भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, म. प्र. शासन भोपाल की आयुक्त उर्मिला शुक्ला के मार्गदर्शन में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में भीम बेठका शैलाश्रय समूह के विश्व धरोहर घोषित होने के 22 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 05 जुलाई 2025 को वाकणकर शोध संस्थान की निदेशक डॉ. मनीषा शर्मा नेतृत्व में संचालनालय पुरातत्व मुख्यालय भोपाल के सभागार में संवाद परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मण्डल की ओर से डॉ. मनोज कुर्मी, डॉ. एम. सी. जोशी, पुराविद् डॉ. नारायण व्यास, डॉ. वाकणकर संस्थान की ओर डॉ. ध्रुवेन्द्र सिंह जोधा, राहुल सिंह, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से डॉ. ओ. पी. मिश्रा, संचालनालय पुरातत्व की ओर से डॉ. रमेश यादव, डॉ. अहमद अली, डॉ. नवनीत जैन, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. जितेन्द्र अनंत तथा एम. एल. बी. कॉलेज की डॉ. अमिता सिंह एवं शोधछात्र उपस्थित रहे। संवाद परिचर्चा का आरम्भ डॉ. रमेश यादव द्वारा सभी का स्वागत कर किया गया। इस परिचर्चा सभी विद्वानों ने भीमबेठका एवं प्रदेश की शैलचित्रकला पर विचार व्यक्त किये। इस परिचर्चा में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा भीमबेठका की खोज से लेकर उसके 2003 में विश्व धरोहर घोषित होने तक के समग्र कार्यकाल की गहन चर्चा हुई। परिचर्चा में शैलचित्रों एवं उत्खननों में प्राप्त पुरावशेषों के तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया गया। डॉ. नारायण व्यास द्वारा भीम बेठका के शैलाश्रयों की खोज एवं उसके सरंक्षण के लिए किये गये प्रयास एवं अनुभव की स्मृतियों को साझा किया। डॉ. कुर्मी द्वारा मध्यप्रदेश के शैलश्रयों / शैलचित्रों पर केन्द्रित एक संयुक्त सर्वेक्षण अभियान एवं आगामी समय में इसी विषय पर एक सेमिनार की योजना से अवगत कराया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान के शोध अधिकारी डॉ. ध्रुवेन्द सिंह जोधा द्वारा सभी विद्वानों का आभार व्यक्त कर ऐसे संवादों के निरन्तर आयोजन पर जोर दिया गया।
22 साल का हुआ विश्व धरोहर भीम बेठका, हुआ संवाद
