पटियेबाजी
भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801
आज बड़ा दिन है, आज सरकार ने वो उपलब्धि हासिल की है जिसके ख्वाब आम आदमी तो ख्वाबों में भी नहीं देख सकता… और कहा भी जाता है कि बड़ी उपलब्धि के साथ बड़ी जिम्मेदारी मुफ्त मिलती है… सो आज पक्ष-विपक्ष के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, चिंतकों, विचारकों, लेखकों, विशेषज्ञों, व्यंग्यकार, स्तंभकार, विश्लेषकों और सोशल मीडिया के जाबांजों पर बड़ी जिम्मेदारी आन पड़ी है… मौका ही कुछ ऐसा है कि सभी को भुनाना ही है, जो मारे सो मीर से लेकर मत चूको चौहान वाली सभी कहावतों को आज चरितार्थ होना ही होगा… टीवी स्क्रीन पर दिखने वाले स्पेशल इफैक्ट से भरपूर ग्राफिक्स हों या अत्यंत मारक क्षमता से लैस क्षत विक्षत कर देने वाले व्यंग्यात्मक स्केच कार्टून, सभी तैयार हैं और सतह पर आने को मानो बिलबिला रहे हैं… जानकार कयास लगा रहे हैं कि सत्ता पक्ष की पूरी तैयारी सिर्फ इस बात को सिद्ध करने पर आधारित होगी, कि घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में सीधे पचास रुपए की बढ़ोत्तरी न सिर्फ जनकल्याणकारी है बल्कि देशहित में भी आवश्यक है… उधर राजनीति के पंडितों को भी अंदेशा है कि तमाम विपक्षी दिग्गज आज आस्तीन चढ़ाए इस जुगाड में घूम रहे होंगे, कि जहां कहीं लाइव डिबेट में सत्ता पक्ष वाला प्रवक्ता मिल बैठे तो उसको गरीब विरोधी और कॉरपोरेट प्रेमी घोषित किया जा सके… वहीं दूसरी ओर दिनभर से रास्ते नाप रहे टीवी चैनलों के धुरंधर रिपोर्टर गृहिणियों, विद्यार्थियों, बेरोजगारों और बुजुर्गों की बाइट लेकर उनका दुख रिकॉर्ड कर अपने हिस्से का जिम्मा सम्हाले भी दिखाई दिये… तो अभी तक कुछ ख़ांटी कलमघिस्सु लिख्खाड़ भी सफेद अखबारी पन्नों को स्याह रंगने में मशगूल होंगे और अपने कर्तव्य की इतिश्री कर घर जाने की तैयारी में होंगे… कुल जमा यह कि सरकार द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर पर पचास रुपए बढ़ाने पर सभी ने अपने अपने हिस्से के कर्तव्य निभाए, और कुछ अभी तक निभा भी रहे होंगे… लेकिन हकीकत सिर्फ यह है कि अब इस देश में जनता की सुध जनार्दन भी नहीं ले पा रहे, जनता उन जनसेवकों के फैसले स्वीकार करने को मजबूर है जिनको उसने ही चुना है… एक समय था जब एक राजनीतिक दल के नेता सिलेंडर के साथ प्रदर्शन कर गरीब हित की बातें करते दिखते थे… लेकिन आज इनको महंगाई का म भी सुनाई नहीं देता, और न जनता में उतना उबाल ही बचा है जो अपने ही सेवकों से सवाल कर सके…!
07-04-2025

