कोई ड्रग्स में उलझा, कोई दुष्कर्म में, अल्पसंख्यक मोर्चा की मछलियां शिकंजे में
भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर कमर्शियल कैपिटल कही जाने वाली इंदौर तक इन दिनों अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता प्रशासनिक रडार पर हैं। ड्रग्स मामले से लेकर धर्मांतरण और समाज को खराब करने की सारी तोहमतें इन नेताओं के सिर हैं। भाजपा के वह नेता, जिनके सहारे वह सियासी कवायदें बढ़ा रहे थे, खामोशी की चादर ओढ़े बैठे हैं। सियासी रसूख और प्रशासनिक दबदबा(?) इन अल्पसंख्यक भाजपाइयों के किसी काम नहीं आ रहा है।
राजधानी भोपाल में इसकी कवायदें पिछले कई दिनों से चल रही थीं। दुष्कर्म, धर्मांतरण और ब्लैक मेलिंग मामले की सियासत का जो गुबार उठा था, तभी से इस मामले को “मछली” परिवार से जोड़ा जा रहा था। मामले में उस समय नया अध्याय जुड़ गया, जब इसमें ड्रग्स का एंगल शामिल हुआ। शिकंजे में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रादेशिक कार्यकारिणी से जुड़े नेता शफीक अहमद के बेटे और भाई का नाम शामिल हैं। शफीक अहमद के परिवार का मामले में शामिल होना इसलिए भी अहम कहा जा रहा है कि शफीक के पिता शरीफ मछली जनसंघ के जमाने से भाजपा से जुड़े हुए है। उनका और पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर का गहरा दोस्ताना हुआ करता था।
शफीक के एक और भाई शाहवर अहमद इन दिनों भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। भविष्य में उनका नाम प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी लिया जा रहा है।
शाहवर अहमद को सहयोग और सियासी रसूख देने के लिए एक कैबिनेट दर्जा प्राप्त अल्पसंख्यक भाजपाई का भी नाम लिया जाता है। कहा जा रहा है कि इन नेता जी ने ही प्रदेश के मुखिया से इस बात की गारंटी ली थी कि मछली परिवार रसूख, व्यवहार और मुस्लिम समुदाय में बेहतर पकड़ रखता है। यह भी कहा जा रहा है कि उन नेता जी को इस बात पर मुखिया जी से सख्त नजरिया महसूस करना पड़ा है। वजह यह है कि सीएम और सरकार नशे के खिलाफ बड़ी मुहिम छेड़े हुए हैं।
इंदौर में मुहिम
इंदौर में एक अभियान के तहत ड्रग्स मामले में कुछ लोग गिरफ्त में लिए गए हैं। इनमें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कमाल खान के बेटे भी शामिल हैं।
मोर्चा अध्यक्ष भी रडार पर
प्रदेश में भाजपा अध्यक्ष बदलने के बाद भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के बदलाव की आहटें सुनाई दे रही हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष का पूर्व भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा से जुड़ा होना ही उनके बदलने की वजह बन सकता है। इधर उनके बेटों पर आपराधिक मामले होने और उनके जेल में होने की चर्चाएं बाजार में हैं।
न घर के रहे, न घाट के
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़ने के सीधा सा एक ही मतलब बहती धारा से जुड़ना है। मुस्लिम भाजपाइयों को समुदाय में दोगला और गद्दार कहकर पुकारा जाता है। लेकिन अपने निहित स्वार्थों के चलते वे भाजपा के लिए “जोड़ो, मोड़ो या रोको” जैसे अभियान चलाकर चुनाव में फायदा पहुंचा रहे हैं। बावजूद इसके उनके हिस्से एक मात्र अल्पसंख्यक मोर्चा या चुनिंदा मुस्लिम इदारे ही हाथ आ रहे हैं। मौजूदा समय में चल रहे हालात के बाद इन मुस्लिम भाजपाइयों की स्थिति न घर के रहे और न ही घाट के जैसी बन जाएगी।
