संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय और इंटेक ने आयोजित किया विरासत पत्थर सतह सफाई प्रशिक्षण
भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश, भोपाल विरासत संरक्षण से जुड़ी ज्ञान-वर्धक पहल में लगातार सराहनीय कदम उठा रहा है। इसी क्रम में, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) भोपाल चैप्टर के सहयोग से भोपाल में “विरासत पत्थर सतह सफाई” विषय पर तीन दिवसीय व्यवहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को पत्थर सतह सफाई की वैज्ञानिक विधियों की विस्तृत समझ प्रदान करना था, जो विरासत संरक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सैद्धांतिक सत्रों और व्यवहारिक प्रदर्शन को मिलाकर, प्रशिक्षण का लक्ष्य जागरूकता और तकनीकी कौशल – दोनों में वृद्धि करना था। यह पहली बार था जब मध्यप्रदेश में केवल विरासत पत्थरों की वैज्ञानिक मैनुअल और मैकेनिकल सफाई पर केंद्रित ऐसी कार्यशाला आयोजित हुई।
उद्घाटन सत्र में उर्मिला शुक्ला, आयुक्त, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्यप्रदेश; मदन मोहन उपाध्याय, संयोजक, INTACH भोपाल चैप्टर; डॉ. मनीषा शर्मा, संयुक्त निदेशक, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्यप्रदेश;
डॉ. मनोज कुमार कुर्मी, अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल सर्किल और मनोज शर्मा, सह-संयोजक, इंटेक (INTACH) भोपाल चैप्टर उपस्थित रहे।
मौके पर बोलते हुए उर्मिला शुक्ला ने संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह समझना जरूरी है कि पत्थरों की सफाई वैज्ञानिक तरीकों से कैसे की जा सकती है। यह कार्यशाला हमारे दृष्टिकोण को और सुदृढ़ बनाएगी तथा कार्य की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
हम इंटैक (INTACH) के साथ अपने सार्थक सहयोग को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। श्री मदन मोहन उपाध्याय ने कहा, “इस कार्यशाला के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हितधारकों को पत्थर सतह सफाई की नई तकनीकों से अवगत कराया जाए और देश की विरासत संरक्षण में योगदान दिया जाए।
इसी क्रम में मनीषा शर्मा ने कहा, “मध्यप्रदेश अनंतकालीन विरासत का धनी है। इसके संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना जरूरी है और इसमें इंटैक
(INTACH) अहम भूमिका निभा रहा है। यह एक बहुत ही मूल्यवान अवसर है।
कार्यशाला में संरक्षण ठेकेदारों, पुरातत्व और विरासत अध्ययन के छात्रों, DAAM और एमपी टूरिज्म के अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। तीन दिनों के दौरान, कार्यक्रम ने अकादमिक ज्ञान और फील्ड तकनीकों का संगम प्रस्तुत करते हुए एक केंद्रित शिक्षण वातावरण बनाया।

ऐसी थी कार्यशाला
पहला दिन (5 अगस्त): INTACH नई दिल्ली के आर्ट एंड मटेरियल हेरिटेज डिवीजन के विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक सत्र।
सुभ्रत सेन, वरिष्ठ समन्वयक ने पत्थरों के प्रकार, संरक्षण एवं पुनर्स्थापन पर चर्चा की।
मोहम्मद ग़ालिब, वरिष्ठ संरक्षक ने पत्थर विरासत (संग्रहालय की वस्तुएं एवं ऐतिहासिक इमारतें) के क्षरण व नष्ट होने के कारणों पर प्रकाश डाला।
भारती गोस्वामी, संरक्षक ने पत्थर विरासत की सफाई के लिए सामग्री और तरीकों पर सत्र लिया।
दूसरा दिन (6 अगस्त): व्यवहारिक प्रदर्शन।
प्रतिभागियों ने रासायनिक प्रक्रियाओं सहित विभिन्न सफाई तकनीकों और चरणबद्ध प्रक्रियाओं का अवलोकन व अभ्यास किया।
कार्यशाला के अंतिम दिन (7 अगस्त) का मुख्य आकर्षण जर्मन कंपनी Kärcher द्वारा पत्थर सफाई तकनीकों और मशीनरी की प्रस्तुति एवं प्रदर्शन रहा। यह कंपनी 90 वर्षों की विरासत और अत्याधुनिक सफाई तकनीक की अग्रणी प्रदाता के रूप में जानी जाती है।
वरुण हांडा, महाप्रबंधक, Kärcher ने मशीनों के उपयोग की जानकारी दी।
लाइव डेमो में प्रेशर क्लीनिंग, सैंड ब्लास्टिंग, ड्राई-आइस ब्लास्टिंग और स्टीम क्लीनिंग जैसी तकनीकों का प्रदर्शन हुआ।
कार्यशाला का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि पत्थर विरासत के संरक्षण में व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सुदृढ़ तरीकों को अपनाया जाएगा। इस पहल ने सरकारी संस्थाओं और INTACH जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच सहयोग के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया।
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