अड्डे पर जुटे जवां शायरों ने श्रोताओं का मन मोह लिया

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खान आशु
भोपाल। तरतीब साहित्यकारों की गठजोड़ से बनी संस्था पोयट्री अड्डा की थी… फिक्र परिदृश्य से गायब हो रहे अच्छे साहित्य को संवारने की थी… महफिल का आगाज वरिष्ठ शायरों की मौजूदगी से सजा और पहले प्रोग्राम में शामिल किए गए नौजवान किए गए शायरों की बेतकल्लुफ़ पेश कलामी को पसंद किए जाने के साथ समापन हुआ।
पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सीनियर शायर साजिद प्रेमी ने एक खाका तैयार किया। डॉ.  महताब आलम, विजय तिवारी और डॉ. नुसरत मेहदी को रूपरेखा बताई। फिक्र की गई कि उभरते हुए कलाकारों/शायरों को मंच दिया जाए। ताबड़तोड़ एक प्रोग्राम को आकार दिया गया। दुष्यंत संग्रहालय में सजी इस महफिल को खुशगवार बनाने के लिए नाम दिया गया सुखन कहकशां नाम दिया गया। मेहमानों में मप्र उर्दू अकादमी निदेशक डॉ . नुसरत मेहदी, अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ. अंजुम बाराबंकवी, विजय तिवारी, डॉ. महताब आलम और डॉ. अहसान आज़मी को शामिल किया गया। इन सभी उस्ताद शायरों के सामने कई पहली बार मंच से रूबरू हुए शायर तो कुछ मंच पर अपनी पहचान पुख्ता करने में जुटे शायरों ने कलम का मुजाहिरा किया। महफिल जमी तो एक के बाद एक फेंकू भोपाली, मनसवी अपर्णा, कमलेश नूर, इंसाफ सिरोंजी, उमेश मिश्रा ‘मुख्लिस’, अभिलाषा श्रीवास्तव, रूपाली सक्सेना ‘गजल’, समीना क़मर, प्रद्युम्न शर्मा, बीएन तिवारी, महावीर सिंह नारायण, अनवर मोहम्मद ‘शान’, एसएम मुबश्शिर और आदिल इमाद ने अपने कलाम पेश किए। श्रोता मुग्ध और बड़े शायर धन्य दिखाई दिए। समय सीमा में बंधा या मुशायरा और कवि सम्मेलन देर शाम तक चलता रहा। कार्यक्रम इस वायदे के साथ अपनी मंजिल पर पहुंचा कि ऐसा ही आयोजन हर माह आयोजित किया जाएगा। साथ ही कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर वायरल भी किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत में साजिद प्रेमी ने प्रोग्राम की रूपरेखा बताई। इस मौके पर अतिथियों को सम्मानित किया गया। साथ ही शायरों का सम्मान भी शॉल और गुलाब के फूल देकर डॉ. नुसरत मेहदी और डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने किया।

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