अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया ‘म्यूजियम मेला’ का शुभारंभ

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राज्य संग्रहालय, भोपाल में सप्ताहव्यापी आयोजन; वर्चुअल रियलिटी केंद्र, 11 पुस्तकों और विभागीय मैस्कॉट ‘वाकन दादा’ का लोकार्पण

भोपाल : अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (18 मई) के अवसर पर संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश द्वारा भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय परिसर, श्यामला हिल्स में सप्ताहव्यापी ‘संग्रहालय मेला’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने मेले का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि “भारतीय पुरातत्त्व ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। देश अपनी जड़ों को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है। एक सिक्के को देखकर इतिहास बताने की क्षमता रखने वाले पुरातत्वविदों का कार्य अद्भुत है।” उन्होंने डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर से अपनी भेंट का स्मरण करते हुए उनकी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया और संचालनालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने राज्य संग्रहालय परिसर में वर्चुअल रियलिटी अनुभव का अवलोकन किया और आमजन से आग्रह किया कि वे इस मेला अवश्य देखने आएं।

इस अवसर पर संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि UNESCO की एक चौथाई साईट मध्यप्रदेश में स्थित हैं और आने वाले समय में और भी कई स्थल विश्व धरोहर सूची में शामिल हो सकते हैं। मध्यप्रदेश की विरासत अत्यंत समृद्ध है — इसमें 3000 वर्ष पुराने गुफाये, दुर्लभ प्रतिमाएं, मंदिर, स्मारक आदि सम्मिलित हैं। संचालनालय द्वारा इनकी संरक्षण एवं जनसुलभता की दिशा में किए जा रहे प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय हैं। उन्होंने लालबाग, राजवाड़ा, उज्जैन सहित अनेक स्थलों पर चल रहे संरक्षण कार्यों की जानकारी भी दी।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश में प्रथम बार वर्चुअल रियलिटी केंद्र का शुभारंभ किया गया। यह केंद्र आगंतुकों को बिना किसी फिजिकल गाइड के संग्रहालय/स्मारक की गहन यात्रा का इमर्सिव अनुभव प्रदान करता है। वर्तमान में यह केंद्र ओरछा एवं राज्य संग्रहालय भोपाल में स्थापित किया गया है, जिसमें भविष्य में अन्य ऐतिहासिक स्थलों को भी जोड़ा जाएगा।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण ‘भारत की सौर परंपरा’ पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी रही, जिसमें देश के प्रमुख सूर्य मंदिरों एवं उनसे संबंधित कलात्मक मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक आमजन के लिए निःशुल्क खुली रहेगी।

मेले में विभाग की विभिन्न इकाइयों द्वारा कुल 9 स्टॉल लगाए गए, जिनमें जनसामान्य को संग्रहालय एवं पुरातत्त्व से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। डिजिटाइजेशन स्टॉल में 6.88 करोड़ अभिलेखीय दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया, जहाँ मशीनों के माध्यम से यह प्रक्रिया लाइव दिखाई गई। 3डी प्रिंटिंग स्टॉल में मूर्तियों की प्रतिकृतियाँ बनाने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया, जो संग्रहालयों में प्रदर्शित की जाती हैं। वीआर स्टॉल में इमर्सिव अनुभव प्रदान किया गया। पी.आर. स्टॉल में संचालनालय की वैश्विक स्तर पर हो रही प्रशंसा और पहलों को दर्शाया गया। मॉडलिंग के स्टॉल में प्रतिकृति निर्माण की प्रत्यक्ष निर्मित का जीवंत प्रदर्शन किया गया। संरक्षण स्टॉल में संरक्षण कार्यों में प्रयुक्त औजारों एवं तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त विभाग के प्रकाशन अनुभाग की जानकारी हेतु भी विशेष स्टॉल स्थापित किया गया।

इस अवसर पर विभाग द्वारा प्रकाशित पुरातात्त्विक 11 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, साथ ही विभाग के अधिकृत मैस्कॉट ‘वाकण दादा’ का लोकार्पण हुआ, जो विभागीय पहलों का चेहरा बनकर आमजन से संवाद करेगा।

प्रदेश के अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में भी अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस को विशेष रूप से मनाया गया। जिसमे ग्वालियर के मोती महल में ‘अतीत से भविष्य के सेतु: हमारे संग्रहालय’ विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित की गई, जिसमें ख्यात विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इंदौर में ‘विंटेज इंदौर’ विषय पर प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी आयोजित की गई। जबलपुर में ‘कृषि संस्कृति में बलराम’ विषय पर आधारित प्रदर्शनी एवं व्याख्यानमाला आयोजित की गई।

यह आयोजन संचालनालय पुरातत्त्व द्वारा इतिहास, कला एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संग्रहालयों की ओर जनसामान्य को आकर्षित करने के उद्देश्य से यह मेला सभी आयु एवं वर्ग के लोगों के लिए एक अनूठा और अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध हो रहा है।

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