विधायक पुत्र चाचा संग पहुंचा माफ़ी मांगने:संगठन के निर्देश पर हुआ सरेंडर !

इंदौर में संगठन मंत्री ने दो घंटे बंद कमरे में की बैठक

इंदौर-3 के विधायक गोलू शुक्ला के बेटे रुद्राक्ष शुक्ला ने मंगलवार देर रात देवास की चामुंडा टेकरी पहुंचकर पुजारी के पैर छूकर माफी मांगी। इससे पहले उन्होंने देवास कोतवाली थाने में सरेंडर किया, जहां पुलिस ने उन्हें मुचलके पर जमानत दे दी। हालांकि, रुद्राक्ष ने इस दौरान मीडिया से किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया। देवास टेकरी विवाद को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सख्ती दिखाई। सोमवार को दिल्ली में पार्टी आलाकमान ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बयान दिया था कि “कोई भी हो, कानून सबके लिए एक समान है, और दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” संघ की ओर से भी नाराजगी जताई गई थी।
*आलाकमान की सख्ती के बाद बदली रणनीति*
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, मामले को शांत करने के लिए पहले यह तय किया गया था कि विधायक गोलू शुक्ला और रमेश मेंदोला देवास जाकर पुजारी और उनके परिवार से मिलेंगे। इसकी सूचना जनसंपर्क माध्यम से भी जारी की गई थी। लेकिन जब यह जानकारी संगठन तक पहुंची तो इसे रोक दिया गया। संगठन ने कहा कि विधायक पार्टी का चेहरा हैं, और उनके जाने से पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। इसके बाद तय हुआ कि रुद्राक्ष शुक्ला स्वयं देवास जाकर पहले थाने में सरेंडर करेंगे और फिर पुजारी से क्षमा मांगेंगे।

संगठन मंत्री की बैठक में हुआ अंतिम निर्णय

बीजेपी संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने इस पूरे मुद्दे को लेकर इंदौर के भाजपा कार्यालय में दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की। इसमें पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, विधायक, जिलाध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष शामिल हुए। बैठक में हितानंद शर्मा ने स्पष्ट कहा कि अब इस विवाद पर किसी भी नेता को बयानबाजी नहीं करनी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि विधायक खुद को और पार्टी को विवादों से बचाएं, और बेटे को भी शांत रहने के लिए कहें। संगठन चाहता है कि अब मामला पूरी तरह शांत हो और मीडिया में इसे लेकर कोई नई प्रतिक्रिया न आए।चाचा के साथ पहुंचा था थाने, चार साथी भी आए साथ
रूद्राक्ष शुक्ला मंगलवार शाम 7:40 बजे अपने दोनों चाचा बब्बी शुक्ला और कमल शुक्ला के साथ कोतवाली थाने पहुंचे। उनके साथ चार अन्य युवक—अनिरुद्ध पंवार, अमन शुक्ला, लोकेश चांदवानी और मनीष तेजवानी भी मौजूद थे। एएसपी जयवीर सिंह भदौरिया ने बताया कि सभी पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

संघ के वरिष्ठ प्रचारक ने जताई नाराजगी

मध्य भारत क्षेत्र के पूर्व प्रचार प्रमुख और वरिष्ठ प्रचारक नरेन्द्र जैन ने सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने लिखा—“सत्ता के लालच में कुकृत्य कब तक ढोएगी भाजपा?” साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि विधायक से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है, न कि कोई आधिकारिक बयान।

प्रदेश अध्यक्ष का बयान – ‘किसी को भी नहीं है आपराधिक कृत्य करने का अधिकार

‘प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने साफ शब्दों में कहा, “चाहे वह विधायक का बेटा हो या कोई और, किसी को भी अपराध करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन कार्रवाई कर रहा है और कानून अपना काम करेगा।”
विजयवर्गीय बोले- ‘अरे छोड़ो यार’
जब मीडिया ने भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय से इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने टालते हुए सिर्फ इतना कहा- “अरे छोड़ो यार।”

दिग्विजय सिंह का आरोप- ‘शराब के नशे में था विधायक पुत्र

‘राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रुद्राक्ष शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह शराब के नशे में चामुंडा टेकरी पहुंचा था। पुजारी के मना करने पर उससे मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों पर इस तरह का व्यवहार भाजपा की धर्मनिष्ठा पर सवाल खड़े करता है।

शराब पर रार, दीदी की हुंकार, कौन है चौकीदार अब क्या करेगी सरकार…

पटियेबाजी


भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

कैलेंडर के कुछेक पन्नों को या दिमागी याददाश्त को पीछे की ओर पलटा जाए तो वे सारे घटनाक्रम बरबस ही ताजा हो जाएंगे जिनमें भाजपा की फायरबांड नेत्री और सूबे की मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती ने शराब के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था… अप्रैल की गर्म हवाओं के आगोश में उड़तीं पुरानी खबरों की कतरनें शराब दुकान पर पत्थरबाजी की गवाही देती नजर आ रही हैं, तो मोबाइल स्क्रीन पर सरकती अंगुली दीदी के पुराने ट्वीट पर जाकर ठहर जाती है…मामला तब भी शराब पर आधारित था और मामला अब फिर वहीं आकर अटक गया है दीदी का ताज़ा ट्वीट फिर वायरल है, ट्वीट के मुताबिक दीदी फिर शराब को लेकर क्रोधित और आंदोलित हैं… मदिरा को लेकर मुखर होने के पीछे दीदी की मंशा दीदी ही जानें लेकिन राजनीति के पंडितों की मानें तो दीदी को महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध की चिंता सता रही है जिसका जिक्र दीदी ने अपने ट्वीट में भी किया है… इधर विपक्षी गलियारों से बहने वाली बयार बता रही है कि दीदी को ढाल बनाकर मोहन को निशाने पर लेने की रणनीति बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है, तो उधर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की नीति पर चलने वाले प्रबुद्ध लोगों के अनुसार दीदी के ट्वीट फिर से सुर्खियों में छाने की कोशिशों के सिवा कुछ भी नहीं है… सबके अपने आंकलन हैं सबके अपने मत हैं कुछ दीदी से सहमत तो कुछ असहमत भी हो सकते हैं, मौजूदा सरकार से लगातार बातचीत होने के बाद भी शराब नीति के प्रभावी तरीके से लागू न हो सकने पर दीदी ने सवाल उठाया है… सरकार की अनसुनी पर कुछ भी कहना जल्दबाजी इसलिए होगी कि मध्यप्रदेश में राजस्व का बड़ा हिस्सा आबकारी विभाग से आता है, विगत चार महीनों से दीदी के मन में पल रही पीड़ा अब गहरी पैठ जमाकर नासूर बन गई है लिहाजा नाराज़ दीदी अब चौकीदार जिंदा है कहने को मजबूर हो गईं… पटियेबाजों के बीच उपजा बड़ा सवाल ये है कि क्या अब दीदी प्रदेश की नई चौकीदार हैं? या फिर चौकीदार शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर सिर्फ इसलिए किया गया है कि पीएम ऑफिस की नजर इस पूरे मामले पर गड़ी रहे… वहीं दीदी ने पिछली पत्थरबाजी से हुई किरकिरी से शायद सबक लेकर ही इस बार गाय के गोबर को इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है, या फिर शराब विरोध को किसी भी बहाने गाय से जोड़ने की कोशिश की गई है ये विश्लेषकों के लिए शोध का विषय हो सकता है… लंबे इंतजार और सरकार से बातचीत के बाद दीदी का फिर से शराब नीति पर मुखर होना सूबे की सियासी हलचल बढ़ा रहा है, गाय और गोबर से मोहन को घेरने की जुगत में लगे चौकीदार के अगले कदम का सभी इंतजार कर रहे हैं…

*15-04-2025*

सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धूमधाम से संपन्न हुई ध्वज एवं पालकी यात्रा

उज्जैन महाकाल पालकी की तर्ज पर हुआ कार्यक्रम

भोपाल। हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर शहर के सभी मंदिरों समेत जगह जगह धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। श्री बाबा महांकाल सेवा संघ द्वारा प्रेमनगर कालोनी के दुर्गा मंदिर से ध्वज एवं पालकी यात्रा निकाली गई। श्रावण मास में उज्जैन में आयोजित होने वाली महाकाल पालकी यात्रा की भांति ही पालकी में विराजित हनुमानजी को नगर भ्रमण कराया गया। लोगों ने जगह जगह पालकी दर्शन कर हनुमत कृपा प्राप्त की वहीं कई जगह पालकी यात्रा का जोरदार स्वागत भी किया गया। शोभायात्रा प्रेमनगर कालोनी से प्रारंभ होकर नवजीवन कालोनी, टिंबर मार्केट, होते हुए खेड़ापति हनुमान मंदिर छोला पहुंची। उज्जैन महाकाल पालकी की तरह शोभायात्रा की क्षेत्रवासियों ने मुक्तकंठ प्रशंसा की। वहीं आयोजन समिति के सदस्यों के अनुशासन और वेशभूषा की भी जमकर सराहना हो रही है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री स्थानीय विधायक विश्वास कैलाश सारंग, वरिष्ठ भाजपा नेता क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य चेतन सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस महासचिव विष्णु विश्वकर्मा, स्थानीय वार्ड पार्षद श्रीकांत राय “लकी” समेत सैकड़ों श्रद्धालुओं और मातृशक्ति की उपस्थिति रही।

आयोजक संस्था श्री बाबा महांकाल सेवा संघ के अध्यक्ष रंजीत सिंह और कार्यक्रम संयोजक दिनेश नाहर ने संयुक्त रूप से बताया संघ के वार्षिक उत्सव का यह नौवां वर्ष है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय सभी सहयोगियों को देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा

हनुमान जी की प्रतिमा होगी आकर्षण का केंद्र

भोपाल। शहर में चारों तरफ हनुमान जन्मोत्सव की धूम है, सभी प्रमुख मंदिरों पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। पुराने शहर के छोला क्षेत्र से निकलने वाली शोभायात्रा का यह नवा वर्ष है। आयोजक संस्था श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि संस्था की परंपरा अनुसार इस वर्ष के आयोजन का संयोजक सर्वसम्मति से दिनेश नाहर को चुना गया है। संयोजक दिनेश नाहर के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ का वार्षिक आयोजन होता है, हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर इस वर्ष क्षेत्रवासियों को खेड़ापति हनुमान के प्रतिरूप का दर्शन करने का लाभ मिलेगा। उपाध्यक्ष अमन चौरसिया और सचिव दीपक नामदेव ने बताया कि आज सुबह से ही प्रेमनगर कालोनी के दुर्गा मंदिर में खेड़ापति हनुमान का अभिषेक शुरू हो जाएगा, अभिषेक में क्षेत्र के सभी व्यक्ति शामिल होंगे। इसके बाद शाम चार बजे से भव्य धर्म ध्वज शोभायात्रा एवं खेड़ापति हनुमान की पालकी यात्रा शुरू होगी। यात्रा प्रेमनगर कालोनी नवजीवन कालोनी टिंबर मार्केट मेन रोड से होते हुए छोला हनुमान मंदिर पर संपन्न होगी।

जीवन प्रबंधन के महापुरोधा भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों में निहित है आत्म ज्ञान

महावीर जयंती पर विशेष

भगवान महावीर स्वामी जिनका नाम सुनते ही हृदय में अहिंसा, सत्य, दया और वात्सल्य के भावों की बल्लरियां हिलोरे मारने लगती हैं। सदाचरण और नैतिकतापूर्ण जीवन के हर मापदंड पर भगवान महावीर की शिक्षाएं, हमें आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उनके बताए हर सिद्धांत वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संजीवनी के समान कारगर साबित हो रहा है। 21वीं सदी आधुनिक तकनीकीकरण और सोशल मीडिया को समर्पित है। यह समय भौतिक चकाचौंध से भरा है। युवा आगे बढ़ने की होड़ में लगे हैं। आर्थिक विकास का मापदंड ही सब कुछ पाना है। संवेदना शून्य होते समाज में स्वार्थ हावी है। ऐसे में अगर मानव समाज में सामंजस्य बैठाना है, तो भगवान महावीर के ”जिओ और जीने दो” के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करना होगा।

भगवान महावीर जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं
वर्तमान में युवा, बुजुर्ग सभी डिप्रेशन और बीमारियों से ग्रसित हैं। मानसिक तनाव लोगों पर प्रभावी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस किसी ने भी भगवान महावीर को समझा है, वो कभी भी जीवन में डिप्रेस्ड नहीं हो सकता है। पैसा हो या न हो, यह जरूरी नहीं है। आज हम भगवान महावीर के जीवन से कुछ सीखने और सुखमय जीवन कैसे बनें इस प्रबंधन को समझने वाले हैं। भगवान महावीर का जीवन दर्शन सुखमय जीवन जीने की कला सिखाता है। सच्चे अर्थों में भगवान महावीर स्वामी हमारे गुरु हैं, क्योंकि उनकी शिक्षाएं जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं।

वर्धमान से भगवान महावीर बनने की यात्रा
भगवान महावीर श्रमण परंपरा के वह सूर्य हैं, जिनकी आभामात्र से हिंसक प्रवृत्ति, अहिंसावृत्ति में बदल जाती है। क्रूरता और क्रोधाग्नि का अकुंर फूटने से पहले ही विलय को प्राप्त हो जाता है। वर्धमान से भगवान महावीर बनने की यात्रा में हमें कठिन दिखाई देती है, लेकिन उनका मार्ग सबसे सरल है। वो कहते हैं, “स्वयं को जानना ही परमानंद है और यही मोक्षमार्ग का सोपान है। साथ ही संयम का मार्ग हमें आत्मनिर्भर बनने एवं पराश्रित बुद्धि से मुक्त करता है।” आज भले ही भगवान महावीर का संदेश आमजन के लिए न होकर जैनों तक सीमित लगता है, लेकिन यह बात सत्य नहीं है। उनका हर सिद्धांत विश्व के प्रत्येक मानव को जीवन जीने की कला सिखाता है। जिसने भी उन्हें जान लिया, वह कभी निराश नहीं हो सकता है और न ही कभी डरपोक और निरंकुश होगा, बल्कि हर परिस्थिति का वह धैर्य और संयम से सामना करेगा।

पैसे से सुख की प्राप्ति असंभव
भगवान महावीर की वाणी यथार्थ की संकल्पना को साकार करती है। हमारा गृहस्थ जीवन कैसे भौतिक संसाधनों व आध्यात्मिक अनुभूतियों के साथ सुखमय बनें, यह विचार मस्तिष्क में कई बार कौंधता तो जरूर है, लेकिन मन मसोट कर रह जाने की हमारी प्रवृत्ति ऐसे विचारों को जन्म देने के पहले ही कुचल देती है। नतीजतन यह घातक साबित होता है। हमारा जीवन पैसों की ओर भाग रहा है, लेकिन उस धन और भोग में सुख की अपेक्षा मानसिक वेदना अधिक समावेशित है।

जीवन प्रबंधन के गुरु हैं महावीर
जीवन को आनंद और शांतिपूर्ण बनाने के लिए भगवान महावीर द्वार कुछ अनमोल सिद्धांत दिए गए हैं, जिसे समझने मात्र से जीवन को गति और मन को असीम संतुष्टि की प्राति होती है। भगवान महावीर कहते हैं, ”जितनी जरूरत है, उतना संग्रह करें…” भगवान महावीर स्वामी ने पांच महाव्रत का उपदेश दिया है। उनमें से एक महाव्रत अपरिग्रह है। अपरिग्रह का अर्थ है, “परिग्रह” (जोड़ना, इकट्ठा करना) का अभाव, यह सिखाता है कि व्यक्ति को केवल वही लेना चाहिए, जिसकी उसे जरूरत है या जो काम आता है और अनावश्यक चीजों को छोड़ देना चाहिए।
अब आप समझें कि हम अंधी दौड़ में स्टेट्स मेंटेन करने की जुनूनी दुनिया में वह सब जोड़ने लगे हैं, जिसकी हमारे जीवन में कोई जरूरत नहीं है। ऐसी अनावश्यक वस्तुओं को जोड़ने में हम अपनी बुद्धि व शारीरिक बल को दांव पर लगा देते हैं और एक दिन ऐसा भी आता है, जब इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं और यह धन ऐशोआराम यहीं रह जाते हैं और मानसिक शांति छूमंतर हो जाती है। भगवान महावीर कहते हैं कि जीवन को कठिन नहीं सरल बनाओ, जो जितना स्वयं को जानने में लगा, वह उतना गहरा होता चला गया। अर्थात अनावश्यक वस्तुओं का जोड़ना समझदारी का काम नहीं है।

”न्याय से कमाओ, विवेक से खर्च करो”
भगवान महावीर खुद में एक प्रबल सिद्धांत हैं। उनके सत्य महाव्रत में सत्य के मौलिक अर्थों का उल्लेख मिलता है।
वह कहते हैं कि जो कुछ भी है, उसे ठीक-ठीक और स्पष्ट रूप से कहना, बिना किसी झूठ या कपट किए बिना सत्य को निष्ठा के साथ पेश करने की विधा ही जीवन को आनंदमय बनाती है। यह सत्य अगर जीवन में समाहित हो जाए, तो सारी समस्याएं खुद-ब-खुद हल हो सकती है। हम पैसा तो कमाना चाहते हैं, लेकिन हमारा तरीका दूसरे को छल-कपट से बर्बाद कर आगे बढ़ने की चाहत कतई सुख नहीं दे सकता है। महावीर स्वामी ने कहा है कि न्याय की कसौटी पर कमाया गया धन जीवन को सही दिशा और दशा प्रदान करता है। हम कमाते कितना है, उससे ज्यादा जरूरी है कि हम पैसे को कैसे खर्च करते हैं। अगर हमारी कमाई कम भी है, लेकिन उसे विवेकपूर्वक खर्च किया जाए तो हम सुखमय जीवन जी सकते हैं। हमेशा ही न्याय से कमाने और विवेक से खर्च करने की आदत ही जीवन में अपनानी चाहिए।

किसी का दिल न दुखाना ही जीवन का सबसे बड़ा कर्म

भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा महाव्रत का संदेश देते हुए कहा है कि किसी भी प्राणी के प्रति हिंसा का भाव मत रखो। चींटी से लेकर हाथी तक सभी जीवों में चेतना है। किसी को दर्द मत पहुंचाओ, किसी को मत सताओ, यही अहिंसा का मार्ग है। अगर हमने वाणी और वचनों से भी किसी को अपशब्द कहे हैं, तो वह भी हिंसा है और यह हिंसा भी हमें शांतिपूर्ण जीवन जीने से वंचित कर सकती है। अगर जीवन को सुखमय बनाना है, तो सरलता के साथ अहिंसक आचरण अपनाएं। जीवन को इतना पवित्र बनाएं कि हमें किसी को कटु शब्द न बोलना पड़े और ऐसे विचारों के साथ जब हम आगे बढ़ेंगे, तो निश्चित ही हमारा जीवन आनंदमय बनेगा।

मैत्री भाव व आपसी सामंजस्य की नींव रखें
भगवान महावीर स्वामी के जीवन को देखें, तो उनकी सादगी और शांत छवि को देखकर जंगल के क्रूर-हिंसक जानवर भी उनके पास आकर बैरभाव भूल जाते थे। सांप और नेवला, गाय और शेर एक साथ सरोवर में पानी पीते थे। महावीर स्वामी के जीवन का यह उद्धरण हमें बताता है कि आप जैसी संगती में रहते हैं, उसका असर आप पर पड़ता है। अत: अपने गृहस्थ जीवन को सरल बनाने के लिए सभी से मैत्री भाव रखना जरूरी है। निंदा, अपमान, मान-सम्मान के कुचक्र जैसे बुरे विचारों से स्वयं दूर रहें। प्रत्येक जीवों के प्रति दया, करूणा और वात्सल्य के भाव बनाए रखें। मन की पवित्रता निष्पकट होनी चाहिए। यहीं से क्षमाभाव का प्रादुर्भाव संभव है, जो जितना सरल होगा वह उतना ही शांतिप्रिय होगा। मैत्री भाव सब जीवों के प्रति सर्वेभवन्तु की भावना को मूर्त रूप देती है।

प्रशंसा से मुग्ध न हों
भगवान महावीर स्वामी ने स्पष्ट कहा है कि अंहकार का भाव दुर्गति का कारण है। मोह और मान का परिणाम घातक है। अगर कोई हमारी प्रशंसा करे, तो भी हमें अहमी नहीं बनना चाहिए। अत: हमें साधन और संयोग न मिले, तो भी दुखी नहीं होना चाहिए। हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहें और भगवान का स्मरण करते रहें।
 
निंदा के जहर से बचें
भगवान महावीर ने कहा है कि कभी भी दूसरों की निंदा न करें। हमेशा अच्छाई लोगों में देखें। अगर नकारात्मक विचार जन्म लेते हैं, तो उनसे कर्मबंध बंधता है और इन कर्मों का फल जीव को नियम से भोगना पड़ता है। अत: निंदा जैसे अवगुण से स्वयं को दूर रखें। आगम ग्रंथों के स्वाध्याय करने की प्रवृत्ति को अपनाएं। स्वाध्याय को जैन ग्रंथों में परम तप कहा गया है। शास्त्रों का पठन-पाठन हमें आत्मकेन्द्रित बनाता है। इसका फल यह है कि कोई हमारी निंदा भी करे, तो हम उन भावों से विचलित नहीं होते हैं।

पुरुषार्थ के साथ आत्मउन्नति के मार्ग को प्रशस्त करें
भगवान महावीर ने कहा कि प्राणी मात्र के प्रति अहिंसा का भाव रखें, निरंतर आत्महित के मार्ग का पुरुषार्थ करें। अगर जीवन को सुखमय बनाना है, तो सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र इन रत्नत्रय को जीवन में अपनाएं। जिसने सम्यकदर्शन को पा लिया उसकी आत्मउन्नति का पथ प्रशस्त हो गया। सम्यकदर्शन का अर्थ अपने आत्मस्वभाव को पहचाना अर्थात अखंडानंद स्वरूप आत्मतत्व की प्राप्ति करना है। जिसने स्वयं को पा लिया मानों उसने सम्यक पुरुषार्थ की प्राप्ति कर ली। अत: हमारे जीवन का लक्ष्य मात्र भौतिक सुख को पाना नहीं, बल्कि हमें स्वयं को जानकर आत्म उन्नति के मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहिए।

आयु निरंतर घट रही है। ऐसे में आत्मजागृति से अपने जीवन सफल बनाने का पुरूषार्थ करना होगा। महावीर स्वामी का हर सिद्धांत तर्क की कसौटी पर खरा उतरता है। उनका दर्शन हमें अपने जीवन को कैसे जीना है, इसकी शिक्षा प्रदान करता है। मनुष्य जन्म को अगर सार्थक करना है, तो महावीर स्वामी के सिद्धांतों को आत्मसात कीजिए।

(नितिन कुमार जैन, वरिष्ठ पत्रकार)

निकली शोभायात्रा, बच्चों ने धारण किया राम लक्ष्मण का रूप

भोपाल। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शिरडी साईं बाबा मंदिर शिर्डी पुरम कोलार में 45वां श्री रामनवमी महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर के संचालक हरीश बाबाजी ने बताया कि परिसर से श्री साईं बाबा की शोभायात्रा व राम दरबार यात्रा निकाली गई। प्रति वर्षानुसार भजन संध्या एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजन सम्मिलित हुए छोटे छोटे बच्चों ने राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का सुंदर रूप लिया और शोभायात्रा में भाग लिया।

भगवान श्रीराम जन्म उत्सव की शोभा यात्रा धूमधाम से निकाली गई।

101 भगवा ध्वजों को हाथों में लिए हजारों राम भक्त हुए शामिल, 50 से अधिक स्थान पर किया गया स्वागत

भोपाल। श्री राम जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर घोड़ा निक्कास चौराहे से परंपरा धार्मिक एवं सामाजिक संस्था भोपाल द्वारा भव्य शोभा यात्रा निकाली गई
शोभा यात्रा का शुभारंभ हनुमान चालीसा की विशेष प्रस्तुति एवं साधु संत एवं सांसद आलोक शर्मा जी द्वारा मां कौशल्या की गोद में विराजे श्री राम लल्ला जी की आरती के साथ शुभारम्भ किया गया।
शोभा यात्रा में भगवान श्री राम का दरबार आकर्षण का केंद्र रहा।

101 भगवा ध्वज, मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध गोस्वामी डीजे,ढोल,बैंड,दुल्दुल घोड़ी,आकर्षक बग्गी में सवार भगवान श्री गणेश जी, के साथ-साथ कई आकर्षक धार्मिक झांकियां चल समारोह में शामिल रही।

शोभा यात्रा घोडा निक्कास मां कर्मा देवी रोड से प्रारंभ होकर छोटे भैया कॉर्नर, जुमराती गेट, लोहा बाजार, सुभाष चौक, लखेरापूरा होते हुए भवानी चौक सोमवारा पर समापन होगा।
प्रारंभ हनुमान चालीसा पाठ से एवं समापन स्थल पर जबलपुर से पधारे कलाकारों द्वारा कर्फ्यू वाली माता जी की भव्य महाआरती के साथ साथ आकर्षक रंगारंग कार्यक्रम हुए।

भव्य शोभा यात्रा में भोपाल सांसद आलोक शर्मा, संस्था के अध्यक्ष अवनी शर्मा,मंडल अध्यक्ष, मनोज राठौर, पार्षद एवं जोन अध्यक्ष पूजा शर्मा, आशीष सिंह ठाकुर, भोपाल किराना व्यापारी महासंघ महामंत्री  विवेक साहू, घोड़ा निक्कास व्यापारी महासंघ अध्यक्ष ईशान अग्रवाल, आकाश बाथम, मोहित गौर सहित अन्य अतिथि गण उपस्थित रहे।

झील का किनारा… सत्य की बात, मुहब्बत की बात

भोपाल। सत्य और शांति की बात कहने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी राजधानी भोपाल में होंगे। मुहब्बत भरे इन लम्हों को यादगार फ्रेम में सजाने की कोशिश की गई…! इसे आकार देने के लिए 7 अप्रैल की तारीख तय है है। जगह का चयन झील के किनारे को किया गया। दुनिया के पसंदीदा शायर मंजर भोपाली के निवास बादबान पर आयोजित इस महत्वाकांक्षी आयोजन में शहर के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, शायर, पत्रकार शहर के खुसूसी लोग जुटेंगे।
साहित्यिक संस्था हम एक हैं के
मंजर भोपाली ने बताया कि 7 अप्रैल को नोबल शांति पुरुस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के भोपाल आगमन पर एक शाम मुहब्बत के नाम से खूबसूरत कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान झील के किनारे कैलाश सत्यार्थी के साथ मुहब्बत की बातें होंगी। इस मौके पर कैलाश सत्यार्थी जी शहर के शायरों और बुद्धिजीवियों से  खास बात करेंगे।

रिश्तों को मिलेगी पहचान, सेवाओं का सम्मान भी, आयोजन 13 को भोपाल में

भोपाल। बेहतर रिश्तों की तलाश में जुटे अभिभावकों के लिए एक बेहतर मौका राजधानी भोपाल में जुटाया जा रहा है। सामाजिक संस्था शिखर एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी इसका आयोजन करने वाली है। कार्यक्रम के दौरान समाज के विशिष्ट लोगों का सम्मान भी किया जाएगा। 13 अप्रैल को होने वाले इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव समेत कई विशिष्टजन मौजूद रहेंगे।
संस्था के मोहम्मद ओवेस ने बताया कि 13 अप्रैल को भोपाल में मुस्लिम युवक युवती का परिचय सम्मेलन (तार्रुफी प्रोग्राम) आयोजित किया जाएगा। प्रदेशभर के लोग शामिल होंगे। उवैस ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रहेंगे। इनके अलावा उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और मप्र वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल भी कार्यक्रम के मेहमान
होंगे। मोहम्मद ओवेस ने बताया के कार्यक्रम का उद्देश्य उन लोगों के लिए अच्छे रिश्तों को तलाश कर एक जगह मिलवाना है, जिन्हें बेहतर रिश्तों की तलाश है। इसमें कुंवारे, तलाकशुदा, बेवा, यतीम लड़के लड़कियों के रिश्ते शामिल रहेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में प्रदेश में मुस्लिम समाज के लिए मुख्यमंत्री द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से भी अवगत कराया जाएगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पत्रकार और समाजसेवियों का सम्मान भी अतिथि के सरंक्षण में किया जाएगा। शिखर एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की कोषाध्यक्ष   शबाना खान ने बताया कि हमारा उद्देश्य मुस्लिम समाज की महिलाओं को सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के सहयोग से हम समाज में दहेज प्रथा तलाक़ प्रथा को खत्म करना चाहते हैं।कार्यक्रम का मकसद प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को महिलाओं तक पहुंचाना भी है। उन्होंने बताया कि प्रोग्राम का रजिस्ट्रेशन अभी चालू जारी है। इन नंबर्स पर कॉल करके कार्यक्रम संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है : 9479903047, 9479903049, 7869131550. कार्यक्रम भोपाल के हिन्दी भवन में सुबह 11 बजे से आयोजित होगा।

एसडीएम आशुतोष शर्मा पहुंचे मां हरसिद्धि मंदिर, मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का लिया जायजा!

जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा ने किए मां हरसिद्धि मंदिर तरावली कला पहुंचकर माता रानी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया एवं मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का जायजा लिया वहीं मंदिर के महंत गिरि महाराज से भी चर्चा की इस दौरान सेन समाज संगठन द्वारा सेवाधारी के रूप में आज मंदिर परिसर में सेवाएं दी जा रही थीं जहां सेन समाज समेत कई सेवाधारी संगठन के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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