पाकिस्तान से शुरु हुआ सिलसिला अब भोपाल भी आ पहुंचा
खान आशु
भोपाल। शादी, ब्याह, बर्थडे, खतना या अकीका के लिए सुंदर और आकर्षक कार्ड आपने खूब देखे होंगे। लेकिन कभी किसी के इंतकाल की सूचना कार्ड से मिलने लगे, तो ताज्जुब होना लाजमी है। लेकिन आधुनिकता के इस दौर में यह परम्परा भी धड़ल्ले से चल पड़ी है। पाकिस्तान से शुरु हुई यह प्रक्रिया अब हमारे देश में भी दौड़ गई है। अपने प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी इसका पालन किया जा रहा है।
पाकिस्तान के शहर इस्लामाबाद से वायरल हुआ एक कार्ड चर्चा का विषय बन हुआ था। यह किसी मांगलिक आयोजन की खुश खबर देने वाला कार्ड नहीं था, बल्कि इस कार्ड के मार्फत किसी के इंतकाल की सूचना दी गई थी। सरताज शहाबुद्दीन नाम की महिला के इंतकाल पर भेजे गए इस कार्ड में नमाज ए जनाजा का टाइम और जगह का उल्लेख किया गया था। साथ ही कार्ड द्वारा दफन की जगह और टाइम भी बताया गया था। कार्ड में शोक आतुर बेटों और भाइयों के नाम का भी जिक्र किया गया था। इस तरह के कार्ड को लेकर अपने देश में खासी लानत मलानत की जा रही थी। इधर उलेमाओं ने भी इस परंपरा को गलत और बेजा करार दिया था। उन्होंने इस परंपरा को गैर शरई और गुनाह के करीब भी बताया था।
अब भोपाल में भी शुरुआत
पाकिस्तान में शुरू हुए अजीब चलन को लेकर फिलहाल भारत में तरह तरह की बातें की ही जा रही थीं, ऐसे में भोपाल में भी इस रिवाज की शुरुआत हो गई है। जानकारी के अनुसार भोपाल के पुराने इलाके में इस परंपरा को दोहराया गया। यहां पुतलीघर क्षेत्र में एक महिला के इंतकाल की सूचना ऐसा ही ग्रीटिंग कार्ड छपवाकर दी गई है। मस्जिद फखरुद्दीन में होने वाली नमाज ए जनाजा और मरहूम के लिए की जाने वाली दुआ ए मगफिरत में शामिल होने की गुजारिश की गई थी।
तकनीक ने किया आसान
ग्रीटिंग कार्ड बनाना अब पहले से आसान हो गया है। लोग आसानी से इसे मोबाइल या लैपटॉप पर भी बना लेते हैं। आमतौर पर किसी के इंतकाल की सूचना टेलीफोनिक या मस्जिदों में ऐलान से दी जाती है। ऐसे में किसी ब्रॉड कास्ट लिस्ट के जरिए आसानी से कई लोगों को सूचना पहुंचा दी जाती है। लेकिन ऐसे कार्ड को तैयार करने के लिए घर के ही किसी व्यक्ति को संलग्न होना पड़ता है, जिसे मरहूम से संबंधित सभी जानकारी हो। सुपुर्द ए खाक के बारे में भी पूरी जानकारी उसे होना चाहिए। सबसे अहम उसके पास सभी संबंधित रिश्तेदारों के नाम और कॉन्टेक्ट नंबर होना भी जरूरी है।
इनका कहना है
इंतकाल को इस तरह गैर शरई कामों से जोड़ना ठीक नहीं है। ऐसे फितनों से बचना चाहिए।
काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी
काजी-ए-शहर
आधुनिकता की नई होड़… अब किसी के इंतकाल की सूचना भी ग्रीटिंग कार्ड से
