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GI टैग उल्लंघन का मामला: धार सभा में नकली मशीन से बने बाग प्रिंट स्टॉल जेपी नड्डा-सीएम को भेंट, शिल्पियों में रोष

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार जिले में आयोजित भव्य सभा में GI टैग प्राप्त बाग प्रिंट हस्तशिल्प कला का गंभीर उल्लंघन हुआ। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय, सावित्री ठाकुर सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को मंच पर मशीन से बने नकली बाग प्रिंट स्टॉल भेंट किए गए। इस घटना से पारंपरिक शिल्पियों में भारी रोष व्याप्त है।
सभा के दौरान मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव ने जे.पी. नड्डा को और अन्य अतिथियों को भी ये स्टॉल भेंट किए गए, जो हाथ की ठप्पा छपाई की बजाय मशीन/स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार किए गए थे। बाग प्रिंट कला GI टैग प्राप्त होने के बावजूद इस तरह के नकली उत्पादों का प्रचार सरकारी मंच पर होना एक गंभीर अपराध है, जो शिल्पियों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

शिल्पियों की चिंता: कला लुप्त होने का खतरा
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने बताया, “यदि नकली मशीन से बने बाग प्रिंट उत्पादों का यह चलन बढ़ता रहा, तो असली हाथ की ठप्पा छपाई कला और इससे जुड़े हजारों शिल्पी लुप्त हो जाएंगे। बाग प्रिंट शिल्पियों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। सरकार एक तरफ GI टैग का गुणगान कर रही है, वहीं नकली उत्पादों को बढ़ावा देकर शिल्पियों का अपमान कर रही है।”
बिलाल खत्री ने मांग की है कि नकली स्टॉल सप्लाई करने वाले अपराधियों पर GI टैग उल्लंघन के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई हो, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा शामिल हो। उन्होंने कहा, “मशीन एवं स्क्रीन प्रिंट बाग प्रिंट नहीं हो सकता। प्राकृतिक रंगों, हाथ के ठप्पों और महीनों की मेहनत से बनने वाली यह कला ग्राम बाग की पहचान है।”

GI टैग का महत्व और उल्लंघन के परिणाम
बाग प्रिंट GI टैग प्राप्त होने से केवल धार जिले के विशिष्ट शिल्पियों द्वारा ही इसका उत्पादन और बिक्री वैध है। मशीन से बने नकली उत्पाद बाजार में सस्ते दामों पर बिकते हैं, जिससे असली कारीगरों को आर्थिक नुकसान होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी आयोजनों में नकली उत्पादों का सम्मान मिलना इस कला के लिए घातक साबित होगा।
शिल्पी समुदाय ने सरकार से तत्काल जांच, नकली उत्पाद सप्लायरों पर FIR और असली बाग प्रिंट को संरक्षण देने की मांग की है। इस घटना ने ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना और हस्तशिल्प संरक्षण प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिल्पी समुदाय आशावान है कि सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेगी, ताकि बाग प्रिंट की सांस्कृतिक धरोहर बची रहे।