चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु
मीडिया के लिए लोगों के मन खटास ऐसे ही नहीं भर गई… जब एक नेशनल न्यूज चैनल जेफ्री एपस्टीन जैसे नर पिशाच को संत साबित करने पर आमादा हो जाए, तो यह खटास और गहरी हो जाती है…!
चंद सेकंड का एक वीडियो एक महिला एंकर ने सोशल मीडिया पर अपडेट किया है….! इस महिला को छोटी, मासूम और खिलौनों से खेलने की उम्र की बच्चियों की चीत्कार सुनाई नहीं दी…! उसकी आंखों के सामने दुनिया के वह नामवर लोग भी नहीं लहराए जिन्होंने हैवानियत की हदें पार कर दीं…! उसको दिखा तो एक संत समान हैवान एपस्टीन, जिसने शिक्षा जैसे पवित्र पेशे को भी दागदार कर दिया…! अपनी लालच की पराकाष्ठा ने उसे हर बुरा काम करने से जोड़ दिया…! मासूमों का बचपन छीनने से लेकर उनका मांस खाने तक का दोषी इस महिला एंकर को संत समान लग रहा है…!
गोदी मीडिया, मक्खन मीडिया, झोला मीडिया इसीलिए सचेत किया गया है कि अप्सटीन फाइल्स की आग हमारे देश के चमकते चेहरों को दागदार न कर दे…! झूठ को सच कहना, जोर जोर से कहना, तब तक कहते रहना जब तक सच न मान लिया जाए… की थीम पर लगे लोग जमे हैं और तरक्की की फसल(?) काट रहे हैं…!
पुछल्ला
नई नहीं आई है महंगाई
अंदर हंगामा भरा था। बाहर भी शोर। मसला मंहगाई का। गैस सिलेंडर की कीमत बहुत ज्यादा है। विपक्ष में बैठे हैं, तो कोई मुद्दा तो उछालना पड़ेगा। लेकिन विरोध के स्वरों में इसको भुला दिया गया कि मंहगाई देश में किसी सियासी दल ने आयात नहीं की है, बल्कि यह तब भी अपना सुर सुनाती थी, जब वे सत्ताधीश हुआ करते थे।
17/02/2026
इसी को कहते हैं मक्खन मीडिया…
