सिलसिला ए अदब में उस्ताद शायर फारुख अंजुम से लेकर युवा औरंगजेब तक ने जमाया रंग

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महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन उर्दू फ़रोग के साथ अब बच्चों की रहनुमाई भी करेगी

खान आशु
भोपाल। उर्दू भाषा के फ़रोग के लिए काम कर रही महमूद जकी वेलफेयर फाउंडेशन अब विद्यार्थियों को मार्गदर्शन भी देगी। इस बात का ऐलान रविवार को सिलसिला ए अदब के मासिक कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष डॉ नजर महमूद ने किया। इस महाना महफिल की सदारत शहर के उस्ताद शायर फारुख अंजुम ने की। इस कार्यक्रम में प्रो नौमान खान और डॉ जफर हसन भी बतौर मेहमान खुसूसी मौजूद थे।
सिलसिला ए अदब की शुरुआत में डॉ अंजुम बाराबंकवी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि डॉ नजर महमूद ने उर्दू के फ़रोग के लिए शहर में एक नया सिलसिला शुरू किया है। कार्यक्रम में हर माह नए शहरों को मंच मुहैया कराया जा रहा है। इसी तरह श्रोताओं में भी हर बार नए लोगों को मौका दिया जा रहा है। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण नया नज़रिया के फेसबुक पेज पर किया जाता है जिससे न सिर्फ भोपाल, बल्कि पूरे देश और दुनिया से उर्दू को मोहब्बत करने वाले जुड़ पाते हैं जिनकी संख्या तकरीबन पांच हजार से ज्यादा होती है।  कार्यक्रम की शुरुआत युवा शायर औरंगजेब आजम का कलाम श्रोताओं को सुनने को मिला। उन्होंने कहा कि “चली है दो ही रिश्तों की ज्यादा यहां पर दोस्ती की और दुश्मनी की”। इस मौके पर मौजूद कमलेश नूर ने कहा कि “मुझे करीब ही मत रख…!” कार्यक्रम को खुशनुमा रंगत देने के लिए मजाहिया शायर खुर्शीद आलम फेंकू भोपाली भी शामिल थे। उन्होंने मजाहिया रंग बिखेरते हुए सुनाया कि “सिर्फ मिस कॉल किया था मजाकन मैंने, उसके भाई से जान बचा लो मेरी!” कार्यक्रम को एक नया अंदाज देने के लिए  शायर फरमान जियाई जब मंच पर आए तो तालियों की गड़गड़ाहट हर तरफ फैल गई। उन्होंने अपने खूबसूरत तरन्नुम में गजल सुनाई। फरमान ने जब सुनाया कि “कैसे कह दूं दुआ बेअसर हो गई, देखिए उनकी मुझ पर नजर हो गई” तो सारा माहौल शायरी के ऊंचे शिखर पर पहुंच गया। इसी माहौल में आबिद काजमी मंच पर आए।

उनकी गजल “तुम निकल सकते हो अपने मुंह पर तला डालकर, हम रहे खामोश तो गुलशन नहीं बच पाएगा” मौजूदा मीडिया हालात पर तानाबाना थी। उनके बाद महफिल एक नए रंग में डूबी हुई थी। आसिम हुसैन फारूखी ने अपने ताजा अफ़सांचे के साथ श्रोताओं से रूबरू थे।
कार्यक्रम के मेहमान खुसूसी डॉ. जफर हसन ने अपनी संस्था की कारगुज़ारियों का जिक्र किया। साथ ही महमूद जकी वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा शुरू की जाने वाली केयर काउंसिल की तारीफ की। कार्यक्रम के दूसरे मेहमान खुसूसी डॉ मोहम्मद नौमान खान ने शिक्षा और अदब के लिए महमूद जकी के कामों  का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ करने का जज्बा होना चाहिए, किसी भी इंसान को इसमें कामयाबी मिलना निश्चित है इसकी मिसाल महमूद जकी और अब डॉ नज़र महमूद के कामों में दिख रही है। प्रो नौमान खान ने डॉ नजर महमूद द्वारा किए जा रहे कामों को तरके से वरसे तक करार देते हुए इन कामों को महमूद जकी के बेहतर कामों को आगे बढ़ाने का कारण बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उस्ताद शायर फारुख अंजुम ने इस मौके पर अपनी प्रसिद्ध गजल “जो पाकर नूर सूरज से उसे जाती समझते हैं, हम ऐसे चांद सितारों को खैराती समझते हैं!” सुनाकर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का संचालन डॉ महताब आलम कर रहे थे। शुक्रिया की रस्म डॉ नजर महमूद ने अदा की। इस मौके पर डॉ मोहम्मद आजम, डॉ कमर अली शाह, हकीम कुरैशी, जावेद मोहम्मद खान, साजिद प्रेमी, अज़ीम असर, जयंत श्रीवास्तव, अरहम अली, तौफीक , खलील खान, अनवर खान, रईस ए आजम, साआदत हलीम खान, शोएब कुरैशी, हाफिज इस्माइल बैग आदि भी मौजूद थे।

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