विक्रमादित्य की गौरवशाली परम्पराओं को सीखकर आगे बढ़ें युवा : डॉ. राजपुरोहित

 

 

• डॉ वाकणकर की धरोहर को समर्पित दो दिवसीय समारोह का समापन

 

भोपाल। सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा है। उनकी शिक्षाओं और कथाओं को सदैव याद रखने की आवश्यकता है। युवाओं को इन ऐतिहासिक प्रसंगों से सीख लेकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

राजधानी भोपाल के राज्य संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने यह बात कहीं। वे यहां संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय मप्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बात कर रहे थे। इस अवसर पर प्रो. सीताराम दुबे ने डॉ. वाकणकर की अनुसंधान परंपरा और ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार भीमबेटका जैसी खोजों ने न केवल मध्यप्रदेश की पुरातत्व दृष्टि को समृद्ध किया, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। गौरतलब है कि प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की जयंती के उपलक्ष्य में संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के अंतर्गत डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान ने यह दो दिवसीय आयोजन किया था। सचिव, मप्र शासन संस्कृति विभाग एवं आयुक्त, पुरातत्व के मार्गदर्शन में इस गरिमामयी आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और प्रेरणादायक व्याख्यानों से भरपूर रहा।

 

हुआ पुस्तकों का विमोचन

डॉ. वाकणकर की जयंती को समर्पित इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। पहली पुस्तक वाकणकर संस्थान द्वारा वर्ष 2023-24 में किए गए कार्यों पर आधारित थी। दूसरी पुस्तक डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित को समर्पित थी और तीसरी पुस्तक प्रसिद्ध भीमबेटका शैलाश्रयों पर केंद्रित थी। इन पुस्तकों का विमोचन संयुक्त संचालक व निदेशक, डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान डॉ. मनीषा शर्मा एवं आमंत्रित अतिथियों ने किया।

 

कला का मिला ईनाम

कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। जिसमें चित्रकला और निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। चित्रकला प्रतियोगिता में अद्वित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता में साहिल भड़के विजेता रहे। आयोजन में भोपाल के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ध्रुवेंद्र जोधा ने किया।

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विरासत स्थलों के संरक्षण को नया आयाम – वर्षा जल प्रबंधन

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश द्वारा “विरासत स्थलों का सुरक्षात्मक संरक्षण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन आज सफलतापूर्वक हुआ। यह कार्यक्रम विरासत स्थलों के संरक्षण को हरित व स्थायी समाधान के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विरासत स्थलों को क्षरण से बचाने के साथ-साथ जल संसाधनों के समुचित उपयोग को समझना और लागू करना था।

इस कार्यक्रम के बारे में बताते हुए डॉ. रविन्द्र ठाकुर ने संरक्षण के क्षेत्र में वर्षाजल प्रबंधन को एक नई दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा,
“हमारी धरोहरें पानी के पास जन्मी हैं — बावड़ियाँ, तालाब, सरोवर और नदियाँ, ये सब हमारे इतिहास के साक्षी हैं। जल प्रबंधन की पारंपरिक पद्धतियों को समझना और उन्हें पुनर्जीवित करना, संरक्षण के साथ-साथ समाज को भी जल संकट से उबारने का मार्ग है।”
कार्यक्रम में वर्षाजल के कारण होने वाली क्षतियों तथा उन्हें रोकने के उपायों पर केंद्रित प्रस्तुतियाँ, तकनीकी सत्र, फील्ड विज़िट, और ओपन डिस्कशन का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट, ग्राउंड वाटर रिजर्वेशन, रनऑफ वॉटर मैनेजमेंट, रूफ वॉटर ट्रीटमेंट और बावड़ियों के पुनर्जीवीकरण जैसी तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (WALMI) की फील्ड विज़िट कराई गई, जहां उन्हें कैचमेंट एरिया डिमार्केशन, वर्षाजल संचयन प्रणाली, ग्राउंडवॉटर रिचार्जिंग, और परफोरेटेड पाथवे जैसी तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के मूल्यांकन, प्रश्नोत्तर सत्र, और प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर संचालनालय की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा भी उपस्थित रहीं।

समझाइश के बाद भी नहीं मान रहे किसान, एक दर्जन कृषकों पर फिर हुआ जुर्माना

भोपाल। कलेक्टर भोपाल के निर्देश पर जिला प्रशासन का अमला लगातार सक्रिय है और क्षेत्र में भ्रमण कर किसानों से पराली न जलाने की अपील निरंतर की जा रही है। हालांकि कहीं जिला प्रशासन की समझाइश का मिला जुला असर देखने को मिल रहा है तो कहीं किसान बेखौफ नरवाई जला रहे हैं। बैरसिया तलसील के अंतर्गत लगभग एक दर्जन लोगों पर 52 हजार 500 सौ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसी क्रम में जनपद पंचायत बैरसिया के सभागार में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैरसिया आशुतोष शर्मा ने वन, राजस्व एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारीयों और कर्मचारियों की बैठक ली। बैठक  में  विभिन्न मुद्दों पर नवीन शासकीय निर्देशों से सभी उपस्थित शासकीय सेवकों को अवगत कराया गया तथा कलेक्टर द्वारा पराली जलाने का निषेध करने संबंधी आदेश के बारे में बताया गया एवं इन तीनों विभागों के कर्मचारियों को संयुक्त रूप से बैरसिया अनुभाग में कृषकों को नरवाई न जलाने की समझाईश देने एवं इसके उपरांत भी पराली जलाने की घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित जनों पर पर्यावरण शुल्क के बतौर जुर्माना अधिरोपित करने एवं अन्य दंडात्मक कार्यवाहियां करने हेतु निर्देशित किया गया। इसके साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत राजस्व विभाग के कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि राज्य शासन के निर्देशानुसार समस्त निर्मित जल संरचनाओं का खसरे में इंद्राज करना सुनिश्चित करें ।

वन विभाग के अधिकारी गणों के द्वारा लघु वन उपज के परिवहन से संबंधित एवं वृक्षों के हित संरक्षण से संबंधित नवीन प्रावधानों से समस्त विभागीय कर्मचारियों को अवगत कराया गया। इसके पश्चात वन विभाग के अधिकारी गणों के साथ वनों में वनचर पशुओं के लिए गर्मी में पीने के पानी की व्यवस्था किए जाने से संबंधित निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी किया गया। उक्त बैठक में अनुविभागीय अधिकारी वन धीरज चौहान, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बैरसिया दिलीप कुमार जैन, वन परिक्षेत्र अधिकारी नजीराबाद दीपक श्रीवास्तव, वन परिक्षेत्र अधिकारी बैरसिया संजय राजपूत, नायब तहसीलदार बैरसिया प्रेम प्रकाश गोस्वामी, मिट्ठूलाल पंवार सहित तीनों विभागों के मैदानी कर्मचारी उपस्थित थे।

महिला अधिकारियों से दुर्व्यवहार का मामला: जांच नहीं, जुगाड़ चला
आरोपी को मिला मुख्यालय में अटैचमेंट, एमडी की भूमिका सवालों में

फेवरिज़्म के आरोपों से घिरा प्रबंधन, कार्रवाई की बजाय मिली सुविधा, कर्मचारी और महिलाएं दोनों आहत

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ के अंतर्गत संचालित बरखेड़ा पठानी स्थित लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र में संविदा पर पदस्थ वैज्ञानिक डॉ. दीपक द्विवेदी पर महिला अधिकारियों के साथ अशोभनीय व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगने के बावजूद विभाग ने उनके विरुद्ध कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। इसके विपरीत, उन्हें ‘सम्मानजनक’ रूप से संघ के मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है। यह फैसला विभाग के प्रबंध संचालक विभाष कुमार ठाकुर द्वारा लिया गया, जिसने न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि महिला अधिकारियों की सुरक्षा और गरिमा को लेकर शासन की मंशा पर भी गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, बीते सप्ताह के भीतर दो महिला अधिकारियों ने डॉ. द्विवेदी के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। पहली शिकायत केमिकल साइंटिस्ट विजेयता श्रीवास्तव द्वारा की गई थी, जिसमें निरंतर मानसिक प्रताड़ना और अपमानजनक व्यवहार का आरोप था। दूसरी शिकायत समीक्षा बैठक के दौरान की गई घटना को लेकर थी, जहाँ डॉ. द्विवेदी ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से न केवल अभद्र भाषा में बात की, बल्कि रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से भी इनकार कर दिया। इस दौरान कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने उक्त व्यवहार को अत्यंत आपत्तिजनक बताया।
इन शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर तत्काल कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि उलटे, प्रबंध संचालक द्वारा डॉ. द्विवेदी को उनके अनुरोध पर मुख्यालय में तैनात कर दिया गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह तैनाती विभागीय मानकों के प्रतिकूल है और इससे साफ संदेश गया है कि आरोपी अधिकारी को संरक्षण दिया जा रहा है। इससे प्रबंध संचालक विभाष कुमार ठाकुर की भूमिका भी कटघरे में आ गई है। इस संबंध में लघु वनोपज संघ का पक्ष जानने के लिए के प्रबंध संचालक ठाकुर एवं संविदा वैज्ञानिक द्विवेदी से सम्पर्क करने की कोशिश की, पर सम्पर्क नहीं हो पाया।

विभाग के अंदर इस घटनाक्रम को लेकर जबरदस्त असंतोष है। कर्मचारी वर्ग इस निर्णय को महिला सम्मान और संस्थागत अनुशासन के खिलाफ मान रहा है। कई अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि ऐसा ही संरक्षण मिलता रहा, तो महिला अधिकारी भविष्य में किसी भी प्रकार की शिकायत करने से हिचकेंगी। इससे विभागीय वातावरण असुरक्षित और पक्षपातपूर्ण बन जाएगा।

प्रशासनिक सूत्रों का यह भी कहना है कि डॉ. द्विवेदी का कुछ प्रभावशाली अधिकारियों से निकट संबंध रहा है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई। यही कारण है कि विभाग में यह धारणा बन रही है कि अगर कोई अधिकारी उच्च संपर्क में है, तो उसे किसी भी तरह की शिकायत से डरने की आवश्यकता नहीं है।
इस पूरे प्रकरण ने शासन की महिला सुरक्षा और सम्मान की नीति पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। एक ओर मुख्यमंत्री मंचों से महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही अधीनस्थ विभाग में महिला अधिकारियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे यह आभास होता है कि सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले को लेकर कोई सख्त कदम उठाती है या इसे भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। यदि इस पर शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना विभाग की साख के साथ-साथ महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और आत्मसम्मान को भी गंभीर खतरे में डाल सकती है।

नल जल योजनाओं के निरीक्षण हेतु दल गठित  किए गए:: जिला पंचायत सीईओ ने आदेश किया जारी

जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने जनपद पंचायत फंदा और बैरसिया अंतर्गत स्वीकृत हस्तांतरित ट्रायलरन प्रगतिरत नल जल योजनाओं के निरीक्षण जांच कराने के लिए सोमवार को आदेश जारी कर दल गठित किए गए हैं। गठित दल में उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अनुभाग फंदा एवं बैरसिया उपयंत्री जनपद पंचायत फंदा एवं बैरसिया सचिव  ग्राम रोजगार सहायक संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र के संबंधित जिला पंचायत सदस्य को अवगत कराते हुये निरीक्षण एवं जांच कार्य सम्पादित करेंगे। संबंधित दल ग्राम पंचायत में मौके पर जाकर नलजल योजना की वर्तमान स्थिति योजना प्रारंभ है या योजना बंद पड़ी हुई है (कारण सहित) ग्राम पंचायत में वर्तमान में पेयजल की स्थिति आदि की जानकारी पूर्ण-अपूर्ण ट्रायलरन प्रगतिरत नलजल योजनाओं से संबंधित निरीक्षण जांच प्रतिवेदन 03 दिवस में अधोहस्ताक्षरकर्ता को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

कृषकों से संवाद कर बताए गए पराली जलाने के नुकसान

भोपाल संवाददाता। कलेक्टर भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह के आदेश पर बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा ने राजस्व विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारी कर्मचारीयों के साथ भ्रमण कर किसानों से संवाद किया । उन्होंने ग्रामीण जनों को नरवाई जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर विस्तृत जानकारी दी। संवाद के दौरान कृषकों को बताया गया कि नरवाई जलाना किस तरह से न केवल पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाता है बल्कि उनके स्वयं के खेतों की उत्पादन क्षमता को भी कम करता है । इसके साथ ही कलेक्टर द्वारा पराली जलाने पर प्रतिबन्ध लगाए जाने की जानकारी भी ग्रामीणों से साझा करते हुए उनसे अपने खेतों में नरवाई ना जलाने तथा रोटावेटर के माध्यम से अपने खेतों में ही मिला देने की अपील की गई।इसके पूर्व गूगल मीट के माध्यम से तहसील एवं जनपद पंचायत के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने-अपने ग्रामों में बैठके आयोजित करके कृषक जनों को एवं ग्रामीण जनों को इस संबंध में जागरूक करने हेतु निर्देशित किया गया एवं शासकीय कर्मचारियों को विभिन्न शासन के आदेशों से अवगत कराया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि पराली या नरवाई जलाए जाने पर 2 एकड़ से कम भूमि धारण करने वाले कृषक पर ढाई हजार रुपए, 2 एकड़ से 5 एकड़ के बीच भूमि धारण करने वाले कृषक पर ₹5000 एवं 5 एकड़ से अधिक भूमि धारण करने वाले कृषक पर₹15000 तक का पर्यावरणीय शुल्क दंड स्वरूप लगाया जा सकता है।

विश्व धरोहर दिवस : पर्यटक पहुंचे जगदीशपुर, देखी इतिहास की विराट छवि

हेरिटेज वॉक में शामिल हुए डेढ़ सौ से ज्यादा विरासत प्रेमी
बारीकी से देखी कला, समझा काल का इतिहास

भोपाल। विश्व धरोहर दिवस पर राजधानी भोपाल में इतिहास प्रेमियों का हुजूम दिखाई दिया। हेरिटेज वॉक पर निकले पर्यटकों का पड़ाव जगदीशपुर(इस्लाम नगर) जाकर ठहरा। यहां प्राचीन महलों का आर्किटेक्ट, इनके निर्माण का इतिहास, धरोहर में समाई संस्कृति और कलां को निहारते इनका दिन बीता। सुबह से लेकर देर दोपहर तक चली इस हेरिटेज वॉक के बाद इनकी जिज्ञासु झोली में कई जानकारियां भरी थीं। अपने इतिहास को जानने समझने की संतुष्टि भी इनके मन में थी, साथ ही अपनी विरासत को सहेजने, संरक्षित करने और इसको संवारने का एक अकथनीय संकल्प भी यह लेकर चले।
विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सचिव, म.प्र. शासन संस्कृति विभाग एवं आयुक्त पुरातत्व उर्मिला शुक्ला के मार्गदर्शन में सम्पूर्ण प्रदेश में हेरिटेज वॉक सहित विभिन्न आयोजन किये गए | कार्यक्रम में विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रही एवं उनके द्वारा धरोहर के महत्व एवं संरक्षण की दिशा में की जा रही विभागीय पहलों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में राजस्थान उप  पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र , अर्जुन सिंह, सिजल शेखावत, जयपाल सिंह, शिशुपाल आदि शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता आशुतोष उपरीत के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विश्व धरोहर दिवस की महत्वता एवं धरोहर संरक्षण में विभाग की निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर वरिष्ठ पुरातत्वीय अधिकारी डॉ. रमेश यादव ने चमन महल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके संरक्षण हेतु विभाग द्वारा किए गए प्रयासों एवं उसके स्थापत्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चमन महल का निर्माण राजपूत स्थापत्य शैली में हुआ है, जबकि इसके बगीचे को मुगल शैली में सजाया गया था।

क्विज से जानकारी
कार्यक्रम के दौरान ‘हेरिटेज क्विज़’ का आयोजन किया गया। यह सत्र रोचक प्रश्नों एवं संवादों से भरपूर रहा, जिससे प्रतिभागियों में ऐतिहासिक स्थलों के प्रति जिज्ञासा और जागरूकता बढ़ी।

जाना अपना चमन
उप संचालक निलेश लोखंडे ने प्रतिभागियों को चमन महल के बारे में संक्षिप्त विवरण प्रदान किया।  नम्रता यादव, कीपर, राज्य संग्रहालय भोपाल ने  सम्पूर्ण कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रदेशभर में रही हलचल
विश्व धरोहर दिवस पर राजधानी भोपाल के अलावा अन्य क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सागर, दमोह एवं अन्य  शहरो में  ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गए।

वर्ल्ड हैरिटेज डे : अपनी विरासत के लिए उठेंगे कदम, जानेंगे धरोहर का महत्व

भोपाल। विश्व धरोहर दिवस के एक दिन को यादगार, जानकारीपरक और अपने इतिहास पर गौरांवित होने जैसा बनाने की तैयारी की गई है। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय मप्र ने इसके लिए विशेष तैयारी की है। 18 अप्रैल को प्रदेश भर में अलग अलग आयोजन के माध्यम से अपनी विरासत से वर्तमान और भावी पीढ़ी को रूबरू कराने और इनसे जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। हेरिटेज वॉक के माध्यम से अपनी विरासत को देखने, जानने, समझने और उनके प्रति रुचि बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

आयुक्त संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय मप्र उर्मिला शुक्ला ने बताया कि विश्व धरोहर दिवस पर राजधानी भोपाल समेत प्रदेश में विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष हेरिटेज वॉक का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य संग्रहालय, भोपाल से जगदीशपुर तक नि:शुल्क बस सेवा प्रदान की जाएगी। साथ ही, जलपान एवं भोजन की समुचित व्यवस्था भी आयोजकों द्वारा की गई है।
ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. मनीषा शर्मा ने बताया कि विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर प्रदेशभर की विरासत के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस क्रम में राजधानी भोपाल में समीपस्थ जगदीशपुर(इस्लाम नगर) के स्मारकों पर जाकर हेरिटेज वॉक किया जाएगा। इसके अलावा इंदौर, रीवा, जबलपुर, ग्वालियर आदि में इसी तरह के आयोजन किए जाएंगे। इन हेरिटेज वॉक के जरिए लोगों को अपनी धरोहर के प्रति जागरूक करने की मंशा है।

निःशुल्क रहेंगे संग्रहालय
संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय मप्र के अधीन सभी संग्रहालय, स्मारक और हेरिटेज भवन 18 अप्रैल को पर्यटकों के लिए निःशुल्क खुले रहेंगे।

विधायक पुत्र चाचा संग पहुंचा माफ़ी मांगने:संगठन के निर्देश पर हुआ सरेंडर !

इंदौर में संगठन मंत्री ने दो घंटे बंद कमरे में की बैठक

इंदौर-3 के विधायक गोलू शुक्ला के बेटे रुद्राक्ष शुक्ला ने मंगलवार देर रात देवास की चामुंडा टेकरी पहुंचकर पुजारी के पैर छूकर माफी मांगी। इससे पहले उन्होंने देवास कोतवाली थाने में सरेंडर किया, जहां पुलिस ने उन्हें मुचलके पर जमानत दे दी। हालांकि, रुद्राक्ष ने इस दौरान मीडिया से किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया। देवास टेकरी विवाद को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सख्ती दिखाई। सोमवार को दिल्ली में पार्टी आलाकमान ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बयान दिया था कि “कोई भी हो, कानून सबके लिए एक समान है, और दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” संघ की ओर से भी नाराजगी जताई गई थी।
*आलाकमान की सख्ती के बाद बदली रणनीति*
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, मामले को शांत करने के लिए पहले यह तय किया गया था कि विधायक गोलू शुक्ला और रमेश मेंदोला देवास जाकर पुजारी और उनके परिवार से मिलेंगे। इसकी सूचना जनसंपर्क माध्यम से भी जारी की गई थी। लेकिन जब यह जानकारी संगठन तक पहुंची तो इसे रोक दिया गया। संगठन ने कहा कि विधायक पार्टी का चेहरा हैं, और उनके जाने से पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। इसके बाद तय हुआ कि रुद्राक्ष शुक्ला स्वयं देवास जाकर पहले थाने में सरेंडर करेंगे और फिर पुजारी से क्षमा मांगेंगे।

संगठन मंत्री की बैठक में हुआ अंतिम निर्णय

बीजेपी संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने इस पूरे मुद्दे को लेकर इंदौर के भाजपा कार्यालय में दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की। इसमें पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, विधायक, जिलाध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष शामिल हुए। बैठक में हितानंद शर्मा ने स्पष्ट कहा कि अब इस विवाद पर किसी भी नेता को बयानबाजी नहीं करनी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि विधायक खुद को और पार्टी को विवादों से बचाएं, और बेटे को भी शांत रहने के लिए कहें। संगठन चाहता है कि अब मामला पूरी तरह शांत हो और मीडिया में इसे लेकर कोई नई प्रतिक्रिया न आए।चाचा के साथ पहुंचा था थाने, चार साथी भी आए साथ
रूद्राक्ष शुक्ला मंगलवार शाम 7:40 बजे अपने दोनों चाचा बब्बी शुक्ला और कमल शुक्ला के साथ कोतवाली थाने पहुंचे। उनके साथ चार अन्य युवक—अनिरुद्ध पंवार, अमन शुक्ला, लोकेश चांदवानी और मनीष तेजवानी भी मौजूद थे। एएसपी जयवीर सिंह भदौरिया ने बताया कि सभी पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

संघ के वरिष्ठ प्रचारक ने जताई नाराजगी

मध्य भारत क्षेत्र के पूर्व प्रचार प्रमुख और वरिष्ठ प्रचारक नरेन्द्र जैन ने सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने लिखा—“सत्ता के लालच में कुकृत्य कब तक ढोएगी भाजपा?” साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि विधायक से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है, न कि कोई आधिकारिक बयान।

प्रदेश अध्यक्ष का बयान – ‘किसी को भी नहीं है आपराधिक कृत्य करने का अधिकार

‘प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने साफ शब्दों में कहा, “चाहे वह विधायक का बेटा हो या कोई और, किसी को भी अपराध करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन कार्रवाई कर रहा है और कानून अपना काम करेगा।”
विजयवर्गीय बोले- ‘अरे छोड़ो यार’
जब मीडिया ने भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय से इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने टालते हुए सिर्फ इतना कहा- “अरे छोड़ो यार।”

दिग्विजय सिंह का आरोप- ‘शराब के नशे में था विधायक पुत्र

‘राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रुद्राक्ष शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह शराब के नशे में चामुंडा टेकरी पहुंचा था। पुजारी के मना करने पर उससे मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों पर इस तरह का व्यवहार भाजपा की धर्मनिष्ठा पर सवाल खड़े करता है।

शराब पर रार, दीदी की हुंकार, कौन है चौकीदार अब क्या करेगी सरकार…

पटियेबाजी


भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

कैलेंडर के कुछेक पन्नों को या दिमागी याददाश्त को पीछे की ओर पलटा जाए तो वे सारे घटनाक्रम बरबस ही ताजा हो जाएंगे जिनमें भाजपा की फायरबांड नेत्री और सूबे की मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती ने शराब के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था… अप्रैल की गर्म हवाओं के आगोश में उड़तीं पुरानी खबरों की कतरनें शराब दुकान पर पत्थरबाजी की गवाही देती नजर आ रही हैं, तो मोबाइल स्क्रीन पर सरकती अंगुली दीदी के पुराने ट्वीट पर जाकर ठहर जाती है…मामला तब भी शराब पर आधारित था और मामला अब फिर वहीं आकर अटक गया है दीदी का ताज़ा ट्वीट फिर वायरल है, ट्वीट के मुताबिक दीदी फिर शराब को लेकर क्रोधित और आंदोलित हैं… मदिरा को लेकर मुखर होने के पीछे दीदी की मंशा दीदी ही जानें लेकिन राजनीति के पंडितों की मानें तो दीदी को महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध की चिंता सता रही है जिसका जिक्र दीदी ने अपने ट्वीट में भी किया है… इधर विपक्षी गलियारों से बहने वाली बयार बता रही है कि दीदी को ढाल बनाकर मोहन को निशाने पर लेने की रणनीति बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है, तो उधर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की नीति पर चलने वाले प्रबुद्ध लोगों के अनुसार दीदी के ट्वीट फिर से सुर्खियों में छाने की कोशिशों के सिवा कुछ भी नहीं है… सबके अपने आंकलन हैं सबके अपने मत हैं कुछ दीदी से सहमत तो कुछ असहमत भी हो सकते हैं, मौजूदा सरकार से लगातार बातचीत होने के बाद भी शराब नीति के प्रभावी तरीके से लागू न हो सकने पर दीदी ने सवाल उठाया है… सरकार की अनसुनी पर कुछ भी कहना जल्दबाजी इसलिए होगी कि मध्यप्रदेश में राजस्व का बड़ा हिस्सा आबकारी विभाग से आता है, विगत चार महीनों से दीदी के मन में पल रही पीड़ा अब गहरी पैठ जमाकर नासूर बन गई है लिहाजा नाराज़ दीदी अब चौकीदार जिंदा है कहने को मजबूर हो गईं… पटियेबाजों के बीच उपजा बड़ा सवाल ये है कि क्या अब दीदी प्रदेश की नई चौकीदार हैं? या फिर चौकीदार शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर सिर्फ इसलिए किया गया है कि पीएम ऑफिस की नजर इस पूरे मामले पर गड़ी रहे… वहीं दीदी ने पिछली पत्थरबाजी से हुई किरकिरी से शायद सबक लेकर ही इस बार गाय के गोबर को इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है, या फिर शराब विरोध को किसी भी बहाने गाय से जोड़ने की कोशिश की गई है ये विश्लेषकों के लिए शोध का विषय हो सकता है… लंबे इंतजार और सरकार से बातचीत के बाद दीदी का फिर से शराब नीति पर मुखर होना सूबे की सियासी हलचल बढ़ा रहा है, गाय और गोबर से मोहन को घेरने की जुगत में लगे चौकीदार के अगले कदम का सभी इंतजार कर रहे हैं…

*15-04-2025*

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