खान आशु
भोपाल। माह ए रमजान अपना पहला अशरा पूरा कर चुका है। शहर की कई मस्जिदों में तरावीह का पहला दौर खत्म होकर मुकम्मल कुरआन के जश्न भी होने लगे हैं। साथ ही राजधानी में रिवाज के मुताबिक इफ्तार दावतें भी शुरू हो गई हैं। अलग अलग दावतों में अलग अलग तरह के लोग जुटाए जा रहे हैं। इन दावतों के जरिए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक धाराओं के संदेश भी दिए जा रहे हैं।
राजधानी समेत प्रदेश और देशभर में अपने मुरीदों की बड़ी फेहरिस्त रखने वाले पीर साहब बादशाह मियां ने मंगलवार को इफ्तार दावत का आयोजन किया है। शहर के सियासी, प्रशासनिक, गणमान्य लोगों की मौजूदगी वाले इस समागम में पीर साहब के मुरीदीन भी शामिल रहेंगे। पीर साहब की दावतों के जरिए लोगों की जुटाई पुरानी आदत है। वे साल भर में कई बार ऐसे मौके निकाल लेते हैं, जब उनके आंगन में मेहमानों की चहल पहल नजर आती है। दरअसल पीर साहब रोजा इफ्तार का आयोजन माह ए रमजान के आखिर में करने का रिवाज रखते हैं, लेकिन इस बार पहले अशरे में इस आयोजन की एक खास वजह है। वे अगले सप्ताह में सफर ए उमराह पर जाने वाले हैं।
यहां दिखेगी सामाजिक समरसता

जमीयत उलेमा मप्र के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने भी दसवें रोजे यानी मंगलवार को ही इफ्तार दावत आयोजित की है। हाजी साहब की इस दावत की खासियत इसमें शामिल किए जाने वाले सर्वधर्म के मेहमान होते हैं। दशकों की उनकी इस इफ्तार परम्परा में पंडित राकेश जी शामिल रहते हैं तो ज्ञानी दलीप सिंह भी दिखाई देते हैं। फादर आनंद मुतुंगल, भंते सागर के अलावा कई मुस्लिम विद्वान भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं। हाजी मोहम्मद हारून सर्वधर्म सद्भाव का यह सिलसिला रमजान माह के अलावा भी चलाते रहते हैं।
यह नया नजरिया है…

दिल्ली, भोपाल, उज्जैन समेत मप्र के कई और जिलों से पब्लिश हो रहे उर्दू दैनिक नया नजरिया ने एक सांस्कृतिक सिलसिले की शुरुआत की है। हर माह आयोजित किया जाने वाला सिलसिला ए अदब रमजान माह में भी अपनी रौशनी बिखेरेगा। कार्यक्रम में इस माह एक अतिरिक्त आयोजन रोजा इफ्तार भी जोड़ दिया गया है। कार्यक्रम आयोजक डॉ नजर महमूद ने बताया कि इस माह के खास आयोजन की सदारत मशहूर शायर जफर सहबाई करेंगे। मेहमान ए खास पीर साहब बादशाह मियां होंगे। इस मौके पर होने वाली नशिस्त में हृदेश शुक्ला कानपुरी, डॉक्टर अहसान आज़मी, डॉ नसीम अहमद, वली उल्लाह वली, इनायत अब्बास अपने शेर ओ कलाम पेश करेंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ महताब आलम करेंगे। इस आयोजन को खास रंग देने के लिए एक अतिरिक्त कार्यक्रम अफसांचा भी जोड़ा गया है। डॉ मोहम्मद आजम इस खास मौके पर एक विशेष अफसाना अपने मुख्तलिफ अंदाज में पेश करेंगे।

