78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आगाज

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अल्लाह ने मखलूक को किसी मकसद के लिए बनाया है

इज़्तिमागाह से खान आशु
भोपाल। 78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आगाज शुक्रवार को सुबह फजिर की नमाज के बाद भिवंडी से आए मौलाना हारून साहब के बयान के साथ हुआ। ईंटखेड़ी-घासीपुरा में लाखों जमातियों के मजमे को खिताब करते हुए मौलाना ने फरमाया कि अल्लाह ने हमें किसी न किसी काम के लिए पहुंचाया है। उस काम से हम भटक गए हैं। उन्होंने हदीस और कुरआन की रोशनी में नसीहत की कि अल्लाह के हुक्म और पैगम्बर साहब के बताए रास्ते पर चलें।
मौलाना ने कहा कि दुनिया में हर चीज का मकसद है। अल्लाह ने जो आसमान बनाया उसका मकसद है, अल्लाह ने जो पहाड़ों को बनाया उसका भी अपना मकसद, समुंदर, नदियां और पानी को बनाने का भी मकसद है। मखलूक को पैदा किया उसका भी मकसद है, लेकिन सब तो अपने काम में लगे हुए हैं, सिर्फ मुसलमान अपना मकसद भूल गए हैं। उन्होंने इस दौरान पैगम्बर हजरत नूह अलैहिस्सलाम से लेकर हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम तक का किस्सा अपने बयान में सुनाया।

जुमा की नमाज के लिए उमड़ा शहर

नमाज ए जुमा की अदायगी के लिए शहरवासियों का हुजूम इज़्तिमागाह पर टूट पड़ा। लोगों ने अपने जरूरी कामों में कटौती करते हुए जुमा की नमाज बड़े मजमे में पढ़ने के लिए कदम बढ़ाए। नमाज के बाद होने वाले बयान में भी वह हाजिर रहे और शाम का बयान सुनने के बाद ही घरों को लौटे। इधर हजारों जमातों के साथ लाखों लोग इस बड़े समागम में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। जो अब दुआ ए खास के बाद ही यहां से रुखसत होंगे।

इज़्तिमागाह पर नमाज का वक्त
• फजिर : सुबह 6 बजे
• जौहर : दोपहर 2 बजे
• असिर: शाम 4.20 बजे
• मगरिब : शाम 5.45 बजे
• ईशा : बयान खत्म होने के बाद



अगर कोई इमरजेंसी आ जाए

लाखों लोगों के मजमे में और दूरदराज पंडाल में मौजूद किसी व्यक्ति के साथ कोई इमरजेंसी हो जाए, तो उसके भी इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए यहां करीब 8=10 इलेक्ट्रिक एंबुलेंस तैनात की गई हैं। इज़्तिमागाह के चारों तरफ फैली यह बैटरी चलित एंबुलेंस किसी मरीज को जरूरत के अनुसार अस्पताल की एंबुलेंस या मेडिकल कैंप तक पहुंचाने में मदद करेगी।

पूरी होगी जीरो वेस्ट की धारणा
इज़्तिमागाह को पूरी तरह कचरा मुक्त, गंदगी और बदबू रहित रखने के प्रयास भी किए गए हैं। सामाजिक संस्था सार्थक ने इसके लिए गंदे पानी की शुद्धिकरण और कचरे के पुनर्चक्रण की व्यवस्था की है। पर्यावरणविद सैयद इम्तियाज अली कहते हैं कि यह प्रयोग पिछले कई वर्षों से किए जा रहे हैं, जिसमें पूरी तरह सफलता प्राप्त हुई है। इस मॉडल को न सिर्फ सराहा और पुरस्कृत किया गया है, बल्कि इसे देश के बड़े आयोजनों में अपनाया भी गया है।

सादगी से हुए हजारों निकाह
इज़्तिमा के पहले दिन शुक्रवार को सामूहिक निकाह का आयोजन किया गया। दिल्ली से आए हजरत ने खास दुआ के साथ निकाह मुकम्मल कराए। पहले से निकाह रजिस्ट्रेशन कराए दुल्हा और उनके परिजन यहां मौजूद थे। इस दौरान न बाजा था, न घोड़ी, न शहनाई और न ही आतिशबाजी, सिर्फ सादगी के साथ यह आयोजन पूरा हो गया। गौरतलब है कि पूर्व में निकाह का यह आयोजन इज़्तिमा के दूसरे दिन हुआ करता था। जिसे दिल्ली मरकज से हुए फैसले के बाद इज़्तिमा के पहले दिन कर दिया गया है।

पहले दिन ही टूटा रिकार्ड

78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा के पहले दिन ही इज्तिमा का पुराना रिकार्ड टूट गया। पहले दिन ही लाखों की तादाद में लोग पहुंचे, हालात यह हो गई कि पंडाल खचाखच भर गया। जबकि अभी इज्तिमा में लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी है, तकरीबन पूरी रात यह सिलसिला चलता रहा और दुआ के दिन तक इज्तिमा पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा।

खिदमत के लिए लगे कैम्प

– राजधानी में खिदमत के लिए जगह-जगह कैम्प लगाए गए हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन, हबीबगंज रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टेंड, भोपाल टाकीज, प्रभात चौराहा से इज्तिमागाह पर जाने वालों के लिए खिदमती कैम्प लगाए गए हैं। स्टेशन पर उतरते ही पहले इज्तिमा यात्रियों का इस्तकबाल किया जाता है। इसके बाद उन्हें कैम्प में लाकर चाय पिलाई जाती है, फिर  निःशुल्क ट्रकों, बसों ,जीपों और अन्य साधनों से उन्हें इज्तिमा स्थल तक पहुंचाया जाता है।

यातायात पुलिस के साथ वॉलिटियर भी जुटे
– प्रशासन के हजारों लोग तो खिदमत में लगे हुए हैं ही, यातायात पुलिस के भी तकरीबन साढ़े चार हजार जवान और तब्लीगी जमाअत के तकरीबन इतनी ही तादाद में वालेंटियर्स यातायात व्यवस्था को बनाने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। यातायात व्यवस्था का आलम यह है कि लाखों लोगों के इज्तिमा पहुंचने के बाद भी जरा सा भी कहीं न तो ट्राफिक जाम हो रहा है और न ही किसी सड़क किनारे रहने वालों को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना करना पड़ रहा। वॉलिटियर्स का यह जज़्बा देख पुलिस भी उनसे सबक ले रही है। लाखों लोगों के बाद भी किसी तरह की कोई अव्यवस्था नजर नहीं आ रही।

विदेशी जमाअतों के लिए अलग व्यवस्था
– इज्तिमा पहुंचने वाली विदेशी जमाअतों के लिए अलग  इंतजाम किए गए हैं। ताकि वह इज्तिमा में सुकून के साथ दीन की बातें सुन और समझ सकें। उनके लिए विभिन्न भाषाओं के ट्रांसलेटर इन कैम्पों में नियुक्त किए गए हैं, जो बयान को विदेशी मुल्कों की जुबान में ट्रांसलेट करके विदेशियों को समझाते हैं।

बड़ा सवाल : भोपाल इज़्तिमा क्यों शुरू हुआ?
सन् 1947 में इज़्तिमा की शुरुआत हुई। यही दौर देश की आजादी और हिंदुस्तान पाकिस्तान के विभाजन का था। अधिकांश लोगों को लगता था कि इस देश से तमाम मुसलमान पाकिस्तान चले गए हैं। जबकि यह हकीकत नहीं थी। मुस्लिमों की बड़ी तादाद ने इस सरजमीं को छोड़ने से इनकार कर दिया था। ऐसे में इस देश में रुक गए और विभाजन को नकारने वालों की तादाद दिखाने का जरिया आलमी तब्लीगी इज्तिमा बना। इस मजहबी समागम को इस मकसद से शुरू किया गया। जिसमें पूरे देश के अलावा विदेशों के जमाती शामिल होते हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस तरह के आयोजन अलग होते हैं।

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