भोपाल। वीआईपी रोड के कब्जादारों के लिए मुश्किलों के नए द्वार खुलने वाले हैं। अदालत से चले आदेश, सीएम की मंशा और भोपाल सांसद के इरादे ने यह हालात बना दिए हैं।वीआईपी मूवमेंट वाले इस इलाके में जमीनों की खरीदी बिक्री और इससे बनने वाले हालात न सिर्फ शहर की कानून व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं बल्कि इससे अदालत के आदेश भी प्रभावित हो रहे हैं और एनजीटी की गाइडलाइन को भी धक्का लग रहा है।
वीआईपी रोड के किनारे बस आई आबादी से एनजीटी के दिशानिर्देश प्रभावित हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बने इन मकानों, होटलों और शादी हॉल से निकला गंदा पानी बड़े तालाब में शामिल हो रहा है। शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले इस तालाब की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए एनजीटी ने तालाब के 100 मीटर दायरे में निर्माण की मनाही की है, लेकिन फर्जी हिबानामा, इनायतनामा, भ्रष्टाचार के दस्तावेजों से यहां बड़ी बसाहट हो गई है।
अदालत के आदेश
वीआईपी रोड के अवैध निर्माण को लेकर अदालत ने बरसों पहले इसको धराशाई करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यहां निर्मित अवैध निर्माण आशियाना विला को गिराने को गिराने के लिए कहा है। यह मकान फर्जी हिबानामा पर खड़ा हुआ है। इसको फर्जी तरीके से विक्रय और भ्रष्टाचार के साथ नामांतरण भी कर दिया गया है। नगर निगम के अधिकारी रहे अब्दुल बसीर, उनकी पत्नी और बेटे सौलत बसीर ने यह धांधली की है।
सीएम की मंशा
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शहर और प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं। मछली परिवार की अनंतपुरा स्थित 99 एकड़ जमीन पर कार्यवाही के डंडे के साथ उन्होंने यह संदेश दिया है। कार्यवाही की यह धुरी अब वीआईपी रोड के अवैध निर्माण की तरफ भी बढ़ने वाली है।
सांसद आलोक की पदयात्रा
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने बड़े तालाब के दायरे में उग आए अवैध निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने बड़े तालाब की सेहत खराब करने वाले निर्माण के खिलाफ पैदल यात्रा निकालने वाले हैं। सांसद आलोक की इस मुहिम के दायरे में वह निर्माण भी गिने जाएंगे जो फर्जी हिबानामा और इनायतनामा के आधार पर खड़े कर लिए गए हैं।
मामला शत्रु संपत्ति का भी
सूत्रों का कहना है कि वीआईपी रोड पर अवैध तरीके से निर्मित और खरीद फरोख्त की जा रही जमीनें वास्तविक रूप से शत्रु संपत्ति में शामिल हैं। इनको लेकर अदालत में कई मामले प्रचलित हैं। ऐसे में इनकी खरीदी, बिक्री या नामांतरण आदि वैसे ही नियमों की अवहेलना मानी जा रही है।
अदालत का आदेश, सीएम की मंशा और सांसद का निर्णय : बढ़ने वाली हैं वीआईपी के कब्जादारों की मुश्किल
