जिला प्रशासन के प्रयासों को चुनौती देने की तैयारी में नीयतखोर
खान अशु
भोपाल। भूमाफिया और दलाल ने मिलकर एक ऐसी जमीन का सौदा कर दिया, जिसपर उनका अधिकार ही नहीं था। डिप्टी रजिस्ट्रार को भी इस गड़बड़झाले में शामिल कर लिया गया। उन्होंने आँखें मूंदकर वक्फ की इस जमीन को रजिस्टर कर दिया। जब नामांतरण की बारी आई तो जिला प्रशासन ने इस घोटाले में साथ देने से इनकार कर दिया। अब हठधर्मिता अपनाते हुए दलाल जिला प्रशासन के फैसले के खिलाफ जाने को तैयार बैठे हैं।सूत्रों का कहना है कि नरसिंहपुर जिला मुख्यालय पर स्थित वक्फ संपत्ति दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़ा का सौदा कर दिया गया। इस जमीन से लगी एक जमीन बेचने के साथ यहां की निवासी शालिनी प्रजापति नामक महिला ने यह सौदा विश्वास गोटे नामक व्यक्ति से कर दिया। सूत्रों का कहना है कांग्रेस नेता की इस रिश्तेदार को सौदे में मदद यहां के एक जमीन दलाल प्रिंस अरोरा ने की। बताया जाता है कि उन्होंने ही भ्रमित कर और कूटरचित दस्तावेजों से डिप्टी रजिस्ट्रार प्रीतम रजक से इस जमीन की रजिस्ट्री करवा दी। सूत्रों का कहना है कि करीब एक करोड़ 24 लाख रुपए में हुए वक्फ जमीन के सौदे के खिलाफ स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता हुसैन पठान ने आवाज उठाई। उन्होंने वक्फ बोर्ड, जिला प्रशासन से लेकर अदालत तक यह मामला उठाया। बताया जाता है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने इसके नामांतरण पर रोक लगा दी है। लेकिन बताया जा रहा है कि तहसीलदार अमित कुमार रिनहीते के इस आदेश के खिलाफ दलाल प्रिंस अरोरा और शालिनी प्रजापति अपील करने की तैयारी कर रहे हैं।
जिला प्रशासन का साफ रवैया
सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन के संज्ञान में जब यह मामला आया तो तहसीलदार अमित कुमार रिनहीते ने फैसला दिया है। जिसमें उन्होंने इस नियमविरुद्ध जमीन सौदे पर नामांतरण करने से रोक दिया। उन्होंने अदालत से स्थिति स्पष्ट होने तक भूमाफिया, दलाल और रजिस्ट्रार के गोंडोबल को आगे बढ़ने से इनकार कर दिया। हालांकि यह गड़बड़ भरी कार्यवाही उनके कार्यकाल में होने से पहले पदस्थ रहे अधिकारी द्वारा अंजाम दी गई बताई जा रही है।
अब दलाल अपील की तरफ
सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ इस सौदे के दलाल प्रिंस अरोरा अपील करने का मन बना रहे हैं। शालिनी प्रजापति और विश्वास गोटे के बीच हुआ यह करोड़ी सौदा फिलहाल खटाई में पड़ा दिखाई दे रहा है। इधर सूत्रों का यह भी कहना है कि अरोरा इस तरह के कई विवादित सौदे करवाने का आरोपी है। उनके हर काम में डिप्टी रजिस्ट्रार रजक की भूमिका भी अहम बताई जाती है।
डिप्टी रजिस्ट्रार बच रहे
डिप्टी रजिस्ट्रार प्रीतम रजक से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
इनका कहना
नियमविरुद्ध बिना दस्तावेज जांचे रजिस्ट्री करने पर डिप्टी रजिस्ट्रार के खिलाफ विभागीय जांच हो सकती है। साथ ही साथ ही मिलीभगत प्रमाणित होने पर उनके खिलाफ BNS की धाराओं 336/420 का मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।मोहम्मद तारिक फाउंडर, नया कारवां नेशनल एनजीओ