आज होगा हज ख्वाहिशमंदो की किस्मत का फैसला, ऑनलाइन तय होंगे नाम

आज ही आ सकती है पहली किस्त जमा करने की मांग

सेंट्रल हज कमेटी को 8 महीने पहले अरबों रुपए जमा करने की जल्दी

खान आशु
भोपाल। सेंट्रल हज कमेटी अपने मुंबई दफ्तर में बैठे हुए कम्प्यूटर पर एक क्लिक करेगी। यहां देशभर के हाजियों की किस्मत का फैसला हो जाएगा। इस ऑनलाइन कुर्रा को देशभर में कहीं से भी देखा जा सकेगा। मप्र हज कमेटी ने भी यह प्रक्रिया देखने की व्यवस्था की है। ऑनलाइन कुर्रा सुबह 11.30 शुरू होगा।
प्रदेश से करीब 11 हजार पार आवेदकों ने हज फॉर्म जमा कराए हैं। इनमें से हज पर जाने वाले लोगों का नाम ऑनलाइन प्रक्रिया से बुधवार को होगा। सेंट्रल हज कमेटी से जारी किए गए सर्कुलर में बताया गया है कि यह प्रक्रिया कमेटी कार्यालय मुंबई से पूरी की जाएगी। पूरे देश के अलग अलग प्रदेशों का बारी बारी से कुर्रा होगा। जिसके अनुसार हज पर जाने वाले लोगों के नाम तय होंगे।

अभी तय नहीं कोटा
प्रदेश से कितने हाजियों को हज पर जाने का मौका मिलेगा, यह सेंट्रल हज कमेटी से कोटा जारी होने के बाद तय होगा। उम्मीद की जा रही है कि ऑनलाइन कुर्रा से पहले इसका ऐलान कर दिया जाएगा। इसी के आधार पर प्रदेश के हाजियों की तादाद तय होगी।

आ सकती है पहली किस्त की मांग
हज कुर्रा होने के बाद चयनित हाजियों से पहली किस्त की मांग की जा सकती है। संभवतः हज कमेटी यह बुधवार शाम को ही कर देगी। इसके मुताबिक प्रत्येक हाजी को करीब एक लाख रुपए से अधिक राशि हज कमेटी को जमा करना होगी।

जल्दी क्यों
हज सफर 2026 संभवतः मई में होगा। आवेदन प्रक्रिया अगस्त माह में पूरी कर ली गई है। इसके मुताबिक करीब आठ तक हज कमेटी के पास हज आवेदकों का अरबों रुपए जमा रहेगा। देशभर से करीब दो लाख से अधिक हज पर जाएंगे, जिन्हें यह राशि जमा करना है। इस राशि से मिलने वाले किसी लाभ पर हाजियों को कोई फायदा नहीं मिलना है, न ही शरई तौर पर वे इसको ले सकते हैं। हज कमेटी इससे होने वाली आमदनी को कहां खर्च करती है, इसका भी कोई ब्यौरा नहीं दिया जाता है।

इनका कहना
प्रदेश हज कमेटी सिर्फ सेंट्रल हज कमेटी के आदेशों का पालन करती है। हज आवेदन या राशि जमा करने में उसका कोई दखल नहीं है।
रफत वारसी
अध्यक्ष, प्रदेश हज कमेटी

राहत इंदौरी की बरसी पर खास : राहत जहां की…!

खान आशु
भोपाल। एक आर्टिस्ट, एक शिक्षक, एक शायर… जिस किरदार को उन्होंने छुआ, अमर कर दिया। डॉ राहत इंदौरी ने जब कैनवास पर अपना फन उकेरा तो उस ऊंचाई तक पहुंचे, जहां दुनिया के मारूफ चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने भी उनकी कूंची की तारीफ में कोताही नहीं बरती। हुसैन जब भी इंदौर में होते, या जब राहत मुंबई में होते तो दोनों के बीच मुलाकात जरूर होती। फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की दीवानगी में जब हुसैन ने फिल्मी पर्दे पर अपने रंग बिखेरे तो इन्हें गजलों के रूप में गीतों को आकार डॉ राहत इंदौरी ने ही दिया।
उर्दू साहित्य की तालीम देने के लिए जब वे इंदौर की नामवर शिक्षा संस्था इस्लामिया करीमिया सोसाइटी से जुड़े तो स्टूडेंट्स कोई सबक पढ़ने से ज्यादा राहत की राहत बटोरने में तलबगार दिखाई दिए। उनके स्टूडेंट्स आज भी अपने इस उस्ताद को अच्छी और बेहतर यादों में सजाए रखते हैं। उनके साथ काम करने वाले टीचर भी इस बात का फख्र महसूस करते हैं कि उन्होंने कभी राहत के भी काम किया था।
मंच का सिलसिला छोटे से शहर देवास से शुरू हुआ… प्रदेश की राजधानी भोपाल से होते हुए देश की धड़कन दिल्ली तक और फिर दुनिया के हर देश और उसके शहर तक उन्होंने साबित कर दिया कि अगर कहीं राहत है तो यहीं है और सिर्फ यहीं है। मंचों पर उनकी मौजूदगी ही किसी महफिल की कामयाबी की गारंटी हुआ करती थी। यही वजह है कि उनके दुनिया से विदा होने के बाद मंच वीरान और सूने दिखाई देने लगे हैं। डॉ राहत इंदौरी के साथ यह भी जोड़ा जाता है कि वे जब तक दुनिया में रहे मंचों के शिखर पर रहे, और जब इस दुनिया से विदा हुए तो शिखर पर बरकरारी के साथ के साथ ही रुखसत हुए।
राहत ने फिल्मों की दुनिया में जब कदम रखा तो उस दौर के महा निर्देशक महेश भट्ट और प्रचलित संगीतकार अन्नू मलिक को अपनी कला का मुरीद बना दिया। सफर आगे बढ़ा तो करीब, मिशन कश्मीर, मुन्ना भाई एमबीबीएस जैसे दर्जनों फिल्मों के गीतों में अपनी पहचान छोड़ गए। सिलसिला लंबा और कामयाब चलता, लेकिन मंच के एक शायर को बंद कमरों का गीतकार पसंद नहीं आया। राहत इंदौरी फिर मंचों के और तत्काल दाद देने वाले रसिक श्रोताओं के हो गए।
जब छोटे पर्दे की तरफ उनका रुख हुआ तो द कपिल शर्मा शो… की हास्य भरी टीवी मौजूदगी में राहत इंदौरी इकलौते शायर बने, जो एक नहीं दो बार इस मंच पर अवतरित हुए। पहली बार कुमार विश्वास और शबीना अदीब के साथ जुगलबंदी करते नजर आए और दूसरी मर्तबा उन्होंने अशोक चक्रधर जैसे प्रख्यात कवि के साथ मौजूदगी दिखाई।
युवा पीढ़ी की अगंभीरता के बीच उनकी मनचाही बात करने के लिए अब राहत इंदौरी सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर मौजूद हैं। उनके रहने के दौर से ज्यादा उनके दुनिया से रुखसत होने के बाद भी वे लोगों के दिलों में हैं, यादों में हैं, बातों में हैं।

सजते हैं राहत के नाम के मेले
डॉ. राहत इंदौरी के दुनिया से रुखसत होने के बाद उनको लोगों के दिलों में जिंदा रखने का अलम उनके बेटों फैसल और सतलज राहत ने उठा रखा है। बेटी शिबली राहत भी उनकी हमकदम हैं। राहत इंदौरी फाउंडेशन नामक संस्था से हर साल पहली जनवरी को बड़ी महफिल सजाई जा रही है। जिसमें दुनिया के नामवर शायर और अदीब जुटकर अपनी खिराज पेश कर रहे हैं। 11 अगस्त वह दिन है, जब दुनिया से राहत रुखसत हो गई। इसी दिन को जहन और लोगों के दिलों में रखने के लिए इंदौर ने एक बड़ी महफिल सजाई है। जिसमें राहत की बात होगी, राहत का अंदाज होगा और वह होगा जो राहत के बहुत करीब हुआ करता था। हमारी तरफ से भी दुनिया के इस महबूब शायर को खिराज ए अकीदत।

ड्रग्स मामले में संरक्षण : बचाव करने वालों पर कार्यवाही कब, सीएम और संगठन की चिट्ठी

भोपाल। शहर को कलंकित करने वाले मामले में अब तक बड़ी कार्यवाहियां हो चुकी हैं। लेकिन पर्दे के पीछे इस कांड के जनक को संरक्षण देने वाले अब भी पकड़ से दूर हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए अखिल भारतीय मुजाविर सेना ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और संगठन मंत्री को भी भेजा गया है।
अखिल भारतीय मुजाविर सेना के संस्थापक शेर मोहम्मद खान ने यह पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि इस ड्रग्स नेटवर्क, इम्स जेहाद, लैण्ड जेहाद में संलिप्त यासीन एहमद, शाहवार एहमद के भाई शहरवार एहमद उर्फ शेरू को पूरा वृहदहस्त वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल का है। उन्होंने लिखा है कि वक्फ बोर्ड ऑफिस से ही शहरयार शेरू का कार्यालय चलता था। शहरयार शेरू वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के साथ उनके चैम्बर में ही पूरा समय गुजारता था। 

पोस्टर जिहाद
शेर मोहम्मद ने अपनी शिकायत में लिखा है कि शहरयार एहमद उर्फ शेरू मछली और डॉ पटेल की जुगलबंदी का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि कि मप्र वक्फ बोर्ड ऑफिस परिसर में शहरयार एहमद उर्फ शेरू मछली ने पटेल के लिये बड़े-बड़े फ्लेक्स होर्डिंग्स लगाये हैं, जो आज दिनांक तक मौजूद हैं।

बचाना चाहते थे संपत्ति
मुजाविर सेना ने लिखा है कि ड्रग्स काण्ड में संलिप्त मछली परिवार की अवैध संपत्तियों, वेयरहाउस, फार्म हाउस पर जब बुल्डोजर से ढहाने की खबर शेरू मछली को लगी तो दिनांक 30 जुलाई को दोपहर 01:00 बजे शेरू मछली वक्फ बोर्ड ऑफिस जाकर डॉ सनव्वर पटेल से मुलाकात करते बुल्डोजर की कार्यवाही रूकवाने के लिये उनसे मदद करने को कहा। इस बात की तस्दीक बोर्ड कार्यालय भोपाल में लगे CCTV कैमरों से की जा सकती है। साथ ही पटेल के मोबाईल की कॉल डिटेल्स से भी पटेल के ड्रग्स रैकिट चलाने वाले ड्रग्स जिहादियों से संबंध से संबंध साफ नजर आयेंगे।

अखिल भारतीय मुजावर सेना ने सीएम डॉ मोहन यादव और संगठन से मांग की है कि हाई प्रोफाईल ड्रग्स माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्रदान करने वाले मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल पर तत्काल भाजपा अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए पद से मुक्त करे।

वैज्ञानिक तरीकों से पत्थरों की सफाई के तरीके जाने आर्किटेक्ट्स ने

संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय और इंटेक ने आयोजित किया विरासत पत्थर सतह सफाई प्रशिक्षण

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश, भोपाल विरासत संरक्षण से जुड़ी ज्ञान-वर्धक पहल में लगातार सराहनीय कदम उठा रहा है। इसी क्रम में, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) भोपाल चैप्टर के सहयोग से भोपाल में “विरासत पत्थर सतह सफाई” विषय पर तीन दिवसीय व्यवहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को पत्थर सतह सफाई की वैज्ञानिक विधियों की विस्तृत समझ प्रदान करना था, जो विरासत संरक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सैद्धांतिक सत्रों और व्यवहारिक प्रदर्शन को मिलाकर, प्रशिक्षण का लक्ष्य जागरूकता और तकनीकी कौशल – दोनों में वृद्धि करना था। यह पहली बार था जब मध्यप्रदेश में केवल विरासत पत्थरों की वैज्ञानिक मैनुअल और मैकेनिकल सफाई पर केंद्रित ऐसी कार्यशाला आयोजित हुई।
उद्घाटन सत्र में उर्मिला शुक्ला, आयुक्त, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय  मध्यप्रदेश; मदन मोहन उपाध्याय, संयोजक, INTACH भोपाल चैप्टर; डॉ. मनीषा शर्मा, संयुक्त निदेशक, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय  मध्यप्रदेश;
डॉ. मनोज कुमार कुर्मी, अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल सर्किल और मनोज शर्मा, सह-संयोजक, इंटेक (INTACH) भोपाल चैप्टर उपस्थित रहे।
मौके पर बोलते हुए उर्मिला शुक्ला ने संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह समझना जरूरी है कि पत्थरों की सफाई वैज्ञानिक तरीकों से कैसे की जा सकती है।  यह कार्यशाला हमारे दृष्टिकोण को और सुदृढ़ बनाएगी तथा कार्य की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
हम इंटैक (INTACH) के साथ अपने सार्थक सहयोग को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। श्री मदन मोहन उपाध्याय ने कहा, “इस कार्यशाला के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हितधारकों को पत्थर सतह सफाई की नई तकनीकों से अवगत कराया जाए और देश की विरासत संरक्षण में योगदान दिया जाए।
इसी क्रम में मनीषा शर्मा ने कहा, “मध्यप्रदेश अनंतकालीन विरासत का धनी है। इसके संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना जरूरी है और इसमें इंटैक
(INTACH) अहम भूमिका निभा रहा है। यह एक बहुत ही मूल्यवान अवसर है।
कार्यशाला में संरक्षण ठेकेदारों, पुरातत्व और विरासत अध्ययन के छात्रों, DAAM और एमपी टूरिज्म के अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। तीन दिनों के दौरान, कार्यक्रम ने अकादमिक ज्ञान और फील्ड तकनीकों का संगम प्रस्तुत करते हुए एक केंद्रित शिक्षण वातावरण बनाया।

ऐसी थी कार्यशाला

पहला दिन (5 अगस्त): INTACH नई दिल्ली के आर्ट एंड मटेरियल हेरिटेज डिवीजन के विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक सत्र।

सुभ्रत सेन, वरिष्ठ समन्वयक ने पत्थरों के प्रकार, संरक्षण एवं पुनर्स्थापन पर चर्चा की।

मोहम्मद ग़ालिब, वरिष्ठ संरक्षक ने पत्थर विरासत (संग्रहालय की वस्तुएं एवं ऐतिहासिक इमारतें) के क्षरण व नष्ट होने के कारणों पर प्रकाश डाला।

भारती गोस्वामी, संरक्षक ने पत्थर विरासत की सफाई के लिए सामग्री और तरीकों पर सत्र लिया।

दूसरा दिन (6 अगस्त): व्यवहारिक प्रदर्शन।
प्रतिभागियों ने रासायनिक प्रक्रियाओं सहित विभिन्न सफाई तकनीकों और चरणबद्ध प्रक्रियाओं का अवलोकन व अभ्यास किया।

कार्यशाला के अंतिम दिन (7 अगस्त) का मुख्य आकर्षण जर्मन कंपनी Kärcher द्वारा पत्थर सफाई तकनीकों और मशीनरी की प्रस्तुति एवं प्रदर्शन रहा। यह कंपनी 90 वर्षों की विरासत और अत्याधुनिक सफाई तकनीक की अग्रणी प्रदाता के रूप में जानी जाती है।

वरुण हांडा, महाप्रबंधक, Kärcher ने मशीनों के उपयोग की जानकारी दी।
लाइव डेमो में प्रेशर क्लीनिंग, सैंड ब्लास्टिंग, ड्राई-आइस ब्लास्टिंग और स्टीम क्लीनिंग जैसी तकनीकों का प्रदर्शन हुआ।

कार्यशाला का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि पत्थर विरासत के संरक्षण में व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सुदृढ़ तरीकों को अपनाया जाएगा। इस पहल ने सरकारी संस्थाओं और INTACH जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच सहयोग के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया।
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मुंगावली गांव में स्कूल वाहन पलटा, 3 स्टूडेंट घायल, स्कूल प्रबंधन का दिखा लापरवाहीपूर्ण रवैया।

सीहोर। शुक्रवार सुबह जिले के जमुनिया में स्थित ब्राइट पब्लिक स्कूल का एक स्कूल वाहन के पलट जाने से बड़ा हादसा होते-होते बच गया। स्कूल वाहन में सवार बच्चों को मामूली चोटें आई हैं। यह घटना मुंगावली के पास हुई, जिसने स्कूल प्रशासन की लापरवाही और खटारा वाहनों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार हादसा एक बार नहीं, बल्कि दो बार हुआ। पहले खराब सडक़ के कारण बस रास्ते से उतर गई थी। इसके बाद बच्चों को दूसरी बस में बैठाया गया, लेकिन वह दूसरी बस भी कुछ दूर जाकर पलट गई। इस लापरवाही से बच्चों की जान खतरे में पड़ गई थी। घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। कि ऐसे खस्ताहाल वाहन सडक़ों पर कैसे चल रहे हैं। क्यों नहीं इन निजी स्कूलों और उनके वाहनों की नियमित जांच की जाती है। हैरानी की बात तो यह है कि हादसे के बाद भी स्कूल का कोई स्टाफ  मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे उनके गैर जिम्मेदार रवैये का पता चलता है।

कानून के दायरे में रहो…’ ईडी को ‘सुप्रीम फटकार

5 साल में 5 हजार प्रकरण दर्ज कर लिए… 10 फीसदी से भी कम निकले दोषी

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी को आज सुप्रीम कोर्ट ने जबरदस्त फटकार लगाई… खबरों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ”केन्द्रीय एजेंसी को कानून के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए… आप धूर्त की तरह काम नहीं कर सकते…” जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शीर्ष अदालत के जुलाई-2022 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की… जस्टिस भुइयां ने इस दौरान कहा कि ”मैंने अपने एक फैसले में देखा कि ईडी ने पिछले पांच सालों में लगभग 5 हजार ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज की हैं, लेकिन दोषसिद्धि की दर 10 फीसदी से भी कम निकली… हम ईडी की छवि को लेकर चिंतित हैं… 5-6 साल की हिरासत के बाद अगर लोग बरी हो जाते हैं तो जिम्मेदारी कौन लेगा..?” इस दौरान केन्द्र और ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू पेश हुए थे और उन्होंने भी अपने तर्क रखे, जिस पर एजेंसी की कम दोषसिद्धि पर जस्टिस ने चिंता व्यक्त करते हुए विरोध किया… फिलहाल समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई अगले सप्ताह जारी रहेगी..!

न्यायिक-गैर न्यायिक विभाजन से नाराज राजस्व अधिकारी,जमा कराई गाड़ियां

भोपाल में व्यवस्था से दूसरे दिन भी नाराज राजस्व अधिकारी काम से बनाई दूरी


जीतेन्द्र सेन
भोपाल।।राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर न्यायिक विभाजन को लेकर गुरुवार को भी विरोध हुआ है। भोपाल के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार कलेक्टोरेट पहुंचे और अपनी गाड़ियां जमा करा दी। भोपाल में बैरागढ़, कोलार, एमपी नगर, शहर वृत्त, बैरसिया और टीटी नगर तहसीलें हैं। इनके तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को न्यायिक और गैर न्यायिक कार्य में विभाजित किया गया है। यानी,जो अधिकारी न्यायिक कार्य कर रहे हैं, वे फिल्ड में नहीं है।
वहीं, फिल्ड वाले अधिकारी न्यायिक कार्य नहीं कर रहे। इस व्यवस्था का वे भी विरोध कर रहे हैं। बुधवार को कोर्ट समेत अन्य काम उन्होंने नहीं किए थे। गुरुवार को भी ऐसी ही स्थिति रही। इस वजह से आमजनों के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। कोर्ट में प्रकरणों की सुनवाई नहीं हो रही तो जनता से जुड़े काम भी अटक रहे हैं।
कलेक्टोरेट में एकसाथ दी चाबियां गुरुवार सुबह सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार एकसाथ कलेक्टोरेट पहुंचे। इसके बाद उन्होंने गाड़ियाें की चाबियां सौंप दी।

मंत्री-अफसरों को सुना चुके बात
इस संबंध में मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ राजस्व मंत्री वर्मा और सीनियर अधिकारियों के सामने अपनी बात रख चुका है। इस दौरान बताया गया था कि अगले 3 महीने के लिए 12 जिलों में ही पायलेट प्रोजेक्ट के तहत यह व्यवस्था लागू की जाएगी, लेकिन बाद में 9 और जिलों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई।
इसके चलते संघ के सभी जिला अध्यक्ष, प्रभारी और प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें 6 अगस्त से विरोध करने का फिर से निर्णय लिया गया। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीनचंद कुंभकार ने बताया कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत प्रदेश के कई जिलों में राजस्व अधिकारी विरोध कर रहे हैं। भोपाल में भी असर देखने को मिल रहा है।

अभी हड़ताल पर नहीं जाएंगे
विभाजन को लेकर संघ की बैठक हो चुकी है। इसमें संवर्ग में विभाजन की इस योजना के पूर्ण रूप से वापस नहीं होने तक सभी राजस्व अधिकारी आपदा प्रबंधन कार्यों को छोड़कर समस्त कार्यों से विरत रहते हुए जिला मुख्यालयों पर उपस्थित रहने का निर्णय लिया गया। हालांकि, कोई भी सामूहिक अवकाश या हड़ताल पर नहीं है। सभी राजस्व अधिकारी जिला मुख्यालय पर ही उपस्थित हैं।

एक दिन पहले बोले थे मंत्री-दिक्कतें आ रही थीं
विरोध के चलते बुधवार को ही राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा था कि यह कैबिनेट का निर्णय है। प्रोटोकॉल और न्यायालयीन प्रक्रिया में पहले बड़ी दिक्कतें आ रही थीं। सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के लिए व्यवस्था नहीं की है। कुछ के लिए ही है।

पटवारी संघ का समर्थन

म.प्र.कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ शैलेन्द्र शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि म.प्र. पटवारी संघ ने हमारे संघ के विरोध प्रदर्शन(न्यायालयीन और गैर न्यायालयीन विभाजन का मुद्दा) को नैतिक समर्थन दिया है। इसके लिए हमारा संघ म.प्र. पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष का आभार व्यक्त करता है।

2022-23 का विमोचन एवं प्रचार प्रसार हेतु जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन संपन्न हुआ

पंचायत उन्नति सूचकांक पी.ए.आई.1.0 का हुआ विमोचन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतें हुई सम्मानित


जीतेन्द्र सेन
भोपाल। 07 अगस्त 2025 को ईटीसी भोपाल में पंचायत उन्नति सूचकांक (पी.ए.आई.1.0) वर्ष 2022-23 का विमोचन एवं प्रचार-प्रसार हेतु जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रामकुंवर नवरंग सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। तत्पश्चात उपस्थित सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पंचायत एवं जिला विकास सूचकांक के 9 विषयों पर जिले की अलग-अलग ग्राम पंचायतों का चयन किया गया। जिसमें सशक्त पंचायत सतत् विकास की अवधारणा के साथ पंचायतों को सशक्त बनाने, उनके कामकाज को पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए किए गए कार्य के आधार पर जिले की ग्राम पंचायत को पंचायत विकास सूचकांक (पी.ए.आई 1.0) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली भोपाल जिले की ग्राम पंचायत बिशनखेड़ी प्रथम पुरस्कार राशि रुपए 11000,ग्राम पंचायत बंगरसिया द्वितीय पुरस्कार राशि  7100,रुपए  ग्राम पंचायत नांदनी तृतीय पुरस्कार राशि रुपए 5100 एवं बाकी ग्राम पंचायतों जैसे बरखेड़ा सालम बरखेड़ी अब्दुल्ला झिरनिया डोब कुठार बरखेड़ा बरामद एवं धूतखेड़ी को राशि रुपए 2100 एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए साथ ही अन्य 10 चयनित ग्राम पंचायत कोड़िया बकानिया बरखेड़ा नाथू समसगढ़ छापरी मेंड़ोरी जगदीशपुर बरखेड़ा बोंदर मुगलिया हाट एवं बर्री छींरखेड़ा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए एवं सभी का टीएमपी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया। वही
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य यही है कि आप लोग अपने-अपने क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का उपयोग करके पंचायतों के विकास कार्य करें ताकि अन्य पंचायतें आपसे प्रेरणा लेकर अपनी पंचायतों को बेहतर बना सकें। उन्होंने कहा कि यह महज सम्मान नहीं बल्कि एक उदाहरण और चुनौती भी है जिससे बाकी पंचायतों को अपनी कमियों को पहचानकर सुधार की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

इस दौरान भोपाल जिला पंचायत अध्यक्षा रामकुवर नवरंग सिंह गुर्जर जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट जिला सदस्य विनय मेहर विनोद राजोरिया अनिल हाडा मिश्री लाल मालवीय भोपाल जिला पंचायत  सीईओ इला तिवारी जनपद पंचायत फंदा सीईओ एवं भोपाल जिले के सरपंच सचिव सहायक सचिव सम्मिलित हुए।

हेल्प नहीं कर पा रही सीएम हेल्प लाइन… हफ्तों में तय होता है कार्य क्षेत्र और अधिकारी

भोपाल। सरकारी अधिकारियों का, सरकारी अधिकारियों के लिए और सरकारी अधिकारियों  द्वारा…! जनता गई भाड़ में और उसकी शिकायतें गईं कबाड़ में…! जैसे हालात से दो चार वह व्यवस्था भी हो गई है, जिससे समाधान के तत्काल आने की उम्मीद लगाई गई थी। सीएम हेल्पलाइन अधिकारियों की उसी सरकारी रवैए की भेंट चढ़ गया है, जिस लचर कार्यशैली से त्रस्त होकर इसकी शरण में जा रहे हैं।
आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान की कल्पना के साथ सीएम हेल्पलाइन 181 को आकार दिया गया था। लेकिन सरकारी रवैए में रंगे इस पोर्टल से भी कुछ राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।

तय नहीं होती जिम्मेदारी
किसी शिकायत के संबंध में पहली टीप “शिकायत निर्धारित किए गए अधिकारी के कार्य क्षेत्र से संबंधित नहीं है” अंकित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया पोर्टल पर बैठने वाले चयनकर्ता अधिकारी और कर्मचारी की कार्यशैली को परिभाषित करती है। इस प्रक्रिया से शिकायत को विलंब से करने का पहला फार्मूला कहा जा सकता है।

हफ्तों नहीं होती सुनवाई
भोपाल की एक सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे को लेकर जुलाई माह में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। पहले इस शिकायत पर संबंधित विभाग तलाशने में ही लंबा समय लगा दिया गया। जब संशोधित शिकायत के साथ इसमें नजूल विभाग और नगर निगम के अनुज्ञा शाखा का जिक्र किया गया तो हफ्तों गुजरने के बाद भी इस निर्माण के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

सीएम ने दिखाई गम्भीरता
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही के आदेश मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा में कार्यवाही करने के लिए कहा है। लेकिन किसी कार्यवाही से बचने के लिए अधिकारियों द्वारा शिकायत को जबरिया बंद किया जा रहा है।

इनका कहना है
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार से सरकार की छवि खराब हो रही है।
मोहम्मद तारिक
प्रदेश अध्यक्ष
संस्था पीस इंडिया
(संयुक्त राष्ट्र संघ से मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्था)

फिर विवाद, फिर बदले गए वक्फ सीईओ, अब कमान इकबाल के हाथ…

भोपाल। कहने को चाबी की गुड़िया, जितना कहा जाएगा उतना ही करेंगी… शिक्षा विभाग से जुड़ीं एक छुईमुई सी महिला,  जिन्हें किसी से मिलने, बात करने और अपनी मर्जी से काम करने की भी इजाजत नहीं थी…! मप्र वक्फ बोर्ड की सीईओ फरजाना गजाल शासन के एकतरफा आदेश से बोर्ड से रुखसत कर दी गईं। उनके स्थान पर संयुक्त कलेक्टर इकबाल मोहम्मद की दस्तक हो गई है। जाने से पहले फरजाना के हिस्से कई नियम विरुद्ध कारगुजारियां आईं हैं। वित्तीय अनियमितताएं, आर्थिक घोटाले, बिना पुलिस वर्फिकेशन  कमेटियों का गठन, अदालत के आदेश के इतर हुई किरायदारियां और भी बहुत कुछ जुड़ गया है।
शासन के एक आदेश से मप्र वक्फ बोर्ड में संयुक्त कलेक्टर इकबाल मोहम्मद को सीईओ बनाया गया है। इस आदेश में फरजाना गजाल के लिए कोई नई पदस्थापना का उल्लेख भी नहीं किया गया है। इसके चलते उन्हें अपने मूल विभाग उच्च शिक्षा में वापस जाने की बाध्यता बनी रहेगी।

लगाए जा रहे कयास
अचानक हुए इस सरकारी फरमान को फरजाना गजाल के खिलाफ हुई अनेक शिकायतों का असर माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से उनके खिलाफ शिकायतों का जखीरा सरकारी दफ्तरों में दौड़ लगा रहा था। लेकिन अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के सियासी रसूख के चलते बार बार उन्हें शिकायतों से राहत मिल रही थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बदले परिदृश्य ने अध्यक्ष को कुछ कमजोर किया है। जिसके असर के रूप में यह स्थानांतरण माना जा रहा है।

दाऊद की दूरी
मप्र वक्फ बोर्ड के गठन से ही इस बात को रेखांकित किया जा रहा है कि यहां मौजूद सीईओ फरजाना गजाल महज चाबी की गुड़िया हैं। असल में पर्दे के पीछे से सभी कामों को अंजाम वक्फ बोर्ड से रिटायर दाऊद अहमद ही निपटा रहे हैं। सीईओ सिर्फ हस्ताक्षर कर कागजों का पेट भर रही थीं बाकी वास्तविक ड्राफ्टिंग दाऊद के कहने पर होती थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि दाऊद अहमद वक्फ बोर्ड कार्यालय में पूरे समय मौजूद रहा करते थे और किसी स्थाई कर्मचारी की तरह काम करते थे। जबकि उनकी बोर्ड में किसी तरह की नियुक्ति नहीं हुई है। कहा यह भी जा रहा है कि फरजाना गजाल की नियुक्ति के लिए भी पूरी भूमिका दाऊद ने ही निभाई थी।

पहला बोर्ड जिसमें कई सीईओ
अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के कार्यकाल वाले मप्र वक्फ बोर्ड को अभी तक के इतिहास का सर्वाधिक सीईओ सहयोग वाला बोर्ड कहा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस समय बोर्ड में कहने को फरजाना गजाल सीईओ की भूमिका में थीं, लेकिन पर्दे के पीछे से कई रिटायर सीईओ अपने ज्ञान से लाभान्वित कर रहे थे। इनमें कांग्रेस के एक बोर्ड के प्रशासक भी शामिल थे। इनके अलावा बोर्ड में पदस्थ रहे दाऊद अहमद, डॉ एसएमएच जैदी आदि भी प्रमुख हैं।

जो आया, इल्जाम लेकर गया
बोर्ड इतिहास में यह रोचक तथ्य है कि यहां जो भी अधिकारी सीईओ बनकर आया, कोई इल्जाम लेकर गया है। राजनीतिक अध्यक्ष की मनोकामना पूरी करते यह अधिकारी लोकायुक्त, विभागीय और अदालती कार्यवाही से दो चार हो रहे हैं। इनमें कई अधिकारी ऐसे भी हैं जो रिटायर होने के बाद भी वक्फ बोर्ड से लगे दाग छुड़ाने में लगे हुए हैं।

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