जिसके वोट से बने मंत्री, उसी जनता को ज़लील मत कीजिए…

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पटियेबाजी

भारत भूषण विश्वकर्मा
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सयाने कहते हैं कि सत्ता और धन का नशा दिखाने के लिए किसी खास मुहूर्त की जरूरत नहीं होती, ये नशा तो लोगों के सर चढ़कर बोलता खुद ब खुद नजर आ ही जाता है… मध्यप्रदेश में गंभीर नेताओं की फेहरिस्त में अब तक शुमार किए जाने वाले प्रहलाद सिंह पटेल के दंभी बयान पर हल्ला मचा हुआ है… मौजूदा सरकार के मंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मां नर्मदा की लगभग दो हजार पांच सौ किलोमीटर की परिक्रमा कर चुके आध्यात्मिक ज्ञान के धनी नेता के इस बयान को भी विपक्ष समेत दिग्गज पत्रकारों ने आड़े हाथों लिया है… पटेल के भाषण का वीडियो जितनी तेजी से वायरल हो रहा है, उतनी ही ज्यादा उनकी किरकिरी होती दिख रही है, सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी पढ़ी सुनी जा सकती है… राजगढ़ जिले के सुठालिया में वीरांगना अवंती बाई लोधी की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर कहे गए “उद्गार” अब माननीय के गले की फांस बनते नजर आ रहे हैं… अगर मौजूदा मंत्री को लोगों का सरकार से या मंत्रियों से मांग करना भीख मांगना लगता है तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आमजन अपनी गुहार लगाने किस दरबार में जाएं…? मतदाताओं द्वारा फूल माला पहना कर मांग पत्र सौंप देने से खिन्न हो जाने वाले मंत्री लगे हाथ यह भी बताएं कि मांग पत्र सौंपने के दूसरे विकल्प क्या हो सकते हैं…? एक संस्कारवान समाज की स्थापना करने को आतुर दिखने वाले प्रहलाद पटेल ने आमजन से “सरकार से भीख न मांगने तथा लेने के बजाय देने का मानस बनाने” का आग्रह किया, लेकिन यह नहीं बताया कि जनता अपनी चुनी हुई सरकार से आस न करे तो कहां जाए…? भिखारियों की फौज जैसे नवीनतम शब्द गढ़ने वाले मंत्री शायद ये बताना भूल गए थे कि पहले स्वागत सत्कार, कुशलक्षेम और बाद में अपनी मांगों को रखने वाले समाज में कौन से विशिष्ट संस्कारों की कमी है…? मंत्री या उनके समर्थक अब जैसे चाहें इस मामले की लीपापोती करते रहें, लेकिन हकीकत यही है कि जनता के वोट से सरकार में बैठे नेताओं को भी अपनी सामाजिक और सार्वजनिक मर्यादा का भान अब नहीं है… जनता को सीधे तौर पर भिखारी तक कह देने की हिम्मत ऐसे ही पैदा नहीं होती, नेताजी के बोल वचन पर तालियां पीटने वाली जनता खुद इसके लिए जाहिर तौर पर जिम्मेदार है…

02-03-2025

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