मिल बैठे देशभर के माहेश्वरी समाज के व्यापारी, वैश्विक पहचान की पहल

भोपाल। माहेश्वरी इंटरनेशनल बिजनेस फाउंडेशन द्वारा जोधपुर में आयोजित  व्यापारिक संवाद बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े माहेश्वरी समाज के प्रमुख उद्योगपतियों, उद्यमियों एवं पेशेवरों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। बैठक ने संगठित व्यापारिक नेटवर्किंग को एक नई दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें अनिल कुमार लाहोटी चेयरमैन, दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण एवं पूर्व चेयरमैन एवं सीईओ रेलवे बोर्ड राजेश मालपानी (मालपानी समूह), विनीत सरडा (पीटीआई इम्पैक्स), गोपाल काबरा (आरआर केबल), प्रदीप गांधी, पूर्व सांसद (14वीं लोकसभा), शोभा सदानी, चेयरमैन माहेश्वरी महिला उद्योग एवं सुनील जागेटिया, सन मैनेजमेंट ग्रुप, दुबई प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

एमआईबीएफ के संस्थापक महामंत्री संतोष लाहोटी एवं प्रशांत माहेश्वरी ने मंच को संबोधित करते हुए संस्था के मिशन, विजन एवं भावी विकास योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज के सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे भारत सहित विदेशों में बसे माहेश्वरी व्यवसायियों और पेशेवरों को एक साझा मंच पर जोड़ने का प्रयास करें, जिससे एक सशक्त एवं वास्तविक वैश्विक माहेश्वरी व्यापार नेटवर्क का निर्माण हो सके और समाज के समग्र आर्थिक विकास को गति मिले।
बैठक में 100 से अधिक उद्योगपतियों, उद्यमियों एवं पेशेवरों ने सक्रिय सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने व्यवसायिक क्षेत्रों का परिचय साझा किया, जिससे आपसी सहयोग, नेटवर्किंग एवं व्यापारिक संभावनाओं के नए द्वार खुले। इस अवसर पर कई गणमान्य सदस्यों की विशेष उपस्थिति रही, जिनमें भाविका माहेश्वरी, योगेश बिड़ला, सुनीता महेश्वरी, रानू परवाल, विनोद लाहोटी,  अतुल लाहोटी, मुकुल राठी (अमेरिका), अनिरुद्ध राठी, मधुर झंवर, मुकेश जाकेटिया, सुरेश लाखोटिया, महावीर लाहोटी, मुकेश चेचानी, अजय गट्टानी, कैलाश काबरा तथा  विकास मूंदड़ा प्रमुख रूप से सम्मिलित रहे।
कार्यक्रम का संचालन दीपिका बियानी द्वारा किया गया। दीपक माहेश्वरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा आगामी 18 जनवरी को मुंबई में आयोजित होने जा रहे एमआईबीएफ के “कॉन्क्लेव ऑन फ्यूचर ऑफ इन्वेस्टिंग” की विस्तृत जानकारी साझा की।

युवाओं को पसंद आ रही “कमरे की दीवारों ने देखा है ”  पुस्तक

अमित सेन
8085661177

शुभम सक्सेना की पहली पुस्तक ने विश्व पुस्तक मेले में बनाई अलग पहचान।

भोपाल! भोपाल के युवा लेखक शुभम सक्सेना के लिए यह क्षण गर्व का है कि उनकी पहली काव्य पुस्तक “कमरे की दीवारों ने देखा है” देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन विश्व पुस्तक मेला, भारत मंडपम (नई दिल्ली) में प्रदर्शित की गई है। यह मेला 10 से 18 जनवरी तक आयोजित हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के हजारों प्रकाशक और लेखक भाग ले रहे हैं।
इस पुस्तक का चयन ऐसे समय में हुआ है जब यहां गुलज़ार, चेतन भगत, मुंशी प्रेमचंद, विनोद कुमार शुक्ल और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जैसे दिग्गज लेखकों की कृतियां भी मौजूद हैं। ऐसे साहित्यिक दिग्गजों के बीच एक युवा लेखक की पहली पुस्तक का स्थान पाना अपने-आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
“कमरे की दीवारों ने देखा है” एक कविता और शायरी संग्रह है, जिसमें आम आदमी की भावनाएं, अकेलापन, संघर्ष, सपने और समाज की सच्चाइयों को संवेदनशील शब्दों में पिरोया गया है। पुस्तक विशेष रूप से युवाओं की आंतरिक दुनिया और आज के दौर की चुप्पी को आवाज़ देती है इस पुस्तक का प्रकाशन मांडा पब्लिकेशन के द्वारा किया गया है ।

विश्व पुस्तक मेला, भारत मंडपम (नई दिल्ली) में किताब पड़ती छात्रा

चित्रकारी , फोटोग्राफी , और लेखनी के शौकीन शुभम
शुभम सक्सेना भोपाल के युवा लेखक और कवि हैं। वे पत्रकारिता (मास कम्युनिकेशन) के विद्यार्थी हैं और साथ ही सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मसंवाद और समाज से जुड़ने का तरीका है। आज इस पुस्तक की उपलब्धि के अलावा चित्रकारी , फोटोग्राफी और कविता, थोट, शायरी लिखने में माहिर है वहीं भास्कर , पत्रिका जैसे बड़े अखबारों की प्रतियोगिताओं में भी शुभम अव्वल रहे है !

युवाओं को भा गई ” कमरे की दीवारों ने देखा है !

शुभम ने इस किताब में अपने उन पलों को उकेरा है, जिन्हें व्यक्ति अक्सर अकेले में जीता है—जहाँ कमरे की दीवारें ही उसकी गवाह बनती हैं। पुस्तक विशेष रूप से युवा पाठकों से संवाद स्थापित करती है और उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।
वहीं भारत मंडपम (नई दिल्ली) में लगे पुस्तक मेले में युवाओं को यह किताब खूब भा रही है और युवा इस किताब को खासा पसंद कर रहे हैं !

सपना हो गया साकार

लेखक शुभम सक्सेना

अपनी इस उपलब्धि पर शुभम सक्सेना कहते हैं , “यह सिर्फ मेरी नहीं, हर उस युवा की जीत है जो अपने शब्दों से कुछ कहना चाहता है। विश्व पुस्तक मेले में अपनी पहली किताब को देखना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है।

युवाओं को भा गई कमरे की दीवारों ने देखा है!

ज़िंदगी की डोर पर भारी पड़ रहा जानलेवा मांझा, मौत का जिम्मा किसके सर…?

पटियेबाजी

बड़ा सवाल, और कितनी जिंदगियों को लीलेगी प्रशासनिक नाकामी…?

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

बेशक वो घर को चलाने वाला ही रहा होगा तभी “इतवार” को भी काम खोजने निकल पड़ा… वरना किसी निकम्मे और बेशर्म सरकारी करिंदे की तरह “संडे” की मौज काट रहा होता… कहने को तो छुट्टी इंसान की जिंदगी में थोड़ा सा आराम और अगले हफ्ते भर चलने की ताज़गी लेकर आती है… लेकिन उसके लिए ये इतवार आखिरी साबित होते हुए, जीवन को जद्दोजहद और संघर्ष से मुक्त कर गया… चलती सड़क पर किसी तेज़ नश्तरी धागे से भी मौत हो सकती है ये बात उन नौकरशाहों की समझ नहीं आ सकती जो खुद बंद शीशे वाली “सरकारी” कारों में चलते हैं… जिनकी औलादों के पास महंगी लग्ज़री गाड़ियां हैं, जिनके अधिकतर काम करने को नौकर चाकरों की फ़ौज लगी होती है… शायद इसी बेफिक्री के चलते अब मोटी पगार पाने वाले सरकारी मुस्टंडों का काम फ़िलहाल “एडवायजरी” और सख़्त कार्यवाही की चेतावनी देते “प्रेस नोट” जारी करना ही रह गया है… अगर जमीन पर काम हो रहा होता तो वो हमारे बीच मौजूद होता जिसकी जिंदगी का दीया आज बुझ चुका है… ये मुद्दा आम आदमी का है, इन जैसे तमाम मामलों पर आम आदमी को ही लड़ना पड़ेगा… जिंदा रहना हर आदमी का अधिकार है और उसके जिंदा रहने के हक़ पर डाका किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है… अब वक़्त है कि जिम्मेदारों की गिरेबाँ पकड़ कर उनसे पूछा जाए कि ये जानलेवा मांझा शहर में कैसे आया? कैसे बिका…? हर अधिकारी कर्मचारी और विभाग की जवाबदेही किसी भी इंसानी जान की सलामती के लिए तय होना ही चाहिए… ऐसी घटनाओं का दोहराव हर साल देखने सुनने को मिलता है, जहां मांझे से इंसानों और पक्षियों के घायल होते हैं यहां तक कि उनकी मौत भी हो जाती है… इसके बाद भी अगर कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखता तो ये इस बात कर प्रमाण है कि प्रशासनिक अमले न सिर्फ नाकामी बो रहे हैं बल्कि दूसरों की जान को बेहद सस्ती चीज समझ रहे हैं… एक जान गई है इंदौर में, एक अस्पताल में गंभीर जख्मी होकर भर्ती है, अब इन घटनाओं के जिम्मेदारों की खोज होना ही चाहिए… अब ये तय होना जरूरी है कि मांझे से होने वाली मौत का जिम्मा किसके सर जाना चाहिए…? शासन और प्रशासन की नाकामी आखिर कितने प्राणों का होम लेगी ये भी बड़ा सवाल है…?


11-01-2026

महिला मोर्चा और युवा मोर्चा संगठन की उर्जा, हर बूथ पर मिलेगी मजबूती- रविन्द्र यति

अटल भवन में महिला मोर्चा और युवा मोर्चा की संयुक्त बैठक को किया संबोधित

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी जिला भोपाल के जिला अध्यक्ष श्री रविंद्र यति की अध्यक्षता में जिला कार्यालय अटल भवन में भाजपा महिला मोर्चा एवं भाजपा युवा मोर्चा के जिला पदाधिकारियों की संयुक्त कामकाजी बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य संगठनात्मक मजबूती, बूथ सशक्तिकरण तथा आगामी कार्यक्रमों की प्रभावी रणनीति तैयार करना रहा। बैठक को महापौर श्रीमती मालती राय ने भी संबोधित किया।

बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष रविंद्र यति ने कहा कि मजबूत संगठन की नींव बूथ स्तर पर ही रखी जाती है। “मेरा बूथ सबसे मजबूत, बूथ जीता, चुनाव जीता” केवल नारा नहीं, बल्कि भाजपा की कार्य संस्कृति है। प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने बूथ को सक्रिय, संगठित और सशक्त बनाने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता से कार्य करना होगा। यति ने कहा कि मतदाता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए जनसंपर्क को और अधिक व्यापक तथा प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने मतदाता जागरूकता अभियानों को गति देने, नए मतदाताओं को जोड़ने तथा पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित रूप से दर्ज कराए जाए। उन्होंने कहा कि महिला मोर्चा और युवा मोर्चा संगठन की ऊर्जा हैं और इनकी सक्रिय भूमिका से हर बूथ पर संगठन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में महिलाओं एवं युवाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष मनोज राठौर, जिला मंत्री राजकुमार विश्वकर्मा, भाषित दीक्षित, भाजपा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष अजय पाटीदार,  नवल प्रजापति,  राजेश साहू,  रामाश्रय सिंह एवं अशोक शुक्ला महेश मकवाना सहित महिला मोर्चा पदाधिकारी एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सीएम के हाथों डॉ. यशोधर मठपाल को मिला 19वां डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने ख्यातनाम पुरातत्वविद डॉ. यशोधर मठपाल को प्रशस्ति पत्र के साथ 2 लाख रूपए का चेक भेंट कर 19 वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया। राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम 11 जनवरी तक जारी रहेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति का निर्माण कर भारतीय संस्कृति, कला एवं शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने रातापानी अभयारण्य का नामकरण डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर जी के नाम पर करने का निर्णय किया है। उत्खनन के क्षेत्र में उनका योगदान अभूतपूर्व है।
आयोजन संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा किया गया था। इस अवसर पर प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल को पुरातत्व के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. मठपाल द्वारा 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं की खोज की गई है। उन्होंने शैल चित्र संरक्षण की पद्धतियों में भी अग्रणी कार्य किया है। जिसके चलते उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर ख्याति है।

बात हुई पुरातत्व की प्रगतियों पर
इस अवसर पर “पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्नों में अद्यतन प्रगतियां” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी को देशभर से प्रख्यात विषय विशषज्ञों, वरिष्ठ प्रशासकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विरासत विशेषज्ञों ने संबोधित किया।

बताओ तो साहब, तलब किए गए थे या सफाई देने गए थे…

पटियेबाजी

अब लोग कह रहे, कम से कम अपने ओहदे का तो मान रखा होता…

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

कहीं थोकबंद मौतों पर भी आंकड़ों में न उलझने की बातें तो कहीं मरने वालों के प्रति दुःख जताने के जतन… कभी “जो हुआ सो हुआ” जैसे मुहावरे भी बड़बोले होने के सबूत के साथ सुनाई दे गए तो कहीं से खुद को ईमानदार दिखाने की कोशिशें ही पत्रकारों को धौंस देती दिखाई पड़ीं… वो चेहरा जिसे कभी मजाकिया जुमलों और हंसी का पर्याय बताया जाता था, आज तंग सुरक्षा घेरे में महफूज़ लेकिन गंभीर ही नजर आया… इंदौर में प्रशासनिक नाकामी के चलते घटी घटना पर सबके अपने तर्क हैं, लेकिन खुद के बचाव में… एक वरिष्ठ पत्रकार को मिले अश्लील जवाब पर जो प्रतिक्रिया सामने आई वह भी सबने देखी है, और अपने आका को मुश्किलों से राहत देने वाले सवाल भी सभी ने सुने हैं… सवालिया तीरों की बारिश में जवाबी ढाल से लैस सियासी जिम्मेदारों की असल कलई भी पूरी तरह खुल चुकी है… अधिकारी हमारी नहीं सुनते जैसे उद्गार उन श्री मुखों से झर रहे हैं जो जरा सी बात पर भी बतंगड़ बनाने में माहिर हैं… लेकिन ये भी ठीक ही हुआ जो सूबे की आवाम को भी आज समझ आया कि, पूरी ऐंठ में शीशे बंद गाड़ियों में रौब गांठने वाले हमारे भाईसाब को निम्न स्तर के कर्मचारी भी गंभीरता से नहीं लेते… इस प्रकरण में लगातार फ्रंट लाइन पर खेलने वाले बड़े साहब का लेटेस्ट डिफेंस अब जनता के बीच कानाफूसी का विषय बन चुका है… कभी राहत टैंकरों के पानी चखकर लोगों में भरोसा जगाने वाले बड़े साहब फिलवक्त किसी बड़े दबाव में दिख रहे हैं… लोगों में उत्सुकता यह जानने की है कि बड़े साहब दरबार में सफाई देने गए थे या उन्हें भी दरबार में तलब किया जाने लगा है… हालांकि वजह जो भी हो बड़े साहब का दरबारी बनना न सिर्फ जनता बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी नुकसान है… लेकिन अपन कर भी क्या सकते हैं, न तो बड़े साहब पर अपना जोर है और न ही दरबार से भिड़ने लायक सामर्थ्य है… मौजूदा सरकार में जमे लोगों और भाजपा की राजनीति करने वालों का दरबार जाना सुहाता है, लेकिन आम आदमी और नियमों के प्रति जिम्मेदार बड़े साहब का ऐसा करना हज़म नहीं हो रहा… दरबारी बनने की असल वजह जो भी रही हों लेकिन कानाफूसी में माहिर लोगों को नया मसाला मिल गया है, जिसमें लोग अपने अपने स्वाद से तड़का लगा रहे हैं…

खैर सियासी लोगों की तो अपनी दुनिया होती है, हो सकता है बड़े साहब भी उसी चमक दमक के प्रभाव में हों…

08-01-2026

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा का पत्रकारों से आत्मीय संवाद…

पुलिस–पत्रकार नव वर्ष मिलन समारोह संपन्न

जीतेन्द्र सेन
भोपाल:- पुलिस और मीडिया के बीच आपसी समन्वय को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में “पुलिस एवं पत्रकार नव वर्ष मिलन समारोह – 2026” का आयोजन गुरुबार को पुलिस ऑफिसर्स मेस, भोपाल में किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया संस्थानों से जुड़े वरिष्ठ एवं युवा पत्रकारों के साथ-साथ पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा जनसंपर्क विभाग के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने उपस्थित पत्रकारों एवं अधिकारियों से आत्मीय भेंट कर सभी को नव वर्ष 2026 की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पत्रकारों से वन-टू-वन संवाद किया और मीडिया तथा पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, सूचनाओं के जिम्मेदाराना संप्रेषण तथा जनहित से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

संवाद के दौरान पुलिस महानिदेशक ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और पुलिस तथा मीडिया के बीच पारस्परिक विश्वास, पारदर्शिता एवं सकारात्मक सहयोग समाज में सकारात्मक संदेश देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी पुलिस और मीडिया मिलकर जनहित, कानून व्यवस्था और सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य करते रहेंगे।
नव वर्ष मिलन समारोह का मुख्य उद्देश्य पुलिस एवं मीडिया के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को मजबूती देना, संवाद को प्रोत्साहित करना तथा आपसी सहभागिता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम सौहार्द, गरिमा और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें पुलिस और मीडिया के सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली!

देश विदेश की 25 महिला विभूतियों को ऊर्जस्विता सम्मान

जयश्री कियावत को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

भोपाल! अनुनय एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान भोपाल में बुधवार को 25 महिला विभूतियों को ऊर्जस्विता सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया ने की और मुख्य अतिथि की भूमिका पशुपालन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने निभाई। महापौर मालती राय और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद थे। इस अवसर पर कई जिलों में कलेक्टर की भूमिका निभाने वाली जयश्री कियावत को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।महिला एवं बाल विकास मंत्री भूरिया ने कहा कि महिलाएं घर का काम तो करती हैं, लेकिन जब बाहर निकलती हैं तो औरों को भी प्रेरणा देने का काम करती हैं। आज जिन महिलाओं को सम्मानित किया गया है, वह अपने-अपने क्षेत्रों में अलग मुकाम बना चुकी है। इससे निश्चित ही बड़ी संख्या में महिलाओं को और भी बेहतर काम करने की प्रेरणा मिल रही है। हमारी सरकार भी महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर योजनाओं को क्रियान्वित कर रही हैं।
इस अवसर पर पटेल ने कहा कि भागवत कथा का आयोजन हो या समाज की बेहतरी के लिए कुछ अन्य आयोजन, बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी उसमें होती है। इस तरह के आयोजन होते रहना चाहिए, जिससे महिलाओं को प्रेरणा मिलती है। अनुनय संस्था की अध्यक्ष माही भजनी ने संस्था के साथ ही पुरस्कारों की जानकारी दी। संस्था के सचिव रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी डॉ. एके भट्टाचार्य ने पुरस्कार के लिए चुनी गई महिलाओं के साथ ही प्रक्रिया की जानकारी दी। इस अवसर पर पार्षद अरविंद वर्मा भी मौजूद थे।
इन महिला विभूतियों का किया गया सम्मानः स्विट्जरलैंड से इजाबेल (इकोटूरिज्म), इंदौर से डॉ. सीमा अलावा (प्रशासनिक सेवा), उज्जैन से महामंडलेश्वर देवी माँ शिवांगी नंद गिरी जी (अध्यात्म), उत्तराखंड से अनुपमा जोशी (डिफेंस सर्विसेस), नीतू शर्मा (सामाजिक नेतृत्व), नर्मदापुरम से डॉ. स्मिता रिछारिया (लेखक), यूके से सोफी हार्टमैन (कम्युनिटी डेवलपमेंट), ग्वालियर से डॉ. महिमा तारे (महिला सशक्तिकरण), छत्तीसगढ़ से तान्या मरावी (आदिवासी कला) और दीप्ति ओग्रे (जनजातीय संस्कृति एवं उद्यमिता), शाजापुर से अनुज्ञा शर्मा (स्पोर्ट्स), भोपाल से  डॉली शर्मा (समाज सेवा), प्रीति शर्मा जैन (प्रिंट मीडिया), डॉ. प्रिया सिंह कुशवाह (स्वास्थ्य सेवा) ,  गुंजन चौकसे (राजनीति) , विनीता सिंह तोमर (समाज सेवा) , जया शर्मा (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) , मुद्रा केसवानी (इन्फ्लुएंसर) , तरु सक्सेना (आतिथ्य शिक्षा) , अविशी श्रीवास्तव (शिक्षा और प्रशिक्षण), डॉ. मनेन्द्र कटियार (लोक स्वास्थ्य), डॉ. राखी माहेश्वरी (स्वास्थ्य सेवा प्रशासन), दिल्ली से नमिता छेत्री (सामाजिक उद्यमिता), छतरपुर से डॉ. श्वेता गर्ग (सामुदायिक विकास)।

आधुनिकता की नई होड़… अब किसी के इंतकाल की सूचना भी  ग्रीटिंग कार्ड से

पाकिस्तान से शुरु हुआ सिलसिला अब भोपाल भी आ पहुंचा

खान आशु
भोपाल। शादी, ब्याह, बर्थडे, खतना या अकीका के लिए सुंदर और आकर्षक कार्ड आपने खूब देखे होंगे। लेकिन कभी किसी के इंतकाल की सूचना कार्ड से मिलने लगे, तो ताज्जुब होना लाजमी है। लेकिन आधुनिकता के इस दौर में यह परम्परा भी धड़ल्ले से चल पड़ी है। पाकिस्तान से शुरु हुई यह प्रक्रिया अब हमारे देश में भी दौड़ गई है। अपने प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी इसका पालन किया जा रहा है।
पाकिस्तान के शहर इस्लामाबाद  से वायरल हुआ एक कार्ड चर्चा का विषय बन हुआ था। यह किसी मांगलिक आयोजन की खुश खबर देने वाला कार्ड नहीं था, बल्कि इस कार्ड के मार्फत किसी के इंतकाल की सूचना दी गई थी। सरताज शहाबुद्दीन नाम की महिला के इंतकाल पर भेजे गए इस कार्ड में नमाज ए जनाजा का टाइम और जगह का उल्लेख किया गया था। साथ ही कार्ड द्वारा दफन की जगह और टाइम भी बताया गया था। कार्ड में शोक आतुर बेटों और भाइयों के नाम का भी जिक्र किया गया था। इस तरह के कार्ड को लेकर अपने देश में खासी लानत मलानत की जा रही थी। इधर उलेमाओं ने भी इस परंपरा को गलत और बेजा करार दिया था। उन्होंने इस परंपरा को गैर शरई और गुनाह के करीब भी बताया था।

अब भोपाल में भी शुरुआत
पाकिस्तान में शुरू हुए अजीब चलन को लेकर फिलहाल भारत में तरह तरह की बातें की ही जा रही थीं, ऐसे में भोपाल में भी इस रिवाज की शुरुआत हो गई है। जानकारी के अनुसार भोपाल के पुराने इलाके में इस परंपरा को दोहराया गया। यहां पुतलीघर क्षेत्र में एक महिला के इंतकाल की सूचना ऐसा ही ग्रीटिंग कार्ड छपवाकर दी गई है। मस्जिद फखरुद्दीन में होने वाली नमाज ए जनाजा और मरहूम के लिए की जाने वाली दुआ ए मगफिरत में शामिल होने की गुजारिश की गई थी।

तकनीक ने किया आसान
ग्रीटिंग कार्ड बनाना अब पहले से आसान हो गया है। लोग आसानी से इसे मोबाइल या लैपटॉप पर भी बना लेते हैं। आमतौर पर किसी के इंतकाल की सूचना टेलीफोनिक या मस्जिदों में ऐलान से दी जाती है। ऐसे में किसी ब्रॉड कास्ट लिस्ट के जरिए आसानी से कई लोगों को सूचना पहुंचा दी जाती है। लेकिन ऐसे कार्ड को तैयार करने के लिए घर के ही किसी व्यक्ति को संलग्न होना पड़ता है, जिसे मरहूम से संबंधित सभी जानकारी हो। सुपुर्द ए खाक के बारे में भी पूरी जानकारी उसे होना चाहिए। सबसे अहम उसके पास सभी संबंधित रिश्तेदारों के नाम और कॉन्टेक्ट नंबर होना भी जरूरी है।

इनका कहना है
इंतकाल को इस तरह गैर शरई कामों से जोड़ना ठीक नहीं है। ऐसे फितनों से बचना चाहिए।
काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी
काजी-ए-शहर

मीकैप्स के तत्वावधान में रहमानी 30 परीक्षा का सफल आयोजन

भोपाल। मुस्लिम एजुकेशन एंड करियर प्रमोशन सोसाइटी (MECAPS) की ओर से बच्चों के लिए रहमानी 30 परीक्षा का सफल आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 7 से 10वीं तक के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। उल्लेखनीय है कि पूरे देश में 4 जनवरी 2026 को रहमानी फाउंडेशन, बिहार द्वारा इस परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में स्कूली विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
इस परीक्षा में सफल विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों के तहत NEET, JEE और CLAT की तैयारी के लिए निःशुल्क हॉस्टल के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके पिछले वर्षों में बहुत अच्छे परिणाम सामने आए हैं।
इस अवसर पर मानद सचिव डॉ. ज़फ़र हसन ने कहा कि MECAPS का मूल उद्देश्य बच्चों में शैक्षणिक जागरूकता पैदा करना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि सोसाइटी न केवल रहमानी 30 जैसी परीक्षाओं का आयोजन करती है, बल्कि क्विज़ प्रतियोगिता, टैलेंट सर्च एग्ज़ाम और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के माध्यम से भी छात्रों की प्रतिभा को निखारने का कार्य करती है।
डॉ. ज़फ़र हसन ने आगे कहा कि MECAPS पिछले 40 वर्षों से जरूरतमंद और प्रतिभाशाली बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है, ताकि आर्थिक कठिनाइयाँ शिक्षा के मार्ग में बाधा न बनें। परीक्षा के सफल आयोजन पर अभिभावकों और विद्यार्थियों ने सोसाइटी की इस शैक्षणिक पहल की सराहना की।

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