भोपाल। आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जयन्ती के अवसर पर राजधानी के शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई स्नातकोत्तर महाविद्यालय राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया।
इस अवसर पर रन फॉर स्वदेशी उद्देश्य के तहत महाविद्यालय की छात्राओं ने विवेकानंद चौराहे पॉलीटेक्निक पर एक भव्य रैली का प्रदर्शन करते हुए “घर घर स्वदेशी, हर घर स्वदेशी“ के नारे लगाए।
रैली में छात्राओं के साथ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० अजय अग्रवाल और प्राध्यापक भी शामिल हुए। तत्पश्चात महाविद्यालय के सभागार में आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में डॉ० नीना जांगले विभागाध्यक्ष योग विभाग के निर्देशन में छात्राओं ने योगाभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन वनवासी कल्याण परिषद के संगठन मंत्री और प्रचारक तिलकराज दाँगी के उद्बोधन से हुआ। इस अवसर पर तिलकराज ने अपने वक्तव्य की शुरुआत स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में दिए गए भाषण से की। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 1893 को उनके द्वारा धर्म संसद में दिए गए भाषण आज भी उतना ही तर्कसंगत है, जितना उस समय था और तब से पूरा विश्व भारत को अध्यात्म के रूप में जानने लगा। तिलकराज ने विवेकानंद के जीवन की कई घटनाओं को सुनाते हुए छात्राओं के प्रेरणा लेने पर ज़ोर दिया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ० धनंजय वर्मा ने विवेकानंद के दार्शनिक सिद्धांतों पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि स्वामी विवेकानंद जी के पूरे दर्शन को हम इस तरह युवाओं के लिए कह सकते हैं कि वह SPAM की शिक्षा देते हैं S for स्पिरिचुअल ग्रोथ यानी आध्यात्मिक वृद्धि P मतलब फिजिकल Strength यानि शारीरिक शक्ति और M फॉर मेंटल डिसिप्लिन मानसिक अनुशासन आज की युवा यदि इस तीनों को लेकर चलेंगे तो भारत आने वाले समय में निश्चित रूप से वैश्विक गुरु बनेंगे। उनके द्वारा उनके जयंती पर 1985 से हम युवा दिवस मनाने लगे हैं और जब उनकी 150 में जयंती थी तब हम उनके जयंती के अवसर पर 2012 2013 से सूर्य नमस्कार भी करने लगे हैं। विवेकानंद की जयन्ती को युवा दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है और सूर्य नमस्कार, योगाभ्यास क्यों शामिल किया जाता है। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० अजय अग्रवाल ने अपने विचार प्रकट किए और अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
घर घर स्वदेशी की मंशा के साथ MLB कॉलेज में मना विवेकानंद दिवस
