चकरघिन्नी
खान आशु
संतों, महंतों, काल, महाकाल, मंदिरों और श्रद्धालुओं की नगरी… सियासत, आध्यात्म और सबकी मिली जुली विरासत की नगरी… सड़कों पर बिखरी आस्था… आस्था के बीच छुपी खुराफात… हालात पहले भी बने थे, फिर बनाए गए…!
सड़कों पर निकला सैलाब… आस्था में डूबे लोग…! जिनके लिए आस्था है, उनके साथ दूसरों का सम्मान भी सभी का नैतिक दायित्व है…! लेकिन आस्था में लिपटी चरण पादुकाएं किसी दूसरे मजहब पर उछाली जाना किस धर्म में सिखाई जा रही है, इसका ख्याल किया जाना चाहिए…! इस एक हरकत के असरात कहां से कहां तक आ सकते हैं इस बात का ख्याल भी रखने की जरूरत है…!
मुखिया और कानून व्यवस्था संभालने के जिम्मेदार के शहर में हादसा होकर खामोशियों में दब जाता है…! नफरती चिंटू मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं… ठीक वैसे ही मुस्कुरा रहे हैं, जैसे किसी पर थूकने का इल्ज़ाम लगा कर खुश हुए थे…! झूठ की बिना पर हुई कार्यवाही की तत्परता और चीख चीख कर बयां हो रहे सच की खामोशी से अंदाज लगाया जा सकता है कि बेइमानी मन में समा गई है या किसी पर कार्यवाही करने का खौफ समाया हुआ है…!
खामोश वह भी बैठे हैं, जिनके जिम्मे क़ौम ने खुद को कर रखा है… डर है कि कुछ कहेंगे तो राज गद्दी से बेदखल कर दिए जाएंगे..!
पुछल्ला
स्वयंभू न्यायाधीश(?)
प्यार, मुहब्बत, इश्क़। न रुका है, न रुकेगा। इसने जात देखी, न रुतबा, न उम्र। सजा देने के चौधरी वह कैसे बन गए, जिन्हें खुद के घर में कहने का कोई हक नहीं। न्याय प्रिय पुलिस भी अब कार्यवाही उसके खिलाफ कर रही है, जिसने प्यार किया है। नफरत फैलाने वाले पुलिस के सहयोगी बनकर बैठे हैं।
29/जून/2025
Category: धर्मसमाज
अड्डे पर जुटे जवां शायरों ने श्रोताओं का मन मोह लिया
खान आशु
भोपाल। तरतीब साहित्यकारों की गठजोड़ से बनी संस्था पोयट्री अड्डा की थी… फिक्र परिदृश्य से गायब हो रहे अच्छे साहित्य को संवारने की थी… महफिल का आगाज वरिष्ठ शायरों की मौजूदगी से सजा और पहले प्रोग्राम में शामिल किए गए नौजवान किए गए शायरों की बेतकल्लुफ़ पेश कलामी को पसंद किए जाने के साथ समापन हुआ।
पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सीनियर शायर साजिद प्रेमी ने एक खाका तैयार किया। डॉ. महताब आलम, विजय तिवारी और डॉ. नुसरत मेहदी को रूपरेखा बताई। फिक्र की गई कि उभरते हुए कलाकारों/शायरों को मंच दिया जाए। ताबड़तोड़ एक प्रोग्राम को आकार दिया गया। दुष्यंत संग्रहालय में सजी इस महफिल को खुशगवार बनाने के लिए नाम दिया गया सुखन कहकशां नाम दिया गया। मेहमानों में मप्र उर्दू अकादमी निदेशक डॉ . नुसरत मेहदी, अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ. अंजुम बाराबंकवी, विजय तिवारी, डॉ. महताब आलम और डॉ. अहसान आज़मी को शामिल किया गया। इन सभी उस्ताद शायरों के सामने कई पहली बार मंच से रूबरू हुए शायर तो कुछ मंच पर अपनी पहचान पुख्ता करने में जुटे शायरों ने कलम का मुजाहिरा किया। महफिल जमी तो एक के बाद एक फेंकू भोपाली, मनसवी अपर्णा, कमलेश नूर, इंसाफ सिरोंजी, उमेश मिश्रा ‘मुख्लिस’, अभिलाषा श्रीवास्तव, रूपाली सक्सेना ‘गजल’, समीना क़मर, प्रद्युम्न शर्मा, बीएन तिवारी, महावीर सिंह नारायण, अनवर मोहम्मद ‘शान’, एसएम मुबश्शिर और आदिल इमाद ने अपने कलाम पेश किए। श्रोता मुग्ध और बड़े शायर धन्य दिखाई दिए। समय सीमा में बंधा या मुशायरा और कवि सम्मेलन देर शाम तक चलता रहा। कार्यक्रम इस वायदे के साथ अपनी मंजिल पर पहुंचा कि ऐसा ही आयोजन हर माह आयोजित किया जाएगा। साथ ही कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर वायरल भी किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत में साजिद प्रेमी ने प्रोग्राम की रूपरेखा बताई। इस मौके पर अतिथियों को सम्मानित किया गया। साथ ही शायरों का सम्मान भी शॉल और गुलाब के फूल देकर डॉ. नुसरत मेहदी और डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने किया।
नवागत सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने गांधीनगर अस्पताल का किया निरीक्षण।
मरीजों को परेशानी होने की शिकायत मिलने पर होगी संबंधितों पर कार्यवाही
जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ.मनीष शर्मा द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गांधीनगर का निरीक्षण कर अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं का जायजा लिया गया। डॉ. शर्मा द्वारा ओपीडी, प्रसव कक्ष,पीएनसी वार्ड, लेबोरेट्री,दवा वितरण समेत विभिन्न सेवाओं की जानकारी ली गई।
निरीक्षण के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ.रितेश रावत, मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार समेत चिकित्सक एवं प्रबंधकीय स्टाफ उपस्थित रहे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ.मनीष शर्मा ने निर्देश दिए कि इस अस्पताल से ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, इसलिए ओपीडी के निर्धारित समय में सभी चिकित्सा एवं पैरामेडिकल स्टाफ ड्यूटी पर उपस्थित रहें। आकस्मिक स्थिति में रात के समय में भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा उपलब्ध रहे। शाम की ओपीडी में सभी चिकित्सक सेवाएं प्रदान करें।
डॉ. शर्मा ने सीबीएमओ को निर्देशित किया कि विकासखंड में संचालित सभी कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग एवं बैठकों को निर्धारित एजेंडा के साथ किया जाना सुनिश्चित किया जाए। अस्पताल में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। मरीज को उपचार लेने में विलंब या परेशानी ना हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। अन्यथा संबंधितों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। निरीक्षण के दौरान डॉ. शर्मा द्वारा भर्ती मरीजों से बात कर सेवाओं की जानकारी भी ली गई!
थाना बैरसिया पुलिस ने नाबालिग बालिका की खोज कर सकुशल की परिजनों को किया सुपुर्द
जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।।पुलिस अधीक्षक भोपाल,देहात प्रमोद कुमार सिन्हा के द्वारा महिला संबंधी अपराधो मे त्वरित कार्यवाही एवं निकाल करने हेतु निर्देशित किया गया है। पुलिस अधीक्षक भोपाल देहात के निर्देशन के तारतम्य मे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल, देहात डाँ नीरज चौरसिया, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) संभाग बैरसिया सर्वप्रिय सिन्हा (आईपीएस) के नेतृत्व मे सभी थाना प्रभारियों को प्रभावी कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया था। इसी तारतम्य में थाना बैरसिया द्वारा एक अपहृत बालिका को गुजरात राज्य व रतलाम शहर से दबिश देकर सकुशल दस्तयाब करने मे सफलता पाई । घटना का सक्षिंप्त विवरण
दिनांक 09.06.25 को फरियादिया सुशीला बाई प्रजापति पति स्व,नवल सिंह प्रजापति निवासी वार्ड न0- 18 महुआखेडा बैरसिया ने रिपोर्ट लेख कराई कि उसकी नाबालिग नातिन को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला फुसलाकर भगा ले गया जिस पर थाना बैरसिया मे अपहरण का मामला पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया।
प्रकरण की विवेचना के दौरान बैरसिया पुलिस ने तकनीकि आधार पर आसपास क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक सीसीटीव्ही कैमरे एवं तकनीकी आधार पर पाया कि विनोद सपेरा नाम का एक व्यक्ति अपने साथ बहला फुसलाकर भगा ले गया है जिसे वह लेकर गुजरात राज्य की ओर रवाना हुआ है। नाबालिग की पतारसी हेतु थाना प्रभारी बैरसिया वीरेन्द्र कुमार सेन द्वारा पुलिस टीम को गुजरात राज्य की ओर रवाना की गई पुलिस टीम द्वारा रास्ते मे टोल प्लाजा एवं होटल, लाज,धर्मशाला आदि मे अपहता व संदेही की तलाश की गई इसी बीच पता चला की संदेही अपहता को ट्रेन के माध्यम से गुजरात लेकर रवाना हुआ है पुलिस टीम द्वारा लगातार रेलवे रूट पर खोजबीन करते हुये अपहृत लडकी को सकुशल दस्तयाब किया गया तथा आरोपी विनोद सपेरा एवं उसके साथी वकील के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
इनकी रहीं सराहनीय भूमिका
अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) संभाग बैरसिया सर्वप्रिय सिन्हा
(आईपीएस) थाना प्रभारी बैरसिया वीरेन्द्र कुमार सेन उनि.दिलीप जायसवाल, उनि .प्रियांशी कौरव, प्र.आर.हेमराज राठौर, आर.नीरज एवं एनआरएस सदस्य इसराईल खान का विशेष योगदान रहा।
सेन शक्ति महासंगठन द्वारा नवागत बैरसिया थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन का किया गया स्वागत सम्मान।
जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। सेन शक्ति महा संगठन एवं समाज बंधुओ द्वारा मंगलवार को बैरसिया थाने के नवागत थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन का स्थानीय रेस्ट हाउस बैरसिया में पुष्प मालाए पहनाकर मिठाईयां खिला एवं सोल श्रीफल के साथ साफा बांधकर स्वागत सम्मान किया गया इस स्वागत अभिनन्दन कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे नरेश सेन लांबाखेड़ा राष्ट्रीय सेन ट्रस्ट भोपाल जिला अध्यक्ष एवं कार्यक्रम का संचालन प्रदीप श्रीवास पलाश वर्मा,केबिनेट मंत्री (दर्जा) प्रतिनिधि केश शिल्पी मण्डल एवं प्रदेश महासचिव सेन शक्ति महासंघठन द्वारा किया जिसमें समाज सेवियों

ने अपना परिचय दिया इस दौरान कार्यक्रम में पधारे जितेंद्र बघेल ने भी नवागत थाना प्रभारी का स्वागत किया इसी कड़ी में सेन समाज संगठन के पदाधिकारीयों द्वारा जितेंद्र बघेल का भी पुष्प मालाए पहनाकर कर सम्मान किया इस मौके पर दर्शन सेन प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सेन शक्ति महा संघठन कामता प्रसाद सराठे पहलवान,पत्रकार जीतेन्द्र सेन राष्ट्रीय पत्रकार महासभा भोपाल जिला अध्यक्ष,नंदकिशोर श्रीवास नंदू भैया प्रदेश महामंत्री सेन शक्ति महासंघठन राम दयाल दसोरे प्रदेश कोषाध्यक्ष सेन शक्ति महासंघठन मोहन सेन शिक्षक नलखेड़ा लक्ष्मी सेन देवेन्द्र श्रीवास पीडब्ल्यूडी मनोज श्रीवास करोंद जसपाल श्रीवास अध्यक्ष जगदीश स्वामी मंदिर कालूराम श्रीवास परस राम सेन हेमराज सेन गोलू सेन प्रभात श्रीवास भैया पहलवान समेत सामाजिक बंधुओं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस अवसर पर नवागत थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन द्वारा अपनी पोस्टिंग और जीवन शैली की कुछ जानकारियां साझा करते हुए सभी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस दौरान समाज बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया ‘म्यूजियम मेला’ का शुभारंभ
राज्य संग्रहालय, भोपाल में सप्ताहव्यापी आयोजन; वर्चुअल रियलिटी केंद्र, 11 पुस्तकों और विभागीय मैस्कॉट ‘वाकन दादा’ का लोकार्पण
भोपाल : अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (18 मई) के अवसर पर संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश द्वारा भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय परिसर, श्यामला हिल्स में सप्ताहव्यापी ‘संग्रहालय मेला’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने मेले का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि “भारतीय पुरातत्त्व ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। देश अपनी जड़ों को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है। एक सिक्के को देखकर इतिहास बताने की क्षमता रखने वाले पुरातत्वविदों का कार्य अद्भुत है।” उन्होंने डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर से अपनी भेंट का स्मरण करते हुए उनकी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया और संचालनालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने राज्य संग्रहालय परिसर में वर्चुअल रियलिटी अनुभव का अवलोकन किया और आमजन से आग्रह किया कि वे इस मेला अवश्य देखने आएं।

इस अवसर पर संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि UNESCO की एक चौथाई साईट मध्यप्रदेश में स्थित हैं और आने वाले समय में और भी कई स्थल विश्व धरोहर सूची में शामिल हो सकते हैं। मध्यप्रदेश की विरासत अत्यंत समृद्ध है — इसमें 3000 वर्ष पुराने गुफाये, दुर्लभ प्रतिमाएं, मंदिर, स्मारक आदि सम्मिलित हैं। संचालनालय द्वारा इनकी संरक्षण एवं जनसुलभता की दिशा में किए जा रहे प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय हैं। उन्होंने लालबाग, राजवाड़ा, उज्जैन सहित अनेक स्थलों पर चल रहे संरक्षण कार्यों की जानकारी भी दी।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश में प्रथम बार वर्चुअल रियलिटी केंद्र का शुभारंभ किया गया। यह केंद्र आगंतुकों को बिना किसी फिजिकल गाइड के संग्रहालय/स्मारक की गहन यात्रा का इमर्सिव अनुभव प्रदान करता है। वर्तमान में यह केंद्र ओरछा एवं राज्य संग्रहालय भोपाल में स्थापित किया गया है, जिसमें भविष्य में अन्य ऐतिहासिक स्थलों को भी जोड़ा जाएगा।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण ‘भारत की सौर परंपरा’ पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी रही, जिसमें देश के प्रमुख सूर्य मंदिरों एवं उनसे संबंधित कलात्मक मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक आमजन के लिए निःशुल्क खुली रहेगी।
मेले में विभाग की विभिन्न इकाइयों द्वारा कुल 9 स्टॉल लगाए गए, जिनमें जनसामान्य को संग्रहालय एवं पुरातत्त्व से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। डिजिटाइजेशन स्टॉल में 6.88 करोड़ अभिलेखीय दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया, जहाँ मशीनों के माध्यम से यह प्रक्रिया लाइव दिखाई गई। 3डी प्रिंटिंग स्टॉल में मूर्तियों की प्रतिकृतियाँ बनाने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया, जो संग्रहालयों में प्रदर्शित की जाती हैं। वीआर स्टॉल में इमर्सिव अनुभव प्रदान किया गया। पी.आर. स्टॉल में संचालनालय की वैश्विक स्तर पर हो रही प्रशंसा और पहलों को दर्शाया गया। मॉडलिंग के स्टॉल में प्रतिकृति निर्माण की प्रत्यक्ष निर्मित का जीवंत प्रदर्शन किया गया। संरक्षण स्टॉल में संरक्षण कार्यों में प्रयुक्त औजारों एवं तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त विभाग के प्रकाशन अनुभाग की जानकारी हेतु भी विशेष स्टॉल स्थापित किया गया।
इस अवसर पर विभाग द्वारा प्रकाशित पुरातात्त्विक 11 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, साथ ही विभाग के अधिकृत मैस्कॉट ‘वाकण दादा’ का लोकार्पण हुआ, जो विभागीय पहलों का चेहरा बनकर आमजन से संवाद करेगा।
प्रदेश के अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में भी अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस को विशेष रूप से मनाया गया। जिसमे ग्वालियर के मोती महल में ‘अतीत से भविष्य के सेतु: हमारे संग्रहालय’ विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित की गई, जिसमें ख्यात विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इंदौर में ‘विंटेज इंदौर’ विषय पर प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी आयोजित की गई। जबलपुर में ‘कृषि संस्कृति में बलराम’ विषय पर आधारित प्रदर्शनी एवं व्याख्यानमाला आयोजित की गई।
यह आयोजन संचालनालय पुरातत्त्व द्वारा इतिहास, कला एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संग्रहालयों की ओर जनसामान्य को आकर्षित करने के उद्देश्य से यह मेला सभी आयु एवं वर्ग के लोगों के लिए एक अनूठा और अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध हो रहा है।
अपना भोपाल : तालाब, पहाड़ियों, सुंदर वादियों, मस्जिदों और तहजीब, तालीम का शहर
जो बात इस जगह, वह कहीं पर नहीं…
भोपाल। तहज़ीब, तालीम, तरक्क़ी और तासीर का शहर दुआ है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को कभी कोई बुरी नज़र न लगे और इसकी खूबसूरती बनी रहे
ताहिर अली
यदि मंदिरों से घंटियों की मधुर आवाज़ और मस्जिदों से बुलंद अज़ान एक साथ गूंजे, तो समझ लीजिए आप उस शहर में हैं, जहाँ सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब ने अपने खूबसूरत रंग बिखेरे हैं। यह शहर है भोपाल – झीलों की नगरी, नवाबी संस्कृति की परछाईं, प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल और ऐतिहासिक धरोहरों का सजीव संग्रह।
तहज़ीब और भाईचारा
भोपाल की सबसे बड़ी खासियत इसकी साझा संस्कृति है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच मंदिर, मस्जिद और मजारों का साथ-साथ दिखना आम बात है। यही वह शहर है, जहाँ सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक – ताजुल मस्जिद है, तो वहीं विश्व की सबसे छोटी मस्जिद मानी जाने वाली ‘ढाई सीढ़ी मस्जिद’ भी यहीं स्थित है। भोपाल में उर्दू भाषा का उपयोग लगभग सभी समुदाय के लोग करते हैं।
भोपाल की सड़कों पर चलते हुए अगर कोई राहगीर किसी मोहल्ले का पता पूछ ले, तो भोपाली उसे दरवाजे तक छोड़कर आते हैं। यही इसकी तहज़ीब है, यही इसकी पहचान है। भोपाल की एक बात ओर मशहूर है कि जो भी भोपाल आता है यहां के लोग उसे सीने से लगा लेते हैं। हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से जो भोपाल आया जैसे नौकरीपेशा या कोई भी व्यवसाय के लिए यहीं का होकर रह गया। भेल कारखाना इसका जीता-जागता उदाहरण है। ज्यादातर नौकरी पेशा अधिकारी एवं कर्मचारी रिटायर होने के बाद भोपाल को ही अपना मानकर यहीं बस गए। काफी लोग कारोबार करने के उद्देश्य से यहीं आकर आबाद हो गये।
भोपाल की मज़ेदार ‘उर्फ़ियत’ – नाम के पीछे नाम की दुनिया!
भोपाल, भोपाली और भोपालियत की पहचान केवल ताल-तालैया और ऐतिहासिक इमारतों आबोहवा, तहजीब और संस्क़ति तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी अनोखी और मज़ेदार ‘उर्फ़ियतों’ के लिए भी मशहूर है। जब किसी मोहल्ले में एक ही नाम के कई लोग हों, तो पहचान बनाने के लिए नाम के पीछे कुछ जोड़ना लाज़मी हो जाता है, फिर चाहे वो पहनावे से जुड़ा हो, बोलचाल से, शौक से या किसी मज़ेदार किस्से से – हर भोपाली को मिल जाता है उसका ख़ास “उर्फ़ी टाइटल”।
तो मिलिए भोपाल की इस अनोखी नामावली से –
तारिक़ टाई, जो हमेशा टाई में दिखते थे, तारिक़ चपटे, जिनके गाल खुद गवाही देते हैं, तारिक़ होंठ कटे, जिनके होंठों की कहानी हर गली जानती है, और तारिक़ झबरे, जिनकी आंखें ही उनकी पहचान हैं। आरिफ़ अंडे का नाश्ता शहर भर में मशहूर है, तो आरिफ़ बुलबुल अपने गले से सबको दीवाना बना देते हैं। बाबूलाल 501 नाम की सिगरेट की तरह मशहूर हैं, और सेठ छगनलाल, जिनका “सेठपना” मोहल्ले में आज भी कायम है।
रविंद्र सिंह लखरत, बाबूलाल लठमार, चांदमल हिटलर, मोहन पंचायती, लाला मुल्कराज, सरदारमल लालवानी, नाहर सिंह सूरमा भोपाली, कन्हैयालाल ‘बीड़ी’ और के. अमीनउद्दीन-301 तो अपनी शान और रसूख़ के लिए पहचाने जाते हैं। अखिलेश अग्रवाल गफूरे और वहीद अग्रवाल की उर्फ़ियतें उनकी दोस्ती और कारोबार की दास्तान सुनाती हैं। हफ़ीज़ पाजामे और चांद कटोरे का नाम सुनते ही भोपाल मुस्कुरा उठता है, वहीं चांद चुड़वे मोहल्ले की कहानियों के नायक हैं। सुरेश 501, अनिल अग्रवाल पटीये, और देवेश सिमहल वकील साहब अपने नाम से ही काफ़ी असरदार हैं। बाबू साहब घोड़े और बाबू साहब नाम की सादगी में गजब की शान है। आलू बड़े, ज़ायकों की दुनिया के हीरो हैं, और लोक सिंह ताल ठोंकू हर बहस में जीत की गारंटी हैं। रईस भूरा, मुन्ने मॉडल ग्राउंड, मुन्ने पेंटर, मुईन क़द्दे और माहिर मदीना – ये नाम जैसे ही कान में पड़ें, पूरा मोहल्ला मुस्करा उठता है।
भोपाल की गलियों में लोग नाम से कम और उर्फ़ियत से ज़्यादा जाने जाते हैं। जावेद चपटे और जावेद चिराटे जैसे नामों में मज़ाकिया तंज है, तो बन्ने पहलवान और बन्ने लखेरा में मोहल्ले की दो अलग-अलग शख्सियतें झलकती हैं। कल्लू अट्ठे, बाबू भड़भुजे, मुन्ने फुक्की, ईरानी और डूंड जैसे नाम रोज़मर्रा की आदतों, मज़ाक या पेशे से जुड़े हैं। सईद बुल, छुटकटे, वहीद ढेलकी, आरिफ पिस्स, और अनफिट भोपाल की उस खास तासीर को दर्शाते हैं, जहां हर नाम के पीछे एक किस्सा है — हँसी, अपनापन और तंज से भरा। यही भोपाल की असली पहचान है — उर्फ़ियतों में बसी यारी और यादें।
भोपाल की इन मज़ेदार उर्फ़ियतों में वो अपनापन है, जो किसी GPS में नहीं मिलता – सिर्फ मोहल्लों की यादों और बातों में ही जिंदा रहता है।
भोपाल में हिंदू-मुस्लिम एकता : सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की मिसाल
भोपाल की सांस्कृतिक विरासत की सबसे मजबूत कड़ी उसकी हिंदू-मुस्लिम एकता है, जो सिर्फ सामाजिक सौहार्द का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों के बीच पनपी सहिष्णुता और साझेदारी की अनूठी मिसाल है। जब देश के अन्य हिस्सों में अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति ने सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया, तब भी भोपाल ने अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोए रखा। हर वर्ग के लोगों ने एक दूसरे से बहुत प्यार मोहब्बत के साथ दिली लगाव रखा। सन 1812 की लड़ाई में हिंदू योद्धाओं जैसे डांगर सिंह, जय सिंह, और अमन सिंह पटेल ने भोपाल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि युद्ध में महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी की, यह दिखाते हुए कि भाईचारा केवल धार्मिक स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्तर पर भी जीवित था।
भोपाल रियासत के प्रशासन में हर कालखंड में हिंदुओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दीवान (प्रधानमंत्री) जैसे उच्च पदों पर लाला घानी राम, लाला फूलानाथ, राजा अवध नारायण जैसे हिंदू अधिकारी रहे। यह समावेशिता केवल औपचारिक नहीं थी — ये अधिकारी नवाबों के विश्वासपात्र भी थे। नवाब क़ुदसिया बेग़म के दरबार में एक हिंदू, एक मुसलमान और एक ईसाई मंत्री नियुक्त थे — यह उस समय की धार्मिक विविधता के प्रति सम्मान का प्रतीक था।
रियासत के इंजिमाम (शामिल करने) के बाद शरीफ़ शरणार्थियों में (उच्च परिवार के शरणार्थी) सरदार गुरबख्श सिंह भी थे, जिनके बेटे अमरीक सिंह रंजीत होटल चलाते हैं। वे बहू मियाँ के साथ ईद पर नवाब साहब को सलाम करने जाते। एक बार नवाब साहब ने पूछा कि भोपाल कैसा लग रहा है, तो सरदार साहब ने हाथ जोड़कर कहा कि जहाँ गरीब परवर सरकार का साया हो, वहाँ कोई कैसे न खुश हो — यह कहते हुए वे भावुक हो गए।
धार्मिक सहिष्णुता के उदाहरण
नवाबों ने हिंदू नागरिकों और जागीरदारों के अधिकारों को बराबरी से सम्मान दिया। नवाब सुल्तान जहां बेग़म ने रंग पंचमी पर रंग और सावन के झूले जैसे हिंदू पर्वों में भाग लिया, और गरीब हिंदुओं के लिए “सदाव्रत” योजना शुरू की, जिसमें उन्हें भोजन और यात्राओं के लिए सामग्री दी जाती थी। हवा महल की दीवार इसलिए टेढ़ी बनाई गई क्योंकि पास के एक हिंदू नागरिक ने अपनी जमीन बेचने से इनकार किया था — सरकार ने उस निर्णय का सम्मान किया।
भोपाल में न कभी विशुद्ध मुस्लिम मोहल्ले रहे, न विशुद्ध हिंदू — सब एक साथ रहते थे। त्योहार, शादियाँ, दुःख-सुख सब साझे होते थे। इसी समरसता ने उर्दू भाषा के विकास को सहज वातावरण दिया। उर्दू न केवल दरबार की भाषा बनी, बल्कि आम जीवन की भाषा भी, जिसमें दोनों समुदायों ने योगदान दिया। भोपाल का इतिहास केवल एक रियासत की कहानी नहीं, बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक सहभागिता का जीवंत दस्तावेज़ है। यह आज के भारत के लिए भी एक प्रेरणा है कि विभिन्न धार्मिक समुदाय कैसे सम्मान, सहयोग और साझा विरासत के आधार पर एक सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं।
दिनों के नाम पर मोहल्लों के नाम
भोपाल की दिलचस्प रचनात्मकता इसके मोहल्लों के नामों में भी झलकती है – मंगलवारा, बुधवारा, इतवारा, जुमेराती, पीरगेट – इन मोहल्लों में किसी एक समुदाय की पहचान नहीं बल्कि पूरे शहर की साझी संस्कृति की झलक मिलती है। यही कारण है कि यहाँ के लोग आपदाओं में एक-दूसरे की मदद के लिए सबसे पहले खड़े नजर आते हैं।
शुजा ख़ां का अट्टा भोपाल की उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गलियों में से एक है, जिसकी मिट्टी ने कई नामचीन और असरदार शख़्सियतों को जन्म दिया है। यूँ तो रियासत भोपाल में जुमेराती के काका मियाँ, इब्राहीमपुरा के तब्बू मियाँ और शफ़ीक़ पठान, लक्ष्मी टॉकीज़ के रफ़्फ़ू पहलवान, बुधवारा के डॉक्टर ज़हीरुलइस्लाम, इमामी गेट के हकीम अख़्तर आलम और सर्राफा चौक के मुन्नू लाल जोहरी जैसे कई मशहूर लोग गुज़रे हैं, मगर शुजा ख़ां का अट्टा की अपनी एक अलग ही तारीख़ है। यहाँ की सरज़मीन न केवल ज़रख़ेज़ रही है, बल्कि इसने समाज, अदब और कारोबार के कई सितारों को भी रौशन किया है। समय के साथ यह इलाका अब एक बड़ा कारोबारी केंद्र बन चुका है, जिसकी वजह से पुराने बाशिंदों के कई ख़ानदान सुकून की तलाश में शहर के अलग-अलग वीआईपी इलाकों में जाकर बस गए हैं। लेकिन इस मोहल्ले की रौनक कभी ज़हूर हाश्मी, शिक्षाविद डॉ. सैय्यद अशफ़ाक अली, खान शाकिर अली खान, शायर अख़्तर सईद ख़ां, नवाब मियाँ ‘सिगरेट’, मौलाना इमरान ख़ां, अल्लामा खालिद अंसारी, शर्की खालिदी और सालिक भोपाली जैसे रौशन चहरों से जगमगाया करती थी।
भोपाल का गुटका, बटुआ और नवाबी बटुए
एक ज़माना था जब भोपाल के गुटके की खासियत हर जगह मशहूर थी। ये वो गुटका नहीं, जो आज की तरह लोगों की जेब में रहता है, बल्कि ड्रायफ्रूट, रंग-बिरंगे मसालों और इत्र की सुगंध से तैयार होता था, जिसे खूबसूरत बटुओं में सजाकर पेश किया जाता था। भोपाल के ‘बटुए’ नवाबी शान की निशानी थे, और आज भी सर्राफा बाजार की कुछ दुकानों पर यह परंपरा जीवित है।
भाईचारे की कहानियाँ – रिश्तों की गर्मी
भोपाल एक ऐसा शहर है जहां किसी एक विशेष समुदाय के मोहल्ले नहीं बल्कि सारे समुदाय समझदारी, भाईचारा और आपसी प्रेम के साथ एक साथ रहते हैं। किसी आपदा-विपदा में एक-दूसरे की मदद करते नजर आते हैं। मैं खुद भोपाल के इतवारा मोहल्ले का निवासी रहा हूँ। हमारे पुश्तैनी मकान के सामने साहू समाज का परिवार रहता था, जो आज भी हमारे दिल के बेहद करीब है। मेरी बहन ने इस परिवार को राखी बाँधी थी। मेरी बारात में ये परिवार हमारे साथ सीहोर तक गया, और जब 1977 में मेरी माताजी का निधन हुआ, तो पहली रसोई इन्हीं के घर से आई। आज भी हमारे सुख-दुख में वही आत्मीयता बरकरार है।
भोपाल: धर्मनिरपेक्ष पहचान का प्रतीक
भोपाल के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक, काली माता का मंदिर, छोटे तालाब क्षेत्र में स्थित है और एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। वहीं एयरपोर्ट क्षेत्र में स्थित मनुआभान की टेकरी पर श्वेतांबर जैन समुदाय का एक प्रसिद्ध मंदिर है। अब इस टेकरी को महावीर गिरी के नाम से भी जाना जाने लगा है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बिड़ला मंदिर भोपाल का श्रद्धा का केंद्र है। चौक स्थित प्राचीन आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, बहुत मशहूर है। इसके साथ ही बिडला मंदिर सहित अनेक मंदिर आस्था के केन्द्र है।
भोपाल में सिख धर्म की उपस्थिति सुदीर्घ और प्रभावशाली रही है, जिसका प्रतीक हैं शहर के तीन प्रमुख ऐतिहासिक गुरुद्वारे – शाजहानाबाद, हमीदिया रोड और इदगाह हिल्स। शाजहानाबाद स्थित गुरुद्वारा नानकसर 19वीं सदी में स्थापित हुआ और आज भी गुरबाणी, संगत और लंगर की परंपराओं को जीवंत रखे हुए है। हमीदिया रोड का गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा शहर का प्रमुख धार्मिक व सामाजिक केंद्र है, जहाँ कीर्तन, शिक्षण शिविर और सामूहिक सेवाएं नियमित रूप से होती हैं। वहीं इदगाह हिल्स स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार आध्यात्मिक शांति व प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण स्थल है, जहाँ पर्वों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। ये तीनों गुरुद्वारे न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि सेवा, एकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल भी पेश करते हैं।
भोपाल की सबसे पुरानी चर्चें शहर के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विविधता का प्रमाण हैं। सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी कैथेड्रल चर्च 150 वर्षों से अधिक पुराना है और नवाब सिकंदरजहां बेगम की अनुमति से ब्रिटिश काल में बना। इसकी वास्तुकला और शांति इसे प्रार्थना का प्रिय स्थल बनाते हैं। सेंट जोसेफ कैथोलिक चर्च एक शांत वातावरण वाला यह चर्च, भोपाल की सबसे पुरानी पूजा स्थलों में से है, जो सामुदायिक कार्यक्रमों और त्योहारों में सक्रिय भूमिका निभाता है। इन्फेंट जीसस चर्च की सुंदर वेदी और क्रिसमस के अवसर पर भव्य सजावट इसे विशेष बनाती है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। इन चर्चों की उपस्थिति भोपाल की सर्वधर्म समभाव की परंपरा को और मज़बूत बनाती है।
नवाबों की विरासत: ताजमहल से लेकर बाबे-ए-आली तक
भोपाल के ताज महल की इमारत, जिसे नवाब हमिदुल्ला खान ने पाकिस्तान से आए सिंधी शरणार्थियों को शरण देने के लिए समर्पित किया था, आज भी सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल है। भोपाल शहर के बीचों-बीच स्थित जामा मस्जिद हिंदू-मुस्लिम एकता की परिचायक है। गोलघर, गौहर महल, मिंटो हॉल, सदर मंजिल और बॉबे आली जैसी शानदार इमारतें अपनी खूबसूरती और भाईचारे की गवाह हैं। भोपाल में किसी जमाने में खवातीन (महिलाओं) के लिए घरेलू सामान की जबरदस्त प्रदर्शनी बाबे-ए-आली में लगा करती थीं। जिसमें शहर के बड़े ताजिर (व्यापारी) अपनी दुकानें प्रदर्शनी में लगाया करते थे। प्रदर्शनी में 10 साल से ज्यादा के पुरूषों को आने की अनुमति नहीं थीं। भोपाल के नबाव होली त्योहार के बाद रंगपंचमीं पर शहरवासियों के साथ मिलकर रंग खेलते थे। उस जमाने में शादियां मोहल्ले में शामीयाने लगा कर की जाती थी। भोपाल की पहचान उस दौर में खास सवारी तांगा से हुआ करती थी। शादी समारोह में शामिल होने आए मेहमानों का तांगा सवारी का किराया खुद अदा करते थे।
बरकतउल्ला भोपाली: आज़ादी की अलख जगाने वाला अज़ीम सपूत
भोपाल की सरज़मीं को यह फ़ख्र हासिल है कि यहाँ एक ऐसा जांबाज़ स्वतंत्रता सेनानी पैदा हुआ, जिसने अपनी पूरी जिंदगी भारत की आज़ादी के नाम कर दी। मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली — एक ऐसा नाम, जो अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ज्वाला बनकर उभरा। कच्चे मकान में जन्मे इस अज़ीम शख्स ने दुनिया के 26 देशों में 45 सालों तक भटकते हुए स्वतंत्रता की मशाल को जलाए रखा। 1890 में जब वो इंग्लैंड पहुंचे, तो देखा कि एक ही साम्राज्य में एक देश (इंग्लैंड) सम्पन्न और दूसरा (भारत) बदहाल क्यों है? इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने कलम और जुबान को हथियार बनाया। पेरिस में ‘अल-इंक़लाब’ के संपादक बने, जापान में ‘इस्लामिक फ्रेटरनिटी’ नामक अखबार शुरू किया, जर्मनी में लाला हरदयाल के साथ ‘ग़दर पार्टी’ की नींव रखी और अमेरिका में जाकर भारतीयों को एकजुट किया।
1915 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने रूस में क्रांतिकारी लेनिन से मुलाकात की, और गांधीजी के मार्गदर्शन में राजा महेन्द्र प्रताप सिंह के साथ मिलकर अफगानिस्तान में निर्वासित भारत सरकार की स्थापना की। इसमें बरकतउल्ला भोपाली को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। उनके नाम पर भोपाल में आज ‘बरकतउल्ला विश्वविद्यालय’ और ‘बरकतउल्ला भवन’ स्थापित हैं।
शायरों, हाकी खिलाड़ियों और पूर्व राष्ट्रपति की धरती
भोपाल ने देश को न केवल नामचीन शायर और लेखक दिए, बल्कि हॉकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। खपोटा लकड़ी से बनी हॉकी स्टिक लेकर इस शहर के खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया। यही भोपाल है जिसने डॉ. शंकर दयाल शर्मा को राष्ट्रपति पद तक पहुँचाया – यह हर भोपाली के लिए गर्व की बात है।
भोपाल का जिक्र करेंगे तो ओबेदुल्ला खां हाकी गोल्ड कप का उल्लेख होना भी जरूरी है, नहीं तो यह अधूरा माना जाएगा। ये टूर्नामेंट भोपाल में एक जश्न की तरह मनाया जाता था। भोपाली पूरे साल इस का इन्तेजार करते थे। हिदुस्तान के अलावा इन्टरनेशनल टीमें में भी इस टूर्नामेंट में भाग लेती थी। साइकिलों का दौर था हर साइकल सवार ऐशबाग स्टेडियम की तरफ नजर आता था।
यह जानना भी ज़रूरी है कि रियासत भोपाल की बेगम सुल्तान जहां के बेटे प्रिंस औबेदुल्ला ख़ान के नाम पर इस टूर्नामेंट की शुरुआत 1931-32 में हुई थी। यह भारत में हॉकी का सबसे पुराना हॉकी टूर्नामेंट माना जाता है। उस दौर में अकेले भोपाल में ही 65 हॉकी क्लब थे। वहीं रायसेन जिले का कस्बा ‘औबेदुल्लागंज’ भी प्रिंस औबेदुल्ला के नाम पर ही रखा गया है। एक ज़माने में भोपाल को ‘हॉकी की नर्सरी’ कहा जाता था।
भोपाल-नंबरों का शहर
वक्त के साथ भोपाल शहर बढ़ता गया, नई बसाहटों के नए-नए नाम आये। विस्तारित हुए शहर भोपाल के इलाकों की शिनाख्त नंबरों से भी होती है। सबसे पहले आता है 1250, मतलब जिला अस्पताल जयप्रकाश चिकित्सालय, जिसे ज्यादातर लोग 1250 या जेपी अस्पताल कहते हैं। अस्पताल का नामकरण इस इलाके में बने 1250 सरकारी आवासों से है। आवास और अस्पताल दोनों 1250 के नाम से जाने जाते हैं। करीब ही सेकेंड है, यानी कभी यहां सिटी बस को दो नंबर स्टॉपेज हुआ करता है। हालांकि, इलाके का असली नाम तुलसीनगर है। सेकंड से आगे बढ़े तो मालूम नहीं क्यों तीन व चार ग़ायब हैं और सीधे पांच नंबर इलाका और पांच नंबर मार्केट। असलियत में ये शिवाजी नगर इलाके का हिस्सा है। पांच के बाद छह नंबर भी शिवाजी नगर का ही हिस्सा है। इतना ही नहीं मिनी बस वालों और यात्रियों की सहूलियत के लिये छह नंबर और सात नंबर स्टॉप के बीच सवा छह और साढ़े छह भी हैं। इन इलाकों में रहने वाले खुद के पते के बारे में यही बताते हैं। सात नंबर के बाद आठ नंबर स्टॉप को आठ नंबर कम रविशंकर मार्केट के नाम से ही जाना जाता है। यहां के वाणिज्यिक इलाके को नौ नंबर के नाम से जाना जाता है। आगे 10 और 11 नंबर के बीच साढ़े 10 नंबर भी पता बन चुका है। इसके बाद 11 नंबर और उससे बायीं तरफ 1100 आ गया। यहां भी इलाके की पहचान 1100 सरकारी क्वार्टर्स की वजह से है। वापस बस स्टॉप की रवायत में आएं तो 11 नंबर से आगे बढ़े तो 12 नंबर, और इसी लिये भोपाल के नए शहर के पीडब्ल्युडी दफ्तर के भवन को 12 नंबर दफ्तर के नाम से जाना जाता है। नंबरों वाला होने में शहर के सबसे ज्यादा पॉश इलाके भी पीछे नहीं हैं। चार इमली, 74 बंगले और 45 बंगले हैं। जहां संतरी से मंत्री तक और बाबू से सबसे बड़े बाबू (आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसर) के साथ ही राज्य शासन के दूसरे अफसर रहते हैं। चार इमली के बारे में शहर के बुज़ुर्ग बताते हैं कि जब भोपाल राजधानी नहीं था तब यहां घना जंगल था और इमली के चार बड़े पेड़ थे। पैंतालीस और चौहत्तर बंगले भी बंगलों की संख्या के कारण बने। अब शहर का प्रसार निरंतर हो रहा है। नित-नए इलाके प्रकट हो रहे हैं। अब भोपाल शहर पूंछ की तरफ बढ़ रहा है। पूंछ में शामिल हो रहे हैं होशंगाबाद रोड एनएच-12 के दोनों तरफ के आर्केड, पैलेस, विला, विहार और पुरम। नई कॉलोनियों की बसाहट भोजपुर की ओर जाने वाले मोड़ तक पहुंच गई है। भोपाल की लंबी होती पूंछ की फिलवक्त लंबाई मील में है, लिहाजा इसे 11 मील कहते हैं।
आधुनिक भोपाल की ओर: स्मार्ट सिटी की उड़ान
वर्तमान में भोपाल एक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहा है। ओवरब्रिज, स्मार्ट रोड, मेट्रो रेल जैसे प्रोजेक्ट्स पुराने शहर को नए शहर से जोड़ रहे हैं। एयरपोर्ट अब भी विशेष सेवाओं के लिए कार्यरत है और पुराने दौर की ‘पुतली घर’ नामक कपड़ा मिल की मीनार आज भी इतिहास की गवाही देती है।
दुआओं में बसा है मेरा भोपाल
मेरे अतीत के झरोखे से कुछ यादगार पल जो मैंने आज भी अपनी यादों में संजोकर रखे हैं। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि 71 वर्ष की उम्र में आज भी भोपाल की इस संस्कृति, भाईचारे और शांति से जुड़ा हूँ। यही दुआ करता हूँ कि यह शहर सदा यूं ही फले-फूले, इसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब को कभी कोई बुरी नज़र न लगे और इसकी खूबसूरती बनी रहे।
(लेखक जनसंपर्क संचालनालय, मप्र शासन के सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक हैं)।
सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में प्रदर्शनी का आगाज
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर पुरातत्व विभाग का आयोजन
भोपाल। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर राजधानी भोपाल में एक दिवसीय छाया चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय के इस आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश द्वारा 18 मई से
‘संग्रहालय मेला’ का आयोजन करेगा। इस आयोजन के माध्यम से जनसामान्य को इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू कराने का अभिनव प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर आयोजित वर्चुअल म्यूज़ियम केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में विभाग के सचिव शिव शेखर शुक्ला भी मौजूद रहेंगे।
यह होगा वर्चुअल म्यूज़ियम केंद्र से फायदा
यह केंद्र आगंतुकों को एक अद्वितीय डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा। इसमें पहली बार वर्चुअल म्यूज़ियम यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी।
यह भी होगा खास
कार्यक्रम के अंतर्गत एक छायाचित्र प्रदर्शनी ‘’भारत की सौर परंपरा” का आयोजन भी किया जाएगा। जिसमें भारत के सूर्य मंदिर एवं मूर्तियों के माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी। प्रदर्शनी सुबह 10:30 से शाम 5:30 बजे तक निशुल्क आमजन के लिए खुली रहेगी।
‘संग्रहालय मेला’ भी अद्भुत
‘संग्रहालय मेला’ में विशेष प्रदर्शनियों, शैक्षणिक गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, बच्चों के लिए रचनात्मक कार्यशालाओं सहित विविध आयोजन होंगे। जो संग्रहालयों के प्रति जनसामान्य की रुचि और सहभागिता को सुदृढ़ करेंगे।
भोपाल रेप केस : कौम से बाहर किए जाएंगे गुनाहगार
* उलेमा ने कहा, ऐसे लोग हमारे नहीं हो सकते
* बनेंगी टोलियां, करेगी निगरानी
खान आशु
भोपाल। राजधानी भोपाल को शर्मसार करने वाले रेप कांड के बाद अब उलेमा ने सख्त फैसला लिया है। उलेमा ने मजहब ए इस्लाम को बदनाम करने वाले मामले से जुड़े गुनाहगारों को कौम से बेदखल करने का फैसला लिया है। इनका कहना है कि इस्लाम को मानने वाला कुरआन की सिखाई बातों पर अमल करता है, जबकि इन गुनाहगारों के क्रियाकलाप इस्लाम ही नहीं किसी भी मजहब की सीख नहीं हो सकती। उलेमा ने भोपाल रेप केस के सभी आरोपियों, उनके सहयोगियों और इन्हें संरक्षण देने वाले हर इंसान को इस्लाम के बाहर का करार दिया है।
राजधानी भोपाल के उलेमा ने कहा कि इस्लाम का तानाबाना आसमानी किताब कुरआन से जुड़ा है। यह किताब औरत की इज्जत, उसकी हिफाजत, उसके लिए अच्छे और बेहतर ख्याल रखने का हुक्म देती है। कुरआन ने किसी गैर मेहरम (जिससे कोई शरई रिश्ता न हो) की तरफ देखना भी गुनाह करार दिया है। ऐसी किसी महिला को देखना, बात करना या उससे कोई ताल्लुक बनाना जीना एक बड़ा गुनाह करार दिया गया है। अल्लाह ऐसे गुनाहगार को कभी माफ नहीं करता।
उलेमा ने कहा कि भोपाल में हुआ मामला न सिर्फ शहर और सूबे के साथ देश को शर्मसार करने वाला है, बल्कि इसने मजहब ए इस्लाम को भी नजरें झुकाने के हालात बना दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक इंसान की वजह से पूरी कौम को नफरत की नजर से देखा जा रहा है। इनके लिए होने वाले किसी फैसले या मिलने वाली हर सख्त सजा की पूरा मुस्लिम समुदाय पैरवी कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुरआन, हदीस और इस्लाम के खिलाफ काम करने वाला कोई भी व्यक्ति हमारे बीच का नहीं हो सकता। उलेमा ने इस मामले के सभी गुनाहगारों को कौम से बेदखल करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि इन गुनाहगारों का अब से मजहब ए इस्लाम से कोई संबंध नहीं रहेगा। यह लोग न हमारी मस्जिदों में दाखिल हो सकेंगे और न ही इन लोगों से शादी, ब्याह या अन्य किसी तरह के ताल्लुक भी मुस्लिम समुदाय रखेगा।

मांगी सख्त सजा
शहर के उलेमा ने भोपाल रेप केस के सभी आरोपियों के लिए सख्त सजा की मांग की है। उन्होंने कहा कि सामने दिखाई देने वाले गुनाहगारों के साथ वह लोग भी कसूरवार हैं, जो इन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहे हैं या करते रहे हैं। सियासी और बहुल का संरक्षण भी इस सजा का ही हकदार है। उन्होंने कहा कि इस मामले में हिन्दू मुस्लिम या सियासी घालमेल करने की बजाए पूरे शहर और सूबे को मिलकर इन सभी घृणित लोगों के लिए सजा की मांग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कानूनी दायरा न हो तो ऐसे लोगों को सार्वजनिक सजा दी जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों का दोहराव न हो सके।
निकाहख्वाह को ताकीद
उलेमा ने कहा कि हमारे प्रदेश में एक कानून अमल में है। जिसके मुताबिक दो अलग धर्मों के लड़के लड़कियों के बीच रिश्ता नहीं हो सकता। उन्होंने प्रदेश के सभी निकाह ख्वाह को ताकीद की है कि ऐसे किसी भी निकाह से बचें। इस तरह की शिकायत पाए जाने पर ऐसे निकाह ख्वाह के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। उनको भविष्य में किसी निकाह की तकमील करने का अधिकार भी नहीं रहेगा। शहर के उलेमा ने हिन्दू सम्प्रदाय से भी गुजारिश की है कि इस तरह की विवादित शादियों को मंदिर या किसी संस्था में न होने दिया जाए।
बनेंगी टोलियां, रखेंगी नजर
शहर के उलेमा ने समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले युगलों पर निगरानी रखने के लिए पूरे प्रदेश में टीमें गठित करने का ऐलान किया है। यह टीमें सार्वजनिक स्थानों, स्कूल कॉलेज, वर्किंग प्लेस या होटल, ढाबों, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट पर साथ दिखाई देने वाले लड़का लड़कियों पर निगरानी रखेंगी। ऐसे जोड़े मिलने पर तत्काल इनके परिवार और संबंधित थाने पर सूचित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अलग अलग धर्मों के लड़के लड़कियों का इस तरह साथ घूमना समाज में विकट हालत बना रहा है। इसको रोकने के लिए सभी को अपने परिवार में भी निगरानी रखने और बेहतर शिक्षा देने की जरूरत है।
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आंगनबाड़ी केंद्र इमलिया नरेंद्र में पोषण पखवाड़ा के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया
जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।।महिला एवं बाल विकास परियोजना बैरसिया 2 के अंतर्गत आने वाले कुल्होर सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्र इमलिया नरेंद्र में सोमवार को पोषण पखवाड़ा के तहत कार्यक्रम मनाया गया कार्यक्रम में कुल्होर सेक्टर की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं शामिल हुई कार्यक्रम में पर्यवेक्षक कल्पना इंदुरकर द्वारा गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार लेने का सुझाव दिया गया कार्यक्रम के दौरान स्थानीय खाद्य सामग्री पोषण आहार के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई साथ ही गांव के लोगों को पोषण युक्त आहार के बारे में भी बताया गया वहीं गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार लेने का सुझाव दिया गया पोषण पखवाड़ा के मौके पर विभिन्न प्रकार की हरी सब्जी एवं पोषण आहार से बने व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई इस मौके पर महिला पर्यवेक्षक कल्पना इंदुरकर ने बताया कि सामुदायिक स्तर पर गर्भवती एवं धात्री महिलाओं किशोरियों तथा 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए जन आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। पोषण पखवाड़ा के तहत मोटे अनाजों का उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है साथ ही इस दौरान कुपोषण मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई इस मौके पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाये बच्चे महिलाएं मौजूद रहे।


