भोपाल। एक तरफ सरकार किसान कल्याण के लिए भरसक प्रयास कर रही है। तरह तरह की योजनाओं से उन्हें संबल देने की कोशिश कर रही है। लेकिन दूसरी तरफ सरकारी एजेंसियां इन योजनाओं को पलीता लगाने पर जुटी हुई हैं। रायसेन जिले के एक सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने केसीसी धारक एक व्यक्ति के नाम पर धोखाधड़ी का लोन पास कर दिया है। लाखों रुपए के इस लोन की संबंधित खाता धारक को जानकारी ही नहीं है। उस सितम यह कि अब उक्त ऋण की किस्तें अदा न करके खाताधारक का सिविल स्कोर भी बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
मामला रायसेन जिले की तहसील सलामतपुर का है। यहां बैंक ऑफ इंडिया की शाखा की एक ग्राहक निशात शाहरीक पत्नी शारिक बसीर, निवासी 102, राजीव नगर, कोहेफिजा, भोपाल ने इस बारे में बैंक की शाखा में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बैंक मैनेजर को कानूनी नोटिस भेज कर कहा है कि उनकी स्वत्व एवं स्वामित्व की कृषि भूमि जिसका खसरा क्रमांक 67, 68, 72, 83, 90, 92, 96, 105 उनके भाइयों के साथ संयुक्त खाते की भूमि थी। उक्त भूमि ग्राम शाहपुर, तहसील रायसेन, पर स्थित है।
बिना आवेदन हो गया लोन
निशात के वकील ने लिखा है कि उक्त भूमि पर किसी व्यक्ति अथवा संस्थान के द्वारा आपके बैंक से केसीसी ऋण लिया गया है। जबकि निशात द्वारा उक्त भूमि पर कभी भी ऋण हेतु न तो आवेदन दिया गया है, न ऋण प्राप्ति हेतु कोई दस्तावेज आदि हस्ताक्षरित कर बैंक अथवा किसी व्यक्ति को दिए हैं। न ही ऋण प्राप्त नहीं किया गया है। उन्होंने लिखा है कि इस बारे में दिनांक 08/04/2025 को आपके बैंक की सलामतपुर शाखा में लिखित में शिकायत की जा चुकी है। लेकिन उसपर वर्तमान में भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई बैंक द्वारा नहीं की गई है।
अदायगी भी गुल
शिकायत में कहा गया है कि उक्त ऋण लेने वाले व्यक्ति के द्वारा ऋण की किस्तों की अदायगी समय पर नहीं की जा रही है। इस कारण मेरे निशात बसीर के सिविल स्कोर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकार निशात के साथ धोखाधड़ी बैंक के माध्यम से हुई है। बैंक द्वारा ऋण देने की प्रक्रिया के समय यदि सूक्ष्मता से जांच करवाकर ऋण की प्रक्रिया की जाती तो यह लोन जारी नहीं होता। लेकिन इस मामले में फर्जी लोन आवेदकों और बैंक की सांठगांठ के चलते ही यह मामला हो पाया है।
इनके नाम हुए लाखों
जानकारी के मुताबिक बैंक की सांठगांठ से यह किसान क्रेडिट लोन असलम उल्लाह खान और अशरफ उल्लाह खान के नाम पर हुआ है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ग्राम रूपनगर शाहपुर (सलामतपुर) की सांठगांठ से इसको अंजाम दिया गया है। आमतौर पर जहां किसानों को लोन लेने के लिए बैंक के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, धोखाधड़ी के इस लोन को आसानी से अंजाम दे दिया गया है।
कागजों पर हो गया फर्जीवाड़ा
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सबसे रोचक तथ्य यह है कि जिस जमीन के नाम पर लाखों रुपए का गोंडोबल किया गया है, असल में उस तरह की जमीन भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं है। कहा जा रहा है कि बैंक और लोन लेने वालों ने जिस खसरा नंबर को आधार बनाया है, वह भूमि नजूल के खसरा रिकार्ड में मौजूद ही नहीं है। वास्तविकता यह है कि लोन लेने के लिए यह खसरे फर्जी तरीके से कागजों पर पैदा किए गए हैं। लोन लेने वालों की इससे बैंक का सरकारी पैसा हड़पने की मंशा थी। लेकिन बैंक की गलती यह है उसने न व्यक्ति की जांच की, न खसरों का सत्यापन किया और न ही जमीन पर जाकर भौतिक सत्यापन करने की कोशिश की। इस कर्मकांड ने जहां सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाया है, वहीं असल लोन चाहतमंदों को मुश्किलों में डाला है।
किसानों के लोन को भ्रष्टाचार की दीमक : आवेदक को पता ही नहीं, बैंक ने कर दिया लाखों का लोन
