भोपाल।। आए दिन पत्रकारों पर बढ़ते अत्याचार और हमलों को देखते हुए राष्ट्रीय पत्रकार महासभा देशभर के अपने सभी जिला पदाधिकारियों से सशक्त अपील करती है कि अब समय आ गया है कि हम एकजुट होकर आवाज़ उठाएँ। गौरतलब है कि आज हिंदुस्तान के कोने-कोने में सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों को लगातार धमकियाँ दी जा रही हैं, उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। कई मामलों में तो दबंग,भू माफिया और असामाजिक तत्व पत्रकारों को मौत के घाट उतार देते हैं। और दुखद यह है कि कई बार कुछ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी फर्जी मुकदमे लगाकर ईमानदार पत्रकारों को प्रताड़ित किया जाता है।
राष्ट्रीय पत्रकार महासभा द्वारा आह्वान किया गया है कि सभी जिला पदाधिकारी अपने-अपने ज़िलों में संगठन को और मजबूत कर। पीड़ित पत्रकारों की सुरक्षा,न्याय और सम्मान के लिए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें। किसी भी पत्रकार पर अत्याचार की सूचना मिलते ही ज़िला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक मामला उठाएँ। राष्ट्रीय पत्रकार महासभा लगातार पीड़ित पत्रकारों की आवाज़ बनकर खड़ी रही है और आगे भी न्याय दिलाने के लिए हर संभव कानूनी, सामाजिक और संगठनात्मक लड़ाई लड़ेगी। यह केवल एक संगठन नहीं बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प है। एकजुट रहें संगठित रहें अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाएँ।
जीतेन्द्र सेन राष्ट्रीय पत्रकार महासभा भोपाल जिला अध्यक्ष
Category: धर्मसमाज
गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वास केवल शब्द नहीं यह हमारे जीवन की नींव है : गोविंद सिंह राजपूत
खाद्य मंत्री ने मानक महोत्सव पर गुणवत्ता के क्षेत्र में कार्य करने वाले मानक प्रदर्शकों को किया सम्मानित
भोपाल । प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि आज पूरी दुनिया विश्व मानक दिवस मना रही हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वास केवल एक शब्द नहीं बल्कि यह हमारे जीवन की एक नींव है। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि जब हम एक समान मानक अपनाते है तो हम न केवल अपने उत्पादों को बेहतर बनाते है बल्कि समाज और देश को भी मजबूत बनाते है ।
श्री राजपूत ने यह बात उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भारत सरकार की भोपाल इकाई भारतीय मानक ब्यू्रों द्वारा आयोजित मानक महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुये कही। इस अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरों भोपाल के वैज्ञानिक-ई/ निदेशक एवं प्रमुख मोहम्मद रिजवान भारतीय मानक ब्यूरों भोपाल के अधिकारी, औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
मानक महोत्सव को संबोधित करते हुये खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि आज का उपभोक्ता समझदार हो गया है। वह कोई भी वस्तु खरीदता है तो उसमें आईएसआई मार्क और हॉलमार्क जरूर देखता है। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र मानकों से अछूता नहीं है। इन्हीं मानकों की वजह से हमें भरोसा होता है कि जो चीज हम इस्तेमाल कर रहे है वह सुरक्षित टिकाऊ और भरोसेंमंद है।
गुणवत्ता और सुरक्षा के मानक तय है :
खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि मैं विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि, खाद्य मानक सीधे तौर पर जनता के विश्वास से जुड़े है। हमारा हर निवाला तभी सुरक्षित होगा जब उसमें गुणवत्ता और सुरक्षा के मानक तय हो। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरों, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण तथा राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उपभोक्ता को शुद्ध, सुरक्षित और मानकयुक्त भोजन मिले। राजपूत ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जिस आत्मनिर्भर भारत की कल्पना करते हैं और स्वदेशी अपनाने की बात कह रहे है उसे पूरा करने के लिये हम सभी को एक संकल्प लेना होगा कि हम राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान के रूप में गुणवत्ता युक्त उत्पादों को बाजार में उतारों जिससे मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल का सपना साकार हों सकें। इस अवसर पर खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने मानक के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले औद्योगिक प्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा भारतीय मानक ब्यू्रों के कर्मचारियों/अधिकारियों को सम्माननित किया।
वादे पे तेरे मारा गया…!
चकरघिन्नी. कॉम
खान आशु
वादा.. और वह भी सियासी वादा… सियासत में चुनाव के दौरान किया गया वादा…! वादे तो ही तोड़ने के लिए हैं, यह लोगों की आम धारणा है…!
और चुनावी वादों का क्या, वह तो मंच से लहराते ही हैं, टूटने के लिए हैं…!
लेकिन इच्छाशक्ति… दृढ़ संकल्प… और कुछ कर गुजरने का सच्चा मन…! इसीलिए 29 माह गुजर गए, वादा अडिग रहा, खुशियां बरकरार रहीं, बहनों की मुस्कान लगातार रही…! तनिक देरी से बवाल खड़ा कर देने वाले विरोधियों के मुंह दही जमने के हालात बनते रहे…!
रक्षा बंधन के पवित्र पर्व का सिलसिला इस दीपावली की खुशियों में अधिक मिठास घोले हुए हैं…! एक हज़ार का सिलसिला, 1250 पर पहुंचकर आनंदित करता रहा है… अब 1500 की रकम के साथ प्रफुल्लित करने लगा है…!
बहनों के आत्मविश्वास, बढ़ते संबल और हम भी समाज में भागीदारी रखते हैं के दम को ही सशक्तिकरण कहना गैर मुनासिब नहीं होगा…! अपने छोटे छोटे खर्चों के लिए, बच्चों की छोटी आवश्यकता के लिए और कई बार परिवारिक कार्यों में मदद के हाथ जुटाने लायक बनाने जैसी नारी शक्ति बन गई है…!
स्थानीय, नगरीय और छोटी सियासत से अब विधानसभा और लोकसभा तक में प्रतिनिधत्व का दम भी उन्हें मिला है…! सरकारी दफ्तरों से निजी निकाय तक कल कारखानों तक में बहनों की संख्या तय हो गई है तो प्रदेश और केंद्र के सदन में उनका मुकाम जल्दी ही तय होने वाला है…!
प्रदेश की आधी आबादी पर मुस्कान लाने के प्रयास पिछले उन वर्षों में भी होना संभव था, जब बागडोर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील, अगंभीर, गैर ईमानदार लोगों के हाथ हुआ करती थी…! ग़म इसका मनाने की बजाए कि अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ, गर्व इसका मनाया जाना चाहिए कि महिलाशक्तिकरण की नई पहल हो चुकी है, जो सतत जारी रहेगी…!
पुछल्ला
एकता पाठ का सार
राजा उनके घर जा पहुंचे जिनसे उनकी पुरानी खुन्नस मानी जाती है। इस युवा(?) नेता की बुजुर्ग बुआ जी से राजा जी के पंगे थे। लेकिन राजकुंवर का रास्ता साफ करना है। आने वाले वक्त में सत्ता की चाबी राजकुमार को सौंपने की उमंग ने एकता पाठ की आवश्यकता को सामने खड़ा कर दिया है। इसलिए शुरुआत गैरों से की जा रही है, अपनों के साथ देने की उम्मीद बंधी ही है न!
=============
*12/10/2025*
खाद्य मंत्री राजपूत ने स्व.यशोदा पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त की
भोपाल।प्रदेश सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण और नरसिंहपुर जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शनिवार को नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव स्थित प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल और सरदार सिंह पटेल के निज निवास में आकर उनकी माता स्व.श्रीमती यशोदा पटेल के दु:खद निधन पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट की और शोक संवेदना व्यक्त की।
नवीन प्रदाय केंद्रों से घटा परिवहन व्यय, होगी 197.16 लाख रुपये की वार्षिक बचत
मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना बनी दक्ष आपूर्ति प्रबंधन का उदाहरण : गोविंद सिंह राजपूत
भोपाल।लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन सामग्री की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के अंतर्गत 15 जिलों में विकासखण्ड स्तर पर नवीन प्रदाय केंद्र खोले गए हैं, जिससे राशन सामग्री के उचित मूल्य दुकानों तक परिवहन की दूरी में उल्लेखनीय कमी आई है।
मंत्री राजपूत ने बताया कि इन प्रदाय केंद्रों के खुलने से राशन सामग्री के प्रदाय केंद्र और उचित मूल्य दुकानों के बीच की औसत दूरी घट गई है, जिससे परिवहन व्यय में भारी बचत संभव हुई है। विभागीय विश्लेषण के अनुसार, 12 जिलों में परिवहन दूरी में कमी आने से औसत परिवहन एवं हैंडलिंग दरों में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके फलस्वरूप राज्य को वार्षिक 197.16 लाख रुपये की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के अंतर्गत अनुबंधित परिवहनकर्ताओं को परिवहन व्यय का निर्धारण प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अंतर्गत आवंटित खाद्यान्न की दूरी और डीजल खपत के आधार पर किया जाता है। साथ ही अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवंटित खाद्यान्न, शक्कर और नमक के लिए परिवहन व्यय शासन द्वारा जारी लागत पत्रक के अनुसार देय है।
खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक राशन सामग्री समय पर, गुणवत्ता के साथ और न्यूनतम लागत में पहुँचे। विकासखण्ड स्तर पर प्रदाय केंद्रों के खुलने से अब राशन वितरण की प्रक्रिया और अधिक तेज, पारदर्शी एवं जनसुलभ हो गई है।
मंत्री राजपूत ने कहा कि इस पहल से जहां विभाग को आर्थिक बचत हुई है, वहीं ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक खाद्यान्न वितरण की लॉजिस्टिक दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। यह कदम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘सशक्त ग्रामीण वितरण तंत्र’ के विज़न को साकार करने की दिशा में एक और ठोस प्रयास है। उन्होंने कहा कि विभाग निरंतर आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक और लागत प्रभावी बनाने की दिशा में कार्यरत है ताकि हर परिवार तक अन्न की सहज और समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित हो सके।
दिल की बात, दिल से…
चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु
सड़क किनारे दर्द से कराहते व्यक्ति की कुशल क्षेम पूछने, उसे इलाज मुहैया कराने, परिजन को सुरक्षित घर तक पहुंचाने वो काफिला रुकवा लेते हैं…! चाय के ठेले, आम या भुट्टे देखकर वो अपना प्रोटोकॉल बिसरा देते हैं…! दूध के कड़ाव पर भी भीड़ भरे इलाके में ठहरने में वे नहीं झिझकते…!
बात मासूमों के अचानक दुनिया से रुखसत हो जाने की हो, तो वे संवेदनशीलता को कहां छोड़ सकते थे…? गलती के लिए कसूरवारों को जांच के घेरे में डालने दल गठित कर दिया गया…! शुरुआती दोषियों को सलाखों के पीछे भी पहुंचा दिया…! मन न माना तो बीमारों से मिलने भी जा पहुंचे, किसी पराए परदेस में…!
आदत कीड़े खोजने की है, खोजे जाने लगे हैं…! मौत पर मातम की बजाए रोटियां सेंकने की आदत है, सेंकी जा रही है…! यह किया होता तो, वह न होता… ऐसा कर लेते तो वैसा न हुआ होता, की पीपडी बजने लगी है…!
संवेदनशीलता, दूसरों का दर्द समझने की आदत, सबके विकास और सबके साथ की धारणा रखने वाले का ही विरोध सिर्फ इसलिए करना है कि हम विपक्षी हैं, तो करो…! लेकिन यह पब्लिक है, सब जानती है, अपने भैया को भी पहचानने में उनसे गलती नहीं होने वाली…!
पुछल्ला
बिल्ली के भाग से छींका नहीं टूटा करता। अपनी कमियों, कमजोरियों, गलतियों से हाथ आई सरकार गंवा बैठे लोग अब बैठे थाले कोई कमी होने की राह तकते रहते हैं। लेकिन हालत यह हैं कि न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी।
===============
10/10/2025
प्रदीप अपने जीवनकाल में रहे मंच को समर्पित, जीवंत किए कई किरदार
3 दिवसीय नाट्योत्सव की शुरुआत
भोपाल। सुबह की रुपहली रंगत, दिन का उजियारा और रात की सुरमई छटा में उन्हें सिर्फ रंगमंच ही नजर आता था। प्रदीप अहिरवार ने अपने जीवनकाल में कई किरदार जीवंत किए। अब दुनिया से रुखसत के बाद भी वे रंगमंच की हर बारीकी में समाए हुए हैं।
तीन दिवसीय प्रदीप अहिरवार नाट्योत्सव के पहले दिन मेहमानों ने स्व. प्रदीप अहिरवार को इन शब्दों में याद किया। उनकी पत्नी रंजना प्रदीप, भाई अर्जुन अहिरवार, मित्र अदनान खान और रंग मोहल्ला सोसायटी के सदस्य इस अवसर पर मौजूद थे। अतिथियों ने कहा कि बेहतर कल एक अच्छे मन से होकर ही गुजर सकती है। प्रदीप ने अपने कोमल हृदय और कुशल व्यवहार से कई पात्रों को जीवंत किया है। उनकी कला आज भी याद की जाती है और भविष्य में याद की जाती रहेगी। प्रदीप की कमी भोपाल का रंगमंच हमेशा महसूस करेगा।

तीन दिन का नाट्योत्सव
स्व. प्रदीप अहिरवार को श्रद्धांजलि भी उनके अंदाज में नाट्योत्सव से दी जा रही है। इसके लिए तीन दिवसीय आयोजन की परिकल्पना की गई है। संस्था के अर्जुन अहिरवार ने बताया कि समारोह की परिकल्पना संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की सांस्कृतिक एवं प्रस्तुति अनुदान योजना के तहत की गईं है। इसके अंतर्गत रंग मोहल्ला सोसाइटी फॉर परफार्मिंग आर्ट्स समिति भोपाल द्वारा पहले दिन 9 अक्टूबर को दिनेश भारती द्वारा लिखित एवं अदनान खान द्वारा निर्देशित हास्य नाटक “द ग्रेट राजा मास्टर टेलर एंड ड्रामा कंपनी” का मंचन किया गया। रंग मोहल्ला सोसाइटी फॉर परफार्मिंग आर्ट्स समिति के कलाकारों ने इसकी प्रस्तुति दी।

दो दिन जारी रहेगा सिलसिला
अहिरवार ने बताया कि समारोह के अगले दिन 10 अक्टूबर को सुनील मिश्र द्वारा लिखित एवं आनंद मिश्र द्वारा निर्देशित नाटक “ऐसे रहो की धरती” की प्रस्तुति सघन सोसायटी फॉर कल्वर एवं वेलफेयर के कलाकार द्वारा दी जाएगी। समारोह के आखिरी दिन 11 अक्टूबर को अब्दुल हक द्वारा लिखित एवं विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित नाटक “संगी रहो संग छूट गव” की प्रस्तुति रामकृष्ण रिपरटायर कल्चर एंड सोशल सोसाइटी के कलाकार द्वारा दी जाएगी।

दवा कंपनियों की लापरवाही उस पर भारी अज्ञानता
पड़ताल : क्योंकि, सच जानना जरूरी है
राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। मामले के तूल पकड़ते ही अब सरकार और दवा कंपनी कटघरे में आ गई है।
हालांकि, दवा ही ज़हर बन गई, यह बात इतनी आसानी से गले नहीं उतर रही, लिहाजा इस मामले की पड़ताल जरूरी थी ताकि सच के करीब पहुंचा जा सके। जो हमने जाना-समझा उसकी चर्चा से पहले हम दवा कंपनियों की लापरवाही पर आते हैं। कफ सिरप ही क्यों?, ऐसी कोई भी दवा जो गुणवत्ताहीन है, दूषित है या एक्सपायरी है वह मार्केट तक पहुंची कैसे? जाहिर है सरकारीतंत्र से मिलीभगत और कालाबाजारी ने ऐसी दवाओं को बाज़ार तक पहुंचाया जो बच्चों की मौत का कारण बनीं। यहां इस बात का जिक्र करना भी लाजिमी है कि ज्यादातर मामलों में ऐसा देखा और पाया गया है कि, गिफ्ट, कमीशन और नगद उपहार के लालच में आकर कतिपय डॉक्टर्स दवा कंपनियों के ऑफर को स्वीकार कर ऐसी दवाएं लिख देते हैं, जो जरूरी नहीं होतीं।
दवाओं में एडवाइजरी क्यों नहीं?
अब दूसरा पहलू यह भी है कि, 2 साल और पांच साल के बच्चों को दवा पिलाने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो एडवाइजरी इस घटना के बाद जारी की है, वह पहले से दवा कंपनियों के लिए जरूरी क्यों नहीं की गई। अगर दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं पिलाना चाहिए तो यह बात कफ सिरप की बोतल में लिखी होनी चाहिए थी।( कम से कम उस डॉ को तो यह बात पता होनी चाहिए थी, जिसने दवा लिखी।) अब इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है? सवाल यह भी है कि महज डॉक्टर पर कार्यवाही कर इस संगीन अपराध से सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती, संबंधित दवा कंपनी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। यह दर्शाता है कि सरकार और दवा कंपनी के बीच “कुछ” तो है। खैर, “कुछ” हो ना हो आम जनमानस में यही भाव जागेगा।
अज्ञानता भी एक बड़ी वजह
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया तहसील में कफ सिरप पीने से जिन बच्चों की मौत हुई, हमारी पड़ताल में व्यक्तिगत तौर पर की गई लापरवाही भी सामने आई है। ( मैं यहां यह स्पष्ट कर दूं कि इस पड़ताल से सरकार और दवा कंपनी की घोर लापरवाही पर पर्दा डालने का कतई मकसद नहीं है।) “व्यक्तिगत लापरवाही” को हम यूं समझें कि, जागरूकता की कमी या ना समझी। कमोवेश यह घटनाएं जहां जहां हुईं, वहां दवा देने की टाइमिंग और डोज को लेकर अज्ञानता भी देखी गई। 2 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को कितनी मात्रा में और कब कब दवा पिलानी है यह जानकारी भी पेरेंट्स को होनी चाहिए। कई बार ज्यादा खांसी चलने पर घबराहट में माता-पिता बच्चों को दवा की ओवरडोज दे देते हैं ताकि वे जल्दी ठीक हो जाएं ,लेकिन ऐसा करना जानलेवा होता है। हमारी पड़ताल में यह बात भी निकल कर सामने आई है। (लेकिन हम इसी को एकमात्र कारण मान लें यह भी जरूरी नहीं।) दरअसल कफ सिरप किडनी और हार्ट को प्रभावित करता है और यदि यह ओवरडोज बच्चों को दे दी जाए तो यह कितना घातक हो सकता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसीलिए बच्चों को डॉक्टर की निगरानी में ही दवाएं देनी चाहिए।
पड़ताल का दूसरा पहलू यह भी गौर करने लायक है कि, बीमार बच्चों के मामले में कफ सिरप के साथ-साथ दूसरी अन्य मेडिसिन भी दी गईं, (बुखार और सर्दी जुकाम से संबंधित) जिसका नॉलेज भी पेरेंट्स को होना चाहिए। यह पता होना चाहिए कि दवाओं का मिश्रित रूप स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।
बहरहाल, दूषित दवा, अज्ञानता या व्यक्तिगत लापरवाही हम किसी निष्कर्ष या नतीजे पर नहीं पहुंच सकते। बच्चों की मौत का मामला बेहद दुखद, मार्मिक और संगीन है, इसकी पूरी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए और ऐसी दवाओं पर भी रोक लगनी चाहिए ताकि भविष्य में और जिंदगियां मौत के मुंह में जाने से बच जाएं।
(लेखक जितेंद्र सूर्यवंशी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
यूनानी बिरादरी को मिलेगा पूरा सहयोग, ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कान्फ्रेंस का आयोजन आज
भोपाल। ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कान्फ्रेंस ने नेशनल कमीशन फार इंडियन सिस्टम आफ मेडिसिन (NCISM) और दिल्ली राज्य आईएसएम बोर्ड की अनुमति एवं सहयोग से अपनी पहली कटिन्युअस मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यक्रम की घोषणा की है। यह कार्यक्रम 5 अक्टूबर को आन्ध्रा भवन, नई दिल्ली स्थित अंबेडकर आडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा।
एनसीआईएसएम ने हाल ही में आईएसएम स्नातकों के लिए कौशल अद्यतन (स्किल अपग्रेडेशन) को अनिवार्य कर दिया है। अब पंजीकरण नवीनीकरण केवल उन्हीं चिकित्सकों का होगा, जिन्होंने CME कार्यक्रमों में भाग लेकर कम से कम 10 क्रेडिट पाइंट्स प्रति वर्ष प्राप्त किए हों।
119 वर्ष पुरानी ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कान्फ्रेंस ने इस दिशा में पहल करते हुए यूनानी स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सकों के हित में ऐसा कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस राष्ट्रीय CME में चार प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के एक-एक घंटे के विशेष व्याख्यान होंगे तथा चिकित्सकों के हेल्य प्रोफेशनल रजिस्ट्री की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. खालिद सिद्दीकी ने कहा कि यूनानी चिकित्सकों के कौशल उन्नयन की यह एक सतत प्रक्रिया है और ऐसे कार्यक्रम दिल्ली के साथ अन्य राज्यों में भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने पांच राज्यों से 300 से अधिक प्रतिभागियों के पंजीकरण और लंबी प्रतीक्षा सूची पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा यूनानी बिरादरी को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
यह सूचित किया जाता है कि कार्यक्रम स्थल पर पंजीकरण की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत रायपुर में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
रायपुर| ग्राम रायपुर के स्वास्थ्य केंद्र में आज “स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार” अभियान के अंतर्गत एक विशाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं एवं बच्चों सहित अन्य ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
शिविर में ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन, एनीमिया सहित विभिन्न जांचें की गईं। साथ ही SRF फाउंडेशन द्वारा एक समुदायिक बैठक का आयोजन कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एवं जागरूकता प्रदान की गई। बैठक में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता को परिवार एवं समाज की प्रगति से जोड़ते हुए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में यह रहें उपस्थित
दारा सिंह, सरपंच, ग्राम रायपुर , अमित चौहान, भाजपा पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष , जितेंद्र डांगी, मीडिया प्रभारी , डॉ. उन्नयन पांडेय , सीएचओ खुशबू यादव , डालचंद जी, रोजगार सहायक , वीरेंद्र सिंह जाट, सचिव , आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम
SRF Foundation से विष्णु वर्मा , अमित मीना एवं कुलदीप सिंह तथा समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहें !

ग्रामवासियों ने इस पहल का स्वागत किया और अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया। उपस्थित अतिथियों ने शिविर की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
