युवाओं को पसंद आ रही “कमरे की दीवारों ने देखा है ”  पुस्तक

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अमित सेन
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शुभम सक्सेना की पहली पुस्तक ने विश्व पुस्तक मेले में बनाई अलग पहचान।

भोपाल! भोपाल के युवा लेखक शुभम सक्सेना के लिए यह क्षण गर्व का है कि उनकी पहली काव्य पुस्तक “कमरे की दीवारों ने देखा है” देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन विश्व पुस्तक मेला, भारत मंडपम (नई दिल्ली) में प्रदर्शित की गई है। यह मेला 10 से 18 जनवरी तक आयोजित हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के हजारों प्रकाशक और लेखक भाग ले रहे हैं।
इस पुस्तक का चयन ऐसे समय में हुआ है जब यहां गुलज़ार, चेतन भगत, मुंशी प्रेमचंद, विनोद कुमार शुक्ल और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जैसे दिग्गज लेखकों की कृतियां भी मौजूद हैं। ऐसे साहित्यिक दिग्गजों के बीच एक युवा लेखक की पहली पुस्तक का स्थान पाना अपने-आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
“कमरे की दीवारों ने देखा है” एक कविता और शायरी संग्रह है, जिसमें आम आदमी की भावनाएं, अकेलापन, संघर्ष, सपने और समाज की सच्चाइयों को संवेदनशील शब्दों में पिरोया गया है। पुस्तक विशेष रूप से युवाओं की आंतरिक दुनिया और आज के दौर की चुप्पी को आवाज़ देती है इस पुस्तक का प्रकाशन मांडा पब्लिकेशन के द्वारा किया गया है ।

विश्व पुस्तक मेला, भारत मंडपम (नई दिल्ली) में किताब पड़ती छात्रा

चित्रकारी , फोटोग्राफी , और लेखनी के शौकीन शुभम
शुभम सक्सेना भोपाल के युवा लेखक और कवि हैं। वे पत्रकारिता (मास कम्युनिकेशन) के विद्यार्थी हैं और साथ ही सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मसंवाद और समाज से जुड़ने का तरीका है। आज इस पुस्तक की उपलब्धि के अलावा चित्रकारी , फोटोग्राफी और कविता, थोट, शायरी लिखने में माहिर है वहीं भास्कर , पत्रिका जैसे बड़े अखबारों की प्रतियोगिताओं में भी शुभम अव्वल रहे है !

युवाओं को भा गई ” कमरे की दीवारों ने देखा है !

शुभम ने इस किताब में अपने उन पलों को उकेरा है, जिन्हें व्यक्ति अक्सर अकेले में जीता है—जहाँ कमरे की दीवारें ही उसकी गवाह बनती हैं। पुस्तक विशेष रूप से युवा पाठकों से संवाद स्थापित करती है और उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।
वहीं भारत मंडपम (नई दिल्ली) में लगे पुस्तक मेले में युवाओं को यह किताब खूब भा रही है और युवा इस किताब को खासा पसंद कर रहे हैं !

सपना हो गया साकार

लेखक शुभम सक्सेना

अपनी इस उपलब्धि पर शुभम सक्सेना कहते हैं , “यह सिर्फ मेरी नहीं, हर उस युवा की जीत है जो अपने शब्दों से कुछ कहना चाहता है। विश्व पुस्तक मेले में अपनी पहली किताब को देखना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है।

युवाओं को भा गई कमरे की दीवारों ने देखा है!
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