सृजन कार्यशाला’ के साथ मनाई विश्वकर्मा जयंती

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय हमेशा से अपने विभिन्न हितधारकों के साथ विविध आयोजनों, गतिविधियों और सतत पहलों के माध्यम से जुड़ाव बनाए रखता है। भगवान विश्वकर्मा दिव्य शिल्पी और कारीगरों, शिल्पकारों, मैकेनिकों तथा वास्तुकारों के आराध्य देव माने जाते हैं।  इसी प्रेरणा से, 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर पर संचालनालय ने कलाकारों और विद्यार्थियों के साथ प्रतिकृति निर्माण का प्रशिक्षण आयोजित कर यह पर्व मनाया।

संचालनालय का प्रतिकृति अनुभाग विभागीय कलाकारों के माध्यम से प्रायोगिक विधियों से प्रतिकृति निर्माण करता है। प्रशिक्षण और शिक्षा के उद्देश्य से इस अवसर पर एकत्रित कलाकारों और विद्यार्थियों को उपकरणों, औजारों और प्रतिकृति निर्माण की प्रत्यक्ष प्रस्तुति दी गई। उन्हें विभिन्न साँचे भी दिखाए गए। संचालनालय ने एक प्रदर्शनी भी लगाई, जिसमें प्रतिकृति निर्माण से संबंधित कच्चा माल और साँचे प्रदर्शित किए गए। 56 महत्वपूर्ण प्रतिकृतियाँ भी प्रदर्शन के लिए रखी गईं।
संयुक्त निदेशक डॉ. मनीषा शर्मा के अनुसार, “हम विद्यार्थियों और कलाकारों की प्रतिक्रिया तथा उनकी सीखने की उत्सुकता से बेहद प्रसन्न हैं। हमारे संग्रहालय अगले छह महीनों के लिए एक रोचक, सहभागितापूर्ण और शैक्षिक गतिविधियों का कैलेंडर जारी करने जा रहे हैं।

अदालत का आदेश, सीएम की मंशा और सांसद का निर्णय : बढ़ने वाली हैं वीआईपी के कब्जादारों की मुश्किल

भोपाल। वीआईपी रोड के कब्जादारों के लिए मुश्किलों के नए द्वार खुलने वाले हैं। अदालत से चले आदेश, सीएम की मंशा और भोपाल सांसद के इरादे ने यह हालात बना दिए हैं।वीआईपी मूवमेंट वाले इस इलाके में जमीनों की खरीदी बिक्री और इससे बनने वाले हालात न सिर्फ शहर की कानून व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं बल्कि इससे अदालत के आदेश भी प्रभावित हो रहे हैं और एनजीटी की गाइडलाइन को भी धक्का लग रहा है।
वीआईपी रोड के किनारे बस आई आबादी से एनजीटी  के दिशानिर्देश प्रभावित हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बने इन मकानों, होटलों और शादी हॉल से निकला गंदा पानी बड़े तालाब में शामिल हो रहा है। शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले इस तालाब की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए एनजीटी ने तालाब के 100 मीटर दायरे में निर्माण की मनाही की है, लेकिन फर्जी हिबानामा, इनायतनामा, भ्रष्टाचार के दस्तावेजों से यहां बड़ी बसाहट हो गई है।

अदालत के आदेश
वीआईपी रोड के अवैध निर्माण को लेकर अदालत ने बरसों पहले इसको धराशाई करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यहां निर्मित अवैध निर्माण आशियाना विला को गिराने को गिराने के लिए कहा है। यह मकान फर्जी हिबानामा पर खड़ा हुआ है। इसको फर्जी तरीके से विक्रय और भ्रष्टाचार के साथ नामांतरण भी कर दिया गया है। नगर निगम के अधिकारी रहे अब्दुल बसीर, उनकी पत्नी और बेटे सौलत बसीर ने यह धांधली की है।

सीएम की मंशा
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शहर और प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं। मछली परिवार की अनंतपुरा स्थित 99 एकड़ जमीन पर कार्यवाही के डंडे के साथ उन्होंने यह संदेश दिया है। कार्यवाही की यह धुरी अब वीआईपी रोड के अवैध निर्माण की तरफ भी बढ़ने वाली है।

सांसद आलोक की पदयात्रा
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने बड़े तालाब के दायरे में उग आए अवैध निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने बड़े तालाब की सेहत खराब करने वाले निर्माण के खिलाफ पैदल यात्रा निकालने वाले हैं। सांसद आलोक की इस मुहिम के दायरे में वह निर्माण भी गिने जाएंगे जो फर्जी हिबानामा और  इनायतनामा के आधार पर खड़े कर लिए गए हैं।

मामला शत्रु संपत्ति का भी
सूत्रों का कहना है कि वीआईपी रोड पर अवैध तरीके से निर्मित और खरीद फरोख्त की जा रही जमीनें वास्तविक रूप से शत्रु संपत्ति में शामिल हैं। इनको लेकर अदालत में कई मामले प्रचलित हैं। ऐसे में इनकी खरीदी, बिक्री या नामांतरण आदि वैसे ही नियमों की अवहेलना मानी जा रही है।

पत्रकारिता और PR में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का बढ़ता प्रभाव

पब्लिक रिलेशंस (PR) उद्योग वर्षों से चमकदार लॉन्च, प्रचार और संकट प्रबंधन के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है। ऐसे में PR (PR) टीमें अपना लगभग 40% समय एकरस कार्यों में खर्च कर देती हैं, जिससे रणनीति या रचनात्मकता के लिए बहुत कम समय बचता है।
आज के डिजिटल दौर में लोगों का ध्यान कम समय तक टिक पाता है, सूचनाओं की बाढ़ ने जगह ले ली है और उपभोक्ता तेज़ और सटीक जानकारी चाहते हैं। ऐसे में पुराने और धीमे तरीकों से काम करने वाली PR प्रक्रिया आज के बदलते समय के अनुकूल नहीं है। इस कारण पत्रकारिता और पब्लिक रिलेशंस (PR) उद्योग कई नई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

बचेगा समय
इस नई ध्यान की अर्थव्यवस्था (Attention Economy) में ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एक परिवर्तन है जो सूचनाओं के शोर को कम कर प्रासंगिक और सटीक कहानियों को सामने लाएगा। इस नई नीति विकास से पत्रकारों का समय बचा रहा है और PR एजेंसियों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना रहा है।

बढ़ रहा प्रभाव
एक शोध के अनुसार, 50 डिजिटल फर्स्ट कंपनियों के विश्लेषण में पाया कि ऑटोमेटेड PR वर्कफ़्लो अपनाने से PR टीमों ने 75% तक समय बचाया और अर्जित मीडिया (earned media) के जरिए 30% अधिक प्रभाव प्राप्त किए।

AI ऑटोमेशन देगा पत्रकारिता को वास्तविक प्रभाव 
90% तेज़ रिपोर्टिंग साइकिल्स क्योंकि मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स अब रियल-टाइम में ऑटोमेट किए जा सकते हैं।
78% PR प्रोफेशनल्स मानते हैं कि ऑटोमेशन से उनके काम की गुणवत्ता बेहतर होती है, केवल गति ही नहीं।

AI ऑटोमेशन का मुख्य कार्य

रिपोर्टर्स के लिए :
यह अप्रासंगिक पिच और जटिल जार्गन को फ़िल्टर करता है और केवल वही सामने लाता है जो वास्तव में मायने रखते हैं।

एडिटर्स के लिए :
यह साफ़ और उपयोगी डेटा देता है कि पाठकों को क्या पसंद आ रहा है, जिससे अधिक सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।

PR टीमों के लिए :
यह समय और बेकार की मेहनत बचाता है, जिससे वे रणनीति, स्टोरीटेलिंग और विश्वसनीयता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

तकनीकी अनुप्रयोगों पर आधारित होगा AI ऑटोमेशन
नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) : लाखों दस्तावेज़ों को स्कैन कर सेकंडों में प्रासंगिक तथ्य निकालती है।

मशीन लर्निंग मॉडल्सः सोशल मीडिया और ऑनलाइन फ़ोरम की निगरानी कर ब्रेकिंग न्यूज़ का पूर्वानुमान लगाना।

अन्य टूल्सः ऑटोमेटेड ट्रांसक्रिप्शन, सेंटिमेंट एनालिसिस और इमेज वेरिफिकेशन रिपोर्टिंग को तेज़ करेंगे और मानवीय त्रुटियों को कम करेंगे।

AI रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म्सः कंटेंट डिलीवरी को व्यक्तिगत बनाएँगे ताकि पाठक जुड़े रहें।

इसलिए पत्रकारों के लिए यह बदलाव विशेष महत्व रखता है। रैक्क्किंग (Rankkking) के संस्थापक अंकुश गुप्ता दस से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, AI और PR ऑटोमेशन में विशेषज्ञ के रूप से काम कर रहे है उनके अनुसारः आज पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट समय की कमी और सूचना का शोर है। ऑटोमेशन पत्रकारों को प्रासंगिक कहानियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, वहीं PR एजेंसियों को बेहतर संबंध बनाने और पारदर्शी संवाद की दिशा में ले जाता है।

अंकुश युवा फ़ाउंडर्स को ऑटोमेशन अपनाने, अपनी पीआर रणनीतियों को स्केल करने, समय बचाने, लागत घटाने और मज़बूत नैरेटिव बनाने में मदद करते हैं।

भविष्य की झलकः
2026 तक, ऑटोमेटेड PR वर्कफ़्लोज़ उतने ही ज़रूरी हो जाएंगे जितने आज सेल्स टीमों के लिए CRM टूल्स हैं। आने वाले समय में AI सिस्टम पैटर्न पहचानेंगे, संभावित खबरों का पूर्वानुमान लगाएंगे और पत्रकारों को रियल-टाइम डेटा भी उपलब्ध कराएँगे।

इसलिए अब सवाल यह नहीं है कि पत्रकारिता में A/ का क्या प्रभाव होगा, बल्कि यह है कि कैसे A/ के साथ सहयोग करके पत्रकारिता का भविष्य विकसित किया जाएगा।

निष्कर्ष:
आज की मीडिया दुनिया में समय सबसे कीमती है। तेज़ी से बदलते मीडिया परिदृश्य में ऑटोमेशन कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। यह संतुलन न केवल पत्रकारिता को अधिक सार्थक बनाएगा, बल्कि PR उद्योग को भी नई दिशा देगा।

ताक पर सीनियरों की फ़ौज, “जुगाड” से जूनियर की मौज

सामने आया उच्च शिक्षा विभाग में लापरवाही और मनमानी का एक और उदाहरण

विशेष संवाददाता

सागर । आखिर मध्यप्रदेश को ऐसे ही अजब गजब नहीं कहा जाता, यहां किस विभाग में कब क्या गुल खिल जाए कोई नहीं जनता। विभाग के बड़े अफसरों की मनमानी और कर्मचारीयों की जुगाड के नतीजे जब भी सामने आते हैं तभी सरकार की किरकिरी करा देते हैं। उच्च शिक्षा विभाग का ऐसा ही एक मामला सागर संभाग से सामने आया है जो जाहिर तौर पर उच्च न्यायालय के निर्देश के ख़िलाफ़ नजर आ रहा है। विभागीय सूत्र बता रहे हैं कि अगर इस मामले की असल “जुगाड” सामने आ गई तो सवालों की आंच मंत्री तक पहुंचते देर नहीं लगेगी।

क्या है “जुगाड” का पूरा मामला
दरअसल “जुगाड” का ये खेल उच्च शिक्षा विभाग सागर संभाग के अतिरिक्त संचालक के स्थानांतरण के बाद शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि स्थानांतरण होने के बाद विभाग के ही एक प्राध्यापक नीरज दुबे को महज वेतन आहरण की तात्कालिक सुविधा हेतु अतिरिक्त संचालक का प्रभार दे दिया गया। जबकि विभागीय सूत्रों की मानें तो सागर संभाग में कई सीनियर प्रिंसिपलों की मौजूदगी के बाद भी जूनियर को चार्ज देना नियम विरोधी है। एक तरफ जहां इस मामले में नियमों और न्यायालय के निर्देशों को अनदेखा किया गया है वहीं दूसरी ओर जूनियर के नीचे काम करने से सीनियरों में रोष और आक्रोश पनप रहा है। विभागीय व्यवस्था के अनुसार अतिरिक्त संचालक पद का प्रभार संभाग में सेवारत किसी भी प्रिंसिपल को सौंपा जाना चाहिए था लेकिन यहां “जुगाड” काम कर गई और जूनियर बाजी मार ले गए।

क्या हैं उच्च न्यायालय के निर्देश
उच्च न्यायालय के निर्देशों की बात की जाए तो यह मामला और गंभीर हो जाता है, दरअसल निर्देश तो यह हैं कि किसी पद के प्रभार यदि आवश्यक हों तो विभागीय अधिकारी कर्मचारियों में जो वरिष्ठ श्रेणी में आता हो उसको ही दिया जाए। इसके साथ ही किसी कनिष्ठ को वरिष्ठ पद का प्रभार देने पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति भी निर्देश में आवश्यक बताई गई है।

जातिगत भेदभाव की कानाफूसी
इस मामले के अलग अलग रंग भी अपना असर छोड़ रहे हैं, दफ्तरों से बाहर आती कानाफूसी मामले को जातिगत भेदभाव का दृष्टिकोण दे रही है।
दबे सुरों में बताया जा रहा है कि प्राध्यापक नीरज दुबे से वरिष्ठ सभी प्रिंसिपल दलित समाज से आते हैं, और विभाग में हावी सवर्ण लॉबी ने एड़ी चोटी का जोर लगाकर नीरज दुबे को प्रभार दिलाया है। इन बातों की हकीकत जो भी हो लेकिन जातिगत भेदभाव की कानाफूसी दलित समाज के विभागीय अधिकारी कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने और मानसिकता बदलने के लिए पर्याप्त है।

समरथ कहुं नहीं दोष गोसाईं
तुलसीकृत श्रीरामचरितमानस की ये चौपाई उच्च शिक्षा विभाग के वजनदार और जुगाड़ू अधिकारी पर पूरी तरह लागू हो रही है। पद के कथित दुरुपयोग के आरोप, मनमानी वसूली और जानबूझकर विभागीय कर्मचारियों के अपमान के किस्से इसके उदाहरण बनते जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारीयों में तेजी से पनपता रोष और उनके मन में विस्तार करती जातिगत भेदभाव की पीड़ा से जल्द ही मंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव को अवगत कराया जाएगा।

इनका कहना है-

आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है, मैं दिखवाता हूं, यदि ऐसा हुआ है ।

प्रबल सिपाहा
आयुक्त
उच्च शिक्षा विभाग, मप्र

युवा पत्रकार सर्जना चतुर्वेदी को बीयू के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदान की पीएचडी की उपाधि

भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 8 सितंबर को आयोजित दीक्षांत समारोह में सर्जना चतुर्वेदी को “महिला अपराध के चर्चित प्रकरणों में मीडिया की अपने सहयोगी अभिकरणों के संदर्भ में भूमिका का विश्लेषण” विषय पर शोध कार्य हेतु डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने यह शोध कार्य प्रोफेसर आशा शुक्ला (पूर्व कुलपति, डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, महिला अध्ययन विभाग, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय) के मार्गदर्शन में पूरा किया।

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण, भोपाल से करने के बाद सर्जना चतुर्वेदी ने दैनिक भास्कर के रोजगार निर्माण, अहा जिंदगी सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 15 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव अर्जित किया है। निर्भया कांड के बाद देश में महिला अपराधों पर मीडिया की भूमिका की महत्ता को देखते हुए उन्होंने इस विषय को अपने शोध का केंद्र बनाया। सर्जना ने शोध कार्य को अपने स्वर्गीय पिता सुरेश चतुर्वेदी को समर्पित किया है।

भोपाल सांसद आलोक शर्मा का बड़ा बयान – अवैध कब्जों पर होगी कड़ी कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारी नहीं बचेंगे

जीतेन्द्र सेन
भोपाल।।सांसद आलोक शर्मा ने शहर में जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत इन कब्जों में पाई जाएगी, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सांसद ने स्पष्ट किया कि अशोका गार्डन थाने के तत्कालीन टीआई की भूमिका की भी जांच की जाएगी और यदि लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है तो कानून के तहत कार्यवाही होगी।

आलोक शर्मा ने कहा कि प्रदेश की मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार में कोई भी “बड़ी मछली” या “मगरमच्छ” कानून से बच नहीं पाएगा। चाहे वो एसडीएम,हो तहसीलदार या आरआई,पटवारी  उन्होंने भरोसा दिलाया कि शारीक मछली द्वारा कब्जाई गई जमीनों को भी चिन्हित कर खाली कराया जाएगा।सांसद के इस बयान से अवैध कब्जाधारियों और उनके संरक्षणकर्ताओं में हड़कंप मच गया है।

किसी के आश्वासन, भ्रष्टाचार के भरोसे करोड़ी प्रॉपर्टी के हुए सौदे

भोपाल। वीआईपी रोड पर स्थित खसरा नंबर 78 की लंबी चौड़ी जमीन पर विकसित हो गए अधिकांश निर्माण झूठे आश्वासन पर टिके हुए हैं। भ्रष्टाचार की फसल ने इसे पोषित किया है। प्रमाण और सुबूतों के नाम पर इनके पास झूठे आश्वासन और भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा दिया गया बल ही मौजूद है।
सूत्रों का कहना है कि वीआईपी रोड स्थित खसरा नंबर 78 के बीच बसा एक भवन नशेमन नाम के साथ खड़ा हुआ है। बताया जाता है कि नवाब हमीद उल्लाह के स्टॉफ में कार्यरत कर्नल ईनाम उल्लाह खान ने इस जमीन को अपनी बेटी को हिबा किया था। जबकि इस हिबानामा का अधिकार उनको इसलिए नहीं था कि यह संपत्ति कभी उनके नाम हुई ही नहीं थी। भ्रष्टाचार की प्रक्रिया के बीच आगे बढ़ी कार्यवाही ने जरीना बसीर ने इसका सौदा अपने ही बेटे सौलत बसीर को कर दिया। फर्जी हिबानामा के आधार पर हुए निर्माण और सौदे को भ्रष्ट अधिकारियों ने नामांतरण भी कर दिया। जबकि शत्रु संपत्ति में शामिल इस जमीन को लेकर अदालत में केस भी चल रहा था।

बाकी जमीनें भी विवाद में
सूत्रों का कहना है कि नशेमन विला के पास स्थित इसी खसरे की एक खाली पड़ी जमीन पर वर्तमान में निर्माण कार्य जारी है। सूत्रों का कहना है कि एक बड़े व्यापारिक घराने द्वारा किए जा रहे निर्माण को अवैध इसलिए भी साबित किया जा सकता है कि इसको पूरा करने के लिए एक राजनीतिक पार्टी के झंडों डंडों का सहारा लेना पड़ रहा है।

बन रहे संघर्ष के हालात
सूत्रों का कहना है कि खसरा नंबर 78 की शत्रु संपत्ति को लेकर कई मामले अदालत में विचाराधीन हैं। बावजूद इसके यहां खरीदी बिक्री धड़ल्ले पर जारी है। एक ही जमीन को कई लोगों को बेच दिए जाने के चलते कई बार यहां विवाद के हालात बनते हैं। यह विवाद कभी शहर के लिए अप्रिय स्थिति भी बना सकते हैं।

प्रशासन सो रहा
सूत्रों का कहना है कि शत्रु संपत्ति को लेकर जारी अदालती मामले को लेकर प्रशासन उदासीन है। विवादों के बीच हो रहे सौदों के नामांतरण और रजिस्ट्री आदि भी हो रही हैं। कुछ मामलों में अदालत इन निर्माण को अवैध मानकर तोड़ने के आदेश भी कर चुकी है, लेकिन प्रशासन इस पर अमल नहीं करवा पा रहा है।

जिला पंचायत सभागार में जिला शिक्षा समिति की बैठक सम्पन्न हुई !

समय पर स्कूल नहीं पहुंचने व शिक्षा नीति का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों पर हो कड़ी कार्यवाही,विनय मेहर

जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। जिला पंचायत कार्यालय में गुरुवार को जिला शिक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई जिसमें भोपाल जिला शिक्षा समिति के अध्यक्ष सदस्य और डीईओ डीपीसी बीआरसी जन शिक्षक सीएम राइज स्कूल प्राचार्य हाई स्कूल हाई सेकेंडरी एवं मिडिल स्कूल प्राथमिक स्कूल के प्रभारी एवं प्राचार्य उपस्थित रहे !
जिसमें जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर द्वारा उठाए गए मुद्दों में बरसों पुरानी जर्जर बिल्डिंग है वहां नई बिल्डिंग स्वीकृत हो जिन ग्रामों तक सीएम राइज स्कूल जाने के लिए बस व्यवस्था नहीं है वहां तत्काल बस की व्यवस्था की जाए और जो शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं तथा शिक्षा नीति का पालन नहीं करते हैं ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए वहीं मेहर ने आगे कहा कि हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए अथक प्रयास किये जा रहे हैं जिसमें मध्य प्रदेश के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा उपलब्ध हो सरकार ने कई हाईटेक स्कूल भी बनाए है!

भाजपा सरकार द्वारा जो पुराने स्कूल हो गए हैं उनके लिए उनकी मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए हर वर्ष भेजती है लेकिन कुछ अधिकारियों की मिली भगत से उनके चहेतों को काम दे देते हैं और सरकार के पैसों का दुरुपयोग होता है यह बात जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने बैठक के दौरान कही  स्कूलों की मरम्मत के लिए जो लिस्ट जाती है बगैर पैसा स्वीकृत हुए ही विभाग के अधिकारी मिलकर के उनके चाहते  ठेकेदारों को मरम्मत का एग्रीमेंट करवा देते यह गलत है और हम जनप्रतिनिधि होने के नाते हमारी देखरेख में यह काम होने चाहिए और वही सभी  एग्रीमेंट निरस्त किए जाए और टेंडर प्रक्रिया की जाए हर वर्ष करोड़ों के काम होने के बाद भी वही आलम होता है कि स्कूलों कि छतो से पानी टपक रहा है बाथरूम नहीं है और जहां बाथरूम बने हैं उसमें कंडे और लकडियां भरी पड़ी हैं। ऐसे प्रभारी प्राचार्य पर भी कार्रवाई हो जहां बच्चों के लिए बनाए गए टॉयलेटों में लकडियां और कंडे भरे रखे हो या फिर कोई अन्य उपयोग कर रहा हो। कानून और नियम सबके लिए बराबर है शिक्षा के क्षेत्र में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी चाहे हम हो या शिक्षा विभाग का कोई भी अधिकारी हो बख्शा नहीं जाएगा।

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में शिक्षकों ने सीखे सांस्कृतिक धरोहर जागरूकता के गुर

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय  द्वारा इंटैक भोपाल चैप्टर एवं एचईसीएस इंटैक के सहयोग से 3 एवं 4 सितम्बर को राज्य संग्रहालय, भोपाल में दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला – धरोहर एवं संस्कृति जागरूकता का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में भोपाल के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे दृष्टिकोण एवं संसाधन उपलब्ध कराना था, जिनसे विद्यालयों में धरोहर शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
कार्यशाला के उद्घाटन दिवस पर इंटैक भोपाल चैप्टर के संयोजक मदन मोहन उपाध्याय, संचालनालय
पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय  के सेवानिवृत्त पुरातत्व अधिकारी डॉ. रमेश यादव तथा एकलव्य फाउंडेशन की निदेशक सुश्री तुलतुल विश्वास ने अपने विचार एवं प्रस्तुतियाँ दीं। इन सत्रों में धरोहर शिक्षा, मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर एवं विद्यार्थियों को सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के नवाचारी उपायों पर चर्चा की गई।

दूसरे दिन का कार्यक्रम एचईसीएस इंटैक की टीम द्वारा संचालित किया गया। इसमें प्रधान निदेशक पूनम दत्त एवं कार्यक्रम समन्वयक सुश्री नांकी कौर ने प्रशिक्षण सत्र लिए। “धरोहर क्या है” विषय पर आयोजित सत्र में धरोहर को कहानी, संस्कृति एवं विरासत के रूप में परिभाषित किया गया तथा धरोहर के विभिन्न प्रकारों का परिचय कराया गया। इसके बाद एक परिचयात्मक गतिविधि एवं धरोहर शिक्षा पद्धति पर चर्चा हुई। चर्चाओं में मुख्य रूप से अतीत को समझने, उसकी देखभाल करने और यह पहचानने पर जोर दिया गया कि वर्तमान को समझने के लिए अतीत का सम्मान करना क्यों आवश्यक है। सत्रों में युवाओं को सांस्कृतिक मूल्यों और सांप्रदायिक सौहार्द के महत्व को सिखाने पर भी बल दिया गया।
व्यावहारिक सत्रों में वस्तु अध्ययन, शिक्षकों के किट का उपयोग तथा विद्यालयों में धरोहर क्लब के गठन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। धरोहर संसाधनों पर भी सत्र आयोजित किए गए, जिसके उपरांत प्रतिभागियों ने समूहगत गतिविधियों एवं प्रस्तुतियों में भाग लिया।

सामाजिक सौहार्दता की मिसाल : वक्फ की जमीन, खुद के प्रयास, कई विवाद के बीच बनवा दिया मंदिर

भोपाल। समाज में धर्म और मजहब को लेकर भले कितनी भी वैमनस्यता फैली हो।एकिन गंगा जमुनी तहजीब हम भारतीयों में भीतर तक समाई हुई है। समय आने पर हिन्दू धर्म के अनुयाई अपनी विश्वसनीयता पीछे नहीं हटते। ऐसे ही एक अल्लाह को मानने वाले मुस्लिम धर्मावलंबी भी अपनी वफ़ा साबित करने में कोताही नहीं बरतते हैं। उज्जैन जिले के कालियादेह में आकार लिया एक मंदिर इसी बात का प्रमाण है। हिंदू समाज की आस्था का केंद्र बना यह मंदिर मुस्लिम समुदाय द्वारा उपलब्ध कराई गई जमीन पर अपनी शान लिए हुए खड़ा है। इसको मूर्तरूप देने में एक मुस्लिम व्यक्ति का ही बड़ा योगदान है।
उज्जैन जिले की तहसील में शामिल है एक स्थान कालियादेह। सूत्रों का कहना है कि पिछले 3 या 4 वर्षों पहले यहां एक मंदिर बनाने की कल्पना की गई। जब इस मंदिर को लेकर बात शुरु हुई तो जमीन उपलब्ध कराने की पहल एक मुस्लिम व्यक्ति ने की। डॉ. सनव्वर पटेल ने इस मंदिर के लिए पर्याप्त मात्रा में जमीन ही उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि इस निर्माण में जरूरी सहयोग भी उन्होंने दिया। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा, हज कमेटी और अब मप्र वक्फ बोर्ड से ताल्लुक होना एक अलग बात है, डॉ सनव्वर पटेल ने मंदिर निर्माण में सहयोग मानवीय व्यवहार और आपसी भाईचारे को बरकरार रखने के लिए किया है। हिंदू आस्थाओं में गहरी रुचि रखने की बात इस उदाहरण से भी समझी जा सकती है डॉ सनव्वर पटेल का शिक्षित बेटा भी रंगमंच पर भगवान श्री राम का किरदार निभाता रहा है। इस बात को लेकर कई बार विवाद भी उठे हैं, लेकिन इसका जवाब डॉ पटेल ने सामाजिक सौहाद्र के तकाजों के साथ ही दिया है।

बताया जाता है विवाद
सूत्रों का कहना है कि कालियादेह में मंदिर निर्माण के लिए जो भूमि उपलब्ध कराई है, वह वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके जवाब में डॉ सनव्वर पटेल में यही कहते रहे हैं कि यह जमीन उनके पिता शेर मोहम्मद के आधिपत्य और मालिकी अधिकार की है, जिसका उपयोग अपने तरीके से करने का उन्हें अधिकार है। इधर डॉ सनव्वर पटेल के विपक्षी लोग यह भी कहते हैं मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मप्र वक्फ बोर्ड के करीब 16 खसरे अपने पिता और परिवार के नाम करवा लिए हैं, जिनमें कालियादेह की यह मंदिर भूमि भी शामिल है।

आरोप यह भी
सूत्रों का कहना है कि उज्जैन महाविद्यालय में हुए एक हत्याकांड में डॉ सनव्वर पटेल ने भाजपा संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद की थी। जिसके चलते संगठन द्वारा उन्हें बार बार पदों से नवाजा जाता रहा है। वर्तमान में वे मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष हैं और उनको कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। साथ ही वे संगठन के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं। इससे पहले वे हज कमेटी के अध्यक्ष और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। भाजपा के इतिहास में प्रदेश या पूरे देश में एक ही व्यक्ति को कभी इतने पदों से नहीं नवाजा गया है। यही वजह है कि भाजपा के मुस्लिम कार्यकर्ताओं में इस बात की चर्चा है कि इस एक व्यक्ति के आसपास ही भाजपा की मुस्लिम सियासत सिमटी हुई है।

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