भोपाल। मध्य प्रदेश को अद्वितीय और समृद्ध पुरातात्विक खजानों का आशीर्वाद प्राप्त है। प्रत्येक मूर्ति, अभिलेखागार दस्तावेज़, भवन, स्मारक एक असाधारण कहानी कहता है।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश की आयुक्त, उर्मिला शुक्ला (आईएएस) ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य इतिहास प्रेमियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बने रहना है, साथ ही नई पीढ़ी, विशेषकर छात्रों में हमारे समृद्ध अतीत के प्रति जागरूकता की भावना जगाना है। यही मेरी पूरी टीम का दृष्टिकोण है। वे मध्य प्रदेश संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय: विरासत संरक्षण और तकनीक एक साथ कार्यक्रम में बात कर रही थीं। कार्यक्रम संचालनालय, इंटैक भोपाल अध्याय के सहयोग से किया गया था। 7 और 8 नवंबर 2025 को राज्य संग्रहालय, भोपाल में मध्य प्रदेश के सिक्के विषय पर एक दो दिवसीय संगोष्ठी (सेमिनार) का आयोजन कर रहा है। यह संगोष्ठी क्षेत्र की समृद्ध मुद्राशास्त्रीय विरासत को प्रदर्शित करेगी और विद्वानों, शोधकर्ताओं व उत्साही लोगों के बीच चर्चा को बढ़ावा देगी।

संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय की आयुक्त, उर्मिला शुक्ला (आईएएस) ने वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में, आज राज्य संग्रहालय, भोपाल में नए इंटरप्रिटेशन सेंटर का उद्घाटन किया है। इस सेंटर का उद्देश्य मध्य प्रदेश की विविध पुरातात्विक संपदा, जिसमें मूर्तियां, शिलालेख और संबंधित सामग्री शामिल हैं, उसी को आकर्षक प्रदर्शनियों और छोटे वीडियो क्लिप्स के माध्यम से आगंतुकों के लिए सुलभ बनाना है, ताकि राज्य की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत जनता तक पहुंच सके। यह इंटरप्रिटेशन सेंटर नवीनतम सॉफ्टवेयर और उपकरणों से लैस, तकनीकी रूप से उन्नत है। इंटरप्रिटेशन सेंटर वह सुविधा है जो आगंतुकों को किसी विशेष स्थान, घटना या संस्कृति को समझने और सराहने में मदद करती है।
राज्य संग्रहालय, भोपाल हाल के वर्षों में विरासत को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत करते हुए एक गतिशील शिक्षण स्थान के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री द्वारा 18 मई 2025 को टेलमी डिजीइन्फोटेक के सहयोग से ‘आँखों देखा’ वर्चुअल रियलिटी सेंटर का उद्घाटन किया गया था। यह केंद्र वर्चुअल रियलिटी, इल्यूजन आर्ट और कहानी सुनाने के माध्यम से अत्यधिक सजीव अनुभव प्रदान करता है। इस पहल को जनता, विशेषकर स्कूलों से, सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इसने मध्य प्रदेश को विरासत नवाचार में अग्रणी बनाया है।
विभाग का मॉडलिंग अनुभाग ‘नो-प्रॉफिट, नो-लॉस’ के आधार पर बिक्री के लिए और प्रदर्शन व शिक्षा के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिकृतियां बनाता है। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश ने स्टार्टअप वराह हेरिटेज के सहयोग से भारत का पहला संग्रहालय-प्रमाणित विरासत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह मंच देश भर के नागरिकों को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश द्वारा प्रमाणित प्रतिकृतियां और आधिकारिक प्रकाशन ऑनलाइन प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्य प्रदेश की स्थापना 1956 में हुई थी। इसके प्रमुख कार्यों में 44 संग्रहालयों और 499 से अधिक राज्य-संरक्षित स्मारकों के माध्यम से राज्य की विरासत का अन्वेषण, संरक्षण, प्रलेखन और प्रदर्शन करना शामिल है।
