भोपाल। कहने को चाबी की गुड़िया, जितना कहा जाएगा उतना ही करेंगी… शिक्षा विभाग से जुड़ीं एक छुईमुई सी महिला, जिन्हें किसी से मिलने, बात करने और अपनी मर्जी से काम करने की भी इजाजत नहीं थी…! मप्र वक्फ बोर्ड की सीईओ फरजाना गजाल शासन के एकतरफा आदेश से बोर्ड से रुखसत कर दी गईं। उनके स्थान पर संयुक्त कलेक्टर इकबाल मोहम्मद की दस्तक हो गई है। जाने से पहले फरजाना के हिस्से कई नियम विरुद्ध कारगुजारियां आईं हैं। वित्तीय अनियमितताएं, आर्थिक घोटाले, बिना पुलिस वर्फिकेशन कमेटियों का गठन, अदालत के आदेश के इतर हुई किरायदारियां और भी बहुत कुछ जुड़ गया है।
शासन के एक आदेश से मप्र वक्फ बोर्ड में संयुक्त कलेक्टर इकबाल मोहम्मद को सीईओ बनाया गया है। इस आदेश में फरजाना गजाल के लिए कोई नई पदस्थापना का उल्लेख भी नहीं किया गया है। इसके चलते उन्हें अपने मूल विभाग उच्च शिक्षा में वापस जाने की बाध्यता बनी रहेगी।
लगाए जा रहे कयास
अचानक हुए इस सरकारी फरमान को फरजाना गजाल के खिलाफ हुई अनेक शिकायतों का असर माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से उनके खिलाफ शिकायतों का जखीरा सरकारी दफ्तरों में दौड़ लगा रहा था। लेकिन अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के सियासी रसूख के चलते बार बार उन्हें शिकायतों से राहत मिल रही थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बदले परिदृश्य ने अध्यक्ष को कुछ कमजोर किया है। जिसके असर के रूप में यह स्थानांतरण माना जा रहा है।
दाऊद की दूरी
मप्र वक्फ बोर्ड के गठन से ही इस बात को रेखांकित किया जा रहा है कि यहां मौजूद सीईओ फरजाना गजाल महज चाबी की गुड़िया हैं। असल में पर्दे के पीछे से सभी कामों को अंजाम वक्फ बोर्ड से रिटायर दाऊद अहमद ही निपटा रहे हैं। सीईओ सिर्फ हस्ताक्षर कर कागजों का पेट भर रही थीं बाकी वास्तविक ड्राफ्टिंग दाऊद के कहने पर होती थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि दाऊद अहमद वक्फ बोर्ड कार्यालय में पूरे समय मौजूद रहा करते थे और किसी स्थाई कर्मचारी की तरह काम करते थे। जबकि उनकी बोर्ड में किसी तरह की नियुक्ति नहीं हुई है। कहा यह भी जा रहा है कि फरजाना गजाल की नियुक्ति के लिए भी पूरी भूमिका दाऊद ने ही निभाई थी।
पहला बोर्ड जिसमें कई सीईओ
अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के कार्यकाल वाले मप्र वक्फ बोर्ड को अभी तक के इतिहास का सर्वाधिक सीईओ सहयोग वाला बोर्ड कहा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस समय बोर्ड में कहने को फरजाना गजाल सीईओ की भूमिका में थीं, लेकिन पर्दे के पीछे से कई रिटायर सीईओ अपने ज्ञान से लाभान्वित कर रहे थे। इनमें कांग्रेस के एक बोर्ड के प्रशासक भी शामिल थे। इनके अलावा बोर्ड में पदस्थ रहे दाऊद अहमद, डॉ एसएमएच जैदी आदि भी प्रमुख हैं।
जो आया, इल्जाम लेकर गया
बोर्ड इतिहास में यह रोचक तथ्य है कि यहां जो भी अधिकारी सीईओ बनकर आया, कोई इल्जाम लेकर गया है। राजनीतिक अध्यक्ष की मनोकामना पूरी करते यह अधिकारी लोकायुक्त, विभागीय और अदालती कार्यवाही से दो चार हो रहे हैं। इनमें कई अधिकारी ऐसे भी हैं जो रिटायर होने के बाद भी वक्फ बोर्ड से लगे दाग छुड़ाने में लगे हुए हैं।
फिर विवाद, फिर बदले गए वक्फ सीईओ, अब कमान इकबाल के हाथ…
