सामाजिक सौहार्दता की मिसाल : वक्फ की जमीन, खुद के प्रयास, कई विवाद के बीच बनवा दिया मंदिर

भोपाल। समाज में धर्म और मजहब को लेकर भले कितनी भी वैमनस्यता फैली हो।एकिन गंगा जमुनी तहजीब हम भारतीयों में भीतर तक समाई हुई है। समय आने पर हिन्दू धर्म के अनुयाई अपनी विश्वसनीयता पीछे नहीं हटते। ऐसे ही एक अल्लाह को मानने वाले मुस्लिम धर्मावलंबी भी अपनी वफ़ा साबित करने में कोताही नहीं बरतते हैं। उज्जैन जिले के कालियादेह में आकार लिया एक मंदिर इसी बात का प्रमाण है। हिंदू समाज की आस्था का केंद्र बना यह मंदिर मुस्लिम समुदाय द्वारा उपलब्ध कराई गई जमीन पर अपनी शान लिए हुए खड़ा है। इसको मूर्तरूप देने में एक मुस्लिम व्यक्ति का ही बड़ा योगदान है।
उज्जैन जिले की तहसील में शामिल है एक स्थान कालियादेह। सूत्रों का कहना है कि पिछले 3 या 4 वर्षों पहले यहां एक मंदिर बनाने की कल्पना की गई। जब इस मंदिर को लेकर बात शुरु हुई तो जमीन उपलब्ध कराने की पहल एक मुस्लिम व्यक्ति ने की। डॉ. सनव्वर पटेल ने इस मंदिर के लिए पर्याप्त मात्रा में जमीन ही उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि इस निर्माण में जरूरी सहयोग भी उन्होंने दिया। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा, हज कमेटी और अब मप्र वक्फ बोर्ड से ताल्लुक होना एक अलग बात है, डॉ सनव्वर पटेल ने मंदिर निर्माण में सहयोग मानवीय व्यवहार और आपसी भाईचारे को बरकरार रखने के लिए किया है। हिंदू आस्थाओं में गहरी रुचि रखने की बात इस उदाहरण से भी समझी जा सकती है डॉ सनव्वर पटेल का शिक्षित बेटा भी रंगमंच पर भगवान श्री राम का किरदार निभाता रहा है। इस बात को लेकर कई बार विवाद भी उठे हैं, लेकिन इसका जवाब डॉ पटेल ने सामाजिक सौहाद्र के तकाजों के साथ ही दिया है।

बताया जाता है विवाद
सूत्रों का कहना है कि कालियादेह में मंदिर निर्माण के लिए जो भूमि उपलब्ध कराई है, वह वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके जवाब में डॉ सनव्वर पटेल में यही कहते रहे हैं कि यह जमीन उनके पिता शेर मोहम्मद के आधिपत्य और मालिकी अधिकार की है, जिसका उपयोग अपने तरीके से करने का उन्हें अधिकार है। इधर डॉ सनव्वर पटेल के विपक्षी लोग यह भी कहते हैं मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मप्र वक्फ बोर्ड के करीब 16 खसरे अपने पिता और परिवार के नाम करवा लिए हैं, जिनमें कालियादेह की यह मंदिर भूमि भी शामिल है।

आरोप यह भी
सूत्रों का कहना है कि उज्जैन महाविद्यालय में हुए एक हत्याकांड में डॉ सनव्वर पटेल ने भाजपा संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद की थी। जिसके चलते संगठन द्वारा उन्हें बार बार पदों से नवाजा जाता रहा है। वर्तमान में वे मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष हैं और उनको कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। साथ ही वे संगठन के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं। इससे पहले वे हज कमेटी के अध्यक्ष और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। भाजपा के इतिहास में प्रदेश या पूरे देश में एक ही व्यक्ति को कभी इतने पदों से नहीं नवाजा गया है। यही वजह है कि भाजपा के मुस्लिम कार्यकर्ताओं में इस बात की चर्चा है कि इस एक व्यक्ति के आसपास ही भाजपा की मुस्लिम सियासत सिमटी हुई है।

हज 2026 के लिए सऊदी अरब सरकार भी जुटा तैयारियों में

भारतीय राजदूत ने की सऊदी सरकार से मुलाकात, दी जानकारी

भोपाल। हज 2026 को लेकर तैयारियों का दौर शुरू हो गया है। जहां भारत में इसको लेकर कुर्रा और किस्त जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, वहीं सऊदी सरकार भी तैयारियों को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहा है।
सऊदी अरब में भारतीय राजदूत डॉ. सुहेल खान ने गत दिनों हज एवं उमराह मंत्री महामहिम डॉ. तौफीक अल रबिया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अगले हज 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। दोनों के बीच आपसी हितों के अन्य मुद्दों पर चर्चा भी हुई।राजदूत के साथ डीसीएम अबू माथेन और सऊदी अरब में भारत के महावाणिज्य दूत
(जेद्दा स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास)  फहद सूरी भी मौजूद थे।

डॉ. सोहैल का है प्रदेश से नाता
सऊदी अरब में भारतीय राजदूत डॉ. सुहेल खान मूलतः मप्र के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मप्र के धार जिला मुख्यालय से हुई है। बाद में इंदौर से उन्होंने शिक्षा पूरी की। मूलतः चिकित्सक पेशे से जुड़े डॉ. सुहैल भारतीय विदेश सेवा से जुड़े हुए हैं। उनकी माता सलमा खान इंदौर के सेंट्रल स्कूल में प्राचार्या रही हैं। जबकि पिता भी शासकीय सेवक रहे हैं। सहज, सरल और मधुर व्यवहार रखने वाले डॉ. सुहैल का हिंदुस्तान से गहरा लगाव है। खासकर सऊदी अरब में रहते हुए मप्र के मुसाफिरों की वे आत्मीय आगवानी करते हैं। मप्र से खिदमत के लिए जाने वाले अधिकारियों को भी वे विशेष मदद करते हैं। कुछ वर्ष पहले इसी तारतम्य में सऊदी अरब पहुंचे तत्कालीन वक्फ बोर्ड सीईओ सैयद शाकिर अली जाफरी आज भी डॉ सुहैल के सहयोग और आत्मीय व्यवहार को याद करते हैं।

राजधानी के सबसे महंगे फ्लैट आकार ले रहे विवादित भूमि पर…

राजनैतिक दल का झंडा लगा कर किया जा रहा शत्रु संपत्ति पर निर्माण

भोपाल। संभवतः राजधानी में सबसे महंगी फ्लैट कीमत यहां होगी। निर्माण कंपनी के नाम पर एक बड़ा तमगा साथ है। एक सियासी दल के झंडे लगाकर किए जा रहे निर्माण के बाद इस बात को भुला दिया गया है कि पहले से निर्मित यहां के मकानों को हटाने के आदेश अदालत दे चुकी है। भविष्य में होने वाली किसी बड़ी कार्यवाही के बीच यहां निर्माण, खरीदी बिक्री, नामांतरण जैसी गतिविधि यहां निर्बाध चल रही हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे इन अवैध गतिविधियों को हवा दे रहे हैं।

VIP रोड की विवादित भूमि ही नहीं, एक वक्फ प्रॉपर्टी के भी गुनाहगार हैं शातिर


शहर के वीआईपी रोड पर स्थित है खसरा नंबर 78। सरकार ने इसको शत्रु संपत्ति मानकर किसी तरह की सौदेबाजी से प्रतिबंध लगा रखा है। कई स्तर पर इसको लेकर अदालती मामले प्रचलित हैं। लेकिन इसके बावजूद यहां बड़े स्टार होटल, नामवर शादी हॉल और बड़े निर्माण कार्य आकार ले रहे हैं।

ग्रीन लैंड में शामिल
सूत्रों का कहना है कि बड़े तालाब के दूसरे छोर पर स्थित खसरा नंबर 78 की भूमि ग्रीन लैंड में शामिल है। इस जगह पर किसी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है। बावजूद इसके इसके यहां निर्माण कार्य चल रहे हैं। कई निर्माण हो चुके हैं और इनकी खरीदी बिक्री भी धड़ल्ले से हो रही है।

वीआईपी मूवमेंट खतरे में
वीआईपी रोड के एक तरफ तालाब और दूसरी तरफ पहाड़ियां यहां से गुजरने वाले वीआईपी के लिए यह रास्ता सुरक्षित माना जाता रहा है। लेकिन तेजी से हो रहे निर्माण ने यह भ्रम तोड़ दिया है। अब सीधे वीआईपी रोड पर निकल आई कई लोगों की एंट्री वीआईपी मूवमेंट को प्रभावित कर रही है।

लगाए झंडे कर दिया निर्माण
वीआईपी रोड की शत्रु संपत्ति पर हो रहे एक निर्माण पर बिड़ला ग्रुप का नाम चस्पा किया गया। इस खसरा नंबर 78 की भूमि पर हो रहे निर्माण को कई जगह सियासी दल के झंडों से भी कवर किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस निर्माण कार्य से निकलने वाले सबसे छोटे फ्लैट की कीमत करीब दो करोड़ रुपए तय की गई है। इस आवाजाही का सीधा असर भी वीआईपी मूवमेंट पर पड़ने वाला है।

पहले भी हो चुके कब्जे
नवाब शासकों के वंशजों द्वारा अपना आधिपत्य बताई जाने वाली इस प्रॉपर्टी का सौदा नवाब शासन काल में सेवा करने वाले भी कर चुके हैं।
नवाब शासक के कार्यालय में पदस्थ रहे किसी अधिकारी ने सिर्फ इस आधार पर हिबानामा और इनायतनामा लिख दिए हैं कि उन्हें नवाब के साथ काम करने से इसका अधिकार है। इसी का एक उदाहरण एक बंगला नशेमन भी है। सूत्रों का कहना है कि किसी कर्मचारी के लिखे हिबनामा के आधार पर ही इस नशेमन का सौदा, नामांतरण सबकुछ हो चुका है। हालांकि विभिन्न अदालती कार्यवाही के बीच इसको तोड़ने के आदेश भी किए जा चुके हैं।

नमाज का दामन थाम लो, हर मुश्किल से बचोगे : सूफी मोहम्मद जाकिर

भोपाल। इस्लाम के आखिरी पैगम्बर हजरत मुहम्मद की पैदाइश और उनकी वफात का महीना चल रहा है। दुनिया में हर जगह अकीदतमंद उत्साह के साथ जश्न ए ईद मिलादुन्नबी नबी मना रहे हैं। इसी कड़ी में 5 सितंबर को मिलादुन्नबी का त्यौहार मनाया जाएगा। इसको लेकर तैयारी का दौर चल रहा है।
तैयारियों के इसी दौर में सीरत कमेटी के अध्यक्ष सूफी मोहम्मद जाकिर उर्फ गब्बू बाबा  इंदौर पहुंचे। इस दौरान मिडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जश्न ए मिलाद सारी कायनात में मनाया जा रहा है। इस्लाम के आखिरी पैगम्बर हजरत मुहम्मद दुनिया में भलाई और भाईचारे का संदेश लेकर आए थे। उन्होंने हर इंसान की भलाई की बात कही। मिलादुन्नबी पर निकलने वाले जुलूस को लेकर कहा कि उत्साह सबमें होता है। लेकिन इस दौरान नमाज को न भूला जाए। नमाज हर मुसलमान पर फर्ज है। इसका हर हालात में पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने जुलूस में डीजे ना ले जाने के लिए अपील की। साथ ही नमाज के वक्त पर इसको अदा करने की बात कही। जलसा ए मिलादुन्नबी के मौके पर पूरे प्रदेश के सूफी, संत और उलेमा जमा हुए थे।

छूटी अंतिम तारीख की आस, नहीं बढ़ी किस्त की मोहलत

बाकी रह गए बड़ी संख्या में हज चाहतमंद

भोपाल। हज 2026 के लिए आठ महीने पहले मांगी गई पहली किस्त हज आवेदकों की मुश्किल बनी हुई है। छुट्टी भरे शेड्यूल में तय की गई आखिरी तारीख बिना इजाफे के सोमवार शाम को खत्म हो गई है।
ऐसे में विभिन्न वजह से बड़ी संख्या में हज चाहतमंद अपनी किस्त की राशि जमा करने से चूक गए हैं। इस स्थिति के चलते इनका चयनित हज फॉर्म कैंसिल भी हो सकता है।
सेंट्रल हज कमेटी ने हज आवेदकों से 25 अगस्त तक पहली किस्त की राशि जमा करने के लिए कहा था।  एक लाख, 52 हजार, 300 रुपए की राशि जमा करने के लिए पहले 20 अगस्त तय की गई थी। बाद में इस तारीख में इजाफा कर 25 अगस्त कर दिया गया था। इसके साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए 30 अगस्त तय की गई थी।

बाकी रह गए कई आवेदक
सूत्रों का कहना है कि आखिरी तारीख तक बड़ी संख्या में हज चाहतमंद अपनी किस्त जमा नहीं कर पाए हैं। समय पूर्व मांगी गई राशि के अलावा कई कारण हैं, जिनके चलते हजयात्री अपनी पहली किस्त जमा नहीं कर पाए हैं।

जमा हुए अरबों रुपए
जानकारी के मुताबिक हज कमेटी ऑफ इंडिया ने फिलहाल एक लाख हाजियों का सिलेक्शन किया है। सऊदी अरब सरकार से कोटा जारी न होने के चलते यह स्थिति बनी है। हाजियों के कोटे की एक और सूची सऊदी अरब सरकार से कोटा जारी होने के बाद होगी। फिलहाल हाजियों से पहली किस्त के रूप में प्रति हाजी एक लाख, 52 हजार रुपए जमा कराए गए हैं। इस लिहाज से हज कमेटी को करीब 15 अरब रुपए की आमद हुई है। यह रकम करीब आठ महीने बाद होने वाले हज सफर पर खर्च की जाएगी। तब तक बैंक से मिलने वाले ब्याज पर हज कमेटी का अधिकार रहेगा। कारण यह है कि कोई भी हाजी अपनी रकम के बदले ब्याज की रकम नहीं लेता है।

फर्जी हिबानामा कर दिया शत्रु संपत्ति का सौदा, तोड़ने के हो चुके हैं आदेश

खान आशु

भोपाल। राजधानी भोपाल की जिस शत्रु संपत्ति का बरसों से अदालती विवाद चल रहा है, उस पर मकान भी बन गया और इस निर्माण के साथ कई फर्जीवाड़े भी जुड़ गए हैं। जिस संपत्ति से इसके फर्जी हिबानामा के हालात जुड़े हुए हैं,  इसके नक्शे के नकलीपन और नियमविरुद्ध हस्तांतरण के मामले भी जुड़ गए हैं। सरकारी विभागों की साठगांठ और भ्रष्टाचार ने इस फर्जीवाड़े पर पर्दे डाल दिए हैं।
मामला राजधानी के वीआईपी स्थित खसरा नंबर 78 का है। शत्रु संपत्ति का हिस्सा इस जमीन को लेकर कई अदालती मामले प्रचलित हैं। बावजूद तहसीलदार ने यहां के एक ऐसे मकान का हस्तांतरण कर दिया है, जो पहले ही कई विवादों में था। इस नियम विरुद्ध हस्तांतरण में बड़े भ्रष्टाचार की बात कही जाती है।

नक्शा बना हवा हवाई
वर्ष 1984 में निर्मित इस भवन के लिए भवन अनुज्ञा के लिए जो नक्शा लगाया गया है, वह कागजी है। खानापूर्ति के नाम पर नक्शा प्रदर्शित किया जरूर गया था, लेकिन बाद में नगर निगम के रिकॉर्ड से इसे गायब कर दिया गया है। नगर निगम के रिकॉर्ड में भवन अनुज्ञा शाखा में अब कोई नक्शा मौजूद नहीं है।

जिसके नाम नहीं, उसने कर दी हिबा
खसरा नंबर 78 की यह भूमि इनाम उल्लाह खान ने हिबा की है, जबकि यह जमीन इनाम के नाम पर है ही नहीं। जब जमीन किसी के नाम पर अंकित ही नहीं है तो वह व्यक्ति किसी को तोहफे में वह जमीन कैसे दे सकता है। एसडीएम कोर्ट में चल रहे विवाद में इस बात पर आपत्ति भी दर्ज की गई है।

जितने केस, उतनी तरह के डॉक्यूमेंट
सूत्रों का कहना है कि अलग अलग अदालतों में इस जमीन के विवाद को लेकर कई मामले प्रचलन में हैं। बताया जाता है कि अलग अलग अदालत में एक ही संपत्ति से संबंधित अलग अलग दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। जो इस मकान के  फर्जीवाड़े की दास्तां बयान करते हैं।

और कर दिया किसी और ने ही सौदा
शत्रु संपत्ति में शामिल खसरा नंबर 78 की इस जमीन पर बनाया गया है नजारा विला नामक आलीशान भवन। कागजों पर इसका मालिकी हक फराज आजम के नाम पर दर्शाया गया है। इस नाते वे जमीन या इस घर के बेचने या इस्तेमाल के अधिकारी हैं। लेकिन बदनीयती के एक सौदे में इस भवन का विक्रेता जरीना बसीर को बताया गया है। जबकि क्रेता उनके ही बेटे सौलत बसीर को दर्शाया गया है।

हो चुके टूटने के आदेश
वर्ष 2011 और 2013 में इस भवन के फर्जीवाड़े को लेकर अदालती मामले चले हैं। इस दौरान अदालत ने खसरा नंबर 78 की जमीन के इस निर्माण को अवैध माना था। अदालत ने इसे तोड़ने के आदेश भी पारित किए हैं। लेकिन अवैध निर्माण अब भी बरकरार है और अपने फर्जीवाड़े और सरकारी सिस्टम में घुले भ्रष्टाचार की कहानी कह रहा है।

सीखे, बनाए, साथ ले गए मिट्टी के गणेश…

भोपाल। मध्यप्रदेश की विपुल पुरासम्पदा की सुरक्षा रख-रखाव एवं इसके प्रचार प्रसार के उद्देश्य से संचालनालय पुरातत्व द्वारा प्रदेश में बिखरी उत्कृष्ट एवं पुरातत्वीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कलाकृतियों को संग्रहालयों में संरक्षित किया गया है। इन्हीं कलाकृतियों में से उत्कृष्ट कोटि की विलक्षण एवं अ‌द्भुत पुरातत्वीय प्रतिमाओं की प्रतिकृतियों का निर्माण प्रतिकृति शाखा द्वारा किया जाता है। इसके प्रचार-प्रसार एवं जनसामान्य में पुरातत्वीय प्रतिमाओं के प्रति जगरूकता के लिए यह आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

“मेरे माटी के गणेश” के निर्माण की प्रसांगिकता हमारे आदिकाल प्रकृति जिस तरह पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी और 29 प्रतिशत मिट्टी की अवधारण को अंगीकृत करते हुये मिट्टी के गणेश निर्माण की यह कार्यशाला सोमवार को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं जनसामान्य उपस्थित हुये उनके द्वारा स्वयं मिट्टी के गणेश तैयार किये गये यह ईको फ्रेंडली गणेश वे अपने साथ ले गये, साथ ही विभागीय प्रतिकृतियों को तैयार करने के शैली से भी सभी को परिचित कराया गया। उक्त सम्पूर्ण आयोजन आयुक्त, पुरातत्व उर्मिला शुक्ला के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर ज्योति सुन्हरे, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, सारंगपुर जिला-राजगढ़ ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया एवं स्वयं ने गणेश प्रतिमा निर्मित की एवं विभागीय गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।

म.प्र.में तहसीलदारों के विरोध पर सख्त हुआ शासन,अनुपस्थिति पर गिरेगी गाज


विरोध में कार्यस्थल छोड़ने वालों पर कलेक्टर कमिश्नर करेंगे कार्यवाही, आदेश हुआ जारी

जीतेन्द्र सेन
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन ने तहसीलदारों और अन्य राजस्व अधिकारियों की कार्यस्थल से अनुपस्थिति और विरोध प्रदर्शनों पर सख्त रुख अपनाया है। आदेश में कहा गया है कि ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जो ड्यूटी छोड़कर विरोध में शामिल होंगे, उनके खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1965 के तहत तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
आपको बता दें कि 3 जून 2025 के मंत्रि-परिषद निर्णय के आधार पर आदेश जारी किया गया जिसमें कार्यस्थल छोड़कर विरोध, हड़ताल,धरना, अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है जिसके तहत नियम 1965 के तहत इसे कदाचार माना जाएगा। इसके लिए सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी हुए हैं कि राजस्व अधिकारी कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। क्योंकि इनके विरोध से राजस्व कार्य बाधित हो रहे है। आपको बता दे कि हाल ही में कई जिलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। इससे जमीन संबंधी कार्य, नामांतरण और अन्य राजस्व सेवाएं प्रभावित हुई। अब शासन के इस आदेश के बाद ऐसे कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई तप मानी जा रही है।
राज्य शासन के राजस्व विभाग से 14 अगस्त 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि जो भी राजस्व अधिकारी अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित रहेंगे और शासन के आदेशी/घोजनाओं के विरुद्ध विरोध या आंदोलन करेंगे, उनके खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मध्यप्रदेश शासन ने स्पष्ट किया है कि 3 जून 2025 को लिए गए मंत्रि-परिषद निर्णय के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती हैं और इन पर कोई डील नहीं दी जाएगी। आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग के स्थाई निर्देश (22 नवम्बर 2006) का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी सेवकों के हड़ताल, धरना, सामूहिक अवकाश और कामकाज में बाधा डालने वाले कृत्य सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कदाचार माने जाते हैं।
पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि अनुपस्थित रहकर शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम, पद और कृत्यों का ब्यौरा तत्काल विभाग की ओर भेजा जाए, ताकि बिना देरी के कार्रवाई की जा सके।

बात में कुछ दम है, यूंही कोई दीवाना नहीं होता, सारणी के वकील के हिस्से एक मिलियन व्यूवर्स का रिकॉर्ड

भोपाल। वह कुछ कहते हैं तो अफसाना बन जाता है। हर कोई उनका दीवाना बन जाता है। बात कुछ इस सलीके से कही गई कि देखते ही देखते अकेले शुरू हुए सफ़र के साथ कारवां जुड़ गया। मप्र के सारणी के अय्यूब मंसूरी के साथ अब एक मिलियन व्यूवर्स जुड़ गए हैं। पेशे से एक अधिवक्ता जितने अपने कार्य के लिए समर्पित हैं, उससे ज्यादा उनमें रिश्ते निभाई की कला है। यही वजह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर हर सामाजिक क्षेत्र में उनके नाम की पुकार है।
वरिष्ठ अधिवक्ता व वरिष्ठ पत्रकार अय्यूब मंसूरी ने फेसबुक क्रिएटर के रूप में एक मिलियन व्यूवर्स का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। इसके पहले भी एक मिनट से ऊपर देखने वाले दर्शकों की संख्या में 10 लाख प्रतिशत की बढ़ोतरी का रिकॉर्ड भी उनकी झोली में आया है, जो बैतूल जिले के लिए गौरव की बात है। मोक्षधाम में कई अंत्येष्टि के मौन धारण करने, गाय का सफल रेस्क्यू करने, तुलसी विवाह वाली रात में पंडित के न मिलने पर गायत्री मंत्र से विवाह रचाने, रामनवमी और धार्मिक जुलूस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर पुष्प वर्षा करने, माइक पर हनुमान चालीसा पढ़ने, रामसत्ता के मंच संचालन करने, गरीबों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने, हरिद्वार में हर की पौड़ी के दर्शन करने, गरीब बच्ची की शादी का खर्च उठाकर कन्यादान करने, रंगारंग कार्यक्रम करने, सारनी में कॉलेज खोलने में अहम भूमिका निभाने, सारनी में ईटीवी चैनल में मिसेज भाग्यशाली के 6,6, एपिसोड की शूटिंग कराने, प्रदेश स्तरीय प्रेमपत्र प्रतियोगिता कराने, शहर को पर्यटक स्थल बनाने के लिए प्रयास करने के अलावा सभी के सामाजिक धार्मिक कार्यों में आगे आ कर बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। जब मंसूरी से उनकी सफलता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा मैं सभी को चाहता हूं, इसलिए सभी धर्म समाज के लोग भी मुझे चाहते हैं। इसलिए मेरी फेसबुक आईडी में मुझे लगातार दर्शक देख रहे हैं।

आ गया फरमान : हज कमेटी की नजर हाजियों के 30 अरब रुपए पर

कुर्रे के साथ ही जारी कर दी पहली किस्त की मांग,मई 2026 में होगा हज सफर

खान आशु
भोपाल। मई 2026 में होने वाली हजयात्रा के लिए सेंट्रल हज कमेटी को पैसा 8 महीने पहले चाहिए़। इस मांग की तैयारी उसने प्रदेशों का हज कोटा और इसके मुताबिक कुर्रा करने से पहले ही कर ली थी। दरअसल उसकी नजर हाजियों से मिलने वाले करीब 30 अरब रुपए पर है। जिसका बैंक ब्याज उसे 8 महीने तक मिलता रहेगा। इस राशि का उपयोग कमेटी क्या करती है, इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने हज कुर्रा के तुरंत बाद 13 जुलाई की शाम को चयनित हाजियों से पहली किस्त की रकम मांग ली है। यह रकम 20 अगस्त की समय सीमा में डीडी के जरिए जमा करने के लिए कहा गया है। 1 लाख, 52 हजार, 300 रुपए से 300/रुपए नॉन रिफंडेबल बताए गए हैं। इस प्रक्रिया से पूरे देश से करीब 30 अरब रुपए जमा होने की उम्मीद की जा रही है।

8 महीने होगा उपयोग
देश भर से करीब 2 लाख हाजी मुकद्दस सफर पर जाते हैं। इन चयनित हाजियों से पहली किस्त के रूप में 1 लाख, 52 हजार, 300 रुपए की राशि मांगी गई है। इसके मुताबिक हज कमेटी को 30 अरब, 460 लाख रुपए जमा होंगे। इसका इस्तेमाल मई माह में होने वाले हज के लिए किया जाएगा। तब तक यह राशि हज कमेटी के बैंक खाते में जमा रहेगी। इस पर मिलने वाला ब्याज भी हज कमेटी को मिलेगा, जिसका कोई हिसाब नहीं है।

कमेटी कर रही गैर शरई काम
मजहब ए इस्लाम में ब्याज का लेना और यहां तक कि लेना भी गैर शरई माना जाता है। हज कमेटी मिलने वाले बैंक ब्याज से क्या काम कर रही है, यह नहीं बताया गया है। लिए हज जैसे मुकद्दस सफर में अगर यह राशि शामिल होती है तो किसी अकीदतमंद के हज खर्च में ब्याज का घालमेल होने की संभावना रहेगी।

कैसे जमा होंगे 20 तक
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने पहली किस्त 20 अगस्त तक जमा कराने के लिए कहा है। लेकिन 13 अगस्त की शाम आए इस फरमान की सूचना चयनित हाजियों को 14 अगस्त को दी गई है। इसके बाद 15, 16 और 17 को बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद उन्हें पहली किस्त की राशि जमा करने के लिए महज तीन दिन का समय मिलेगा।

इनका कहना है
हज कमेटी ऑफ इंडिया किस्तों में राशि की मांग करती है। पैसा भी उनके खाते में ही जमा होता है। अंतिम तारीख बढ़ाने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
रफत वारसी
अध्यक्ष, प्रदेश हज कमेटी

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