सुबह 8.30 बजे के बाद लगेंगे पहली से आठवीं तक के स्कूल
जीतेन्द्र सेन भोपाल।। भोपाल ज़िले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के समय में परिवर्तन किया गया है जहां सुबह 8.30 बजे के बाद लगेंगे पहली से आठवीं तक के स्कूल गौरतलब हैं कि भोपाल ज़िले में तापमान में गिरावट के चलते सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के समय में ज़िला शिक्षा अधिकारी एन.के.अहिरवार द्वारा परिवर्तन के आदेश जारी किए गए हैं। जारी हुआ आदेश में कहा गया है कि तापमान में गिरावट होने से संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल जिले में संचालित समस्त शासकीय अशासकीय,केन्द्रीय विद्यालय,जवाहर नवोदय विद्यालय,आई.सी.एस.ई सी.बी.एस.ई,अनुदान प्राप्त एवं अन्य मान्यता प्राप्त कक्षा नर्सरी से कक्षा आठवी तक की कक्षाएं प्रातः 08:30 बजे से पूर्व संचालित नहीं की जायें। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा।
देश, दुनिया, प्रदेश की तरक्की की दुआओं के साथ इज़्तिमा का समापन
आखिरी दिन उठे दुआ के लिए लाखों हाथ • अल्लाह के रास्ते निकलीं सैकड़ों जमातें • फटाफट कचरा सफाचट, खटाखट यातायात भी क्लियर
इज़्तिमागाह से खान आशु ए अल्लाह, हम गुनाहगार हैं, खतावार हैं, तेरे हुक्म से गाफिल हैं, तेरी राह से भटके हुए हैं, तेरे नाफरमान हैं… लेकिन जो हैं, जैसे हैं तेरे बंदे हैं, तेरी किताब के कायल हैं, तेरे पैगंबर की सीरत को मानने वाले हैं….! ए अल्लाह हम सभी पर रहम फरमा दे….! पिछले तीन दिनों से ईंटखेड़ी में चल रहे 78वें आलमी तबलीगी इज्तिमा का समापन सोमवार सुबह इन दुआओं के साथ हुआ। मौलाना सआद कांधालवी साहब ने यह दुआ कराई। दुआ ए खास के दौरान मौलाना ने पहले अरबी में दुआ की। इसके बाद मौजूद मजमे को जोड़ते हुए उर्दू में भी दुआओं का निजाम चला। आयोजन स्थल से लेकर तीन किमी तक सड़क खेत और घरों में बैठे लोगों ने आमीन कहा। दुआ ए खास में शिरकत के लिए बड़ी तादाद में लोगों ने रात से ही इज्तिमागाह पहुंचना शुरू कर दिया था। कुछ लोगों ने अल सुबह इज्तिमागाह का रुख किया। सुबह से दुआ के लिए दौड़ ने शहर की अधिकांश सड़कों को वाहनों से भर दिया। हर शख्स इस मजमा ए खास में शामिल होने के लिए उतावला दिखाई दे रहा था। जिस दौरान मौलाना सआद साहब दुआ कर रहे थे, सारा मजमा पिन ड्रॉप साइलेंट की मुद्रा में दिखाई दे रहा था। दूर दूर तक सिर्फ मौलाना की आवाज गूंज रही थी और बीच बीच में लोगों की आमीन की आवाज़ें इसमें शामिल हो रही थीं।
तय वक्त पर हुई दुआ आलमी तबलीगी इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को सुबह 10.30 बजे दुआ ए खास होने का ऐलान किया गया था। इस लिहाज से लोगों का इज्तिमागाह पहुंचने का सिलसिला भी अल सुबह से शुरू हो गया था। मौलाना सआद साहब ने अपना बयान पूरा करने के बाद दुआ ए खास की शुरुआत की। मजमे में मौजूद करीब 13 लाख से भी ज्यादा लोगों दुआ के साथ आमीन की सदाएं गुंजायमान की। खामोशी के दुआ ए खास और आमीन का सिलसिला करीब 30 मिनट तक जारी रहा। सुबह करीब 10.24 बजे शुरू हुई दुआ करीब 10.54 बजे तक चला। दुआ पूरी होने के बाद भोपाल मरकज के इकबाल हफीज ने जमातियों को वापसी का शेड्यूल समझाया।
शुरू हुआ रवानगी का सिलसिला दुआ के बाद लोगों की रवानगी का सिलसिला शुरू हो गया। यहां से कुछ लोग अपने घरों को लौटे तो कुछ दीन सीखने के मकसद से चार माह और चालीस दिन की जमातों में निकले। 14 नवंबर को हुई शुरूआत के बाद सोमवार को इस मजहबी समागम का समापन हुआ। जिसमें करीब 13 लाख लोगों ने शिरकत की।
71 पार्किंग में वाहन, ट्रैफिक इंतजाम में हजारों लोग चार दिन के आलमी तब्लीगी इज्तिमा में 13 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। हजारों वाहन थे। इज्तिमा स्थल ईटखेड़ी पहुंचने के रास्ते भी सीमित। बावजूद इसके न तो कहीं जाम लगा और न ही कहीं यातायात रुका। इन इंतजामों में लगे पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों के साथ हजारों वॉलेन्टियर्स की कई दिनों की मेहनत के चलते ये आसान हो पाया। इज्तिमा के समापन के बाद रास्तेभर वॉलेन्टियर्स ने यातायात इंतजाम संभाले रखा। गोलखेड़ी से होकर कई गांवों को लांघते हुए अचारपुरा बायपास तक आने वाले मार्ग की व्यवस्था हिन्दू भाइयों ने संभाल रखी थी। इनमें एक पूर्व सरपंच भी शामिल थे।
चला तकरीरों का दौर चार दिन के इस आयोजन में देशभर से उलेमाओं की तकरीर हुई। सोमवार सुबह फजिर की नमाज के बाद की तकरीर में फिर से उन बातों को दोहराया गया। सुबह फजिर की नमाज के बाद बयान किया गया। इनके बाद तबलीग की मुख्य 6 बातों की तालीम दी गई। दुआ ए खास से पहले मौलाना सआद साहब ने जमात में निकलने वालों को खास ताकीद देते हुए बयान किया। चार दिन चलीं इन मजलिसों में उलेमा बोले अल्लाह की मर्जी के बिना कोई काम नहीं होता। ये अकीदा तोड़ने से खराब हालात होंगे। नेक राह जो बताई गई है, उस पर चलने वाले बनो तो तुम्हारी हर परेशानी खत्म हो जाएगी। आपसी रिश्ते बेहतर रखने और सबके काम आने की हिदायत भी मजमे को दी गई।
सबका शुक्रिया, सबका आभार आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान सहयोग करने वाले सभी लोगों और संस्थाओं का इज्तिमा इंतेजामिया कमेटी ने आभार जताया। जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, पीएचई, विद्युत विभाग, रेलवे, स्वास्थ्य विभाग के सभी जमीनी कर्मचारियों व आला अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया।
झलकियां • आलमी तबलीगी इज्तिमा के पूरा होने पर होने वाली दुआ ए खास में शामिल होने लोगों ने अल सुबह से दौड़ लगा दी थी। आमतौर पर ईद और बकरीद पर इतनी सुबह साफ सुथरे कपड़े, खुशबू लगाए और सिर पर टोपी सजाए मुस्लिम धर्मावलंबी सड़कों पर दिखाई देते हैं। • आलमी तबलीगी इज्तिमा इस कड़ी का तीसरा आयोजन कहा जा सकता है। • इज्तिमागाह के आसपास स्थित खानपान दुकानों में नारायण नाश्ता हाउस और सहाय फूड कॉर्नर पर भी ग्राहकों की खासी भीड़ दिखाई दी। • इज्तिमा परिसर में अनिल केतली में चाय लिए घूम घूम कर लोगों की खिदमत कर रहा था। जबकि सुरेश ने यहां मीठे लच्छे बेचता दिखा। • वापसी सफर के दौरान लोगों ने सड़क किनारे अस्थाई दुकानों से किसानों द्वारा बेची जा रही अमरूद, मूली, संतरे, मैथी आदि की जमकर खरीदी की। • दुआ ए खास के बाद पहले पैदल मुसाफिरों को निकाला गया। उसके बाद दो पहिया वाहन, फिर चार पहिया निकाले गए। बड़े माल वाहकों को सबसे आखिर में। • वापसी के समय लोगों का हुजूम इज़्तिमागाह से बायपास, गांधी नगर, करोंद और काजी कैंप के अलावा bmhrc और मंडी होते हुए छोला की तरफ रहा। • इज़्तिमागाह आने जाने वाले मार्ग पर हर तरफ टोपियां ही टोपियां दिखाई दे रही थीं।
दुआ ए खास के लिए जुटने लगा मजमा • शहर के बाजार हुए सूने, सबका रुख इज़्तिमागाह की तरफ • बढ़ रही हैं विदेशी जमाते
इज़्तिमागाह से खान आशु 77वें आलमी तबलीगी इज्तिमा के तीसरे दिन रविवार को भी सुबह से उलेमाओं की तकरीर और बयान का सिलसिला जारी रहा। सुबह से रात तक चलने वाली इन तकरीरों में तालीम, भाईचारा, सामाजिक समरसता और अल्लाह की इबादत एवं फरमा बरदारी की ताकीद की गई। रविवार सुबह तक इस मजमे में करीब 8 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिनमें देशभर की जमातों के अलावा करीब 24 विदेशी देशों के मेहमान भी शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि रविवार की छुट्टी और सोमवार सुबह होने वाली दुआ ए खास के चलते इस मजमे में और इजाफा होगा। दुआ ए खास में करीब 15 लाख लोगों की शिरकत की उम्मीद की जा रही है।
उलेमाओं ने कहा- दीन को समझें, सबके लिए समभाव रखें आलमी तब्लीगी इज्तिमा में दुनियाभर से आए मुसलमानों के बीच उलेमा इस्लामी शिक्षा, भाईचारे और सुधार का संदेश अपनी तकरीरों में दे रहे हैं। इस दौरान मौलाना यूसुफ साहब ने इस्लामी जीवन के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली। उन्होंने ईमान की ताकत, इस्लामी अदब और दीन के प्रचार-प्रसार की अहमियत पर जोर दिया। मौलाना ने कहा कि दीन का काम केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक इबादत है, जो इंसान को अल्लाह के करीब ले जाती है। इसी तरह मुफ्ती इलयास साहब के बयान का केंद्र इस्लामी अखलाक और समाजी सुधार था। उन्होंने बताया कि इस्लाम सिर्फ इबादत का मज़हब नहीं, बल्कि यह इंसानी जिंदगी के हर पहलू को संभालने वाला मज़हब है। मौलाना ने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने किरदार से इस्लाम का सच्चा संदेश दूसरों तक पहुंचाएं। अपनी तकरीर के दौरान इकबाल हफीज साहब तौहीद और इख़लास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को हर समय अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अपने सभी कामों में उसकी रज़ा को प्राथमिकता देनी चाहिए। हर शाम मगरिब की नमाज के बाद होने वाली खास महफिल को दिल्ली मरकज से आए मौलाना सआद साहब कांधलवी संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उनका बयान इस्लामी एकता और उम्मत के सुधार पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मुसलमानों को अपनी खामियों को दूर कर आपसी इत्तेहाद को मजबूत करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दीन के काम को बढ़ावा देने के लिए हर मुसलमान को अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी।
खिदमत से मिलता है खुदा… आलमी तब्लीगी इज्तिमा आयोजन के दौरान शहर के कई ऐसे बाशिंदें नजर आए, जो पूरे चार दिन लोगों के आने से लेकर लौटते तक की उनकी सभी व्यवस्थाएं करने में जुटे रहे। यह पहला मौका नहीं है, वे कई सालों से हर साल इज्तिमा आने जाने वाले लोगों की खिदमत करते हैं। उनका मुख्य काम भोपाल आए लोगों को इज्तिमागाह तक छोड़ना और खाने-पीने का इंतजाम करना होता है। भोपाल के रहने वाले मोहम्मद अख्तर (77) ने बताया कि वह इज्तिमा में करीब 50 वर्षों से ख़िदमत कर रहे हैं। पहले और अब के दौर में बहुत फर्क है। लोग उस समय ट्रेनों से आना अधिक पसंद करते थे। भोपाल स्टेशन पर भारी भीड़ उतरती थी, हमारी कोशिश रहती थी कि लोगों की खिदमत या उनको मिलने वाली सुविधाओं को बेहतरी से पूरा करें। लोगों के आते थे हम अपने-अपने तांगे लेकर उन्हें ताजुल मसाजिद छोड़ दिया करते थे। उस टाइम ताजुल मसाजिद में भी बहुत अधिक इंतजाम नहीं हुआ करते थे, कई बार बारिश हो जाती थी तो कीचड़ मच जाती थी तो लोगों को आसपास की मस्जिदों में ठहराया करते थे। इसके अलावा वहां बहुत सारे महिलाएं आतीं थी जो बाहर खाना बनाने का काम किया करती थीं।
खर्च कर दी जिंदगी तबलीग से सिखाई जाने वाली भलाई की बातें और खुद की जिंदगी में एक बेहतर अनुशासन कायम रखने की नीयत से लोगों का जमातों में निकलने का सिलसिला करीब सौ बरस पुराना हो चुका है। भोपाल इज्तिमा में पहुंचे लोगों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा जमातों में गुजार दिया है। साथ ही कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने दीन की इस महफिल को पहली बार अनुभव किया है।
दीन की खिदमत बड़ा काम मूलतः मथुरा के रहने वाले शमसुद्दीन कारोबारी सिलसिले को पार करते हुए ग्वालियर होते हुए भोपाल पहुंच गए हैं। पुराने शहर के बाशिंदे शमसुद्दीन बताते हैं दुनिया में सब कुछ जरूरी है, लेकिन उससे बड़ा काम दीन की खिदमत है। वे बताते हैं कि करीब 55 बरस से वे लगातार जमातों और इज्तिमा का हिस्सा बन रहे हैं। घर के सुकून से ज्यादा जमातों में रहने वाले 90 वर्षीय शमसुद्दीन महीने में तीन दिन, साल में चालीस दिन जमात में आवश्यक रूप से जाते हैं। इसके अलावा वे कई बार चार महीने के चिल्ले पर भी कई बार जा चुके हैं।
कामयाबी का रास्ता इसी से होकर गुजरता है मेडिकल डिपार्टमेंट में अकाउंटेंट रहे हाजी अनवर उल्लाह खान भी अपने रिटायरमेंट के बाद ज्यादा वक्त जमातों और तबलीगी काम में गुजारते हैं। करीब 30 वर्षों से लगातार आलमी तबलीगी इज्तिमा में शिरकत कर रहे 84 वर्षीय अनवर उल्लाह बताते हैं कि असल सुकून दीन की बात में है और कामयाबी का रास्ता भी इसी से होकर गुजरता है। उम्र 40 के पार ही पहुंची है, लेकिन काजी सैयद अनस अली नदवी ने जमातों का रास्ता छोटी उम्र से ही इख्तियार कर लिया था। चार महीने, चालीस दिन और तीन दिन की इज्तिमा हाजिरी उनकी अल्पायु से ही शुरू हो गई थी। काजी अनस बताते हैं कि इंसान के दुनिया में आने का असल मकसद मौत के बाद की जिंदगी को संवारना है। जमातों के रास्ते इसी के लिए मेहनत की जा रही है। 10 वर्षीय मेहरान और 8 वर्षीय इबाद जफर पहली बार इज्तिमा में शामिल होने पहुंचे हैं। कुरआन की तालीम से फारिग होने के बाद वे नमाजों की पाबंदी करते रहे हैं। तफरीह के बतौर कई बार अपने वालिद शकील खान और तनवीर जफर के साथ इज्तिमागाह भी पहुंचे। लेकिन ये पहला मौका है, जब वे पूरे तीन दिन की जमात के साथ इज्तिमा में पहुंचे हैं। स्कूल से छुट्टी और अपनी दैनिक दिनचर्या को नजरंदाज कर मेहरान और इबाद ने जमात में शरीक होने का मकसद बेहतर तरबियत और कुछ अच्छे सबक सीखना बताया।
कल दुआ के साथ समापन चार दिन के इज्तिमा का समापन सोमवार सुबह दुआ ए खास के साथ होगा। दुआ के लिए सुबह 10.30 बजे का वक्त मुकर्रर किया गया है। सुबह फजिर की नमाज के बाद मौलाना सआद साहब का खास बयान होगा। इस दौरान वे जमातों में निकलने वाले लोगों को इस सफर में अपनाए जाने वाले अखलाक, रखे जाने वाले ख्याल और किए जाने वाले काम समझाएंगे। इसके बाद सुबह करीब 10.30 बजे दुआ होगी। जिसके बाद लोग इज्तिमागाह से रुखसत होना शुरू हो जाएंगे। इज्तिमा प्रबंधन ने बताया कि दुआ के बाद इज्तिमा से करीब 2 हजार जमातें देशभर के लिए निकलेंगी।
जिससे इज़्तिमा में लग गए चार चांद… यह है भोपाल की तहजीब आलमी तब्लीगी इज्तिमा में हर रोज की भागदौड़ से बड़ा ट्रैफिक सम्हालने की जिम्मेदारी कुछ गैर मुस्लिम युवाओं ने संभाली। क्षेत्र के एक पूर्व सरपंच और उनके सैकड़ों साथी यातायात दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं। उन्हें दुआ ए खास के बाद निकलने वाली बड़ी तादाद को भी सम्हालने और व्यवस्थित निकालने की भी जिम्मेदारी मिली है। इज़्तिमागाह से सटे गोलखेड़ी और इससे जुड़े कई गांवों से गुजारकर व्यवस्थित अचारपुरा बायपास तक पहुंचाने की जिम्मेदारी यही दल सम्हाल रहा है। • इज़्तिमागाह पर खानपान और अन्य जरूरत की दुकानों में बड़ी तादाद में गैर मुस्लिम भी शामिल हैं। इन्हें बिना कुर्रा दुकान आवंटित की गई है। इनसे जगह का किराया और बिजली पानी का खर्च भी नहीं लिया गया है। • इज़्तिमागाह पर पानी की इंतजाम के लिए 50 से ज्यादा ट्यूबवेल काम में लिए जा रहे हैं। जिनमें से अधिकांश गैर मुस्लिम किसानों के हैं। इन्होंने इज़्तिमा कार्य के लिए सहर्ष अपने ट्यूबवेल प्रबंधन को सौंप दिए हैं। • इब्राहिमगंज छोला निवासी रामअवतार इज़्तिमागाह पर मसाला चाय बेच रहे हैं। कीमत 10 है, लेकिन उनके लिए चाय मुफ्त है, जो पैसा न होने की बात करते हैं। कहते हैं चाय की तलब है तो पीकर ही जाइए, भले पैसा हो या नहीं…! • ईंटखेड़ी क्षेत्र में इज़्तिमा आयोजन होने से यहां रहने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यहां के लिए चलने वाले लोकल कन्वेंस लगभग बंद हैं। ऐसे में यह जरूरत वह वाहन पूरी कर रहे हैं जो इज़्तिमा इंतजाम में लगे हैं। एक ही ऑटो में बैठकर टोपी पहने वाला जमाती और साड़ी पहने हुई महिलाएं इस मार्ग पर दिखाई दे रहे हैं।
खास खास • इज़्तिमागाह पर PHE विभाग ने पानी के इंतजाम के लिए करीब 560 टंकियां रखी हैं। यहां बैतूल खला, स्नानागार, पेयजल और वजू के लिए करीब 29400 लीटर पानी एक बार में खर्च हो रहा है। विभाग 4 बार इतने पानी का इंतजाम कर रहा है। जिसके लिए उसने पूरे इज़्तिमागाह में करीब 19800 मीटर की पाइप लाइन बिछाई है। • इज़्तिमागाह पर धूल न उड़े इसके लिए दिन में कई बार छिड़काव किया जा रहा है। • इज्तिमा आयोजन के चलते पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सन्नाटे पसरे दिखाई दे रहे हैं। यहां बाजार बंद और लोगों की आवाजाही कम नजर आ रही है। • इज्तिमा में शामिल विदेशी जमातों के साथ द्विभाषी भी मौजूद हैं, जो उन्हें उलेमाओं के बयान का सार समझा रहे हैं। इसी तरह मूक बधीर जमातियों को भी सांकेतिक भाषा में बयान समझाए जा रहे हैं। • भोपाल टॉकीज से इज्तिमागाह तक यातायात व्यवस्था सम्हाल रहे वालेंटियर्स ने अपनी शिफ्टों का बंटवारा कर रखा है। लेकिन ड्यूटी के बाद भी वे अपने क्षेत्रों में ही मौजूद रहते हैं। • सियासी गतिविधियों से दूर इस आयोजन में जन प्रतिनिधियों का अप्रत्यक्ष जोड़ ही है। उन्हें भी इस आयोजन में आमजन की तरह ही शामिल होना पड़ रहा है। • इज्तिमा समापन के बाद सोमवार को विभिन्न पार्किंग से वाहनों को बारी बारी से निकाला जाएगा। पैदल, दोपहिया, छोटे वाहन और बाद में भारी वाहनों के निकलने की व्यवस्था है, ताकि शहर के यातायात पर प्रभाव न पड़े। • ताजुल मसाजिद में होने वाले आयोजन के दौर से इसी परिसर में एक बड़ा व्यापारिक मेला भी लगता आया है। गर्म कपड़ों के लिए मशहूर यह बाजार रस्ते का माल सस्ते में की तर्ज पर आकार लेता है। इसकी शुरुआत सोमवार शाम से होगी, जो करीब दो माह तक चलेगा। • पूरे इज़्तिमागाह मार्ग पर विभिन्न लोगों ने स्वागत के पोस्टर, बैनर, हार्डिंग्स लगा दिए हैं। • मेट्रो का काम चलने से नबी बाग, करोंद और आरिफ नगर, काजी कैंप में यातायात संबंधी दिक्कतें हो रही हैं।
सारे शहर में मजहबी समागम की चहल पहल खिदमत में जुटे वोलेंटियर जमातियों की कर रहे मदद स्टेशन से इज्तिमागाह के बीच कई जगह पानी, चाय नाश्ता, खाने के इंतजाम
इज्तिमागाह से खान अशु भोपाल। आलमी तबलीगी इज्तिमा का दूसरा दिन शनिवार भी उलेमाओं के बयान और तकरीर से शुरू हुआ। सुबह फजिर की नमाज़ के बाद मौलाना सईद साहब ने अल्लाह और इंसान की मिसाल एक कारीगर और मशीन से करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई। मौलाना ने कहा कि जिस तरह कोई मशीन बनाई जाती है तो उसके इस्तेमाल के लिए एक बुकलेट तैयार की जाती है। इस बुकलेट में बताए गए तरीकों से मशीन को चलाना आसान होता है। इसी तरह अल्लाह ने इंसान को बनाया और उसके व्यवस्थित संचालन के लिए कुरआन भी दिया। कुरआन में बताए गए तरीके से चलने पर इंसान रूपी मशीन कामयाब और इसके इतर चलने पर इसमें खराबी आना लाजमी है। मौलाना सईद ने कहा कि आज का इंसान अल्लाह के खजानों से फायदा उठाने वाला नहीं है। वह अगर अल्लाह के तरीकों, कुरआन की सीख और नबी के बताए रास्तों पर चलने का नियम बना ले तो वह दुनिया में भी कामयाब होगा और आखिरत में भी उसके लिए आसानियां होंगी। आलमी तबलीगी इज्तिमा के दूसरे दिन इज्तिमागाह पर पिछले दिन से बढ़ी हुई तादाद दिखाई दी। देश दुनिया से आई जमातों में शामिल लोग हाथ में तस्बीह और जुबां पर अल्लाह का जिक्र लिए दिखाई दे रहे हैं। उनकी सुबह नमाज के साथ होती है और रात भी इसी के साथ पूरी हो रही है। सारा दिन बयान और तकरीर के दौर के बीच सीखने सिखाने का दौर भी जारी है। बड़ी तादाद में पहुंचे बुजुर्ग, जवान और बच्चे अलग अलग तालिमी खेमों में बेहतरी की बातें सीख रहे हैं।
दुनिया भर से आए लोग आलमी तबलीगी इज्तिमा में बड़ी तादाद में विदेशी जमातें भी पहुंची हैं। करीब 300 से ज्यादा विदेशी मेहमानों में किर्गिस्तान, मलेशिया, इथोपिया, बर्मा (म्यांमार), श्रीलंका, सउदी अरब, कंबोडिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, सीर्रा लोन, फ्रांस, जॉर्जिया, तुर्की, आयरलैंड, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, ट्यूनिशिया, इजिप्ट आदि देशों के लोग शामिल हैं। इज्तिमा दुआ से पहले कुछ और विदेशी जमातों के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। इज्तिमा प्रबंधन ने विदेशी मेहमानों के ठहरने के इंतजाम अलग से किए हैं। इन खेमों में ट्रांसलेटर भी मौजूद हैं, जो उलेमाओं के बयान को इन अलग अलग देशों के लोगों को उनकी भाषा में अनुवाद करके बताते हैं।
बात सिर्फ जमीन के नीचे और आसमान के ऊपर की आलमी तबलीगी इज्तिमा के दौरान होने वाली तकरीरों में तबलीग के छह सूत्रों पर ही बात की जाती है। कहा जाता है यहां होने वाली तकरीरों में सिर्फ मौत के बाद जमीन के नीचे (कब्र) की बात की जाती है या फिर आखिरत के हिसाब के लिए होने वाली आसमान के ऊपर की जिंदगी पर चर्चा होती है। दुनिया के मसलों, सामाजिक या राजनीतिक बातों के लिए यहां कोई स्थान नहीं होता।
उलेमाओं की तकरीरें दीन का रास्ता सच्चा जौहर की नमाज के बाद हुए बयान में मुफ्ती जौहेर उल इस्लाम ने कहा कि दीन का रास्ता सच्चा है, बाकी सब गुमराह करने वाले हैं। दुनिया में जिंदगी बिताने का हर तरीका इस्लाम ने सिखाया है, लेकिन इस रास्ते से लोग भटक रहे हैं। जिंदगी बिताने का कुरान का बताया रास्ता ही जिंदगी की कामयाबी की सीढी है, इससे ही आखिरत की जिंदगी संवर पाएगी।
अब नहीं आएगा कोई पैगंबर असीर की नमाज के बाद मुख्तसिर बात करते हुए मुफ्ती अब्दुल अजीज साहब ने कहा कि इस्लाम में कई पैगंबर आए और उन्होंने दीन की बात लोगों तक पहुंचाई। हजरत मोहम्मद सअ के बाद ये सिलसिला बंद हो गया है। लेकिन इस्लाम की अच्छी बातों को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब आपके हमारे जिम्मे है। जमातों, मुलाकातों और इज्तिमा के जरिए इसी बात की मेहनत की जा रही है। नबियों के इस काम को करने में आने वाली मुश्किलों से घबराने की बजाए हमें उन तकलीफों का ख्याल करना चाहिए, जो हमसे पहले नबियों ने इस्लाम के लिए उठाई हैं।
अच्छी बात सब तक पहुंचाना भी ईमान का हिस्सा मगरिब की नमाज के बाद मौलाना मोहम्मद सआद साहब कंधालवी की तकरीर हुई। बड़े मजमे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास जो बेहतर है, वह लोगों तक पहुंचे और उसको भी इससे फैज हासिल हो, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। हमें कोशिश करना चाहिए कि भलाई की बात, बेहतरी की बात और किसी के काम आने वाले नुस्खे खुद के पास महदूद रखने की बजाए इसको आगे बढ़ाकर इसमें इजाफा करें। सआद साहब ने कहा कि अब दौर आसान हो चुका है, नए दौर की टेक्नोलॉजी बेहतरी को फैलाने में मददगार हो सकती है। उन्होंने लोगों से अच्छे अखलाक, किसी का दिल न दुखाने और सबके लिए बेहतरी के काम करते रहने की ताकीद भी की।
अगर कुछ गुम हो जाए! इज्तिमागाह पर मौजूद बड़े मजमे में लोगों के सामान की गुमशुदगी के हालात भी बन रहे हैं। जिसको व्यवस्थित करने के लिए यहां 7 केंद्र स्थापित किए गए हैं। गुमशुदा सामान केंद्रों पर अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों का सामान पहुंचा है, जिनको तस्दीक के बाद इनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया। इन केंद्रों के व्यवस्थापक ने बताया कि इस व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए करीब 1500 वालेंटियर्स तैनात किए गए हैं, जो पूरे क्षेत्र में सतत निगरानी रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक मिलने वाले सामानों में सबसे ज्यादा मोबाइल फोन और घड़ियां हैं, जिन्हें लोग वजू खाना और बॉथरूम या टॉयलेट के आसपास भूल गए थे। इसके अलावा कई लोगों के पर्स और नगद राशि भी निगरानी करने वालों को मिली, जिन्हें उचित तफ्तीश कर उनके असल मालिकों तक पहुंचा दिया गया है।
इज्तिमा से जुड़ी खास चीजें, जो साल में एक बार ही होती हैं आलमी तबलीगी इज्तिमा मजहबी तकरीरों, बेहतरी की बातों, नमाज और इबादत के साथ आपस में जुड़ने के अलावा कुछ और यादें भी छोड़कर जाता है। ये खास बातें आमतौर पर सालभर में एक बार ही देखने को मिलती हैं:
एक सबक : ट्रैफिक कंट्रोल और पार्किंग व्यवस्था शहर की बिगड़ैल यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस का बड़ा अमला भी असफल साबित हो चुका है। कलेक्टर को खुद इसकी फिक्र में सड़क पर उतरना पड़ रहा है। ऐसे में लाखों लोगों की मौजूदगी वाले मजमे के दौरान चंद वोलेंटियर पूरी तरह व्यवस्थित आवाजाही बरकरार रखते हैं। इसी तरह इज्तिमा में शामिल होने वाले बड़े छोटे वाहनों की पार्किंग और समापन के बाद इनकी सुगम वापसी भी सराहनीय है। आमतौर पर कोई छोटा जमावड़ा होने पर भी वाहनों की रेलमपेल से पूरा शहर अस्त व्यस्त दिखाई देने लगता है।
एक इलाज : काढ़ा इज्तिमागाह और शहर के कई स्थानों पर जमातियों को इलाज मुहैया कराने एलोपैथिक, आयुर्वैदिक, होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सा के कैंप लगाए गए हैं। इनमें शामिल यूनानी चिकित्सा द्वारा तैयार किया जाने वाला काढ़ा एक खास असर लिए होता है। आम दिनों में तैयार किए जाने वाले काढ़े से अलग ये होता है कि इसमें कई अतिरिक्त और प्रभारी दवाओं और जड़ी बूटियों का मिश्रण सिर्फ इज्तिमा के दौरान ही किया जाता है। 4 दिन के आयोजन में हजारों खुराक लोग गटक जाते हैं और अपने साथ इसको ले जाने की ललक भी नहीं छोड़ पाते हैं।
एक स्वाद : खानपान के शौकीन नवाबों के इस शहर भोपाल में वैसे तो हर दिन चटोरेपन के लिए कई आइटम्स मौजूद होते हैं। लेकिन इज्तिमा आयोजन के दौरान कई ऐसे आइटम्स भी होते हैं, जो सिर्फ इस अवधि में ही मिल पाते हैं। इनमें हलवा मांडा और सोहन हलवा खास है। जबकि मुंबई की खास मिठाई कही जाने वाली अफलातून भी लोगों को इस सीजन में ही खाने को मिल पाती है।
एक यादगार : आलमी तबलीगी इज्तिमा जिस दौर में ताजुल मसाजिद में हुआ करता था, उसी दौर से इस परिसर में एक मेला लगने की परंपरा रही है। गर्म कपड़े के लिए सारे प्रदेश में मशहूर ये बाजार अब भी ताजुल मसाजिद में लगता है। दुआ के बाद शुरू होने वाला ये खास बाजार करीब दो माह चलता है। इस बाजार में बिकने वाले मुरादाबादी बर्तन भी आम दिनों में मिलना मुश्किल होते हैं। साथ ही यूपी हैंडलूम के विभिन्न उत्पाद भी इस बाजार की खासियत होते हैं।
झलकियां शनिवार और रविवार की छुट्टी की वजह से इज्तिमागाह में हुजूमबढ़ने लगा है। सुबह से पहुंच रही सैकड़ों जमातें सोमवार को होने वाली दुआ तक मौजूद रहेंगे पुराने शहर के अधिकांश इलाकों में बंद जैसे पड़े बाजार, सन्नाटे के हालात ताजुल मसजिद परिसर में लगने वाले कपड़ा मार्केट ने आकार लेना शुरू किया। 17 नवम्बर से शुरू होकर करीब दो माह तक जारी रहेगा स्थानीय लोग भी व्यक्तिगत रूप से और जमात की शक्ल में इज्तिमागाह पहुंच रहे हैं हमीदिया रोड, भोपाल टाकीज, सिंधी कॉलोनी, काजी कैंप, करोंद चौराहे से लेकर कई मार्गों पर टोपी लगाए जमाती ही दिखाए दे रहे हैं सारे रास्तों पर पुलिस की बड़ी मौजूदगी। उनके सहयोग में जुटे हुए हैं हजारों वालेंटियर
भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार संग्रहालय, मध्य प्रदेश द्वारा “पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में अद्यतन प्रगतियाँ” विषय पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 09 से 11 जनवरी, 2026 में मिंटो हॉल भोपाल में किया जाएगा। यह सम्मान प्रतिवर्ष/द्विवार्षिक डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें प्यार से ‘हरिभाऊ’ कहा जाता था और भारतीय शैल कला अध्ययन का “पितामह” कहा जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखशास्त्री और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान के नाम से भी जाना जाता है, एक राष्ट्रीय पुरस्कार है, जो संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय , भोपाल, मध्य प्रदेश द्वारा वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से, वर्ष के आधार पर, प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनके रचनात्मक, प्रभावी और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और 2 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल होता है। पुरस्कार समारोह आयोजित करने और प्राप्तकर्ता का चयन करने के लिए अधिकृत, भोपाल स्थित संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश ने श्री यशोधर मठपाल को 19वें वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदानों को स्मरणीय बनाने के लिए, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय , भोपाल, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक मिंटो हॉल, भोपाल में “पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में अद्यतन प्रगतियाँ” पर एक राष्ट्रीय स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, जिसमें पूरे भारत से प्रशासक, नीति निर्माता, क्षेत्रीय कार्यकर्ता, प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और छात्र भाग लेंगे, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में उभरते विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी और पुरातात्विक धरोहरों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश की जाएगी। राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य नीचे सूचीबद्ध शोध-पत्र विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा।
विषय पुरातत्व, नृ-पुरातत्व, पुरातात्विक मापिकी (आर्कियोमेट्री), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ हाइब्रिड प्रणालियों सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ। मूर्त और अमूर्त विरासत के संग्रह, भंडारण, पहुंच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन में रुझान। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in पर जाएँ।
प्रसार भारती के गणतंत्र कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग में शामिल होंगे डॉ. अंजुम बाराबंकवी
भोपाल। कभी भगवान श्रीराम पर गजलें लिखकर वे चर्चाओं में रहते हैं तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रशंसा किए जाने से जिक्र उनके आसपास आ जाता है। अपने फन-ओ-कलाम से बिरलेपन की इंतहा छूने वाले अंतरराष्ट्रीय शायर डॉ. अंजुम बाराबंकवी इस बार इसलिए पुकारे जा रहे हैं कि उन्हें विश्व के सबसे बड़े कवि सम्मेलन में शामिल होने का न्यौता आया है। प्रसार भारती के दिल्ली कार्यालय से इसकी रिकॉर्डिंग होना है। यह कार्यक्रम 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर प्रसारित किया जाएगा। इसकी भव्यता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। प्रसार भारती ने अपने गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ शायर डॉ. अंजुम बाराबंकवी को उर्दू भाषा के मूल कवि के रूप में चयनित किया है। उन्हें सर्वभाषा कवि सम्मेलन 2026 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। जानकारी के मुताबिक इस वर्ष यह आयोजन रविवार 23 नवम्बर होगा। यह आयोजन आकाशवाणी दिल्ली के रंगभवन सभागार में किया जाएगा। कहा जाता है कि यह सर्वभाषा कवि सम्मेलन विश्व का सबसे बड़ा कवि सम्मेलन है।
अंजुम के राम मूलतः उत्तर प्रदेश के रहने वाले डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने राम जन्मभूमि को नजदीक से देखा है। इस जगह को बहुत प्यार किया भी है और पाया भी है। इसी के चलते उन्होंने अपनी लंबी अदबी जिंदगी में भगवान श्रीराम को भी शामिल किया। इस श्रृंखला में लिखी गई उनकी ग़ज़लें बहुत सराही गईं। यहां तक इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से भी प्रशंसा मिली है। पीएम मोदी ने उन्हें इसके लिए चिट्ठी भी भेजी है।
भोपाल। एस.आर.एफ फाउंडेशन द्वारा शासकीय माध्यमिक विद्यालय बीनापुर में लोकेशन लेवल अकादमिक प्रतियोगिता आयोजन किया गया जिसमें कई तरह की प्रतियोगिता जैसे स्पेल बी, जस्ट ए मिनट, कविता पाठ, भाषण, मेंटल मैथ, तथा ईवीएस एवं विज्ञान क्विज सहित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाइट भोपाल के प्राचार्य सुभाष कुमार गुप्ता रहे कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रूपाली रिचारिया (बी आर सी सी फंदा ग्रामीण), विजेंद्र सिंह भदौरिया (BAC), सुनीता ठाकुर (BAC), राकेश कुमार धानगर (CAC), सुधीर कुमार काले एवं रवि कुमार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि भूपत सिंह मीना, 10 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे। अंत में विजेता विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। सभी गणमान्य अतिथियों ने एस आर एफ फाउंडेशन के इस सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायक आयोजन की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
इज़्तिमागाह से खान आशु भोपाल। 78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आगाज शुक्रवार को सुबह फजिर की नमाज के बाद भिवंडी से आए मौलाना हारून साहब के बयान के साथ हुआ। ईंटखेड़ी-घासीपुरा में लाखों जमातियों के मजमे को खिताब करते हुए मौलाना ने फरमाया कि अल्लाह ने हमें किसी न किसी काम के लिए पहुंचाया है। उस काम से हम भटक गए हैं। उन्होंने हदीस और कुरआन की रोशनी में नसीहत की कि अल्लाह के हुक्म और पैगम्बर साहब के बताए रास्ते पर चलें। मौलाना ने कहा कि दुनिया में हर चीज का मकसद है। अल्लाह ने जो आसमान बनाया उसका मकसद है, अल्लाह ने जो पहाड़ों को बनाया उसका भी अपना मकसद, समुंदर, नदियां और पानी को बनाने का भी मकसद है। मखलूक को पैदा किया उसका भी मकसद है, लेकिन सब तो अपने काम में लगे हुए हैं, सिर्फ मुसलमान अपना मकसद भूल गए हैं। उन्होंने इस दौरान पैगम्बर हजरत नूह अलैहिस्सलाम से लेकर हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम तक का किस्सा अपने बयान में सुनाया।
जुमा की नमाज के लिए उमड़ा शहर
नमाज ए जुमा की अदायगी के लिए शहरवासियों का हुजूम इज़्तिमागाह पर टूट पड़ा। लोगों ने अपने जरूरी कामों में कटौती करते हुए जुमा की नमाज बड़े मजमे में पढ़ने के लिए कदम बढ़ाए। नमाज के बाद होने वाले बयान में भी वह हाजिर रहे और शाम का बयान सुनने के बाद ही घरों को लौटे। इधर हजारों जमातों के साथ लाखों लोग इस बड़े समागम में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। जो अब दुआ ए खास के बाद ही यहां से रुखसत होंगे।
इज़्तिमागाह पर नमाज का वक्त • फजिर : सुबह 6 बजे • जौहर : दोपहर 2 बजे • असिर: शाम 4.20 बजे • मगरिब : शाम 5.45 बजे • ईशा : बयान खत्म होने के बाद
अगर कोई इमरजेंसी आ जाए
लाखों लोगों के मजमे में और दूरदराज पंडाल में मौजूद किसी व्यक्ति के साथ कोई इमरजेंसी हो जाए, तो उसके भी इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए यहां करीब 8=10 इलेक्ट्रिक एंबुलेंस तैनात की गई हैं। इज़्तिमागाह के चारों तरफ फैली यह बैटरी चलित एंबुलेंस किसी मरीज को जरूरत के अनुसार अस्पताल की एंबुलेंस या मेडिकल कैंप तक पहुंचाने में मदद करेगी।
पूरी होगी जीरो वेस्ट की धारणा इज़्तिमागाह को पूरी तरह कचरा मुक्त, गंदगी और बदबू रहित रखने के प्रयास भी किए गए हैं। सामाजिक संस्था सार्थक ने इसके लिए गंदे पानी की शुद्धिकरण और कचरे के पुनर्चक्रण की व्यवस्था की है। पर्यावरणविद सैयद इम्तियाज अली कहते हैं कि यह प्रयोग पिछले कई वर्षों से किए जा रहे हैं, जिसमें पूरी तरह सफलता प्राप्त हुई है। इस मॉडल को न सिर्फ सराहा और पुरस्कृत किया गया है, बल्कि इसे देश के बड़े आयोजनों में अपनाया भी गया है।
सादगी से हुए हजारों निकाह इज़्तिमा के पहले दिन शुक्रवार को सामूहिक निकाह का आयोजन किया गया। दिल्ली से आए हजरत ने खास दुआ के साथ निकाह मुकम्मल कराए। पहले से निकाह रजिस्ट्रेशन कराए दुल्हा और उनके परिजन यहां मौजूद थे। इस दौरान न बाजा था, न घोड़ी, न शहनाई और न ही आतिशबाजी, सिर्फ सादगी के साथ यह आयोजन पूरा हो गया। गौरतलब है कि पूर्व में निकाह का यह आयोजन इज़्तिमा के दूसरे दिन हुआ करता था। जिसे दिल्ली मरकज से हुए फैसले के बाद इज़्तिमा के पहले दिन कर दिया गया है।
पहले दिन ही टूटा रिकार्ड
78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा के पहले दिन ही इज्तिमा का पुराना रिकार्ड टूट गया। पहले दिन ही लाखों की तादाद में लोग पहुंचे, हालात यह हो गई कि पंडाल खचाखच भर गया। जबकि अभी इज्तिमा में लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी है, तकरीबन पूरी रात यह सिलसिला चलता रहा और दुआ के दिन तक इज्तिमा पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा।
खिदमत के लिए लगे कैम्प
– राजधानी में खिदमत के लिए जगह-जगह कैम्प लगाए गए हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन, हबीबगंज रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टेंड, भोपाल टाकीज, प्रभात चौराहा से इज्तिमागाह पर जाने वालों के लिए खिदमती कैम्प लगाए गए हैं। स्टेशन पर उतरते ही पहले इज्तिमा यात्रियों का इस्तकबाल किया जाता है। इसके बाद उन्हें कैम्प में लाकर चाय पिलाई जाती है, फिर निःशुल्क ट्रकों, बसों ,जीपों और अन्य साधनों से उन्हें इज्तिमा स्थल तक पहुंचाया जाता है।
यातायात पुलिस के साथ वॉलिटियर भी जुटे – प्रशासन के हजारों लोग तो खिदमत में लगे हुए हैं ही, यातायात पुलिस के भी तकरीबन साढ़े चार हजार जवान और तब्लीगी जमाअत के तकरीबन इतनी ही तादाद में वालेंटियर्स यातायात व्यवस्था को बनाने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। यातायात व्यवस्था का आलम यह है कि लाखों लोगों के इज्तिमा पहुंचने के बाद भी जरा सा भी कहीं न तो ट्राफिक जाम हो रहा है और न ही किसी सड़क किनारे रहने वालों को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना करना पड़ रहा। वॉलिटियर्स का यह जज़्बा देख पुलिस भी उनसे सबक ले रही है। लाखों लोगों के बाद भी किसी तरह की कोई अव्यवस्था नजर नहीं आ रही।
विदेशी जमाअतों के लिए अलग व्यवस्था – इज्तिमा पहुंचने वाली विदेशी जमाअतों के लिए अलग इंतजाम किए गए हैं। ताकि वह इज्तिमा में सुकून के साथ दीन की बातें सुन और समझ सकें। उनके लिए विभिन्न भाषाओं के ट्रांसलेटर इन कैम्पों में नियुक्त किए गए हैं, जो बयान को विदेशी मुल्कों की जुबान में ट्रांसलेट करके विदेशियों को समझाते हैं।
बड़ा सवाल : भोपाल इज़्तिमा क्यों शुरू हुआ? सन् 1947 में इज़्तिमा की शुरुआत हुई। यही दौर देश की आजादी और हिंदुस्तान पाकिस्तान के विभाजन का था। अधिकांश लोगों को लगता था कि इस देश से तमाम मुसलमान पाकिस्तान चले गए हैं। जबकि यह हकीकत नहीं थी। मुस्लिमों की बड़ी तादाद ने इस सरजमीं को छोड़ने से इनकार कर दिया था। ऐसे में इस देश में रुक गए और विभाजन को नकारने वालों की तादाद दिखाने का जरिया आलमी तब्लीगी इज्तिमा बना। इस मजहबी समागम को इस मकसद से शुरू किया गया। जिसमें पूरे देश के अलावा विदेशों के जमाती शामिल होते हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस तरह के आयोजन अलग होते हैं।
भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रथम आगमन पर सेन समाज विकास संगठन के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष रामरतन सेन का भव्य स्वागत किया गया। सेन के रेलवे स्टेशन भोपाल पहुंचते ही गाजे बाजे के साथ पुष्पहार पहनाकर उनका स्वागत किया गया। स्वागत के पश्चात प्रदेश अध्यक्ष चार पहिया वाहनों के साथ जुलूस के रूप में संत शिरोमणि सेन जी महाराज चौक पहुंचे। जहां उन्होंने संत शिरोमणि सेन महाराज की पूजा अर्चना कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही उपस्थित सभी समाज बंधुओ ने प्रदेश अध्यक्ष रामरतन सेन का पुष्प-माला पहनाकर मिठाई खिलाकर स्वागत किया और उन्हें नवीन दायित्व प्राप्त होने के लिए शुभकामनाएं एवं बधाइयां प्रेषित की। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ज्योतिषगुरु सुरेश आचार्य और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष नरेश भोले के नेतृत्व में सेन का भव्य स्वागत किया गया। प्रदेश अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में वरिष्ठ नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए सभी सामाजिक बंधुओं को धन्यवाद दिया और आश्वस्त किया कि वह समाज उत्थान के लिए सदैव समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े हुए व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का मुकुट कांटो भरा होता है लेकिन यह कांटो भरा मुकुट मैंने अपनी समाज के प्रत्येक व्यक्ति के उत्थान के लिए पहना है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मैं अकेला प्रदेश अध्यक्ष नहीं हूं, आप सभी प्रदेश अध्यक्ष ही हैं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुरेश आचार्य ने प्रदेश अध्यक्ष रामरतन सेन को कंधे से कंधा मिलाकर समाज सेवा करने के लिए आश्वस्त किया। आचार्य ने कहा कि सेन साहब आप संघर्ष कीजिए, समाज का प्रत्येक व्यक्ति आपके साथ समाज उत्थान में कंधे से कंधा मिलाकर सदैव खड़ा रहेगा। सभी उपस्थित समाज बंधुओं ने प्रदेश अध्यक्ष रामरतन सेन को बधाइयां दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रामचरण माथुर , प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष माखन दाऊ , सेन श्रृंगार दर्शन के संयोजक मन्नूलाल श्रीवास , भाजपा मंडल उपाध्यक्ष नरेश भोले , वरिष्ठ समाजसेवी गंगाराम सेन, वरिष्ठ समाजसेवी सीताराम सेन , विदिशा जिला उपाध्यक्ष रामबाबू सेन , पत्रकार संजय सराठे , पत्रकार अमित सेन सहित समस्त सामाजिक बंधु एवं मातृशक्ति उपस्थिति रही।
जीतेन्द्र सेन बैरसिया। दिनांक 21 अक्टूबर 2025 को फरियादी सीताराम अहिरवार पिता रामसिंह अहिरवार उम्र 35 साल निवासी ग्राम नरेला बाजाप्त थाना बैरसिया जिला भोपाल ने रिपोर्ट किया कि उसके पड़ोस मे रहने वाले महेश अहिरवार मिथुन नंदू आशीष व अरूण ने घर के बगल मे रास्ते के कब्जे को लेने की बात पर से विवाद हुआ था जिसमे उक्त व्यक्तियो ने हाथ,मुक्को,डण्डा एवं लोहे की राड से हमारे परिवार से गाली गुप्तार कर मारपीट की थी जिसमे चाचा पर्वत सिंह एवं अन्य परिवारजनो को चोटे आई थी चाचा पर्वत सिंह को ज्यादा चोटे लगी है जिनको ईलाज के लिए पीपुल्स अस्पताल लेकर गये है फरियादी की सूचना पर देहाती नालसी लेख कर थाना बैरसिया मे अपराध क्रमांक 520/25 धारा 296,115(2),351(3),3(5) बीएनएस का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। प्रकरण की विवेचना के दौरान घायल पर्वत सिंह की हालत लगातार खराब होने से डाक्टर से लिखित मे जानकारी चाही जिन्होने घायल को गंभीर चोटे आना बताया। दिनांक 04/11/2025 को घायल पर्वत सिंह की ईलाज के दौरान म्रत्यु होने पर प्रकरण मे धारा 118(2),103(1) बीएनएस का इजाफा किया गया प्रकरण गंभीर प्रवृत्ति का होने से पुलिस अधीक्षक भोपाल ग्रामीण रामशरण प्रजापति के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देहात डॉ नीरज चौरसिया व इंचार्ज एसडीओपी बैरसिया मंजू चौहान के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी बैरसिया वीरेन्द्र सेन के नेतृत्व मे मर्डर के आरोपीगणो की अतिशीघ्र गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम का गठन किया गया पुलिस टीम के द्वारा मुखबिर की सटीक सूचना व तकनीकि आधार से आरोपीगण महेश अहिरवार, मिथुन, नंदू, आशीष व अरूण को करोंद से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल दाखिल किया गया।
आरोपीयों के नाम
1.महेश अहिरवार पिता रतीराम अहिरवार उम्र 45 साल निवासी ग्राम नरेला बाजाप्त थाना बैरसिया 2. आशीष अहिरवार पिता महेश अहिरवार उम्र 25 साल निवासी ग्राम नरेला बाजाप्त थाना बैरसिया 3. अरूण अहिरवार पिता महेश अहिरवार उम्र 23 साल निवासी ग्राम नरेला बाजाप्त थाना बैरसिया 4. नंदू उर्फ नंदकिशोर पिता रतीराम अहिवार उम्र 34 साल निवासी ग्राम नरेला बाजाप्त थाना बैरसिया 5. मिथुन अहिरवार पिता रतीराम अहिरवार उम्र 32 साल निवासी ग्राम नरेला बाजाप्त थाना बैरसिया
पुलिस टीम-
उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी बैरसिया वीरेन्द्र सेन उ.नि हरिशंकर वर्मा प्र.आर हेमराज सिंह प्र.आर रामेश्वर चौरसिया आर. रामसेवक आर. रामेश्वर वर्मा.आर.देवेन्द्र आर. मनीष.आर.नीरज दांगी.आर.अजय सिंह गुर्जर.आर.जितेन्द्र सिंह आर.सरदारसिंह प्र.आर मुस्ताक अहमद सायबर सेल देहात जिला भोपाल तथा ग्राम रक्षा समिति सदस्य विशाल आकाश ईसराइल बबलू मोकम का विशेष योगदान रहा