“जीआईएस मध्यप्रदेश ” कार्यक्रम के तहत हो रहा आयोजन
भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत भोपाल जिले में 23 फरवरी 2025 से 25 फरवरी 2025 तक 3 दिवसीय “ग्रामीण उत्पाद मेला” का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएं अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी। भोपाल जिले में वर्तमान में 4334 (SHG) और 50798 समुह जुड़े हुए हैं, जिनमें लगभग 11000 महिलाएं विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। विशेष रूप से “वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट” योजना के तहत ज़री – ज़र्दोज़ी उत्पादों के लिए करीब 105 महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर कार्य कर रही हैं। इन उत्पादों को ‘राग भोपाली’ ब्रांड के तहत विपणन किया जाता है । इस मेले में SHG द्वारा तैयार विभिन्न प्रकार के उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिनमें मुख्य रूप से जरी जरदोजी के उत्पाद, चंदेरी साड़ी, रेडिमेट कुर्ते, सोया बडी, बाग प्रिंट सूट साड़ी सिल्क सूट साड़ी, भेलपुरी, चाय नाश्ता, चाट -फुल्की एवं अन्य ग्रामीण उत्पाद स्टॉल लगाये जा रहे है। फूड स्टॉल के साथ-साथ यहां मनोरंजन के लिए संगीत संध्या का भी आयोजन किया जाएगा। ऐसे प्रयासों से एक तरफ स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं को अपने हुनर और व्यापार कौशल को बढ़ाने का अवसर मिलता है वहीं दूसरी ओर अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने का प्रोत्साहन मिल रहा है। स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में यह मेला ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए आयोजित किया गया है, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। वहीं मूल्यवर्धन और विपणन के क्षेत्र में भी लाभ होगा, इस मेले में प्रदर्शित उत्पादों को व्यापक बाजार में पहचान मिलेगी, जिससे ग्रामीण उत्पादों की बिक्री और आय में वृद्धि होगी। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना के तहत स्थानीय उत्पादों जैसे ज़री – ज़र्दोज़ी, आंवला, बाग़ प्रिंट सूट साड़ी आदि बढ़ावा दिया जाएगा, जो हर जिले के लिए विशिष्ट होते हैं। स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन से भी उम्मीदें बढ़ती दिख रहीं हैं, इस मेले में स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो ग्रामीण महिलाओं की कारीगरी और उद्यमिता को बढ़ावा देंगे। इन सब तथ्यों से अतिरिक्त आर्थिक और सामाजिक समावेशन के अवसर भी महिलाओं को यहां मिलेंगे, यह आयोजन ग्रामीण महिलाओं को व्यवसाय और बाज़ार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा, और उनकी सामाजिक स्थिति को मजबूत करेगा ।
