दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में शिक्षकों ने सीखे सांस्कृतिक धरोहर जागरूकता के गुर

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भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय  द्वारा इंटैक भोपाल चैप्टर एवं एचईसीएस इंटैक के सहयोग से 3 एवं 4 सितम्बर को राज्य संग्रहालय, भोपाल में दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला – धरोहर एवं संस्कृति जागरूकता का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में भोपाल के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे दृष्टिकोण एवं संसाधन उपलब्ध कराना था, जिनसे विद्यालयों में धरोहर शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
कार्यशाला के उद्घाटन दिवस पर इंटैक भोपाल चैप्टर के संयोजक मदन मोहन उपाध्याय, संचालनालय
पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय  के सेवानिवृत्त पुरातत्व अधिकारी डॉ. रमेश यादव तथा एकलव्य फाउंडेशन की निदेशक सुश्री तुलतुल विश्वास ने अपने विचार एवं प्रस्तुतियाँ दीं। इन सत्रों में धरोहर शिक्षा, मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर एवं विद्यार्थियों को सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के नवाचारी उपायों पर चर्चा की गई।

दूसरे दिन का कार्यक्रम एचईसीएस इंटैक की टीम द्वारा संचालित किया गया। इसमें प्रधान निदेशक पूनम दत्त एवं कार्यक्रम समन्वयक सुश्री नांकी कौर ने प्रशिक्षण सत्र लिए। “धरोहर क्या है” विषय पर आयोजित सत्र में धरोहर को कहानी, संस्कृति एवं विरासत के रूप में परिभाषित किया गया तथा धरोहर के विभिन्न प्रकारों का परिचय कराया गया। इसके बाद एक परिचयात्मक गतिविधि एवं धरोहर शिक्षा पद्धति पर चर्चा हुई। चर्चाओं में मुख्य रूप से अतीत को समझने, उसकी देखभाल करने और यह पहचानने पर जोर दिया गया कि वर्तमान को समझने के लिए अतीत का सम्मान करना क्यों आवश्यक है। सत्रों में युवाओं को सांस्कृतिक मूल्यों और सांप्रदायिक सौहार्द के महत्व को सिखाने पर भी बल दिया गया।
व्यावहारिक सत्रों में वस्तु अध्ययन, शिक्षकों के किट का उपयोग तथा विद्यालयों में धरोहर क्लब के गठन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। धरोहर संसाधनों पर भी सत्र आयोजित किए गए, जिसके उपरांत प्रतिभागियों ने समूहगत गतिविधियों एवं प्रस्तुतियों में भाग लिया।

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