खान आशु
भोपाल। महाकुंभ से लेकर दतिया के आयोजन तक में मुस्लिम व्यापारियों की बेदखली की आवाज़ें उठी हुई हैं। सनातन के पैरोकार बने संतों से लेकर कई कथा वाचकों ने इस अभियान की कमान संभाल रखी है। ऐसे में आलमी तबलीगी इज्तिमा के वैश्विक आयोजन के दौरान लगने वाले मेले में सभी धर्मों के कारोबारियों को शामिल किए जाने का ऐलान किया गया है। इज्तिमा में लगने वाले बाजार के माध्यम से नफरत का जवाब मुहब्बत से देने की बात कही जा रही है।
ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के संरक्षक मंडल में शामिल जफर आलम ने कहा कि बांटने की सियासत को हवा दे रहे लोग एक तरफ बंटोगे तो कटोगे… का नारा बुलंद कर रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि गंगा जमुनी तहजीब के इस देश को कई टुकड़ों में बांटने की कोशिश में यही लोग सबसे आगे हैं। आलम ने कहा कि मिल जुलकर त्यौहार और खुशियां मनाने वालों के बीच धर्म की गहरी खाई खोदी जा रही है। लेकिन यह कोशिशें परवान नहीं चढ़ेंगी, क्योंकि हमारे देश में एक दूसरे के हाथ मजबूती से थमे हुए हैं, जिनको आसानी से अलग करना संभव नहीं हो सकता।

इज्तिमा बाजार में आएं हर धर्म के व्यापारी
त्यौहार कमेटी की तरफ से जफर आलम ने कहा कि आलमी तबलीगी इज्तिमा के मुख्य आयोजन के समापन के बाद 3 दिसंबर से ताजुल मसाजिद परिसर में एक बड़ा मेला और व्यापारिक बाजार आयोजित किया जाएगा। करीब दो माह चलने वाले इस बाजार का इतिहास इतना ही पुराना है, जितनी उम्र इज्तिमा आयोजन की है। इस मेले में लगने वाली हजारों दुकानों में सभी धर्मों के कारोबारी पूरे देश से आकर अपना व्यापार करते हैं। जफर आलम ने कहा कि इन दिनों देश के विभिन्न हिस्सों से उठ रही साधु, संतों और कथा वाचकों की आवाजों में किसी भी सनातनी कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के कारोबारियों को शामिल न किए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन इज्तिमा आयोजन के दौरान ऐसी कोई पाबंदी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस मेले में बरसों की परम्परा बरकरार रहेगी। यहां सभी धर्मों के व्यापारियों को पहले की तरह अपनी दुकानें लगाने की स्वतंत्रता रहेगी।
कहां लगेगा मेला
आलमी तबलीगी इज्तिमा के शुरुआती दौर से ही ताजुल मसाजिद परिसर में व्यापारिक मेला लगता है। करीब दो माह चलने वाले इस मेले की खासियत यहां रियायती दामों पर मिलने वाले गर्म कपड़े होते हैं।
एक शिकायत मानवाधिकार आयोग में
राजधानी भोपाल के एक सामाजिक कार्यकर्ता और अभिभाषक दीपक बुंदेले ने मध्य प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग को एक शिकायत की है। उन्होंने दमोह में स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के मकसद से आयोजित स्वरोजगार मेले में मुसलमान व्यापारियों से धार्मिक आधार पर भेदभाव करते हुए मेले से निकालने पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है।
एडवोकेट दीपक ने कहा कि दमोह मेले के आयोजकों द्वारा कथित तौर पर कहा गया है कि यहां मुसलमानों को स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने विभिन्न समाचार पत्र और न्यूज चैनलों की खबरों का हवाला देते हुए आयोग को बताया कि आगरा और लखनऊ के मुस्लिम व्यापारियों द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी उन्हें बाजार से बाहर निकाल दिया गया है। एडवोकेट
दीपक ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 के अनुसार देश के किसी भी नागरिक के साथ धार्मिक आधार पर भेद-भाव नहीं किया जा सकता। संयुक्त
राष्ट्र महासभा द्वारा स्वीकृत घोषणा पत्र दिनांक 10 दिसंबर 1948 के अनुसार के अनुच्छेद 2 के अनुसार भी धर्म, नस्ल, भाषा, लिंग आदि के आधार पर भी भेदभाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने धार्मिक आधार पर मुसलमान व्यापारियों से भेद-भाव करने वालों के खिलाफ एवं मेले के आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
