सत्र में रिटर्न के स्रोत, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक पोर्टफोलियो में प्राइवेट एसेट्स की भूमिका पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ योगदानकर्ताओं एवं समाज के विशिष्ट लीडर्स रामेश्वर लाल काबरा एवं रतनी बाई, वरिष्ठ आईआरएस चंदन पुगलिया, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, आदित्य बिड़ला समूह के केके माहेश्वरी, विश्वंभर नेवर तथा प्रबुद्ध वक्ता भाविका माहेश्वरी का सम्मान किया गया।
वैश्विक निवेश, पूंजी प्रवाह, व्यावसायिक विस्तार और सामुदायिक उत्थान पर महमंथन
