स्पैम कॉल से मिलेगा छुटकारा! डिसप्ले पर नंबर के साथ दिखेगा फोन करने वाले का नाम, ट्रायल शुरू

डेस्क रिपोर्ट – देशभर में इन दिनों ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शातिर अलग-अलग नंबरों से फोन कर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बना रहे हैं। लेकिन अब जल्द ही इन फ्रॉड कॉल से छुटकारा मिलने वाला है। दरअसल टेलीकॉम कंपनियां इन दिनों इंटर ऑपरेटर ट्रायल कर रही हैं जो अगले हफ्ते तक पूरा हो जाएगा। अगर यह ट्रायल सफल रहा तो आपको फोन कॉल आने पर फोन नंबर के साथ फोन करने वाले का नाम भी डिसप्ले पर दिखाई देगा। इससे आप आसानी से इस बात का पता लगा पाएंगे कि क्या है फोन कॉल आपके लिए जरूरी है या नहीं।
बता दें कि टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट ने टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया है कि वे 18 अप्रैल तक ट्रायल पूरा कर उसकी रिपोर्ट जमा करें। जिओ और एयरेटल के बीच ट्रायल खत्म हो गया है। एयरटेल और वोडाफोन के बीच ट्रायल अगले हफ्ते शुरू किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनियां हरियाणा और महाराष्ट्र में ये ट्रायल कर रही हैं। ट्रायल सही साबित होता है तो सरकार इसे धीरे-धीरे शुरू करने का ऑर्डर देगी। शुरू में इसका फायदा 4जी और 5जी यूजर्स को मिलेगा, हालांकि 2G यूजर्स को इस सर्विस के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने कंपनियों को इस सर्विस को जल्द से जल्द शुरू करने का ऑर्डर दिया है। सरकार के इस फैसले के पीछे की वजह स्पैम कॉल्स पर रोक लगाना है।

सांसद डॉ लता वानखेड़े ने की मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से सौजन्य भेंट

ताशकंद उज़्बेकिस्तान की बैठक के अनुभव किया साझा

भोपाल। सांसद डॉ लता वानखेड़े ने सोमवार को खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से उनके कार्यालय पहुंचकर सौजन्य भेंट की। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सांसद डॉ लता वानखेड़े का स्वागत एवं अभिनंदन किया। बैठक के दौरान ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में आयोजित पांच दिवसीय अंतर संसदीय संघ की बैठक के अनुभव डॉ लता वानखेड़े ने मंत्री श्री राजपूत से साझा किया। श्री राजपूत ने सांसद डॉ लता वानखेड़े को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पर शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर हरिराम सिंह ,रोशन कुर्मी ,उमेश केवलारी,रवि ठाकुर, संजय सिंह बीना,अर्जुन पटेल,अशोक सिंह सेवन आदि उपस्थित रहे उपस्थित रहे।

जीवन प्रबंधन के महापुरोधा भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों में निहित है आत्म ज्ञान

महावीर जयंती पर विशेष

भगवान महावीर स्वामी जिनका नाम सुनते ही हृदय में अहिंसा, सत्य, दया और वात्सल्य के भावों की बल्लरियां हिलोरे मारने लगती हैं। सदाचरण और नैतिकतापूर्ण जीवन के हर मापदंड पर भगवान महावीर की शिक्षाएं, हमें आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उनके बताए हर सिद्धांत वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संजीवनी के समान कारगर साबित हो रहा है। 21वीं सदी आधुनिक तकनीकीकरण और सोशल मीडिया को समर्पित है। यह समय भौतिक चकाचौंध से भरा है। युवा आगे बढ़ने की होड़ में लगे हैं। आर्थिक विकास का मापदंड ही सब कुछ पाना है। संवेदना शून्य होते समाज में स्वार्थ हावी है। ऐसे में अगर मानव समाज में सामंजस्य बैठाना है, तो भगवान महावीर के ”जिओ और जीने दो” के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करना होगा।

भगवान महावीर जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं
वर्तमान में युवा, बुजुर्ग सभी डिप्रेशन और बीमारियों से ग्रसित हैं। मानसिक तनाव लोगों पर प्रभावी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस किसी ने भी भगवान महावीर को समझा है, वो कभी भी जीवन में डिप्रेस्ड नहीं हो सकता है। पैसा हो या न हो, यह जरूरी नहीं है। आज हम भगवान महावीर के जीवन से कुछ सीखने और सुखमय जीवन कैसे बनें इस प्रबंधन को समझने वाले हैं। भगवान महावीर का जीवन दर्शन सुखमय जीवन जीने की कला सिखाता है। सच्चे अर्थों में भगवान महावीर स्वामी हमारे गुरु हैं, क्योंकि उनकी शिक्षाएं जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं।

वर्धमान से भगवान महावीर बनने की यात्रा
भगवान महावीर श्रमण परंपरा के वह सूर्य हैं, जिनकी आभामात्र से हिंसक प्रवृत्ति, अहिंसावृत्ति में बदल जाती है। क्रूरता और क्रोधाग्नि का अकुंर फूटने से पहले ही विलय को प्राप्त हो जाता है। वर्धमान से भगवान महावीर बनने की यात्रा में हमें कठिन दिखाई देती है, लेकिन उनका मार्ग सबसे सरल है। वो कहते हैं, “स्वयं को जानना ही परमानंद है और यही मोक्षमार्ग का सोपान है। साथ ही संयम का मार्ग हमें आत्मनिर्भर बनने एवं पराश्रित बुद्धि से मुक्त करता है।” आज भले ही भगवान महावीर का संदेश आमजन के लिए न होकर जैनों तक सीमित लगता है, लेकिन यह बात सत्य नहीं है। उनका हर सिद्धांत विश्व के प्रत्येक मानव को जीवन जीने की कला सिखाता है। जिसने भी उन्हें जान लिया, वह कभी निराश नहीं हो सकता है और न ही कभी डरपोक और निरंकुश होगा, बल्कि हर परिस्थिति का वह धैर्य और संयम से सामना करेगा।

पैसे से सुख की प्राप्ति असंभव
भगवान महावीर की वाणी यथार्थ की संकल्पना को साकार करती है। हमारा गृहस्थ जीवन कैसे भौतिक संसाधनों व आध्यात्मिक अनुभूतियों के साथ सुखमय बनें, यह विचार मस्तिष्क में कई बार कौंधता तो जरूर है, लेकिन मन मसोट कर रह जाने की हमारी प्रवृत्ति ऐसे विचारों को जन्म देने के पहले ही कुचल देती है। नतीजतन यह घातक साबित होता है। हमारा जीवन पैसों की ओर भाग रहा है, लेकिन उस धन और भोग में सुख की अपेक्षा मानसिक वेदना अधिक समावेशित है।

जीवन प्रबंधन के गुरु हैं महावीर
जीवन को आनंद और शांतिपूर्ण बनाने के लिए भगवान महावीर द्वार कुछ अनमोल सिद्धांत दिए गए हैं, जिसे समझने मात्र से जीवन को गति और मन को असीम संतुष्टि की प्राति होती है। भगवान महावीर कहते हैं, ”जितनी जरूरत है, उतना संग्रह करें…” भगवान महावीर स्वामी ने पांच महाव्रत का उपदेश दिया है। उनमें से एक महाव्रत अपरिग्रह है। अपरिग्रह का अर्थ है, “परिग्रह” (जोड़ना, इकट्ठा करना) का अभाव, यह सिखाता है कि व्यक्ति को केवल वही लेना चाहिए, जिसकी उसे जरूरत है या जो काम आता है और अनावश्यक चीजों को छोड़ देना चाहिए।
अब आप समझें कि हम अंधी दौड़ में स्टेट्स मेंटेन करने की जुनूनी दुनिया में वह सब जोड़ने लगे हैं, जिसकी हमारे जीवन में कोई जरूरत नहीं है। ऐसी अनावश्यक वस्तुओं को जोड़ने में हम अपनी बुद्धि व शारीरिक बल को दांव पर लगा देते हैं और एक दिन ऐसा भी आता है, जब इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं और यह धन ऐशोआराम यहीं रह जाते हैं और मानसिक शांति छूमंतर हो जाती है। भगवान महावीर कहते हैं कि जीवन को कठिन नहीं सरल बनाओ, जो जितना स्वयं को जानने में लगा, वह उतना गहरा होता चला गया। अर्थात अनावश्यक वस्तुओं का जोड़ना समझदारी का काम नहीं है।

”न्याय से कमाओ, विवेक से खर्च करो”
भगवान महावीर खुद में एक प्रबल सिद्धांत हैं। उनके सत्य महाव्रत में सत्य के मौलिक अर्थों का उल्लेख मिलता है।
वह कहते हैं कि जो कुछ भी है, उसे ठीक-ठीक और स्पष्ट रूप से कहना, बिना किसी झूठ या कपट किए बिना सत्य को निष्ठा के साथ पेश करने की विधा ही जीवन को आनंदमय बनाती है। यह सत्य अगर जीवन में समाहित हो जाए, तो सारी समस्याएं खुद-ब-खुद हल हो सकती है। हम पैसा तो कमाना चाहते हैं, लेकिन हमारा तरीका दूसरे को छल-कपट से बर्बाद कर आगे बढ़ने की चाहत कतई सुख नहीं दे सकता है। महावीर स्वामी ने कहा है कि न्याय की कसौटी पर कमाया गया धन जीवन को सही दिशा और दशा प्रदान करता है। हम कमाते कितना है, उससे ज्यादा जरूरी है कि हम पैसे को कैसे खर्च करते हैं। अगर हमारी कमाई कम भी है, लेकिन उसे विवेकपूर्वक खर्च किया जाए तो हम सुखमय जीवन जी सकते हैं। हमेशा ही न्याय से कमाने और विवेक से खर्च करने की आदत ही जीवन में अपनानी चाहिए।

किसी का दिल न दुखाना ही जीवन का सबसे बड़ा कर्म

भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा महाव्रत का संदेश देते हुए कहा है कि किसी भी प्राणी के प्रति हिंसा का भाव मत रखो। चींटी से लेकर हाथी तक सभी जीवों में चेतना है। किसी को दर्द मत पहुंचाओ, किसी को मत सताओ, यही अहिंसा का मार्ग है। अगर हमने वाणी और वचनों से भी किसी को अपशब्द कहे हैं, तो वह भी हिंसा है और यह हिंसा भी हमें शांतिपूर्ण जीवन जीने से वंचित कर सकती है। अगर जीवन को सुखमय बनाना है, तो सरलता के साथ अहिंसक आचरण अपनाएं। जीवन को इतना पवित्र बनाएं कि हमें किसी को कटु शब्द न बोलना पड़े और ऐसे विचारों के साथ जब हम आगे बढ़ेंगे, तो निश्चित ही हमारा जीवन आनंदमय बनेगा।

मैत्री भाव व आपसी सामंजस्य की नींव रखें
भगवान महावीर स्वामी के जीवन को देखें, तो उनकी सादगी और शांत छवि को देखकर जंगल के क्रूर-हिंसक जानवर भी उनके पास आकर बैरभाव भूल जाते थे। सांप और नेवला, गाय और शेर एक साथ सरोवर में पानी पीते थे। महावीर स्वामी के जीवन का यह उद्धरण हमें बताता है कि आप जैसी संगती में रहते हैं, उसका असर आप पर पड़ता है। अत: अपने गृहस्थ जीवन को सरल बनाने के लिए सभी से मैत्री भाव रखना जरूरी है। निंदा, अपमान, मान-सम्मान के कुचक्र जैसे बुरे विचारों से स्वयं दूर रहें। प्रत्येक जीवों के प्रति दया, करूणा और वात्सल्य के भाव बनाए रखें। मन की पवित्रता निष्पकट होनी चाहिए। यहीं से क्षमाभाव का प्रादुर्भाव संभव है, जो जितना सरल होगा वह उतना ही शांतिप्रिय होगा। मैत्री भाव सब जीवों के प्रति सर्वेभवन्तु की भावना को मूर्त रूप देती है।

प्रशंसा से मुग्ध न हों
भगवान महावीर स्वामी ने स्पष्ट कहा है कि अंहकार का भाव दुर्गति का कारण है। मोह और मान का परिणाम घातक है। अगर कोई हमारी प्रशंसा करे, तो भी हमें अहमी नहीं बनना चाहिए। अत: हमें साधन और संयोग न मिले, तो भी दुखी नहीं होना चाहिए। हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहें और भगवान का स्मरण करते रहें।
 
निंदा के जहर से बचें
भगवान महावीर ने कहा है कि कभी भी दूसरों की निंदा न करें। हमेशा अच्छाई लोगों में देखें। अगर नकारात्मक विचार जन्म लेते हैं, तो उनसे कर्मबंध बंधता है और इन कर्मों का फल जीव को नियम से भोगना पड़ता है। अत: निंदा जैसे अवगुण से स्वयं को दूर रखें। आगम ग्रंथों के स्वाध्याय करने की प्रवृत्ति को अपनाएं। स्वाध्याय को जैन ग्रंथों में परम तप कहा गया है। शास्त्रों का पठन-पाठन हमें आत्मकेन्द्रित बनाता है। इसका फल यह है कि कोई हमारी निंदा भी करे, तो हम उन भावों से विचलित नहीं होते हैं।

पुरुषार्थ के साथ आत्मउन्नति के मार्ग को प्रशस्त करें
भगवान महावीर ने कहा कि प्राणी मात्र के प्रति अहिंसा का भाव रखें, निरंतर आत्महित के मार्ग का पुरुषार्थ करें। अगर जीवन को सुखमय बनाना है, तो सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र इन रत्नत्रय को जीवन में अपनाएं। जिसने सम्यकदर्शन को पा लिया उसकी आत्मउन्नति का पथ प्रशस्त हो गया। सम्यकदर्शन का अर्थ अपने आत्मस्वभाव को पहचाना अर्थात अखंडानंद स्वरूप आत्मतत्व की प्राप्ति करना है। जिसने स्वयं को पा लिया मानों उसने सम्यक पुरुषार्थ की प्राप्ति कर ली। अत: हमारे जीवन का लक्ष्य मात्र भौतिक सुख को पाना नहीं, बल्कि हमें स्वयं को जानकर आत्म उन्नति के मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहिए।

आयु निरंतर घट रही है। ऐसे में आत्मजागृति से अपने जीवन सफल बनाने का पुरूषार्थ करना होगा। महावीर स्वामी का हर सिद्धांत तर्क की कसौटी पर खरा उतरता है। उनका दर्शन हमें अपने जीवन को कैसे जीना है, इसकी शिक्षा प्रदान करता है। मनुष्य जन्म को अगर सार्थक करना है, तो महावीर स्वामी के सिद्धांतों को आत्मसात कीजिए।

(नितिन कुमार जैन, वरिष्ठ पत्रकार)

वक्फ संशोधन बिल: सिर्फ विरोध, न प्रदर्शन, शक्ति प्रदर्शन

भोपाल। वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को लेकर मध्य प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई है। बोर्ड का कहना है कि इसमें कुछ बदलाव स्वीकार नहीं। बोर्ड ने सरकार पर देश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ और सिर्फ गुमराह करने का है। केवल भ्रम पैदा करना और सरकार का अपनी नाकामी को छुपाना है। इसमें कोई भी ऐसा पॉइंट नजर नहीं आता है। इसी को लेकर गुरुवार को राजधानी भोपाल में एक शांतिपूर्ण धरने का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें नारेबाजी, प्रदर्शन, झंडे बैनर, रैली को दरकिनार रखते हुए लोगों को शामिल होने के लिए कहा गया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ की संपत्ति पर बहुत समय से सरकार की नजर है। सरकार की निगाह वक्फ संपत्ति पर थी, वह हड़प नहीं पा रही थी। वक्फ की जमीन को लेकर हम लोग शुरू से विरोध कर रहे हैं। लोकसभा में भी हमारे जितने सदस्य हैंस बोर्ड में भी हमने बात की है। एक-एक को बताया जाए यह लोग भ्रम फैला रहे हैं। वक्फ की संपत्ति को सरकार अपनी संपत्ति बनाना चाह रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ की प्रॉपर्टी निजी है, यह हमारे लोगों के दान की हुई संपत्ति है। इसको दान किया गया है, जब तक बहुत अच्छा निजाम चला तो लोग चैरिटी के लिए संपत्ति दान करते रहे। उसके बाद डोनेशन भी बंद हो गया। दान करने से भी लोग डरने लगे। इसका नुकसान चैरिटी वालों को हो रहा है।

विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि संशोधन विधेयक के अनुसार अब वक्फ की जमीन पर कुछ भी कार्य करने से पहले कलेक्टर से पूछना होगा। यह प्रक्रिया लंबी भी होगी और अनावश्यक भी।

मसूद की अपील
राजधानी भोपाल में वक़्फ़ बिल के खि़लाफ़ 10 अप्रैल को दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक सेंट्रल लायब्रेरी ग्राउण्ड में धरना दिया जाएगा। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ऐलान किया है कि पूरे मुल्क में वक़्फ़ बिल के खि़लाफ़ एहतेजाज करना है, इसी सिलसिले में भोपाल में धरना वक्फ कानून के खिलाफ दिया जाएगा। बोर्ड के मेम्बर आरिफ़ मसूद ने अवाम से अपील की है कि इस धरने पर बिना किसी झण्डा, बैनर व बिना रैली बनाए खामोशी के साथ ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में सेंट्रल लायब्रेरी ग्राउण्ड पहुंचकर अपना एहतेजाज दर्ज कराएं।

डिजिटल क्रांति का एक और कदम, अब नहीं देना होगी आधार की कॉपी

सबसे आवश्यक पहचान पत्र को लेकर बड़ी अपडेट

भोपाल| भारत के सबसे आवश्यक पहचान पत्र आधार कार्ड के बिना अब हर कार्यवाही लगभग अधूरी ही रह जाती है, रेलवे के रिजर्वेशन से लेकर किसी योजना का लाभ लेने तक लगभग हर आवेदन बिना आधार कार्ड प्रस्तुत किए पूर्ण नहीं माना जाता है। इसी कड़ी में सरकार ने एक ऐसा ऐप लॉन्च किया है जिसके बाद व्यक्ति को आधार कार्ड की कॉपी जमा करने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। आधार के इस ऐप के लांच होने के बाद अब क्यूआर कोड से ही काम आसान हो जायेगा। मसलन अब आपको होटलों, दुकानों, हवाईअड्डों या किसी अन्य जगहों पर आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं होगी। आधार ऐप से ही आप अपना और अपनी पहचान को वेरिफाई करा सकेंगे।
डिजिटल क्रांति का सदुपयोग कर लोगों को सलूहियत देने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को नया आधार एप लॉन्च किया। जिससे आपका काम आसान होगा। QR Code से काम होगा आसान। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को आधार संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ऐप के आने के बाद होटल और दुकान में आधार की फोटो कॉपी नहीं देनी होगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार के नए ऐप का परीक्षण कर रहा। इससे चेहरे के जरिए सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होगी।

ऐसा होगा नया आधार ऐप
नया आधार ऐप पूरी तरह से सुरक्षित होगा, जो यह सुनिश्चित करता है कि आधार से जुड़ा डाटा कहीं पर लिक नहीं होगा। इस ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन किया जा सकेगा। किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी पर पूरा नियंत्रण होगा। आधार से जुड़ी सिर्फ उतनी ही जानकारी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा की जाएगी, जितनी आवश्यक है।

अभी क्या होता है
अभी तक आधार सत्यापन के नाम पर किसी भी व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर से लेकर अन्य व्यक्तिगत जानकारी भी मांग ली जाती है। जबकि उतनी जानकारी की किसी को आवश्यकता नहीं होती है। कार्यक्रम में वरिष्ठ नीति निर्माता, विशेषज्ञ, टेक्नोक्रेट और पेशेवर समेत करीब 750 लोगों ने हिस्सा लिया।

आधार आर्थिक विकास में सहायक
मंत्री ने हितधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि हम विकास को आगे बढ़ाने के लिए एआई को डीपीआई के साथ कैसे एकीकृत कर सकते हैं। इस पर भी गहनता से काम हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि आधार समावेशन को गति दे रहा है और आर्थिक विकास में सहायता कर रहा है। आधार परिष्कृत प्रणाली है जो गोपनीयता को सुरक्षित रखती है और पहचान को प्रमाणित करती है।

भविष्य के लिए तैयार यूआईडीएआई
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने आधार के उपयोग के विस्तार को सक्षम करने के लिए यूआईडीएआई की सराहना की। वहीं, यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि आधार फेस प्रमाणीकरण, पूरे प्रमाणीकरण परिदृश्य की पहचान बन रहा है। आधार पारिस्थितिकी तंत्र बड़ा हो गया है। यूआईडीएआई भविष्य के लिए तैयार है।

भगवान श्रीराम जन्म उत्सव की शोभा यात्रा धूमधाम से निकाली गई।

101 भगवा ध्वजों को हाथों में लिए हजारों राम भक्त हुए शामिल, 50 से अधिक स्थान पर किया गया स्वागत

भोपाल। श्री राम जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर घोड़ा निक्कास चौराहे से परंपरा धार्मिक एवं सामाजिक संस्था भोपाल द्वारा भव्य शोभा यात्रा निकाली गई
शोभा यात्रा का शुभारंभ हनुमान चालीसा की विशेष प्रस्तुति एवं साधु संत एवं सांसद आलोक शर्मा जी द्वारा मां कौशल्या की गोद में विराजे श्री राम लल्ला जी की आरती के साथ शुभारम्भ किया गया।
शोभा यात्रा में भगवान श्री राम का दरबार आकर्षण का केंद्र रहा।

101 भगवा ध्वज, मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध गोस्वामी डीजे,ढोल,बैंड,दुल्दुल घोड़ी,आकर्षक बग्गी में सवार भगवान श्री गणेश जी, के साथ-साथ कई आकर्षक धार्मिक झांकियां चल समारोह में शामिल रही।

शोभा यात्रा घोडा निक्कास मां कर्मा देवी रोड से प्रारंभ होकर छोटे भैया कॉर्नर, जुमराती गेट, लोहा बाजार, सुभाष चौक, लखेरापूरा होते हुए भवानी चौक सोमवारा पर समापन होगा।
प्रारंभ हनुमान चालीसा पाठ से एवं समापन स्थल पर जबलपुर से पधारे कलाकारों द्वारा कर्फ्यू वाली माता जी की भव्य महाआरती के साथ साथ आकर्षक रंगारंग कार्यक्रम हुए।

भव्य शोभा यात्रा में भोपाल सांसद आलोक शर्मा, संस्था के अध्यक्ष अवनी शर्मा,मंडल अध्यक्ष, मनोज राठौर, पार्षद एवं जोन अध्यक्ष पूजा शर्मा, आशीष सिंह ठाकुर, भोपाल किराना व्यापारी महासंघ महामंत्री  विवेक साहू, घोड़ा निक्कास व्यापारी महासंघ अध्यक्ष ईशान अग्रवाल, आकाश बाथम, मोहित गौर सहित अन्य अतिथि गण उपस्थित रहे।

ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे हमने ठगा नहीं…

ऐलानिया ठगी, लोग लाइन लगकर खुद को ठगवाने जा रहे…!

कानपुर की मशहूर ठग्गू की लड्डू दुकान, जहां मुंह मीठा होता है लुभावने स्लोगन से
• गर्मी से राहत देती है बदनाम कुल्फी

कानपुर यात्रा से खान आशु की रिपोर्ट
भोपाल। यह दुनिया का इकलौता ठग होगा, जो खुली घोषणा करता है, ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे हमने ठगा नहीं…! इतनी साफगोई और स्पष्टवादिता की एकमात्र वजह है, स्वाद, क्वालिटी, व्यवहार और ग्राहक के खिंचे चले आने का यकीन और भरोसा।
उत्तरप्रदेश की कमर्शियल और औद्योगिक नगरी कानपुर में स्थित है ठग्गू की लड्डू दुकान। कई तरह के जायकों से मालामाल इस दुकान पर हर मौसम ग्राहकों की कतार नजर आती है। यहां आने वालों के लिए दुकान पर मौजूद लड्डू से ज्यादा ठग्गू की व्यवहार कुशलता ज्यादा तसल्ली देने वाली होती है।

स्लोगन का आकर्षण बड़ा
ठग्गू के लड्डू नाम सुनकर ही लोगों का आकर्षण इस दुकान की तरफ बढ़ जाता है। यहां पहुंचने पर बोर्ड पर लिखा स्लोगन “ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं” आगंतुक के चेहरे पर मुस्कान की मिठास फैला देता है। कदम आगे बढ़ते हैं तो अगला स्लोगन ग्राहक का स्वागत करता है, लिखा है, “मेहमान को चखा नहीं देना, टिक जाएगा…!” इस वाक्य को पूरा करने के लिए अगली पंक्ति लिखी गई है, “चखते ही जुबां और जेब की गर्मी खत्म”! ठग्गू के लड्डू की दुकान पर स्लोगन का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता। इसके आगे भी बहुत कुछ यहां लिखा है, जो ग्राहकों के होंठों पर मुस्कान, मन में गुदगुदाहट और दिल में सुकून वाली तसल्ली पैदा करता है। दुकान के छोटे आकार को लेकर ठग्गू जी ने लिखा है कि “बिकती नहीं फुटपाथ पर तो नाम होता टॉप पर!”

सियासत से जुड़ा पेड़ा
ठग्गू जी की स्लोगन श्रृंखला में सियासी नारे को भी शामिल किया गया है। अपने पेड़े की उत्कृष्टता उद्धत करते हुए बोर्ड पर एक स्लोगन उकेरा गया है, “हमारा नेता कैसा हो, दूध के पेड़े जैसा हो ….!” इसी बात को आगे बढ़ाते हुए ठग्गू जी ने खाने की पवित्रता का उल्लेख किया है। लिखा गया है, “पूर्ण पवित्र, उज्ज्वल चरित्र!”

कुल्फी बदनाम हुई
मटका कुल्फी को एक आकार देते हुए ठग्गू जी ने कुल्फी को कुछ अलग रंगत दी है। इसका स्वाद और आकार प्रकार भी आम मटका कुल्फी से कुछ अलग है। ग्राहकों के खिंचे चले आने की एक बड़ी वजह इसको दिया गया नाम है। ठग्गू जी ने इसको नाम दिया है, “बदनाम कुल्फी।”

पीएम मोदी भी चख चुके स्वाद
कानपुर के फेमस ‘ठग्गू के लड्डू’ की दुकान के लड्डू का स्वाद पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर बड़े बॉलीवुड सितारे तक चख चुके हैं। कई मौकों पर उन्होंने इसका जिक्र भी किया है। इसका स्वाद देश विदेश में प्रसिद्ध है। 

ठग्गू के लड्डू’ नाम के पीछे है दिलचस्प कहानी
कानपुर शहर के बीचोबीच स्थित है ठग्गू के लडडू की दुकान। छोटी सी दुकान है, लेकिन इसकी चर्चा दूर-दूर तक है और जो भी कानपुर आता है वह बिना ठग्गू के लडडू को चखे बिना नहीं जाता है। इस दुकान के नाम के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है। दुकान मालिक राजेश पांडे ने बताया कि उनके पिता गांधी जी की सभा में जाया करते थे। वहां उस समय सफेद चीनी के बारे में बताया जाता था कि ये मीठा जहर है। मेरे पिताजी ने सोचा हम भी तो लड्डू बनाते हैं और इसी मीठी चीनी से हमारा लड्डू तैयार होता है यानी हम लोगों का मुंह तो मीठा कर रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं लोगों को ठग भी रहे हैं। तभी से दुकान का नाम ठग्गू के लडडू हो गया।

रिश्तों को मिलेगी पहचान, सेवाओं का सम्मान भी, आयोजन 13 को भोपाल में

भोपाल। बेहतर रिश्तों की तलाश में जुटे अभिभावकों के लिए एक बेहतर मौका राजधानी भोपाल में जुटाया जा रहा है। सामाजिक संस्था शिखर एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी इसका आयोजन करने वाली है। कार्यक्रम के दौरान समाज के विशिष्ट लोगों का सम्मान भी किया जाएगा। 13 अप्रैल को होने वाले इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव समेत कई विशिष्टजन मौजूद रहेंगे।
संस्था के मोहम्मद ओवेस ने बताया कि 13 अप्रैल को भोपाल में मुस्लिम युवक युवती का परिचय सम्मेलन (तार्रुफी प्रोग्राम) आयोजित किया जाएगा। प्रदेशभर के लोग शामिल होंगे। उवैस ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रहेंगे। इनके अलावा उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और मप्र वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल भी कार्यक्रम के मेहमान
होंगे। मोहम्मद ओवेस ने बताया के कार्यक्रम का उद्देश्य उन लोगों के लिए अच्छे रिश्तों को तलाश कर एक जगह मिलवाना है, जिन्हें बेहतर रिश्तों की तलाश है। इसमें कुंवारे, तलाकशुदा, बेवा, यतीम लड़के लड़कियों के रिश्ते शामिल रहेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में प्रदेश में मुस्लिम समाज के लिए मुख्यमंत्री द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से भी अवगत कराया जाएगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पत्रकार और समाजसेवियों का सम्मान भी अतिथि के सरंक्षण में किया जाएगा। शिखर एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की कोषाध्यक्ष   शबाना खान ने बताया कि हमारा उद्देश्य मुस्लिम समाज की महिलाओं को सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के सहयोग से हम समाज में दहेज प्रथा तलाक़ प्रथा को खत्म करना चाहते हैं।कार्यक्रम का मकसद प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को महिलाओं तक पहुंचाना भी है। उन्होंने बताया कि प्रोग्राम का रजिस्ट्रेशन अभी चालू जारी है। इन नंबर्स पर कॉल करके कार्यक्रम संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है : 9479903047, 9479903049, 7869131550. कार्यक्रम भोपाल के हिन्दी भवन में सुबह 11 बजे से आयोजित होगा।

अपनी विरासत : व्याख्यानमाला में उकेरी गईं प्रदेश की धरोहर, जिनका है दुनिया में नाम

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल मप्र के अंतर्गत डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान, भोपाल द्वारा प्रख्यात पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के पुण्य तिथि के अवसर पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। आयोजन का प्रारंभ मुख्य वक्ता प्रोफेसर आलोक त्रिपाठी अतिरिक्त महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली एवं डॉ. भुवन विक्रम, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यक्षेत्र भोपाल एवं डॉ. मनीषा शर्मा निदेशक डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में डॉ. मनीषा शर्मा निदेशक डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान ने अपने उद्बोधन में संस्थान के परिचय एवं गतिविधियों तथा डॉ. वाकणकर  के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए व्याख्यान के लिए आमंत्रित वक्ताद्वय का परिचय कराया।
इस कड़ी में मुख्य वक्ता प्रोफेसर आलोक त्रिपाठी ने “अंडर वॉटर आर्कयोलॉजिकल इन्वेस्टीगेशनस” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। जिसमें बंगाराम आईलैंड लक्षदीप तथा द्वारका में किये गये अंडर वॉटर आर्केयोलॉजी में किये गये कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। प्रो. त्रिपाठी प्रिंस रॉयल कार्गोशीप जो सन् 1792 में दुर्घटना ग्रस्त होकर जलमग्न हो गई थी, की खोज पर विस्तृत विवरण दिया। प्रकाश डाला गया। इस कार्गोशीप की खोज में उपलब्ध चुनौतियों एवं उसके मलबे से प्राप्त तोप एवं अन्य पुरावशेषों की जानकारी दी गई। तदुपरांत अंडर वॉटर आर्केयॉलोजी टीम द्वारा द्वारका की खोज के अन्तर्गत किये गये उत्खननों को रेखांकित किया गया एवं साहित्यों, महाभारत एवं पुराणों में उल्लेखित विवरणों के आधार पर तथा पूर्व में किये गये पुरातत्वीय कार्यों की जानकारी देते हुए द्वारका के समुद्री क्षेत्र में की गई खोज की जानकारी दी गई। द्वारका नगर की स्थापना महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा की गई थी, और उनके उपरांत उसके समुद्र में समाहित होने की जानकारी पुराणों से प्राप्त होती है। इसी आधार पर प्रो. त्रिपाठी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में अंडर वाटर आर्कयोलॉजिकल शाखा का पुनर्गठन किया गया है। प्रो. त्रिपाठी के निर्देशन में द्वारका की खोज संबंधी उत्खनन् चल रहे है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने वर्तमान में पुरातत्वीय अन्वेषणों के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी का उपयोग कर एवं अन्य एजेंसियों की सहभागिता से पुरातत्वीय अन्वेषणों को आगे बढ़ाने पर भी आवश्यकता प्रतिपादित किया गया।
डॉ. भुवन विक्रम क्षेत्रीय निदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मंदिर स्थापत्य उद्भव एवं विकास यात्रा का विशिष्ट पड़ाव बाजरा मठ ग्यारसपुर पर अपने विचार रखा गया। डॉ. विक्रम ने अपने व्याख्यान में मध्यप्रदेश के संदर्भ में मंदिरों की क्रमिक विकास पर प्रकाश डाला, एवं विदिशा जिले के ग्यारसपुर के बाजरा मठ मंदिर की विशद् विवेचना में अवगत बताया कि, य‌द्मि कई त्रिकुट मंदिर सूचित है परन्तु बाजरा मठ मंदिर एक ऐसा त्रिकुट मंदिर है, जिसके तीनों गर्भ गृह एक साथ समान्तर में निर्मित है, और यह तीनों मंदिर किसी पंथ विशेष के न होकर तीन विविध देवताओं यथा मध्य में सूर्य एवं एक तरफ शिव और दूसरी तरफ संकर्षण को समर्पित है, जिनकी पुष्टि इन गर्भ गृहों के प्रवेश द्वार के ललाटबिंब पर अंकित प्रतिमाओं एवं अन्य गौड़ देव आकृतियों यथा द्वादश आदित्य, द्वादश रूद्र आदि के अंकन से होती है। यहाँ से प्राप्त प्रतिमाएं यथा अर्द्धनारीश् वर, हरिहर, हरसूर्य, मिश्रित प्रतिमाएं है, जो विविध देवताओं के संयुक्त रूप को प्रस्तुत करती है। इसी तारतम्य में यह भी प्रकाश डाला गया कि, मध्यप्रदेश विशेषतः विदिशा में सूर्य मंदिर का निर्माण हुआ। विदिशा का बीजामंडल सम्भवतः मूलरूप से सूर्य मंदिर रहा होगा, जो भैलस्वामी के नाम से प्रसिद्ध था।
कार्यक्रम के मंच का संचालन डॉ. रमेश यादव, पुरातत्वीय अधिकारी एवं अन्त में डॉ. धुर्वेद्र सिंह जोधा द्वारा आमंत्रित अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

हनुमान जन्मोत्सव की तैयारियां प्रारंभ, शिवलिंग में दिखेगा रणजीत हनुमान का रूप

नवें वर्ष के आयोजन को भव्य बनाने में जुटा श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ

भोपाल। आगामी हनुमान जन्मोत्सव को लेकर शहर के सभी प्राचीन मंदिरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अपने आराध्य मारुतिनंदन का जन्मोत्सव मनाने को शहर की कई सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाओं में भी सक्रियता बढ़ती दिख रही है। इसी क्रम में पुराने शहर की अग्रणी धार्मिक वो सामाजिक संस्था “श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ” ने भी हनुमान जन्मोत्सव की तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। गौरतलब है कि हनुमान जन्मोत्सव श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ का वार्षिक आयोजन होता है जिसे संघ द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। संस्था के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि यह वर्ष संस्था के वार्षिक आयोजन का नौवां वर्ष है, और परंपरा अनुसार कार्यक्रम संयोजक के रूप में सर्व सम्मति से दिनेश नाहर को जवाबदारी सौंपी गई है। रंजीत सिंह के अनुसार विगत वर्षों की भांति जनसहयोग से यह कार्यक्रम भी भव्यता के शिखर को छुएगा। कार्यक्रम संयोजक दिनेश नाहर के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर 12 अप्रैल को होने वाले आयोजन की शोभायात्रा प्रेमनगर कालोनी छोला स्थित दुर्गा मंदिर से कन्या पूजन के साथ सायं 5 बजे शुरू होगी, जो प्रेमनगर कालोनी, नवजीवन कालोनी, टिंबर मार्केट मेन रोड, होकर खेड़ापति हनुमान मंदिर छोला पर समापन होगी। दिनेश ने सर्व हिन्दू समाज से भव्य शोभायात्रा में सम्मिलित होने का आग्रह किया।

मातृशक्ति का पूजन कर देंगे, बेटी बचाओ का संदेश

श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ के विधिक सेवा प्रभारी अधिवक्ता दीपक नामदेव ने बताया कि आयोजन में प्रतिवर्षानुसार कन्या पूजन कर बेटी बचाने और बेटियों को पढ़ाने का संदेश दिया जाएगा। दीपक नामदेव ने बताया कि कामकाजी तथा नौकरीपेशा महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा हेतु पेपर स्प्रे, स्टन गन, जैसी आत्मरक्षा की चीजें निःशुल्क वितरित की जाएगी।

आयोजन में होगी हर वर्ग की सहभागिता

संस्था के उपाध्यक्ष अमन चौरसिया ने बताया कि ‘श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ के वार्षिक आयोजन में हर साल युवाओं, बुजुर्गों समेत महिलाओं की खासी उपस्थिति रहती है, इस वर्ष भी आयोजन में सर्व समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता होगी’। उपाध्यक्ष अमन चौरसिया ने बताया कि ढोल, डीजे, बग्गी और धर्मध्वज शोभायात्रा को भव्य रूप देंगे वहीं आयोजन के दौरान समापन स्थल पर भव्य आतिशबाजी दर्शकों का मन मोह लेगी।

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