किसान कांग्रेस भोपाल ग्रामीण ने पार्वती नदी के पास वैकल्पिक पक्का रास्ता बनाने भूख हड़ताल कर किया जल सत्याग्रह

भाजपा विधायक विष्णु खत्री के खिलाफ लगाए मुर्दाबाद के नारे- किसान कांग्रेस

बैरसिया। सोमवार को किसान कांग्रेस भोपाल ग्रामीण जिला अध्यक्ष रामभाई मेहर ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं  कार्यकर्ताओं और किसानों के साथ किसानों एवं आम जनों व्यापारी बंधुओ की  समस्या को देखते हुए भूख हड़ताल कर जल सत्याग्रह किया गौरतलब हैं कि बैरसिया नरसिंहगढ़ रोड पर स्थित पार्वती नदी का पुल पिछले 8-10 महीनो से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है जिस पर प्रशासन द्वारा आवा गमन भी पूरी तरह से बंद कर दिया है

वहां पर वैकल्पिक पक्का रास्ता बनाने को लेकर क्षतिग्रस्त पुल के समीप सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक भूख हड़ताल करने के बाद पार्वती नदी में किसान कांग्रेस जिला ग्रामीण अध्यक्ष राम भाई मेहर समेत कांग्रेस नेताओं कार्यकर्ताओं एवं किसानों ने भाजपा विधायक विष्णु खत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जल सत्याग्रह कर वैकल्पिक रास्ते को पक्का और मजबूत बनवाने हेतु बैरसिया एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा इस दौरान किसान कांग्रेस जिला ग्रामीण अध्यक्ष राम भाई मेहर ब्लॉक अध्यक्ष मदन सिंह ठाकुर बैरसिया विधान सभा अध्यक्ष पार्षद भाग्यश्री चंचल खत्री समेत किसान कांग्रेस के नेता गण कार्यकर्ता एवं किसान जन बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

मध्य प्रदेश को अद्वितीय और समृद्ध पुरातात्विक खजानों का आशीर्वाद प्राप्त : उर्मिला शुक्ला

भोपाल। मध्य प्रदेश को अद्वितीय और समृद्ध पुरातात्विक खजानों का आशीर्वाद प्राप्त है। प्रत्येक मूर्ति, अभिलेखागार दस्तावेज़, भवन, स्मारक एक असाधारण कहानी कहता है।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश की आयुक्त, उर्मिला शुक्ला (आईएएस) ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य इतिहास प्रेमियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बने रहना है, साथ ही नई पीढ़ी, विशेषकर छात्रों में हमारे समृद्ध अतीत के प्रति जागरूकता की भावना जगाना है। यही मेरी पूरी टीम का दृष्टिकोण है। वे मध्य प्रदेश संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय:  विरासत संरक्षण और तकनीक एक साथ कार्यक्रम में बात कर रही थीं। कार्यक्रम संचालनालय, इंटैक भोपाल अध्याय के सहयोग से किया गया था। 7 और 8 नवंबर 2025 को राज्य संग्रहालय, भोपाल में मध्य प्रदेश के सिक्के विषय पर एक दो दिवसीय संगोष्ठी (सेमिनार) का आयोजन कर रहा है। यह संगोष्ठी क्षेत्र की समृद्ध मुद्राशास्त्रीय विरासत को प्रदर्शित करेगी और विद्वानों, शोधकर्ताओं व उत्साही लोगों के बीच चर्चा को बढ़ावा देगी।

संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय की आयुक्त, उर्मिला शुक्ला (आईएएस) ने वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में, आज राज्य संग्रहालय, भोपाल में नए  इंटरप्रिटेशन सेंटर  का उद्घाटन किया है। इस सेंटर का उद्देश्य मध्य प्रदेश की विविध पुरातात्विक संपदा, जिसमें मूर्तियां, शिलालेख और संबंधित सामग्री शामिल हैं, उसी को आकर्षक प्रदर्शनियों और छोटे वीडियो क्लिप्स के माध्यम से आगंतुकों के लिए सुलभ बनाना है, ताकि राज्य की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत जनता तक पहुंच सके। यह इंटरप्रिटेशन सेंटर नवीनतम सॉफ्टवेयर और उपकरणों से लैस, तकनीकी रूप से उन्नत है। इंटरप्रिटेशन सेंटर वह सुविधा है जो आगंतुकों को किसी विशेष स्थान, घटना या संस्कृति को समझने और सराहने में मदद करती है।
राज्य संग्रहालय, भोपाल हाल के वर्षों में विरासत को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत करते हुए एक गतिशील शिक्षण स्थान के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री द्वारा 18 मई 2025 को टेलमी डिजीइन्फोटेक के सहयोग से ‘आँखों देखा’ वर्चुअल रियलिटी सेंटर का उद्घाटन किया गया था। यह केंद्र वर्चुअल रियलिटी, इल्यूजन आर्ट और कहानी सुनाने के माध्यम से अत्यधिक सजीव अनुभव प्रदान करता है। इस पहल को जनता, विशेषकर स्कूलों से, सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इसने मध्य प्रदेश को विरासत नवाचार में अग्रणी बनाया है।
विभाग का मॉडलिंग अनुभाग ‘नो-प्रॉफिट, नो-लॉस’ के आधार पर बिक्री के लिए और प्रदर्शन व शिक्षा के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिकृतियां बनाता है। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश ने स्टार्टअप वराह हेरिटेज के सहयोग से भारत का पहला संग्रहालय-प्रमाणित विरासत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह मंच देश भर के नागरिकों को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश द्वारा प्रमाणित प्रतिकृतियां और आधिकारिक प्रकाशन ऑनलाइन प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्य प्रदेश की स्थापना 1956 में हुई थी। इसके प्रमुख कार्यों में 44 संग्रहालयों और 499 से अधिक राज्य-संरक्षित स्मारकों के माध्यम से राज्य की विरासत का अन्वेषण, संरक्षण, प्रलेखन और प्रदर्शन करना शामिल है।

इज्तिमागाह तैयार, मेहमानों का इंतजार

जमातों के लिए बने खेमे, तय हुए हलके

    भोपाल। 14 नवंबर से शुरू होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा के लिए आयोजन स्थल तैयार होने के करीब है। यहां विदेशों से आने वाली जमातों के अलावा देश के अन्य प्रदेशों से आने वाले जमातियों के ठहरने के इंतजाम कर दिए गए हैं। इसी तरह प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाली जमातों और स्थानीय जमातियों के लिए भी हलके तय कर दिए गए हैं। इज्तिमागाह पर तेजी से जारी काम के बीच उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में यहां की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होकर मेहमानों के इंतजार में खड़ी दिखाई देंगी।
    ईंटखेडी स्थित इज्तिमागाह पर पिछले कई दिनों से जारी कामों के बीच यहां जमातियों के ठहरने के इंतजाम मुकम्मल कर दिए गए हैं। शुरूआती तौर पर यहां आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडू, छत्तीसगढ, कर्नाटक, बरार, नागपुर, गुजरात, मुंबई, वादी, महाराष्ट्र, यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, नेपाल, उड़ीसा, वेस्ट बंगाल, आसाम, मेवात, राजस्थान, दिल्ली आदि के खेमे तैयार किए गए हैं। इन खेमों को ब्लाॅक ए, बी, ई, एफ और जी में बांटा गया है। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाली जमातों के लिए ए, बी, सी, ई, एच, आई आदि ब्लाॅक बनाए गए हैं। इनमें उज्जैन, राजगढ, शाजापुर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बडवानी, देवास, महू, आगर मालवा, रतलाम, झाबुआ, धार, मंदसौर, नीमच, इंदौर, सीहोर, सिरोंज, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर कलां, रायसेन, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, होशंगाबाद, हरदा, गुना, अशोक नगर, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, सिवनी, शहडोल, बैतूल, छिंदवाडा, जबलपुर, बालाघाट, कटनी, नरसिंहपुर आदि जिलों के लिए इंतजाम किए गए हैं।

    स्थानीय जमातों के लिए ब्लाॅक सी
    राजधानी भोपाल के विभिन्न इलाकों से तीन दिन की जमात लेकर पहुंचने वालों के लिए यहां ब्लाॅक सी में इंतजाम किए गए हैं। जिसमें पीजीबीटी, याकूब खां, कच्ची मस्जिद, आम वाली मस्जिद, मस्जिद अहमद नगर, मस्जिद मुल्तानी, आरिफ नगर मस्जिद, करोंद, नन्नी बी, ऐशबाग, अफजल कालोनी, बाग उमरावदूल्हा, नूर महल, स्टेशन, बुधवारा, तलैया, जुमेराती, इब्राहिमपुरा, छावनी, बरखेडी, जहांगीराबाद, हुजूर, तेहसील बैरसिया और बीएचईएल की जमातों के ठहरने के इंतजाम किए गए हैं।

    कुल 14 ब्लाॅक, तश्कील ब्लाॅक डी में
    इज्तिमागाह को कुल 14 ब्लाॅक में बांटा गया है। ब्लाॅक डी में विदेशी मेहमानों के ठहरने का इंतजाम होगा। साथ ही यहां तशकील भी की जाएगी। इसके अलावा इज्तिमागाह पर रहबर जमात, निगरानी जमात, गुमशुदा और कुतुबखाना के लिए भी अलग से इंतजाम किए गए हैं। इज्तिमागाह की जरूरतों के लिहाज से यहां एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी आदि पैथी के चिकित्सा शिविर मौजूद रहेंगे। फायर ब्रिगेड और सुरक्षा कैम्प भी यहां बनाए गए हैं। साथ ही जमातियों के खाने और चाय-नाश्ते के लिए बड़ी तादाद में फूड जोन भी बनाए जा रहे हैं।

    क्लीन और ग्रीन इज्तिमा
    इज्तिमा प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि पिछले कई सालों की तरह इस साल भी इज्तिमागाह पर क्लीन और ग्रीन की धारणा को आगे रखा जाएगा। इसके लिए यहां तंबाकू उत्पादों और पाॅलिथिन बैग्स के इस्तेमाल पर पाबंदी रहेगी।

    शहर गश्त पर जमातें

    देश के अनेक राज्यों की जमातों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। यह जमातें फिलहाल शहर की विभिन्न मस्जिदों में ठहरी हुई हैं और यहां इज्तिमा में शिरकत के लिए लोगों को दावत देने का काम कर रही हैं।

    संस्कृत और अरबी के विद्वानों से करवाया राष्ट्रगीत का अनुवाद

    अब मुस्लिमों के बीच भी पहुंच रहा वंदे मातरम्

    खान अशु
    भोपाल। कुछ बरस पहले जब स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम गान की अनिवार्यता की बातें उठीं, सरकारी संस्थानों और खासकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में इसके गाने पर जोर दिया जाने लगा तो समाज दो धड़ों में बंटता दिखाई देने लगा। जहां हिन्दूवादी विचारधारा के लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया, वहीं मुस्लिम समाज इससे खुद को अलग करता दिखाई देने लगा। दोनों के अपने-अपने विचार, अलग-अलग तर्क थे। मामलात बिगड़ने लगे तो मुस्लिम समाज से एक आवाज आई। उसने जिम्मेदारी उठाई कि मुस्लिम समाज में वंदे मातरम को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया जाए। संस्कृत और अरबी के विद्वानों से इस गीत का अनुवाद करवाया गया। अब इसे लेकर समाज के बीच पहुंचा जा रहा है। गीत के अनुवाद और उसके मूल मकसद की बारीकियां लोगों को समझाई जा रही हैं। पिछले कई सालों से चल रहे इस काम के बीच कहीं विरोध तो कहीं सहमति के मिले-जुले असर भी दिखाई दे रहे हैं। मुस्लिम समाज के बीच वंदे मातरम का तजुर्मा (अनुवाद) लेकर पहुंचने की शुरूआत मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सह-संयोजक एसके मुद्दीन ने की है।
    करीब पांच-छह साल पहले जब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थाओं में वंदे मातरम गान की अनिवार्यता लागू की तो प्रदेश सहित देशभर के मदरसों ने खुद को इससे अलग कर लिया था। चूंकि मदरसा स्कूली शिक्षा के अंतर्गत आते हैं और इनको मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मदद मिलती है, इसके चलते यह अनिवार्यता मदरसों पर भी लागू होती है। ऐसे में तात्कालीन मप्र मदरसा बोर्ड अध्यक्ष एसके मुद्दीन ने वंदे मातरम का तजुर्मा कराया और वंदे मातरम गीत को लेकर मुस्लिम समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का बीड़ा उठाया है।

    मकसद सामाजिक एकरसता का
    जहां हिन्दुत्व को एक जात और धर्म विशेष से जोड़कर देखा जाता है, वहीं एसके मुद्दीन इसे महज एक जीवनशैली मानते हैं। उनका मानना है कि इन्सान जिस देश या जमीन पर रहता है या वास करता है, उसकी एक जीवनशैली होती है, जिसका वह पालन करता है। भारत में रहने वालों की तेहजीब हिन्दू सभ्यता है और इसी वजह से वह हिन्दू सभ्यता और हिन्दुत्व से जुड़े हैं। उनकी तकरीरों में रामराज को किसी धार्मिक या सियासी नारे के रूप में इस्तेमाल किए जाने का विरोध भी होता है। उनका कहना है कि आजादी के पहले जब महात्मा गांधी रामराज की कल्पना किया करते थे, भूखे को खाना, सिर पर छत और तन ढकने को कपड़ा ही उन्होंने रामराज का आधार माना था। उनके रामराज की कल्पना में बेहतर इंसाफ और दुश्मन के प्रति भी मयार्दाओं का पालन करना शामिल होता था।

    विरोध भी सहमति भी
    पुरे देश सहित प्रदेशभर में दिखाए जा रहे वंदे मातरम के तर्जुमे को लेकर मुस्लिम समाज में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाए हैं। जहां राष्ट्रीय मुस्लिम मंच और भाजपा से जुड़े मुस्लिम इससे संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं तो वहीं पुख्ता ईमान और एकेश्वरवाद की बात पर कायम मुस्लिमों को इस पर ऐतराज है। उनका कहना है कि शब्दों के हेरफेर से भावनाएं नहीं बदल सकती, झूठ को सच करार नहीं दिया जा सकता। इस्लाम में खुदा के सिवा किसी किसी की इबादत या सजदा करना जायज नहीं है।

    यह हैं एसके मुद्दीन
    भाजपा के पुराने कार्यकर्ता हैं। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर की कार्यकारिणियों में उनकी मौजूदगी है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की राजनीति से जुड़े मुद्दीन मप्र मदरसा बोर्ड के चेयरमेन रह चुके हैं। वे कुक्कुट विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। साथ ही आरएसएस की मुस्लिम विग राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के वे राष्ट्रीय सह-संयोजक भी है। वे राज्य अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष के भी रहे हैं।

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    यह है वंदे मातरम् का अनुवाद

    वंदे मातरम् वंदे मातरम्
    (ऐ मादरे वतन तुझे मेरा सलाम)

    सुजलाम सुफलाम मायज शीतलाम
    (जिसका पानी अच्छा है, फल अच्छे हैं, चंदन की ठण्डी हवाएं हैं)

    शस्य शंयामालाम भारतम्। वंदे मातरम्।
    (उपजाउ यहां की जमीन है। ऐ मादरे वतन तुझे मेरा सलाम)

    शुभ्रज्योत्स्नाम पुलकित यामीनिम।
    (सुहानी चांदनी, दिल को सुकून देने वाली रातें)

    फुल्ल कुसमित द्रुमदल शोभिनीम।।
    (खिले हुए फूल, पेड़ के जमघट बहुत अच्छे हैं) सुहासिनी सुमधुरभाषिणीम। (प्यारी मुस्कान और मीठे बोल हैं तेरे) सुखदाम वरदाम् मातरम्। वंदे मारतम् ।।
    (सुख देने वाली हमें दुआ दे। ऐ मादरे वतन तुझे मेरा सलाम
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    इनका कहना है


    इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी की इबादत जायज नहीं है। अल्फाजों को बदलकर उनकी भावनाओं को नहीं बदला जा सकता।
    काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, काजी-ए-शहर

    वंदे मातरम धार्मिक या सामाजिक बहस का मुद्दा नहीं है। यह साहित्यिक बहस है, जिसे सियासी पार्टियों ने साम्प्रदायिक रंग चढ़ा दिया है।
    काजी सैयद अनस अली नदवी, अध्यक्ष, ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड

    प्रख्यात पण्डितों और अरबी के विद्वानों से अनुवाद कराया गया है। इस गीत में देश की जमीन, पानी, फल, फूल, पौधों, चांदनी आदि की तारीफ की गई है। जिस देश या जमीन पर इंसान सांसें ले रहा है उसकी तारीफ करने का हुक्म इस्लाम भी देता है।
    एसके मुद्दीन, राष्ट्रीय सह-संयोजक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच

    न नक्शा मांग पा रहा निगम, न अदालत के आदेश पर अमल हो रहा

    वीआईपी पर खड़ी है भ्रष्टाचार की इमारत

    भोपाल। साजिशों, गड़बड़ियों और मिलीभगत की एक इमारत राजधानी के वीआईपी रोड पर खड़ी है। पर्याप्त दस्तावेज और अनुमतियों का हिसाब नगर निगम इनसे नहीं मांग पा रहा है। न ही बरसों पूर्व अदालत द्वारा इस भवन को ढहाने की कार्यवाही आगे बढ़ पाई है। इस मामले में सीएम हेल्पलाइन प्लेटफॉर्म पर की शिकायत भी बेअसर है, इस शिकायत पर भी नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने संबंधित से कोई सवाल नहीं किया है।
    सूत्रों का कहना है कि शहर के वीआईपी मूवमेंट वाले इलाके में हुए एक अवैध निर्माण पर नगर निगम की कृपा बनी हुई है। नगर निगम के ही कर्मचारी रहे मोहम्मद बशीर ने यहां नशेमन विला के नाम से भवन तान दिया है। इनकी बीवी के नाम पर एक फर्जी हिबानामे को इसका आधार बनाया गया है। जबकि इसके लिए नगर निगम से नियमानुसार कोई अनुमति हासिल नहीं ली गई है। हिबानामा को लेकर कई गड़बड़ियों के बावजूद इस नशेमन विला का विक्रय भी कर दिया गया और इसका नामांतरण भी हो गया है। इस विला को लेकर प्रचलित कई अदालती मामले भी हैं। जिनमें इसको जमींदोज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन नगर निगम इसका पालन भी नहीं कर पा रहा है।

    दस्तावेजों की गैरमौजूदगी
    सूत्रों का कहना है कि इस नशेमन विला के लिए न्यायोचित हिबानामा, भवन अनुज्ञा, नक्शा और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते विभागों द्वारा या अदालत में मांगे जाने पर बार बार अलग दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। जांच करने पर इनका फर्जीवाड़ा उजागर भी हो सकता है।

    सीएम हेल्पलाइन बेअसर
    सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सीएम हेल्पलाइन प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराई गई है। लेकिन शिकायत के कई हफ्ते गुजर जाने के बाद भी नगर निगम ने अब तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की है। बताया जाता है कि पूर्व नगर निगम कर्मचारी को कार्यवाही से बचाने के लिए नगर निगम कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।

    सीएम हेल्पलाइन के हाल : स्कूल को बचाने में शिक्षा विभाग ने बदल दिए 14 जांच अधिकारी

    खान आशु
    भोपाल। सरकारी विभागों में होने वाली दिक्कतों, परेशानियों और अव्यवस्थागत शिकायतों के निवारण के लिए बनाए गए सीएम हेल्पलाइन प्लेटफॉर्म के हालात नाजुक हैं। यहां होने वाली शिकायतों को विभाग अपने तौर पर ट्रीट कर रहे हैं। जिसके चलते न तो शिकायत होने का डर लोगों में बाकी रह गया है और इससे भ्रष्टाचार की रवानी बढ़ गई है, सो अलग।
    सूत्रों का कहना है कि राजधानी भोपाल में स्थित एक स्कूल, इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में यहां के एक शिक्षक ने एक मासूम बच्ची के साथ सेक्सुअल असाल्ट की कोशिश की। प्रबंधन ने कोशिशें कर इस मामले की शिकायत पुलिस में नहीं होने दी। इस मामले को मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म तक जाने से भी रोक दिया गया। लेकिन अगस्त माह में इसको लेकर सीएम हेल्पलाइन पर एक शिकायत दर्ज कर दी गई। सूत्रों का कहना है कि तभी से इस शिकायत पर शिक्षा विभाग द्वारा टालमटोल की जा रही है। बताया जाता है कि करीब तीन माह से जारी इस शिकायत पर अब तक जांच तो दूर, अभी तक जांच अधिकारी ही तय नहीं हो पाया है। बताया जाता है कि अब तक करीब 14 अधिकारियों को यह जांच सौंपी जा चुकी है, लेकिन इस पर फैसला अब तक नहीं हो पाया है।

    भरोसा आरोपी पर
    सूत्रों का कहना है कि इस मामले में इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रबंधन से जवाब तलब किया गया है। जिसमें उसने साफ तौर पर इस तरह की कोई घटना होने से इनकार कर दिया है। बताया जाता है कि स्कूल शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन के इस जवाब को ही अंतिम मान रहा है। वह शिकायतकर्ता को इसी बात मान्य करने पर दबाव बना रहा है कि स्कूल प्रबंधन ऐसे कृत्य के होने से इनकार कर रहा है।

    दिक्कत यहां है
    आमतौर पर किसी शिकायत की जांच उसी विभाग को सौंप दी जाती है, जिससे संबंधित यह शिकायत होती है। ऐसी स्थिति में संबंधों के आधार पर एक दूसरे को बचाने में लग जाने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं।

    उलझाने का एक तरीका यह भी
    सूत्रों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर हुई अधिकांश शिकायतों में जांच अधिकारी ही गलत दर्ज कर दिया जाता है। जिससे जांच प्रभावित भी होती है और उसको समय पर कोई समाधान नहीं मिल पाता है।

    बघेली संस्कृति को मिलेगी नई पहचान: वंदना द्विवेदी

    विंध्य क्षेत्र के लिए रेल यात्रा अधिक सुगम बनाएंगे की मांग

    भोपाल। विंध्य क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाना, उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और बघेली संस्कृति को बढ़ावा देना ही संगठन का मुख्य उद्देश्य है।
    विंध्य एकता परिषद मध्यप्रदेश ने सोमवार को भोपाल में प्रेसवार्ता कर संगठन की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी। संगठन की प्रदेशाध्यक्ष वंदना द्विवेदी ने बताया कि परिषद द्वारा हर साल विंध्य एकता परिषद का वार्षिक सम्मेलन, विंध्य महोत्सव, प्रतिभा सम्मान समारोह, होली मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों के जरिए बघेली बोली, लोककलाओं और परंपराओं को नई पहचान दी जा रही है।
    उन्होंने बताया कि परिषद की पहल पर भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवान दास सबनानी ने अपनी विधायक निधि से एक एम्बुलेंस प्रदान की है, जो विंध्य क्षेत्र के लोगों की सेवा में लगातार सक्रिय रहेगी।
    वंदना द्विवेदी ने कहा कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के सहयोग से भोपाल–रीवा (22145/22146) द्विसाप्ताहिक ट्रेन शुरू की गई है। अब परिषद इसकी मांग कर रही है कि यह ट्रेन सप्ताह में सातों दिन चले।
    उन्होंने बताया कि परिषद भोपाल में विंध्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सस्ती दरों पर भूखंड और मकान उपलब्ध कराने हेतु भोपाल विकास प्राधिकरण से भूमि आवंटन की मांग कर रही है। साथ ही, परिषद के कार्यालय भवन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सभागार निर्माण की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
    वंदना द्विवेदी ने कहा कि विंध्य एकता परिषद सिर्फ संगठन नहीं, यह विंध्य क्षेत्र की अस्मिता, संस्कृति और एकता की प्रतीक है।

    नातिया कलाम से सजेगी बाबा कमाल की चौखट, उर्स की महफिल 11 दिसंबर से

    पदाधिकारियों ने दिया पहले चंदा, फिर की इसकी शुरुआत
    देशभर के कव्वालों का होगा जमावड़ा

    भोपाल। शहंशाहे मालवा हजरत मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती रे.अ का सालाना उर्स इस वर्ष 11 से 15 दिसंबर तक मनाया जाएगा। उर्स में व्यापारिक मेला 28 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा।
    उर्स में देश की कई मशहूर कव्वाल पार्टी बाबा की शान अपने कलाम पेश करेंगी।
    उर्स की तैयारियों को लेकर कमेटी के सदर सुहेल निसार एडवोकेट की अध्यक्षता में वृहद बैठक का आयोजन स्थानीय कमालिया स्कूल धार में किया गया। जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और उर्स की तैयारियां शुरू कर दी गई।
    बैठक की शुरुआत कुरान पाक की तिलावत से की गई। उसके बाद उर्स कमेटी के अध्यक्ष सुहेल निसार ने पिछले साल का लेखाजोखा ओर हिसाब पेश किया। उर्स कमेटी के सदर व पदाधिकारियों और सदस्यों ने सबसे पहले उर्स का चंदा देकर तैयारियों व चंदे की शुरुआत की।
    सदर सुहेल निसार ने बताया कि इस वर्ष बाबा का सालाना उर्स 11 से 15 दिसंबर तक मनाया जाएगा। वहीं व्यापारिक मेला 28 दिसंबर तक रहेगा।

    उर्स में देश की प्रसिद्ध कव्वाल पार्टी जिनमें रईस अनीस साबरी दिल्ली, जुनैद सुल्तानी बदायूं, अतीक हुसैन बंदानवाजी हैदराबाद, जावेद हुसैन कव्वाल रामपुर, हैदर हसन नियाजी निजामी ब्रदर्स दिल्ली, हाजी मुकर्रम वारसी भोपाल, टिम्मू गुलफाम जयपुर, नदीम जाफर कव्वाल जयपुर सहित स्थानीय कव्वाल उर्स के दौरान अपने कलाम पेश करेंगे।।
    इस अवसर पर बड़ी संख्या में उर्स कमेटी के सभी पदाधिकारी मेम्बर ओर सहयोगी मौजूद रहे।

    आलमी तब्लीगी इज्तिमा: पाकिस्तान की जमात को रही है पाबंदी, अब भी बरकरार रहेगी

    अधिकारी जुटे इज्तिमागाह पर दिए समय पर काम पूरा करने के निर्देश

    भोपाल। 78 बरस से मजहबी रौशनी फैला रहे आलमी तब्लीगी इज्तिमा में दुश्मन देश पाकिस्तान के लिए कभी जगह नहीं रही है, न वहां की जमाते ही यहां शामिल हुई हैं। यह सिलसिला अब भी बरकरार रहेगा। पाकिस्तान से किसी जमात के इज्तिमा में शामिल होने की कोई अनुमति नहीं है।
    आलमी तब्लीगी इज्तिमा के प्रवक्ता डॉ. उमर हफीज ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस समागम में विदेश से जो भी जमाते आती हैं, उन्हें भारत से मिली हुई अनुमति, वीजा और अन्य दस्तावेज हासिल करने होते हैं। इसकी एक प्रति वे हमेशा अपने पास भी रखते हैं और एक कॉपी इज्तिमा प्रबंधन को भी जमा करते हैं।

    अपनों से व्यवहार…
    चार दिन के इज्तिमा आयोजन के दौरान लगने वाली सीमित दुकानों में खानपान, स्वास्थ्य, रेलवे आदि के ही स्टॉल लगाए जाते हैं। बावजूद इसके भी हर धर्म के लोगों का सहयोग इसमें होता है। दूध, सब्जी, स्वास्थ्य या सुरक्षा में सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं। इधर ताजुल मसाजिद में भी लगने वाले मेले में किसी धर्म के दुकानदार के लिए पाबंदी नहीं होती है। न किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को यहां आने पर कोई प्रतिबंध लगाया जाता है। डॉ उमर हफीज का कहना है कि वैसे तो इज्तिमा प्रबंधन का इस मेले में कोई दखल नहीं होता है, लेकिन ऐसी किसी पाबंदी की अब तक खबर नहीं आई। जबकि हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष इस बात को लेकर झूठा प्रचार कर समाज में वैमनस्यता फैला रहे हैं।

    हुई बैठक, दिए निर्देश
    जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त बैठक मंगलवार को ईंटखेड़ी में आयोजित की गई। इस दौरान सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। इस समीक्षा बैठक में किए जा चुके कामों की समीक्षा की गई। साथ ही बाकी बचे कामों को समयावधि में पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया।

    जिनका चलता है मसाजिद कमेटी में सिक्का, उन सीईओ की नियुक्ति ही अवैध और नियमाविरुद्ध

    कई उलेमाओं समेत कई की शिकायत

    भोपाल। तीन जिलों की मस्जिदों एवं इमाम-मुअज्जिन की देखरेख करने वाले विभाग मसाजिद कमेटी की नियुक्तियों पर सवाल उठे हैं। यहां कार्यरत दर्जनों लोगों की नियुक्ति की शिकायत की गई है। इनमें एक शिकायत इस कमेटी के सचिव को लेकर भी शामिल है। नियमों से बांधे रखने वाले इस कर्मचारी की नियुक्ति भी अवैध बताई गई है। साथ ही कई उलेमाओं को भी इस दायरे में शामिल किया गया है।
    अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को की गई शिकायत में मसाजिद कमेटी में नियमों की अवहेलना का हवाला दिया गया है। शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2001 में मोहतमिम (अधीक्षक) द्वारा इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति की गई थी। जबकि उन्हें इस नियुक्ति का अधिकार नहीं था। सूत्रों का कहना है कि वास्तविक तौर से कमेटी में इंस्पेक्टर के पद की स्वीकृति ही नहीं है। मसाजिद कमेटी नियम 1960 के नियम8-1 के (VI) के अनुसार बिना इस पद की स्वीकृति के यह नियुक्ति कर दी गई। कालांतर में इस पद पर कार्य करते हुए सम्बंधित व्यक्ति सैयद उवैस अली कमेटी के प्रभारी सचिव के पद तक पहुंच गए हैं। बताया जाता है कि बिना शासकीय स्वीकृति के हुई इस नियुक्ति पर उवैस इस कार्यालय के सर्वाधिक प्राप्त करने वाले कर्मचारी भी बन गए हैं।

    नियुक्ति का आसान रास्ता
    सूत्रों का कहना है कि मसाजिद कमेटी द्वारा एक स्कूल का संचालन भी किया जाता है। इस कमेटी में जगह हासिल करने का सबसे आसान तरीका इस स्कूल को ही माना जाता है। बताया जाता है कि कमेटी में किसी व्यक्ति को दाखिला देने के लिए पहले उसे स्कूल में कर्मचारी बनाया जाता है। इसके बाद पिछले रास्ते से उसे कमेटी कार्यालय में शामिल कर लिया जाता है। शिकायत में ऐसे कई कर्मचारियों का हवाला दिया गया है, जिनकी नियुक्ति स्कूल के लिए की गई थी, लेकिन अब वे मसाजिद कमेटी में कार्य कर रहे हैं।

    कई उलेमाओं का भी जिक्र
    सूत्रों का कहना है कि शिकायत में मसाजिद कमेटी से संबद्ध कई उलेमाओं का भी जिक्र किया गया है। जिनकी नियुक्ति नियमों को दरकिनार कर की गई है। इनमें काजी, नायब काजी, मुफ्ती और नायाब मुफ्ती का भी उल्लेख है।

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