अमित सेन
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भोपाल। बदलते दौर के साथ हर क्षेत्र में परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। आधुनिक तकनीक से जुड़कर काम की आसानी और जन की सुविधा के प्रयास तेज हैं। इसी कड़ी में मत्स्य बीज प्रक्षेत्र पर महासंघ की महत्वकांक्षी “टेक्नोलोजी ट्रांसफर युनिट” का लोकार्पण किया गया। इस दौरान उपस्तिथ अधिकारियों ने व्यवस्था को और अधिक आसान बनाने का आश्वासन भी दिया।
मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ (सहकारी) मर्यादित की भोपाल इकाई अंतर्गत भदभदा मत्स्य बीज प्रक्षेत्र पर महासंघ की महत्वकांक्षी “टेक्नोलोजी ट्रांसफर युनिट” का लोकार्पण/उद्घाटन सोमवार को मत्स्य महासंघ की प्रबंध संचालक
निधि निवेदिता (आईएएस) ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रवि गजभिये, संचालक मत्स्योद्योग, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग एवं यतीश त्रिपाठी, सचिव, मत्स्य महासंघ उपस्थित थे। कार्यक्रम में गिरीश मेश्राम, उप संचालक, ज्योति टोप्पो, उप संचालक, संचालनालय मत्स्योद्योग भी मौजूद थे। उद्घाटन समारोह में डिस्प्ले एरिया में महासंघ की जलाशय के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उत्पादन तकनीक के प्रदर्शन के साथ ही जलाशय के वर्किंग मॉडल, मॉडल फिशरी एस्टेट, विभिन्न प्रकार के मत्स्याखेट उपकरण (नाव-जाल आदि) नई मत्स्य पालन तकनीक के मॉडल्स (रि-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायो फ्लॉक, पॉली लाईनर पॉण्ड आदि) का अवलोकन किया गया। इस अवसर पर सर्कुलर हैचरी, उसकी कार्य प्रणाली, विभिन्न प्रकार की मछलियों एवं उनकी खाद्य विशिष्टता व सामग्रियों के प्रदर्शन का अवलोकन भी किया गया। ड्रोन के माध्यम से तैयार किए गए जलाशय प्रबंधन तकनीक व गतिविधियों के विडियों को देखते हुए उपस्थित अधिकारियों से चर्चा उपरांत मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने हेतु हर संभव प्रयास के निर्देश भी दिए।

गिनाई समस्याएं, मिला आश्वासन
केरवां जलाशय में कार्यरत पंजीकृत समिति के मछुआ सदस्यों के साथ प्रबंध संचालक द्वारा जलाशय का उत्पादन बढ़ाने, उनको आ रही कठिनाईयों व महासंघ / मत्स्योद्योग विभाग से उनकी अपेक्षाओं के संबंध में चर्चा की गई। जिसमें उनके द्वारा मछुआरों की आवास समस्या एवं समिति/मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उनको फिश कियोस्क/पार्लर, मोबाईल मार्केटिंग आदि में आवश्यक सहयोग भी दिलवाए जाने के संबध में शासन स्तर से कार्यवाही हेतु आश्वस्त किया गया।

हुआ पंजीयन, होगी आसानी
कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार की एनएफडीपी योजनांतर्गत कार्यक्रम के दौरान पंजीयन भी किया जाकर उनके प्रमाण-पत्र भी प्रबंध संचालक द्वारा मछुआरों को प्रदाय किए गए। भारत सरकार/राज्य शासन की मंशा एवं दिशा-निर्देशों अनुरूप महासंघ द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट कार्यक्रम प्रस्तावित भी किए गए, जो कि भारतीय इतिहास में मत्स्य महासंघ को सहकारिता क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
