खान आशु
भोपाल। हमारे देश में लागू संविधान शिक्षा को लेकर कई रियायतें, राहतें, अधिकार देता है। जिनमें यह भी शामिल है कि किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय को उसके मजहब की मान्यताओं के लिहाज से शिक्षा हासिल करने की छूट होगी। देश और प्रदेश में बने ताजा हालात में सरकारों ने मदरसा शिक्षा को बेड़ियों में जकड़ने की मुहिम छेड़ रखी है। वैध अवैध, कानूनी गैर कानूनी, मान्य या अमान्य की सीमाओं में बांधकर मजहबी तालीम को बंद करने जैसे हालात बनाए जा रहे हैं।
राजधानी भोपाल में गांधी नगर नई बस्ती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मदरसों के प्रबंधक, शिक्षक, शिक्षाविद और शहर के फिक्रमंद लोग जुटे। कार्यक्रम एएम हाई सेकेंडरी स्कूल द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, मुफ्ती मोहम्मद अहमद, मानू के प्रो अहसान, मप्र मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो हलीम खान, वरिष्ठ पत्रकार डॉ महताब आलम, मप्र मुस्लिम विकास परिषद अध्यक्ष एड माहिर खान आदि मौजूद थे।
इस मौके पर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि देश का कानून और संविधान सबके लिए समान है। लेकिन अल्पसंख्यकों के लिए कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी हैं। संविधान की धारा 28, 29 और 30 ने शिक्षा के विशेष अधिकार दिए हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ महताब आलम ने मदरसों को लेकर मची खलबली पर कहा कि रजिस्ट्रेशन में प्रोटेक्शन है। नियमों का पालन करते हुए किए गए काम में सबकी भलाई और आसानी है। इस मौके पर प्रो हलीम खान ने भी मदरसों को संचालित करने के नियम और ताजा हालात पर बात की। कार्यक्रम को मुफ्ती मोहम्मद अहमद, प्रो अहसान, मोहम्मद माहिर आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम संयोजक सआदत हलीम, मोहम्मद सुहैब कुरैशी आदि ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताया। इस मौके पर विभिन्न रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए स्टॉल भी लगाए गए थे।
MP News : भारत इकलौता देश, जहां अल्पसंख्यकों को मिले एक्स्ट्रा अधिकार : डॉ महताब आलम
