हेल्प नहीं कर पा रही सीएम हेल्प लाइन… हफ्तों में तय होता है कार्य क्षेत्र और अधिकारी

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भोपाल। सरकारी अधिकारियों का, सरकारी अधिकारियों के लिए और सरकारी अधिकारियों  द्वारा…! जनता गई भाड़ में और उसकी शिकायतें गईं कबाड़ में…! जैसे हालात से दो चार वह व्यवस्था भी हो गई है, जिससे समाधान के तत्काल आने की उम्मीद लगाई गई थी। सीएम हेल्पलाइन अधिकारियों की उसी सरकारी रवैए की भेंट चढ़ गया है, जिस लचर कार्यशैली से त्रस्त होकर इसकी शरण में जा रहे हैं।
आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान की कल्पना के साथ सीएम हेल्पलाइन 181 को आकार दिया गया था। लेकिन सरकारी रवैए में रंगे इस पोर्टल से भी कुछ राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।

तय नहीं होती जिम्मेदारी
किसी शिकायत के संबंध में पहली टीप “शिकायत निर्धारित किए गए अधिकारी के कार्य क्षेत्र से संबंधित नहीं है” अंकित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया पोर्टल पर बैठने वाले चयनकर्ता अधिकारी और कर्मचारी की कार्यशैली को परिभाषित करती है। इस प्रक्रिया से शिकायत को विलंब से करने का पहला फार्मूला कहा जा सकता है।

हफ्तों नहीं होती सुनवाई
भोपाल की एक सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे को लेकर जुलाई माह में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। पहले इस शिकायत पर संबंधित विभाग तलाशने में ही लंबा समय लगा दिया गया। जब संशोधित शिकायत के साथ इसमें नजूल विभाग और नगर निगम के अनुज्ञा शाखा का जिक्र किया गया तो हफ्तों गुजरने के बाद भी इस निर्माण के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

सीएम ने दिखाई गम्भीरता
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही के आदेश मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा में कार्यवाही करने के लिए कहा है। लेकिन किसी कार्यवाही से बचने के लिए अधिकारियों द्वारा शिकायत को जबरिया बंद किया जा रहा है।

इनका कहना है
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार से सरकार की छवि खराब हो रही है।
मोहम्मद तारिक
प्रदेश अध्यक्ष
संस्था पीस इंडिया
(संयुक्त राष्ट्र संघ से मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्था)

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